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मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित

रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा,  अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है। इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है। इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित

रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा,  अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है। इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है। इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।  

शिक्षक नहीं तो पढ़ाई नहीं: बच्चों ने स्कूल में लगाया ताला, पालकों का साथ

बालोद जिले के कुसुमटोला माध्यमिक स्कूल में शिक्षक की कमी को लेकर बच्चों और पालकों ने मिलकर स्कूल में ताला जड़ दिया। बारिश के बीच बच्चों ने स्कूल के गेट के सामने बैठकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति की मांग की। जानकारी के अनुसार, स्कूल में कुल 51 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। पहले यहां तीन शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन तीन शिक्षकों में से एक प्रधानपाठक की पदोन्नति हो जाने के बाद अब सिर्फ दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, जिससे नाराज होकर बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा। वहीं तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे बच्चों और पालकों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट तो खोल दिया, लेकिन बच्चे स्कूल के भीतर नहीं गए। स्कूल के अंदर तहसीलदार और शिक्षक मौजूद थे। वहीं बच्चे और उनके अभिभावक बाहर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे।

PHE भर्ती विवाद: डिप्लोमा बनाम डिग्री की लड़ाई में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

रायपुर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया “B.Ed बनाम D.Ed” की तरह “डिप्लोमा बनाम डिग्री” विवादों से घिर गई है. लाखों डिप्लोमा धारक युवा अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की सभी तकनीकी भर्तियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा. दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों हेतु भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई थी. भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से विभागीय आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता त्रि-वर्षीय डिप्लोमा निर्धारित की गई थी. इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए डिग्री धारकों ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दाखिल की, जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आया. इसके पश्चात भर्ती प्रक्रिया पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है. वहीं दूसरी ओर, डिप्लोमा धारकों का कहना है कि इसरो, डीआरडीओ, व सार्वजनिक उपक्रमों सहित देश की तमाम अग्रणी तकनीकी संस्थाओं में शैक्षणिक अर्हता पद के अनुसार तय की जाती है. अतः पद यदि उप अभियंता (Junior Engineer) है, तो डिप्लोमा ही उपयुक्त योग्यता है. डिप्लोमा अभ्यर्थियों ने इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. उनका तर्क है कि 7 नवम्बर 2024 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता”.

शिक्षकों के तबादले के खिलाफ बारिश में भीगते छात्राओं ने रोका हाईवे

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में ‘छू लो आसमान स्कूल’ की करीब 350 छात्राओं ने आज भारी बारिश के बीच नेशनल हाईवे पर बैठकर ढाई घंटे तक सड़क जाम कर दिया. हाथों में तख्तियां लिए ये बच्चियां लगातार नारे लगाती रहीं और प्रशासन से सीधी मांग की – “हमें सिर्फ शिक्षक नहीं, भरोसा चाहिए.” छात्राओं ने कहा कि शिक्षा विभाग के वादों पर अब उन्हें यकीन नहीं रहा, इसलिए कलेक्टर खुद आकर यह गारंटी दें कि जिन शिक्षकों ने उन्हें पढ़ने और आगे बढ़ने का सपना दिखाया था, वे वापस आएंगे. छात्राओं का यह प्रदर्शन न किसी संगठन का था और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का. यह उन बच्चियों का अपना फैसला था जो शिक्षा को लेकर गंभीर हैं और अब चुप नहीं रहना चाहतीं. प्रदर्शन के दौरान बारिश तेज थी, लेकिन छात्राएं डटी रहीं. प्रशासन ने हालांकि इस विरोध के पीछे किसी के उकसावे की संभावना की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि यदि किसी शिक्षक या अन्य व्यक्ति ने छात्राओं को उकसाया है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. यह प्रदर्शन सिर्फ शिक्षकों की वापसी की मांग नहीं था, बल्कि उस भरोसे की वापसी की गुहार थी जो इन बच्चियों को कभी दिखाया गया था. अब प्रशासन जांच और समाधान की बात कर रहा है, पर बच्चियों के मन में असमंजस बना हुआ है. सवाल यह है कि जब भविष्य की ये बेटियां अपने अधिकारों के लिए बारिश में भीगती सड़क पर बैठने को मजबूर हो जाएं, तो क्या इसे सिर्फ विरोध मानना चाहिए या सिस्टम के लिए एक आईना और चेतावनी के रूप में देखना चाहिए?

धमकी देकर नाबालिग से किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को किया सलाखों के पीछे

बलरामपुर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी मनोज ने घर में घुसकर नाबालिग को जान से मारने की धमकी दी और उसे अपने मामा के घर ले गया. जहां आरोपी ने नाबालिग के साथ गंदा काम किया. मामला थाना रघुनाथ नगर का है. पीड़िता ने रोते-बिलखते अपने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया. वरिष्ठ अधिकारियो के निर्देशानुसार आरोपी मनोज कुमार (21 वर्षीय) को गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपी के खिलाफ  धारा333 351(1), 137 (2) 64 बीएनएस, पाक्सो एक्ट 4,6 के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेजा गया है.

