नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मालविंदर सिंह कंग नेकेंद्र सरकार से आग्रह किया कि शादी के समय लड़कों के डोप टेस्ट और चिकित्सा जांच को अनिवार्य बनाने के लिए कानून बनाया जाए। उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मांग उठाई। कंग ने कहा, ‘आज हमारे समाज में तलाक और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जब नया रिश्ता जुड़ता है तो लड़की के बारे में बहुत जांच-पड़ताल की जाती है, लेकिन लड़कों को लेकर उतनी जांच-पड़ताल नहीं होती।’ उनका कहना था कि शादी के समय लोग इस तरह की चीजें छिपाते हैं।
उन्होंने कहा, 'सरकार से मांग है कि एक कानून बनाया जाए कि शादी के समय डोप टेस्ट और चिकित्सा जांच अनिवार्य हो।' उन्होंने कहा कि शादी के बाद कई बार सामने आता है कि लड़का गंभीर रूप से बीमार है या फिर वह आपराधिक प्रवृत्ति का है। इससे महिलाओं के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
कंग ने कहा कि दूल्हे के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए कि वह मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और डोप टेस्ट का सर्टिफिकेट लड़की वालों के सामने पेश करे और तभी शादी हो।
कांग्रेस सांसद ने की ऑनलाइन कारोबारियों पर लगाम की मांग
कांग्रेस के उज्जवल रमण सिंह ने सरकार से ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाने तथा छोटे एवं मझौले व्यापारियों के हितों के संरक्षण की मांग की। सिंह ने शून्य काल में इस बारे में नियम बनाने और छोटे दुकानदारों और मझौले व्यापारियों का व्यवसाय को बचाने के उपाय करने की सरकार से मांग की।
सपा के वीरेन्द्र सिंह ने किसानों के घरों में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने पर बिल बढ़कर आने तथा प्रीपेड मीटर लगाने से उन्हें हो रही कठिनाइयों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए उनकी समस्यायें दूर करने की मांग की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निशिकांत दुबे ने मुस्लिमों और ईसाइयों से विवाह करने वाली आदिवासी युवतियों का अनुसूचित जनजाति का दर्जा समाप्त करने की मांग की।
भाजपा के ही चन्दूभाई छगनभाई शिहोरा ने गुजरात के सुरेन्द्र नगर इलाके के नमक किसानों को बारिश से हुए नुकसान की भरपाई करने और उन्हें भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। सपा के आनंद भदौरिया ने उत्तर प्रदेश में शहीदों और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किये जाने का मुद्दा उठाया और इसके दोषियों को सजा देने की मांग की। कांग्रेस के डॉ. प्रशांत यादवराव पडोले ने 2027 की जनगणना के लिए निर्धारित प्रारूप के कॉलम में अन्य पिछड़ा वर्ग को भी जोड़ने की मांग की।





