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हरियाली की छांव में होगा सिंहस्थ, उज्जैन बनेगा देश का पहला ‘ग्रीन कुंभ’ मॉडल

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की नई पहचान देने की दिशा में उज्जैन प्रशासन ने व्यापक हरित अभियान शुरू कर दिया है। पहली बार सिंहस्थ महापर्व को 'ग्रीन कुंभ' की अवधारणा के साथ आयोजित किया जाएगा। इसके तहत पूरे शहर और सिंहस्थ क्षेत्र में 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जबकि 114 किलोमीटर लंबी सड़कों को हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रशासन ने इस महाअभियान की शुरुआत कर दी है और अब तक तीन लाख से अधिक गड्ढों की खुदाई पूरी की जा चुकी है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित कर श्रद्धालुओं को स्वच्छ, छायादार और पर्यावरण अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

84 हजार बड़े छायादार पेड़ों से सजेगा सिंहस्थ मार्ग
योजना के तहत सिंहस्थ क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के दोनों ओर 84 हजार बड़े और छायादार पौधे लगाए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन सहित ऐसी प्रजातियों को शामिल किया गया है, जिनकी ऊंचाई 10 से 12 फीट होगी और जो कम समय में तेजी से विकसित होकर पर्याप्त छाया प्रदान कर सकें।

प्रशासन का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव की चुनौती को देखते हुए यह पहल केवल सुंदरीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचना तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।

नीम, करंज और जामुन के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे श्रद्धालुओं को देंगे प्राकृतिक छाया
इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन और अन्य छायादार प्रजातियों के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे। इन प्रजातियों का चयन इसलिए किया गया है कि ये कम समय में अच्छी वृद्धि कर सकें और सिंहस्थ-2028 तक श्रद्धालुओं को प्राकृतिक छाया उपलब्ध करा सकें। बढ़ते तापमान और हीटवेव को देखते हुए यह चयन केवल सुंदरीकरण के लिए नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है।

कितने हेक्टेयर मे फैलेगा वन क्षेत्र
उज्जैन की पहचान अब सिर्फ महाकाल नगरी तक सीमित नहीं रहेगी.शहर के नवलखी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू विकसित किया जाएगा. यह आधुनिक जू पर्यटकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में बेहद करीब से देखने का अनूठा अनुभव देगा. उज्जैन वन मंडल के डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार, यहां 300 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों को बसाने की योजना है.परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि प्रशासनिक के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है. पहला चरण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

पहले चरण में लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र काम
यह फॉरेस्ट जू दो चरणों में तैयार होगा. पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित किया जाएगा, जहां केवल भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास जैसे माहौल में रखा जाएगा. यहां विशाल ड्राइव-थ्रू सफारी, खुले प्राकृतिक बाड़े और अत्याधुनिक विजिटर सुविधाएं होंगी. पर्यटक बिना जंगल जैसा रोमांचक अनुभव ले सकेंगे, जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी। 

दूसरे चरण मे दिखेंगे दुर्लभ वन्यजीव
फॉरेस्ट जू के दूसरे चरण में इसे ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम के आधार पर विकसित किया जाएगा. इस चरण में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दुर्लभ वन्यजीवों को शामिल करने की योजना है. उद्देश्य यह है कि उज्जैन का यह फॉरेस्ट जू केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने। 

अनोखी डिजाइन मे दिखेगा जू 
उज्जैन में बनने वाला विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू अपनी अनोखी डिजाइन के कारण खास होगा. जू का क्षेत्र फोरलेन और पंचकोशी मार्ग से दो हिस्सों में बंटा होने के बावजूद, 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास दोनों हिस्सों को जोड़ेंगे. ओवरब्रिज पर बैटरी संचालित इलेक्ट्रिक सफारी और पैदल पर्यटकों के लिए अलग रास्ते होंगे, जबकि घने पेड़-पौधे वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण का एहसास कराएंगे. परियोजना के पहले चरण में 60 हेक्टेयर में ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित होगा, जहां केवल भारत के वन्यजीव प्राकृतिक आवास जैसे खुले वातावरण में नजर आएंगे. ड्राइव-थ्रू सफारी और आधुनिक सुविधाएं पर्यटकों को असली जंगल जैसा रोमांचक अनुभव देंगी। 

घाट, उद्यान और जलाशय भी होंगे अभियान का हिस्सा
निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और संपर्क मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के तट, शासकीय परिसरों और विभिन्न संस्थागत क्षेत्रों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।

पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि उनके संरक्षण, देखभाल और जीवित रहने की नियमित निगरानी की जा सके।

आस्था और प्रकृति संरक्षण का साझा संकल्प
सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे वृक्षों को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। धार्मिक ग्रंथों में पौधारोपण को पुण्य और यज्ञ के समान बताया गया है। ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित यह 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर प्राकृतिक विरासत तैयार करने का सामूहिक संकल्प भी माना जा रहा है।

प्रशासन निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण करेगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के किनारे, शासकीय परिसरों और संस्थागत क्षेत्रों को भी इस हरित अभियान से जोड़ा गया है।

पौधों की होगी जियो-टैगिंग, सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प
पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि संरक्षण और जीवित रहने की भी लगातार निगरानी की जा सके। सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे पेड़ों को देवतुल्य माना गया है। पुराणों में पौधारोपण को यज्ञ और पुण्य का कार्य बताया गया है।

ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण का सामूहिक संकल्प भी है।

फैक्ट फाइल

    3 लाख से ज्यादा गड्ढों की खोदाई पूरी।
    10 से 12 फीट ऊंचे होंगे लगाए जाने वाले पौधे। 
    29 किमी निर्माणाधीन घाट और मार्गों पर भी पौधारोपण होगा। 
    400 से ज्यादा उद्यान भी हरित अभियान से जुड़ेंगे। 

 

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