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आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों को मिलेगा आर्थिक सहारा, अम्बिकापुर में 48 लाख मंजूर

अम्बिकापुर  जिला प्रशासन द्वारा प्राकृतिक आपदा में मृतकों के वारिसों को 48 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। जिसमें तहसील अम्बिकापुर के भिटटीकला निवासी उपदेव यादव की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस रनमेत यादव, तहसील दरिमा के नवापाराकला निवासी रूपनारायण की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस रामबाई, तहसील दरिमा के कतकालो निवासी पार्वती राजवाड़े की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस प्रदीप राजवाड़े, तहसील उदयपुर के पण्डरीपानी निवासी सीता सिरदार की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस पोलेश्वर प्रसाद, तहसील कुन्नी लखनपुर के तुनगुरी निवासी सुरेन्द्र राजवाड़े की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस हीरा बाई, तहसील कुन्नी लखनपुर के मांजा निवासी प्यारी बाई की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस लक्षन राम, तहसील सीतापुर के खड़ादोरना निवासी शिवम गुप्ता की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस अमित गुप्ता, तहसील बतौली के कुनकुरीकला निवासी सुरजपति की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस भागीरथी पैकरा, तहसील लुण्ड्रा के बरगीडीह निवासी विक्रम उर्फ डललू तिवारी की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस घनश्याम तिवारी, तहसील लुण्ड्रा के उदारी निवासी लोकेश पैकरा की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस सोना सिंह, तहसील रघुनाथपुर लुण्ड्रा के बदगरी निवासी रामलाल खोई की मृत्यु आकाशीय बिजली गिरने से होने पर उनके वारिस सुषमा सिंह, एवं तहसील धौरपुर निवासी फुलेश्वरी कुजूर की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस रीखू कुजूर को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की है। इस राशि की मंजूरी राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 संशोधित प्रावधानों के तहत प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत दी गई है।

कलेक्टर ने तिरंगा यात्रा, स्वतंत्रता दिवस और योजनाओं की प्रगति की गई समीक्षा

महासमुंद : कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश, महासमुंद में विकास कार्यों की हुई समीक्षा महासमुंद: कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा की बैठक सम्पन्न, अधिकारियों को सौंपे गए आवश्यक निर्देश कलेक्टर ने तिरंगा यात्रा, स्वतंत्रता दिवस और योजनाओं की प्रगति की गई समीक्षा महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने आज सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक लेकर विभिन्न विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों और आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर नवपदस्थ जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अनुविभागीय अधिकारी, सभी विभाग के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। वीसी के माध्यम से जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ सहित सभी ब्लॉक स्तरीय संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर लंगेह ने तिरंगा यात्रा की तैयारी की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष तिरंगा यात्रा हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव स्वच्छता के संग थीम पर आयोजित किया जाएगा। यह अभियान तीन चरणों में आयोजित होगा, जो 15 अगस्त तक चलेगा। कलेक्टर ने कहा कि तिरंगा यात्रा की तैयारी हेतु सभी जनपद सीईओ को आवश्यक निर्देश दिए। इस अभियान में स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूह और आम नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भी आजादी का महोत्सव मना सकते हैं। साथ ही कलेक्टर ने इस वर्ष मनाए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे रजत जयंती थीम के अनुरूप एवं गरिमापूर्ण आयोजन करने और पूर्व वर्षों की भांति अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में लंगेह ने अटल मॉनिटरिंग पोर्टल में समय-सीमा में डेटा अपलोड करने, तथा ई-ऑफिस का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने 15 वर्ष से अधिक पुरानी शासकीय वाहनों की नीलामी हेतु संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए बसना एवं खल्लारी में प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पीएम जनमन योजना अंतर्गत निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवासों को 15 अगस्त तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। बहुद्देशीय केंद्रों की प्रगति की जानकारी भी ली गई। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अब तक 87 प्रतिशत कार्ड बनाए जा चुके हैं, शेष शत-प्रतिशत लक्ष्य को जल्द पूर्ण करने हेतु स्वास्थ्य विभाग की टीम को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने को कहा गया। राशन कार्ड में मृत व्यक्तियों के नाम हटाने हेतु विशेष अभियान चलाने को कहा गया। कृषि विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि 66 हजार टन खाद में से 81 प्रतिशत खाद का वितरण किया जा चुका है। वहीं, मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने व जरूरत पड़ने पर गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पशु मालिकों पर अपने पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ने पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाए। पंचायत स्तर पर पशुओं को रखने की स्थानीय व्यवस्था की जाए। अब तक महासमुंद में 1500 रुपए, पिथौरा में 400, सरायपाली में 1400 एवं बसना में 500 रुपए की पेनाल्टी वसूली गई है तथा कुल 251 पशुओं को विस्थापित किया गया है। अनुविभागीय अधिकारियों को इस पर निजी रूप से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पेंशन प्रकरणों की समीक्षा की और सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को समय-सीमा में जानकारी भेजने के निर्देश दिए। बैठक में समय-सीमा में प्राप्त पत्रों की समीक्षा, जनशिकायत निवारण, एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जनता से जुड़े प्रकरणों को समय पर और प्राथमिकता से हल किया जाए।

छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज से खुला समृद्धि का नया द्वार

रणनीतिक खनिजों की खोज में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक छलांग:छत्तीसगढ़ में निकेल-क्रोमियम-PGE की पुष्टि रायपुर  खनिज विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (DGML) ने राज्य में हाल ही में प्राप्त संयुक्त अनुज्ञा क्षेत्र में निकल (Nickel), क्रोमियम (Chromium) और प्लेटिनम समूह के तत्वों (PGEs) की खोज की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि छत्तीसगढ़ में रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह खोज महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह निकल, क्रोमियम और PGE ब्लॉक में हुई है, जो लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस क्षेत्र का प्रारंभिक अन्वेषण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा G4 स्तर पर किया गया था, जिसमें इन खनिजों की उपस्थिति की संभावना प्रकट हुई थी। इस आधार पर, छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग के अंतर्गत भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय (DGM) ने विस्तृत भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन कर ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराई। दिनांक 6 मार्च 2023 को ब्लॉक का सफलतापूर्वक नीलामीकरण हुआ, जिसमें DGML ने 21%  सबसे ऊँची बोली लगाकर इसे हासिल किया। इसके पश्चात DGM छत्तीसगढ़ द्वारा अन्वेषण कार्यों को शीघ्र गति देने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान किया गया। आवश्यक वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के बाद, DGML ने अन्वेषण कार्यों की शुरुआत की, जिनमें विस्तृत भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, रॉक चिप सैम्पलिंग, ड्रोन आधारित मैग्नेटिक सर्वेक्षण तथा इंड्यूस्ड पोलराइजेशन (IP) सर्वेक्षण शामिल हैं। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। अब तक लगभग 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो संभावित मैफिक-अल्ट्रामैफिक चट्टान संरचनाओं में स्थित है। भूभौतिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त संकेतों के अनुसार 300 मीटर गहराई तक सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो इस ब्लॉक की समृद्ध खनिज क्षमता को रेखांकित करती है। भालुकोना ब्लॉक के समीप ही स्थित केलवरडबरी निकल, क्रोमियम एवं PGE ब्लॉक पूर्व में मेसर्स वेदांता लिमिटेड को नीलामी के माध्यम से प्रदान किया गया था। इन दोनों ब्लॉकों के संयुक्त विकास से महासमुंद क्षेत्र को देश के रणनीतिक खनिजों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएँ सशक्त हुई हैं। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक खोज राज्य और देश के लिए अत्यावश्यक खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की भावना को सशक्त करती है और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करती है। छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य शासन द्वारा रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसका प्रमाण 2024-25 के अन्वेषण प्रस्तावों में परिलक्षित होता है, जहां 50% से अधिक प्रस्ताव इन्हीं खनिजों पर केंद्रित हैं। अब तक राज्य द्वारा 51 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें ग्रेफाइट, निकल, क्रोमियम, PGEs, लिथियम, ग्लॉकोनाइट, फॉस्फोराइट एवं ग्रेफाइट-वैनाडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 टिन ब्लॉकों को भारत सरकार के खनिज मंत्रालय को आगामी नीलामी हेतु सौंपा गया है। इस दिशा में योजनाबद्ध एवं संस्थागत प्रयासों को गति देने के लिए DGM, छत्तीसगढ़ ने एक क्रिटिकल मिनरल सेल (Critical Mineral Cell) का गठन किया है, जो शोध, शैक्षणिक एवं पेशेवर संस्थानों के साथ सहभागिता बढ़ाकर खनिज अन्वेषण एवं परिशोधन को प्रोत्साहित कर रहा है। इस संदर्भ में खनिज संसाधन विभाग के सचिव, श्री पी. दयानंद, ने कहा कि यह खोज केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है। बढ़ती वैश्विक मांग के मद्देनज़र, हरित ऊर्जा एवं हाई-टेक तकनीकों के लिए आवश्यक खनिज — जैसे निकेल और प्लेटिनम समूह के तत्व — भविष्य की तकनीकों की रीढ़ हैं। छत्तीसगढ़ भारत के रणनीतिक खनिज मानचित्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध है और हम इसके लिए आवश्यक संस्थागत और संचालनात्मक सहयोग सुनिश्चित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज समृद्धि की स्थिति को और मजबूत करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में उपयोगी खनिजों की खोज की दिशा में अद्भुत संभावनाओं की नींव भी रखती है।