खनन मामले में लापरवाही नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने खनन सचिव से मांगा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण

बिलासपुर हाईकोर्ट ने अवैध उत्खनन के एक मामले में खनन सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है. मामला सक्ती जिले के ग्राम नंदेली में शासकीय भूमि पर हो रहे अवैध पत्थर उत्खनन के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका का है. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने खनन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं, महाधिवक्ता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए मांगे गए समय को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है. याचिकाकर्ता खोलबाहरा द्वारा अधिवक्ता योगेश चंद्रा के जरिए जनहित याचिका दायर की गई है. जिसमें कहा गया है कि ग्राम नंदेली, तहसील जैजैपुर, जिला सक्ती स्थित खसरा नंबर 16/1, क्षेत्रफल 14.2 हेक्टेयर की शासकीय भूमि पर राजेश्वर साहू सहित अन्य निजी व्यक्तियों द्वारा लंबे समय से गौण खनिज पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तहसील और जिला प्रशासन से कई बार की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे पहले याचिकाकर्ता ने एक अलग रिट याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने 30 जून 2025 के आदेश में यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं है. हालांकि अदालत ने उन्हें जनहित याचिका दायर करने की छूट दी थी. इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत वर्तमान जनहित याचिका दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद से प्रतिवादी उस स्थान को धीरे-धीरे पाटने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे साक्ष्य मिटाए जा सकें. उन्होंने इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की. कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए खनन विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले व्यक्तिगत रूप से हलफनामा प्रस्तुत करें और इस विषय में स्थिति स्पष्ट करें.

तालाब की ज़मीन पर करोड़ों की डील! 100 साल पुराने जलस्रोत को बनाया कृषि भूमि

  महासमुंद बिरकोनी के ग्रामीणों के सार्वजनिक निस्तारी और सिंचाई के लिए 100 साल पुराने 4 एकड़ से ज्यादा में फैला चुहरी तालाब को कृषि भूमि बताकर फर्जी तरीके से मनोरमा इंडस्ट्री को बेचने का मामला सामने आया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने तालाब को कृषि भूमि दर्शाकर एक झूठ के सहारे शासन से करीब 58 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी में छूट भी हासिल की है. मनोरमा इंडस्ट्री ने जिन 6 खसरे की जमीन को उद्योग के उपयोग के लिए रजिस्ट्री कराया है उनमें से एक खसरा नंबर तालाब का है. और इस पूरे फर्जीवाड़ा में तहसीलदार, पटवारी, जमीन दलाल और जमीन बेचने वालों पर अहम भूमिका निभाने का आरोप है. अब इस तालाब को इंडस्ट्री द्वारा पाटा जा रहा है. ग्राम पंचायत बिरकोनी के इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड के ओमनगर खमतराई रायपुर निवासी डायरेक्टर गौतम कुमार पाल ने प्लांट के ठीक पीछे पटवारी हल्का नंबर 33 में स्थित खसरा नंबर 2613, 2615, 2617, 2623 और 2626 रकबा 7. 86 हेक्टेयर, 19 एकड़ 65 डिसमिल जमीन 30 जून 2025 को बिरकोनी निवासी दिनबंधु पिता मनराखन चंद्राकर, तुकाराम पिता बाबूलाल चंद्राकर और अशोक पिता छबिराम चंद्राकर से 8 करोड़ 80 लाख 51 हजार 911 रुपये में कृषि भूमि बताकर खरीदा है. इस रजिस्ट्री में 100 साल पुरानी चुहरी तालाब का कही भी उल्लेख नही किया गया है. मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर ने बिक्रय -विलेख के साथ 6 कृषि भूमि की तस्वीर को लगाकर उप पंजीयक के समक्ष पेश किया है लेकिन उन 6 तस्वीरों में से चुहरी तालाब की तस्वीर नही थी. इसके अलावा 1955-56 के अधिकार अभिलेख पंजी में दर्ज खसरा नंबर 1220 है, जो रि – नंबरिंग के बाद वर्तमान में खसरा नंबर 2613 है, जिसका रकबा 1.90 हेक्टेयर यानी 4 एकड़ 75 डिसमिल है. अधिकार अभिलेख पंजी में पानी के नीचे भूमि को निस्तारी के लिए चुहरी तालाब उल्लेख किया गया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने इन जमीनों को खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग संचालनालय से 25 जून 2025 को बकायदा स्टांप शुल्क छूट प्रमाण पत्र भी लिया है. जिसके आधार पर मनोरमा इंडस्ट्री को स्टांप शुल्क में करीब 58 लाख 11 हजार 426 रुपये की छूट दिया गया है. एक झूठ के सहारे 58 लाख की ली छूट मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड प्रबंधन ने झूठी जानकारी देकर बिरकोनी के खसरा नंबर 2013 रकबा 1.90 हेक्टेयर पर सौ साल पुरानी चुहरी तालाब की अस्तित्व को मिटाने के लिए शासन से ही स्टांप ड्यूटी में छूट लिया है. शासन द्वारा उद्योग के विकास के लिए रजिस्ट्री में छूट देने का प्रबंधन किया गया है. लेकिन सवाल है कि क्या अब शासन ही उद्योग को पुरानी सरोवर को पाटने के लिए छूट प्रदान कर रहे हैं? एक तरफ शासन -प्रशासन गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए लोगों के घरों, ऑफिस और भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए जागरूक कर रहा है. तो दूसरी ओर मनोरमा इंडस्ट्री जैसे उद्योग शासन से छूट का फायदा उठाकर 100 साल पुराने तालाब का नामोनिशान मिटा रहे हैं. तालाब की धार्मिक महत्व सदियों पुरानी बिरकोन के चुहरी तालाब से धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है. बिरकोनी की चंडी माता मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में चुहरी तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. यहां के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि, नवरात्रि में दूर दराज से श्रद्धालु यहां आते हैं. उनके लिए तालाब निस्तारी में उपयोग किया जाता है और नवरात्रि पर्व के बाद जवारा विसर्जन इसी तालाब में किया जाता है. हालांकि, गांव के अंदरूनी हिस्से में तालाब बन चुका है लेकिन चुहरी तालाब की धार्मिक महत्व सदियों से चली आ रही है. इस संबंध में मनोरमा इंडस्ट्री के मनसूर अली अहमद से संपर्क किया गया. उन्होंने जमीन क्रेता और मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर गौतम कुमार पाल का नंबर देने से इंकार करते हुए सभी दस्तावेज सही होना बताया.

