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सीएम साय ने की स्वच्छता दीदियों की सराहना, कहा – राष्ट्र निर्माण में दे रहीं योगदान

  रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में हमारी स्वच्छता दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने निष्ठा, परिश्रम और सेवा-भावना के साथ समाज को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में आयोजित सम्मान समारोह में स्वच्छता दीदियों को साड़ी, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर एक प्राकृतिक रूप से समृद्ध और सुंदर जिला है, लेकिन पहले जब वे गांवों का दौरा करते थे, तो सड़कों के किनारे फैला कचरा गांवों और नगरों की सुंदरता को धूमिल कर देता था। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत कर इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन में परिवर्तित किया। उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर लोगों को प्रेरित किया और गांव-गांव, शहर-शहर स्वच्छता की अलख जगाई। उन्होंने हर नागरिक को स्वच्छ और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान में हमारी स्वच्छता दीदियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके अथक परिश्रम और समर्पण का ही परिणाम है कि आज जशपुर जिले ने स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे वास्तव में सम्मान की पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने हमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में अमूल्य योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर, मोहल्ले, चौराहे, मंदिर और सार्वजनिक स्थलों की सफाई को अपना कर्तव्य मानें और स्वच्छता को अपनी आदत में शामिल करें। उल्लेखनीय है कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरी स्वच्छता सुधारों के मूल्यांकन और प्रोत्साहन हेतु स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के अंतर्गत 4,589 शहरों को शामिल किया गया था। इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में जशपुर जिले के नगरीय निकायों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन कर देश भर में अपना परचम लहराया है।इसमें जशपुरनगर ने 20,000 से 50,000 की जनसंख्या वर्ग में पूरे देश में 10वां स्थान प्राप्त किया है, जो कि 2023 की 505वीं रैंकिंग से एक लंबी छलांग है। इसी वर्ग में नगर पंचायत कुनकुरी ने 13वां रैंक, नगर पंचायत पत्थलगांव ने 30वां रैंक, नगर पंचायत बगीचा ने 51वां रैंक, और नगर पंचायत कोतबा ने 64वां रैंक हासिल किया है। यह असाधारण उपलब्धि स्वच्छता दीदियों के परिश्रम और प्रशासनिक टीम के समन्वित प्रयास का प्रतिफल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगरीय निकायों द्वारा योजनाबद्ध रूप से कई कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें बी.टी. रोड निर्माण, रोड मार्किंग, सामुदायिक शौचालयों का उन्नयन, चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, वॉल पेंटिंग, वेस्ट मैटेरियल से पार्कों का निर्माण, कम्पोस्टिंग शेड और रिसाइक्लिंग सेंटर की स्थापना, फुटपाथों पर पेवर ब्लॉक लगाना, साइनेज आदि प्रमुख हैं। लेकिन इन प्रयासों की आत्मा बनी हैं वे स्वच्छता दीदियाँ, जो हर गली, मोहल्ले में जाकर डोर टू डोर कचरा संग्रहण जैसे श्रमसाध्य कार्यों को अंजाम देती हैं। इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने सभी स्वच्छता दीदियों, नगरीय निकायों के अधिकारियों और नागरिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने कहा कि स्वच्छता दीदियाँ वह कार्य कर रही हैं जो पहले समाज में उपेक्षित था। उन्होंने कहा कि कभी स्वच्छता के प्रति लोगों में चेतना नहीं थी, लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत दीदियों ने लोगों को न केवल जागरूक किया, बल्कि व्यवहार परिवर्तन भी सुनिश्चित किया, जिससे जशपुर को यह गौरव प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

इंसानियत की ड्यूटी पर तैनात जवान: समय पर इलाज दिलाकर बचाई जान

बीजापुर नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवान केवल सुरक्षा की ड्यूटी नहीं निभा रहे, बल्कि मानवता की मिसाल भी पेश कर रहे हैं. बीजापुर और तेलंगाना के बॉर्डर पर बसे कर्रेगुट्टा के पटेल पारा से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने सबका दिल जीत लिया. जानकारी के मुताबिक, पटेल पारा के एक ग्रामीण की अचानक तबीयत गंभीर हो गई. हालात बिगड़ते देख परिजन और ग्रामीण घबराए हुए थे. तत्काल ग्रामीणों ने इसकी सूचना पास के सुरक्षा बल के जवानों को दी. जवानों ने बिना देर किए ग्रामीण को चार पहिया वाहन में बैठाया और ट्रैक्टर के माध्यम से कठिन रास्तों से होते हुए अपने कैम्प तक पहुंचाया. वहाँ समय पर इलाज मिलने से ग्रामीण की जान बच गई. अब उस ग्रामीण की हालत पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बताई जा रही है. इस मानवीय पहल के बाद गाँव के लोग जवानों के प्रति आभार जता रहे हैं और कह रहे हैं कि ये सुरक्षाकर्मी केवल नक्सलियों से ही नहीं लड़ते, बल्कि हमारी जिंदगी की रक्षा भी करते हैं.