कौशल से समृद्धि की ओर – युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर मुख्यमंत्री साय का विशेष जोर

कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ें, युवाओं को बनाएं आत्मनिर्भर – मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में कौशल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है। इसके लिए विभाग द्वारा निरंतर नवाचार और प्रभावी कार्ययोजना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025–26 के लिए जिलेवार प्रशिक्षण उपलब्धि और आबंटित बजट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के सम्बन्ध में जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि अब तक 549 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि पुनर्वास केंद्रों में 382 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में पीएम जनमन योजना के तहत अत्यंत पिछड़ी जनजाति (PVTG) के युवाओं को दिए जा रहे कोर्सवार प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 1 जुलाई 2025 से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत चेहरा-आधारित स्कैनिंग प्रणाली द्वारा प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निगरानी में सुधार हुआ है। बैठक में विभाग द्वारा निजी संस्थाओं के साथ किए गए एमओयू की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें नांदी फाउंडेशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा संस्थानों से किए गए समझौते शामिल हैं। इन संस्थानों के माध्यम से राज्य में गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बैठक में ‘कौशल तिहार 2025’ के आयोजन की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं में कौशल के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह प्रतियोगिता जिला और राज्य स्तरीय दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें दो आयु वर्ग – 22 वर्ष से कम एवं 22 वर्ष से अधिक – के प्रतिभागी भाग लेंगे। प्रतियोगिता में 10 प्रमुख ट्रेड ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, ब्रिकलेइंग, रिन्युएबल एनर्जी हेल्थ एंड सोशल केयर, प्लंबिंग एंड हीटिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशंस, इलेक्ट्रॉनिक्स फील्ड टेक्नीशियन, कंप्यूटर, मोबाइल फोन टेक्नीशियन, ग्राफिक डिजाइन टेक्नोलॉजी/डेस्कटॉप पब्लिशिंग तथा रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग शामिल है।जिला स्तर पर प्रत्येक ट्रेड और आयु वर्ग से दो विजेताओं का चयन किया जाएगा, जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को पुरस्कार, ट्रॉफी और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्हें इंडिया स्किल्स 2025 की क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा, जहाँ से चयनित प्रतिभागी ‘वर्ल्ड स्किल्स 2026’, शंघाई (चीन) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं को युवाओं की आजीविका, आत्मनिर्भरता और भविष्य के निर्माण से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में सतत प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में वन एवं कौशल विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कौशल विकास विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास अभिकरण (CSDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

