नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई और देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी हालत में युद्ध रुकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक है। सरकार ने एलपीजी के दाम बढ़ा दिए हैं और इसकी वजह से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार की गलत विदेश नीति के कारण देश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद में प्रधानमंत्री के बयान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री देश की मौजूदा स्थिति और संभावित चुनौतियों पर खुलकर बोलते हैं, तो जनता को सही जानकारी मिल सकेगी और भ्रम की स्थिति खत्म हो जाएगी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई सीसीएस बैठक पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बैठक पहले क्यों नहीं की गई और सरकार ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य देशों ने ईरान से बातचीत कर अपने जहाज सुरक्षित निकाल लिए, लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया, जिससे देश को खतरे में डाला गया। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इज़रायल भेजे गए भारतीय छात्र फिलहाल कहां हैं और उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों में पहले आई गिरावट के दौरान राहत न देने और अब कीमतें बढ़ाने पर सवाल उठाए।
इसी बीच आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा, "आज जीरो आवर के दौरान मैंने एक अहम मुद्दा उठाया, जो देश के सभी मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़ा है। जब हम अपने प्लान रिचार्ज करवाते हैं, तो हमें रोजाना के लिए एक तय डेटा लिमिट मिलती है, जैसे कि 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी प्रति दिन मिलती है। जब आधी रात बीत जाती है, तो जो डेटा इस्तेमाल नहीं हुआ है, उसे आगे बढ़ाकर अगले दिन की डेटा लिमिट में जोड़ दिया जाना चाहिए।"
सांसद राघव चड्ढा ने कहा, "मैंने लगातार नागरिक उड्डयन से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। मेरा मकसद हमेशा यही रहा है कि आम आदमी के लिए हवाई यात्रा आरामदायक और किफायती हो। यह इतनी महंगी न हो जाए कि लोग हवाई यात्रा ही न कर पाएं। हम एयरलाइन टिकट की कीमतों से जुड़ी समस्याओं को लगातार देख रहे हैं।"




