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छत्तीसगढ़ ACB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा मामले

रायपुर.

छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2021 से लेकर 2026 (मई माह तक) की गई कार्रवाई का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है. पांच सालों के दौरान की गई कार्रवाई से जो तस्वीर उभर कर सामने आई है, उसमें साबित हो रहा है कि प्रदेश में राजस्व विभाग सबसे ज्यादा भ्रष्ट है, वहीं सूरजपुर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिले के लोग, रायपुर-दुर्ग जैसे जिलों की तुलना में भ्रष्टाचार को लेकर कहीं ज्यादा जागरुक और सतर्क हैं.

एसीबी द्वारा सबसे पहले आंकड़ा 2021 से लेकर 2026 मई तक का है, जिसमें स्पष्ट हो रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी के साथ विभाग की कार्रवाई भी तेज हो रही है. वर्ष 2021 में प्रकरणों (ट्रेप) की संख्या 13 थी, जिसमें 14 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए थे. वहीं यह आंकड़ा 2022 में बढ़कर 13 (प्रकरण) और 18 (गिरफ्तार शासकीय अधिकारी-कर्मचारी) का हो गया. वर्ष 2023 में यह आंकड़ा शून्य रहा. 22 दिसंबर, 2023 को नई सरकार के गठन के साथ ही आंकड़ों में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई. 44 प्रकरणों में एसीबी ने 57 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी को गिरफ्तार किया. इस बार रिश्वत की राशि भी रिकार्ड तोड़ 11 लाख 52 हजार रुपए तक पहुंच गई. वहीं इस साल 2 आरोपियों को सजा भी हुई. इसके अगले साल प्रकरणों की संख्या 60 हो गई, जिसमें 71 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए. रिश्वत की रकम ने फिर नया रिकार्ड बनाते हुए 23 लाख 91 हजार 540 रुपए तक पहुंच गई. वहीं वर्ष 2026 में 28 मई तक 24 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिमें 33 शासकीय कर्मचारी और अधिकारी की गिरफ्तारी हुई है. इन प्रकरणों में 9 लाख 94 हजार 500 रुपए जब्त किए गए हैं. इस तरह से पांच सालों के दौरान एसीबी ने कुल 154 प्रकरणों में 193 शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रिश्वत के तौर पर दी गई रकम 51 लाख 67 हजार 540 रुपए जब्त किए गए हैं. वहीं पांच सालों के दौरान महज 5 लोगों को ही सजा हो पाई है.

आदिवासी जिलों के लोग ज्यादा जागरूक
बात करें उन जिलों में जहां से ज्यादा शिकायत मिली और विभाग ने उन पर कार्रवाई की, तो सबसे पहला नाम सूरजपुर जिले का आता है. आंकड़ों के अनुसार, सूरजपुर में सबसे ज़्यादा 16 ट्रैप मामले दर्ज किए गए हैं, और यहाँ आरोपियों की संख्या भी 16 है. वहीं सरगुजा में दर्ज मामलों की संख्या भले ही 12 है, लेकिन यहाँ आरोपियों (शासकीय सेवकों) की संख्या पूरे राज्य में सबसे अधिक यानी 20 है. राजधानी क्षेत्र रायपुर में 13 मामले और 15 आरोपी दर्ज हैं. इसके बाद रायगढ़ का स्थान है, जहाँ 11 मामले और 12 आरोपी हैं. मुंगेली, बिलासपुर, बलरामपुर, दुर्ग , जांजगीर-चांपा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जैसे जिलों में कुल मामलों की संख्या 6 से 8 के बीच है।

राजस्व विभाग सबसे भ्रष्ट, इसके बाद शिक्षा विभाग
बात करें वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक विभागवार और पदनामवार पंजीकृत ट्रैप मामलों और आरोपियों की संख्या की तो राजस्व विभाग में सबसे अधिक 56 ट्रैप मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुल 67 शासकीय सेवक आरोपी हैं, इनमें अनुविभागीय अधिकारी (02) और तहसीलदार (01) स्तर के अधिकारी शामिल हैं. इस सूची में दूसरे स्थान पर स्कूल शिक्षा विभाग है, जहाँ 20 मामले और 25 आरोपी हैं. इनमें सहायक संचालक (01) और जिला शिक्षा अधिकारी (01) जैसे पद शामिल हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कुल 14 ट्रैप मामले दर्ज हुए हैं जिनमें 15 आरोपी हैं। मुख्य रूप से मुख्य कार्यपालन अधिकारी (03) और अनुविभागीय अधिकारी (01) आरोपी पाए गए हैं. इसके बाद गृह (पुलिस) विभाग का नंबर है, जहां 10 मामले दर्ज हैं, जिनमें 13 आरोपी हैं. इनमें निरीक्षक (01) और उप निरीक्षक (02) शामिल हैं. कम मामले वाले विभागों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (7 मामले, 10 आरोपी) और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग (6 मामले, 8 आरोपी) हैं.

निर्माण कार्य के भुगतान के लिए रिश्वत सबसे आम
इसके अलावा बात करें कार्य, जिसके लिए सबसे ज्यादा रिश्वत मांगी गई है, तो सबसे पहले स्थान निर्माण कार्य का भुगतान है. इसके 14 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं. इसके बाद जमीन का सीमांकन कार्य, जमीन नामांतरण कार्य और जमीन का राजस्व रिकार्ड दुरुस्त करने का कार्य (8-8) शामिल है. इसके बाद मुआवजा राशि दिलाने, पेंशन-ग्रेज्युटी जारी करने, निर्माण कार्य के भौतिक सत्यापन करने, बिजली कनेक्शन देने, जमीन की चौहद्दी बनाने के एवज में रिश्वत मांगे जाने का मामला है. इस तरह से कुल 89 कार्य हैं, जिनके लिए शासकीय कर्मचारी-अधिकारियों ने रिश्वत मांगी थी, जिस पर एसीबी ने कार्रवाई की है.

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