नहर लाइनिंग और चैनल निर्माण के लिए रायपुर को 3.55 करोड़ की स्वीकृति

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग ने  मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिला के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में गुडरू व्यपवर्तन नहर की लाईनिंग एवं आर.सी.सी. चैनल निर्मार्ण हेतु 3 करोड़ 54 लाख 80 हजार रुपये  की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के पूर्ण होने पर 486 हेक्टेयर खरीफ एवं 243 हेक्टेयर रबी सहित कुल 729 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्रीय किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह कार्य अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत लघु सिंचाई योजना के मद से क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए वित्त विभाग द्वारा पूर्व में सहमति प्रदान की जा चुकी है। राज्य शासन द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि स्वीकृत कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर ही पूर्ण कराएं। कार्य प्रारंभ करने से पहले तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी और निर्माण कार्य की ड्रॉइंग एवं डिज़ाइन की स्वीकृति भी सक्षम अधिकारी से लिया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक हो, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। निर्माण कार्य केवल उसी स्थिति में प्रारंभ किया जाएगा जब कम से कम 75 प्रतिशत भूमि बाधा रहित रूप से उपलब्ध हो। यदि भू-अर्जन की आवश्यकता हो, तो उसे स्वीकृत राशि की सीमा के भीतर ही पूरा किया जाएगा और किसी अन्य मद की बचत राशि से भू-अर्जन नहीं किया जाएगा। यदि प्रस्तावित क्षेत्र में भू-अर्जन नहीं है तो निर्माण केवल शासकीय भूमि पर किया जाएगा, जिसके लिए भूमि का आबंटन सक्षम अधिकारी से कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। कार्य पूर्ण होने के बाद योजना का पूर्णता प्रमाण पत्र शासन को प्रस्तुत करना भी अनिवार्य होगा। इस निर्णय से मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि की संभावना है।

खाद्य सुरक्षा को लेकर कोरिया में सतर्कता, ‘बने खाबो-बने रहिबो’ के तहत शुरू हुई जांच

कोरिया : बने खाबो-बने रहिबो अभियान के तहत जिले में खाद्य सुरक्षा जांच कोरिया: ‘बने खाबो-बने रहिबो’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा को लेकर सघन जांच अभियान खाद्य सुरक्षा को लेकर कोरिया में सतर्कता, ‘बने खाबो-बने रहिबो’ के तहत शुरू हुई जांच मिठाई दुकानों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं से लिए गए नमूने, जांच के लिए रायपुर भेजे गए कोरिया  राज्य शासन एवं खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा वर्षा ऋतु में खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम एवं सुरक्षित खाद्य सुनिश्चित करने हेतु पूरे प्रदेश में विशेष अभियान श्बने खाबो-बने रहिबोश् चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरिया जिले में भी 4 से 6 अगस्त तक स्ट्रीट फूड वेन्डर्स, रेस्टोरेंट्स, मिठाई दुकानों एवं अन्य खाद्य प्रदायकों की सघन जांच की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मिठाई और खाद्य सामग्री के नमूने एकत्र किए हैं। इनमें गणपति बिकानेर स्वीट्स, पटना से नारियल लड्डू और काजू कतली, बिकानेर स्वीट्स भंडार, आदर्श चौक, पटना से गोंद लड्डू, छप्पन भोग, जमगहना से बेसन लड्डू, मामाजी स्वीट्स से बूंदी और दिव्यांश स्वीट्स, खरवत से बेसन बर्फी शामिल हैं। सभी नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी, रायपुर भेजा गया है। परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 एवं नियम 2011 के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य मिलावटी या अस्वच्छ खाद्य पर रोक लगाना है। उपभोक्ताओं को जागरूक करना भी है ताकि वे ताजे, स्वच्छ एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें। विभाग ने खाद्य विक्रेताओं को भी निर्देशित किया है कि वे व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ ही साफ-सुथरे बर्तनों, ताजे कच्चे माल और ढंके हुए खाद्य पदार्थों का उपयोग करें। खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम जनता से अपील की है कि संदिग्ध खाद्य सामग्री या अस्वच्छता की जानकारी होने पर विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

