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गर्व की बात: चतरू चौधरी ने वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास

बालोतरा
 पश्चिम राजस्थान के सरहदी बालोतरा जिले के छोटे से गांव लापला की बेटी चतरू ने वो कर दिखाया है जो बड़े-बड़े शहरों के खिलाड़ी भी नहीं कर पाते है. चतरू का सपना बड़ा था, लेकिन हालात नहीं. पिता एक साधारण किसान हैं. बेटी की खेल प्रतिभा को देखकर उन्होंने कर्ज लिया और हरहाल में बेटी को आगे बढ़ाने की ठानी. अब चतरू ने भी समाज की सोच से लड़ते हुए अमेरिका में गोल्ड मेडल जीतकर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है बल्कि गांव और जिले का भी नाम रोशन किया है.

चतरू के गांववालों ने खूब ताने दिए. कुछ ने तो कहा  “लड़की होकर क्या कर लेगी?” लेकिन पिता ने हार नहीं मानी और चतरू ने भी दिन-रात मेहनत जारी रखी. सीमित संसाधनों, आर्थिक परेशानियों और सामाजिक दवाब के बीच पली-बढ़ी चतरू ने अमेरिका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का परचम लहराया है.

गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

रेत के दरिया के बीच कच्ची झोपड़ी से निकलकर सात समंदर पार अमेरिका में गोल्ड जीतने का कीर्तिमान रचने वाली पुलिस कांस्टेबल चतरू का वतन वापसी पर जोरदार स्वागत किया गया. विश्व मंच पर राजस्थान पुलिस के चमके सितारों में थार की बेटी के शामिल होने से हर थार का बाशिंदा उसे आशीर्वाद और बधाई देता नजर आया. उत्साही लोगों ने डीजे बजाया और चतरू चौधरी को फूल मालाओं से लाद दिया.

अमेरिका के अलबामा में आयोजित वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स 2025 में भाग लेने के लिए बीते दिनों राजस्थान पुलिस का दल अमेरिका पहुंचा था. इस दल में बायतु के छोटे से गांव लापला के किसान की बेटी चतरू चौधरी के प्रदर्शन पर पूरे मरुधरा की निगाहें थी. चतरू ने अपने प्रदर्शन से किसी भी थार वासी को निराश नहीं किया है. चतरू ने 11 किलोमीटर और 21 किलोमीटर रिले रेस में गोल्ड मैडल जीता है. वहीं 400 मीटर और 800 मीटर में उसने कांस्य पदक जीता है. वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स 2025 में राजस्थान पुलिस के जाँबाजो की इस स्वर्णिम जीत के बाद पूरे राज्य में खुशी का माहौल है. राजस्थान पुलिस ने 29 पदक अर्जित किए है जिनमे 17 स्वर्ण पदक, 5 रजत पदक और 7 कांस्य पदक जीते है.

कर्ज लेकर पिता ने करवाई तैयारी

राजस्थान पुलिस की कचनार चौधरी, राजबाला और चतरू ने खाकी का नाम रोशन किया है.  वतन वापसी पर लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए चतरू ने बताया कि पिता ने कर्ज लेकर खेल की तैयारी करवाई और उसने भी पिता का मान रखते हुए अमेरिका में गोल्ड जीता है. वह बताती है कि गांव में न तो कोई खेल मैदान है और न ही संसाधन. ऐसे में गांव की प्रतिभाओं को उचित मंच नहीं मिल पाता है, जिससे वह अपनी प्रतिभा को नही निखार पाती है.

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