समारोह : मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा बी डी महंत की स्मृति में समारोह

बिलासपुर  मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा  हरेली के अवसर पर चैतुरगढ़ के महिषासुरमर्दिनी माता के परिसर में मध्य प्रदेश और भारत सरकार  की राजनीति में दखल देने वाले पनिका समाज के प्रेरणास्रोत बाबू बिसाहू दास महंत को उनकी 47वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी।साथ ही उनकी स्मृति में बेल,नीम,बड़गद,पीपल के पौधे लगाकर   समाज हित में उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।बहुप्रतीक्षित अनुसूचित जनजाति की मांग को   कोरबा जिला के पनिका समाज ने उठाते हुए  पुनः नया संगठन की अगुवानी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।  भरतदास मानिकपुरी अध्यक्ष, नन्हीदास महंत  महासचिव, गोपालदास   पड़वार,कोषाध्यक्ष, गोरे   महंत सचिव, मनोज  मानिकपुरी,प्रदेश प्रवक्ता, निर्वाचन अधिकारी घनश्याम दास, पाली ब्लॉक के समाज अध्यक्ष कंवल दास रंगोले, लाफा सोसाइटी समाज प्रमुख  पीला दास महंत,बगदरा निवासी संतोष दास महंत, मानिकदास,सहित  भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,डॉक्टर देवधर महंत,साहित्यकार एवं अधिवक्ता उच्च न्यायालय बिलासपुर,डॉक्टर फूल दास महंत पनिका समाज महासमिति राष्ट्रीय संगठन नई दिल्ली अर्जुनदास , हरिहर दास, कोटा से भरतदास, शम्भुदास , पुरुषोत्तम दास, मयादास, मोहर दास ,  एवं महिला आमीन माता समिति, नवयुवकप्रदेश अध्यक्ष भावी रवि के साथ सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में स्वप्रेरित उपस्थित हुए।  

समारोह : मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा बी डी महंत की स्मृति में समारोह

बिलासपुर  मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा  हरेली के अवसर पर चैतुरगढ़ के महिषासुरमर्दिनी माता के परिसर में मध्य प्रदेश और भारत सरकार  की राजनीति में दखल देने वाले पनिका समाज के प्रेरणास्रोत बाबू बिसाहू दास महंत को उनकी 47वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी।साथ ही उनकी स्मृति में बेल,नीम,बड़गद,पीपल के पौधे लगाकर   समाज हित में उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।बहुप्रतीक्षित अनुसूचित जनजाति की मांग को   कोरबा जिला के पनिका समाज ने उठाते हुए  पुनः नया संगठन की अगुवानी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।  भरतदास मानिकपुरी अध्यक्ष, नन्हीदास महंत  महासचिव, गोपालदास   पड़वार,कोषाध्यक्ष, गोरे   महंत सचिव, मनोज  मानिकपुरी,प्रदेश प्रवक्ता, निर्वाचन अधिकारी घनश्याम दास, पाली ब्लॉक के समाज अध्यक्ष कंवल दास रंगोले, लाफा सोसाइटी समाज प्रमुख  पीला दास महंत,बगदरा निवासी संतोष दास महंत, मानिकदास,सहित  भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,डॉक्टर देवधर महंत,साहित्यकार एवं अधिवक्ता उच्च न्यायालय बिलासपुर,डॉक्टर फूल दास महंत पनिका समाज महासमिति राष्ट्रीय संगठन नई दिल्ली अर्जुनदास , हरिहर दास, कोटा से भरतदास, शम्भुदास , पुरुषोत्तम दास, मयादास, मोहर दास ,  एवं महिला आमीन माता समिति, नवयुवकप्रदेश अध्यक्ष भावी रवि के साथ सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में स्वप्रेरित उपस्थित हुए।