खाद्य सुरक्षा को लेकर कोण्डागांव में चलाया गया ‘बने खाबो – बने रहिबो’ जागरूकता अभियान

कोण्डागांव राज्य शासन के निर्देशानुसार वर्षा ऋतु के दौरान खाद्य जनित बीमारियों एवं संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ द्वारा ‘बने खाबो – बने रहिबो‘ नाम से विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामाग्री उपलब्ध कराना और उनमें जागरूकता फैलाना है। यह अभियान राज्य के समस्त जिलों में 04 अगस्त से 06 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। जिसमें खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले के स्ट्रीट फूड वेडर्स, होटल, रेस्टोरेंट एवं अन्य प्रतिष्ठानों का सघन जांच किया जा रहा है। इस दौरान चलित खाद्य प्रयोगशाला के माध्यम से मौके पर ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही दुकानदारों और आम लोगों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के नियमों, अखबारी कागज के उपयोग से होने वाले नुकसान, बासी खाद्य सामाग्री का उपयोग न करने, पीने के पानी की जांच, एक ही तेल को बार बार गर्म कर उपयोग करने से होने वाले नुकसाल, फूड हैंडलर्स की स्वच्छता का महत्व आदि के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया जाएगा। इस अभियान के तहत कोण्डागांव में सोमवार होटल, मिठाई दुकान और स्ट्रीट फूड वेंडर्स के 14 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 54 खाद्य सामाग्रियों की मौके पर जांच की गई। इसके अलावा मारवाड़ी भोजनालय से राहर दाल और गुलाबी चना का नमूना लिया गया। इसी प्रकार सुनीता होटल से पेड़ा और बेसन लड्डू का नमूना लिया गया तथा न्यू संजय स्वीट्स से खोवा का नमूना लिया गया, जिन्हें गुणवत्ता जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया है। खाद्य कारोबारकर्ताओं और आम लोगों को वर्षा ऋतु के समय खाद्य की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई और त्यौहार के पहले विशेष सावधानी बरतने के लिए निर्देशित किया गया।

रायपुर : ’प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बनी किसानों की ताकत’

रायपुर : ’प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बनी किसानों की ताकत’ ’आधुनिक खेती की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहे कृषक’ रायपुर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छत्तीसगढ़ सहित देशभर में किसानों के लिए आर्थिक संबल का मजबूत आधार बनकर उभरी है। यह योजना राज्य के कृषकों को न केवल नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक खेती की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। बलरामपुर जिले के ग्राम सागरपुर निवासी कृषक श्री सुसेन मण्डल भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से निरंतर लाभ प्राप्त कर खेती-किसानी को सशक्त बना रहे हैं। हाल ही में उन्हें योजना की 20वीं किस्त के रूप में 2,000 रुपए की राशि प्राप्त हुई है, जिससे उन्होंने खाद-बीज की खरीदी और मजदूरी भुगतान जैसे कार्यों में सहुलियत हुई। श्री सुसेन मण्डल ने बताया कि वे विगत कई वर्षों से इस योजना के नियमित लाभार्थी हैं। प्रत्येक किस्त से उन्हें खेती के जरूरी संसाधनों की पूर्ति करने में मदद मिलती है, जिससे कृषि कार्यों की गति बनी रहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता तीन किश्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के लिए आवश्यक निवेश हेतु वित्तीय सहायता देना है, ताकि कृषि कार्य समय पर और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें। छत्तीसगढ़ के हजारों किसान इस योजना से लाभान्वित होकर न केवल परंपरागत खेती को मजबूती दे रहे हैं, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय में भी वृद्धि कर रहे हैं। इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बल मिल रहा है तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो रहा है।

