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प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की कला सिखाने शिक्षकों को दी गई प्रकृति शिक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित मध्यप्रदेश प्रकृति संरक्षण शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमपीटीटीएनसी 2025–2028) के अंतर्गत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2021 में हुए कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़-26 में प्रारंभ किए गए मिशन LiFE (लाइफ स्टायल फॉर एनवारनमेंट) के उद्देश्यों से प्रेरित यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (भोपाल) और पीसीपीसी के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य प्रकृति के अविवेकपूर्ण उपभोग के स्थान पर सचेत और विचारशील उपयोग को बढ़ावा देना है।

शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली के संबंध में प्रशिक्षित कर विद्यार्थियों को जिम्मेदार और जागरुक नागरिक के रूप में विकसित करना है।

पन्ना नेचर कैंप्स के अनुभव से मिली प्रेरणा

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की परिकल्पना पूर्व में आयोजित पन्ना नेचर कैंप्स की सफलता से प्रेरित हो कर की गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से संचालित इन शिविरों ने पन्ना टाइगर पुनर्स्थापन परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 15 वर्षों तक चले इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि संरक्षण कार्यों में समाज और समुदाय की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक दायित्व पर फोकस

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस तथ्य पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48(क) राज्यों को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(ग) प्रत्येक नागरिक को प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करने और सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है। इसके अंतर्गत वन, झील, नदियाँ और वन्यजीवों की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया है।

प्रकृति संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा

शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में प्रकृति संरक्षण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। इसमें तेजी से बढ़ती जनसंख्या, आर्थिक विकास की तीव्र गति और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया। विकास की प्रक्रिया में पारिस्थितिकी सुरक्षा के उपायों को शामिल करना भी आवश्यक है, जिससे प्रकृति स्वयं को पुनर्जीवित कर सके।

‘ईको-सिटीजन’ तैयार करने में शिक्षकों की भूमिका

शिक्षक प्रशिक्षण में बताया गया कि विद्यार्थी समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावी वाहक होते हैं। शिक्षक उनके साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं और उन्हें सही दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों में भी प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकेंगे और ये विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार और संवेदनशील ईको-सिटीजन के रूप में समाज में योगदान दे सकेंगे।

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