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सरकारी स्कूल में नवाचार की मिसाल: ‘मैथ्स पार्क’ से बच्चे कर रहे गणित में महारत

डोंगरगढ़

राजनांदगांव जिले के डोगरगढ़ विकासखंड के ग्राम सेंदरी का शासकीय हाई स्कूल इन दिनों पूरे प्रदेश में उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहां स्थापित संभवतः प्रदेश का पहला मैथ्स पार्क  न केवल बच्चों की पढ़ाई का तरीका बदल रहा है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर भी नया रूप ले रही है। कभी घोर नक्सल प्रभावित रहा यह इलाका अब अभिनव शिक्षण पद्धति के जरिए सीखने-सिखाने का केंद्र बन गया है।

इस अनोखे पार्क में शून्य के जनक आर्यभट्ट से लेकर महान गणितज्ञ रामानुजन् तक के सिद्धांतों को रोचक आकृतियों, मॉडल्स और गतिविधियों के माध्यम से जीवंत किया गया है। जटिल माने जाने वाले प्रमेय, आकृतियां और गणितीय अवधारणाएं अब बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का साधन बन गई हैं। इससे न केवल विषय का भय समाप्त हुआ है, बल्कि विद्यार्थियों में गणित के प्रति नया उत्साह पैदा हुआ है। वैदिक गणित की सरल तकनीकों को भी पार्क में शामिल किया गया है, जिससे तेज और सटीक गणना का अभ्यास बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ा रहा है।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि पार्क को सरकारी अनुदान के बजाय स्कूल के शिक्षकों ने स्वयं अपनी कमाई से करीब दस लाख रुपये की राशि जुटाकर विकसित किया है। गणित के शिक्षक गोकूल जंघेल इस नवाचार के प्रणेता हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों में गणित के प्रति रुचि जगाने की मंशा से इस पार्क का निर्माण किया गया है। आकृतियों और संकेतों के जरिए बेसिक गणित को सरल रूप में समझाने की कोशिश की गई है ताकि बच्चे कठिन सिद्धांतों को भी आसानी से पकड़ सकें।

109 विद्यार्थियों और पांच शिक्षकों वाले इस हाई स्कूल में कोरोना काल के दौरान जब स्कूल बंद थे, तभी इस नवाचार की नींव रखी गई। प्राचार्य किरण मिश्रा बताती हैं कि महामारी के चलते बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे थे। तब शिक्षकों ने इसे एक अवसर मानकर पहले वृक्षारोपण अभियान चलाया और फिर मैथ्स पार्क का डिजाइन तैयार कर इसे जमीन पर उतारा। उनका कहना है कि इस पार्क के चलते बच्चों में गणित के प्रति जागरूकता और रुचि तेजी से बढ़ी है।

जिले के कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने इस प्रयास की सराहना करते हुए स्कूल को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया है। गणित पार्क में मौजूद मॉडल्स और गतिविधियों ने छात्रों का गणित से डर लगभग खत्म कर दिया है। कक्षा 9वीं की छात्रा निहारिका यादव और 10वीं के उदित नारायण साहू का कहना है कि अब गणित उनका पसंदीदा विषय बन गया है, क्योंकि वे सिर्फ पढ़ते नहीं बल्कि खेलते हुए सीखते हैं।

ग्राम सेंदरी का यह स्कूल किसी सामान्य शासकीय विद्यालय जैसा नहीं, बल्कि किसी आधुनिक निजी संस्थान जैसी अनुभूति देता है। स्वच्छ परिसर, सुव्यवस्थित कक्षाएं, डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लास और प्रोजेक्ट बेस्ड पढ़ाई ने शिक्षा को बेहतर दिशा दी है। इसकी सफलता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 40 से अधिक विद्यार्थी राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं, और बोर्ड परीक्षा में एक छात्र ने प्रदेश के टॉप-10 में स्थान हासिल किया है।

सेंदरी का यह सरकारी स्कूल यह साबित कर रहा है कि नीयत सशक्त और उद्देश्य स्पष्ट हों तो संसाधन बाधा नहीं बनते। यहां के शिक्षकों की लगन और समर्पण ने शिक्षा को नवाचार, सेवा और समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बना दिया है। यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उस उम्मीद की है जो बताती है कि सही पहल से पूरा वातावरण बदल सकता है।

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