उत्तर बस्तर कांकेर: स्कूल परिसर के आसपास तंबाकू बिक्री पर रोक, कलेक्टर ने एसडीएम को दिए सख्त निर्देश

उत्तर बस्तर कांकेर : शहरी क्षेत्रों में स्कूलों के आसपास तम्बाकू उत्पाद बेचने वालों पर सख्ती से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करें सभी एसडीएम : कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर कलेक्टर का निर्देश: स्कूलों के पास तंबाकू बिक्री पर हो सख्त कार्रवाई, सभी एसडीएम को दिए आदेश उत्तर बस्तर कांकेर: स्कूल परिसर के आसपास तंबाकू बिक्री पर रोक, कलेक्टर ने एसडीएम को दिए सख्त निर्देश सार्वजनिक स्थलों और कार्यालयों में धूम्रपान करने वालों पर लगेगा जुर्माना सभी कार्यालयों में तम्बाकू नियंत्रण के लिए नामांकित किए जाएंगे नोडल अधिकारी उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर की अध्यक्षता में आज राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक का आयोजन  किया गया। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्कूलों व सार्वजनिक स्थलों के आसपास ठेले, गुमटियों में तम्बाकू और उससे निर्मित विभिन्न प्रकार के उत्पाद बेचे जाने की शिकायतें अक्सर मिलती हैं। बच्चों को किसी प्रकार के नशे की लत ना पड़े, इसलिए सभी अनुविभागीय अधिकारी कोटपा एक्ट के तहत सख्ती से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करें। कलेक्टर द्वारा जिले में नशे के विरुद्ध अभियान चलाते हुए सतत् चालानी कार्यवाही करने, जिले के सभी कार्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू मुक्त किये जाने के साथ-साथ यथाशीघ्र जिले को धूम्रपान मुक्त किये जाने के निर्देश दिए गए। पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में कोटपा 2003 के विषय को भी शामिल करने तथा जिले के समस्त कार्यालयों में तम्बाकू नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी के नामांकित करने के निर्देश दिए गए।   बैठक के दौरान तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला सलाहकार डॉ. विनोद वैध द्वारा तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में की जा रही गतिविधियों के सम्बंध में अवगत कराया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर द्वारा राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम, कोटपा एक्ट 2003, कोटपा छ.ग. संशोधन अधिनियम 2021, धूम्रपान मुक्त नीतियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर जिला स्तर के सभी अधिकारीगण उपस्थित थे।

रायपुर : प्रदेश में अब तक 636.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 636.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1054.2 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 329.0 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले मे 581.2 मि.मी., बलौदाबाजार में 557.5 मि.मी., गरियाबंद में 499.8 मि.मी., महासमुंद में 538.2 मि.मी. और धमतरी में 505.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 675.8 मि.मी., मुंगेली में 680.4 मि.मी., रायगढ़ मंे 795.8 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 867.2 मि.मी., कोरबा में 710.3 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 632.1 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 594.5 मि.मी., सक्ती में 729.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 506.8 मि.मी., कबीरधाम में 472.4 मि.मी., राजनांदगांव में 552.4 मि.मी., बालोद में 591.9 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 791.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 452.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 477.3 मि.मी., सूरजपुर में 818.5 मि.मी., जशपुर में 719.1 मि.मी., कोरिया में 739.3 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 709.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 727.6 मि.मी., कोंडागांव में 482.4 मि.मी., नारायणपुर में 594.2 मि.मी., बीजापुर में 804.5 मि.मी., सुकमा में 497.8 मि.मी., कांकेर में 644.6 मि.मी., दंतेवाड़ा में 664.1 मि.मी. और औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।