कांग्रेस का प्रस्ताव: रमेश बैस को मिले उपराष्ट्रपति पद, मुख्यमंत्री बैज ने लिखा पीएम को पत्र

रायपुर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। इस बीच छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने छत्तीसगढ़ वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व राज्यपाल रमेश बेस को उपराष्ट्रपति बनाने की मांग की है। दीपक बैज ने अपने पत्र में लिखा कि आम चुनाव वर्ष 2000 से अब तक छत्तीसगढ़ ने 11 लोकसभा क्षेत्र में से औसतन 10 सीटें जिताकर भाजपा को संसद सदस्य के रूप में देने का काम किया है। वर्ष 2014 में केंद्र में आपकी सरकार जब बनी उस वक्त छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा में से भाजपा ने 10 सीटें जीती। इसी प्रकार 2019 में 9 सीटें तथा वर्ष 2024 के आम चुनाव में 10 सीटें भाजपा को जीताकर सांसद के रूप में प्रदेश की जनता ने भेजा है। किन्तु हम सभी के लिए पीड़ा का विषय है कि तीनों कार्यकाल में छत्तीसगढ़ को केवल राज्यमंत्री का प्रतिनिधत्व मिला। उन्होंने लिखा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा में कई ऐसे नेता मौजूद हैं जो देश के उप राष्ट्रपति के पद को सुशोभित करने में सक्षम हैं। जिसमें पूर्व राज्यपाल रमेश बैस जैसे महत्वपूर्ण नेता शामिल है जो कि 7 बार के सांसद एवं झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुके हैं। बैज ने आगे लिखा है कि वर्तमान छत्तीसगढ़ में भाजपा के 10 सांसदों को कोई महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। वहीं वरीयता के आधार पर मैं समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से उप राष्ट्रपति के पद हेतु छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ के किसी नेता को अवसर देने का निवेदन करता हूं। बता दें कि उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ ने 21 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी।

मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित

रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा,  अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है। इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है। इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित

रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा,  अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है। इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है। इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।  

शिक्षक नहीं तो पढ़ाई नहीं: बच्चों ने स्कूल में लगाया ताला, पालकों का साथ

बालोद जिले के कुसुमटोला माध्यमिक स्कूल में शिक्षक की कमी को लेकर बच्चों और पालकों ने मिलकर स्कूल में ताला जड़ दिया। बारिश के बीच बच्चों ने स्कूल के गेट के सामने बैठकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति की मांग की। जानकारी के अनुसार, स्कूल में कुल 51 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। पहले यहां तीन शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन तीन शिक्षकों में से एक प्रधानपाठक की पदोन्नति हो जाने के बाद अब सिर्फ दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, जिससे नाराज होकर बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा। वहीं तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे बच्चों और पालकों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट तो खोल दिया, लेकिन बच्चे स्कूल के भीतर नहीं गए। स्कूल के अंदर तहसीलदार और शिक्षक मौजूद थे। वहीं बच्चे और उनके अभिभावक बाहर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे।

PHE भर्ती विवाद: डिप्लोमा बनाम डिग्री की लड़ाई में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

रायपुर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया “B.Ed बनाम D.Ed” की तरह “डिप्लोमा बनाम डिग्री” विवादों से घिर गई है. लाखों डिप्लोमा धारक युवा अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की सभी तकनीकी भर्तियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा. दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों हेतु भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई थी. भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से विभागीय आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता त्रि-वर्षीय डिप्लोमा निर्धारित की गई थी. इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए डिग्री धारकों ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दाखिल की, जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आया. इसके पश्चात भर्ती प्रक्रिया पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है. वहीं दूसरी ओर, डिप्लोमा धारकों का कहना है कि इसरो, डीआरडीओ, व सार्वजनिक उपक्रमों सहित देश की तमाम अग्रणी तकनीकी संस्थाओं में शैक्षणिक अर्हता पद के अनुसार तय की जाती है. अतः पद यदि उप अभियंता (Junior Engineer) है, तो डिप्लोमा ही उपयुक्त योग्यता है. डिप्लोमा अभ्यर्थियों ने इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. उनका तर्क है कि 7 नवम्बर 2024 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता”.

शिक्षकों के तबादले के खिलाफ बारिश में भीगते छात्राओं ने रोका हाईवे

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में ‘छू लो आसमान स्कूल’ की करीब 350 छात्राओं ने आज भारी बारिश के बीच नेशनल हाईवे पर बैठकर ढाई घंटे तक सड़क जाम कर दिया. हाथों में तख्तियां लिए ये बच्चियां लगातार नारे लगाती रहीं और प्रशासन से सीधी मांग की – “हमें सिर्फ शिक्षक नहीं, भरोसा चाहिए.” छात्राओं ने कहा कि शिक्षा विभाग के वादों पर अब उन्हें यकीन नहीं रहा, इसलिए कलेक्टर खुद आकर यह गारंटी दें कि जिन शिक्षकों ने उन्हें पढ़ने और आगे बढ़ने का सपना दिखाया था, वे वापस आएंगे. छात्राओं का यह प्रदर्शन न किसी संगठन का था और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का. यह उन बच्चियों का अपना फैसला था जो शिक्षा को लेकर गंभीर हैं और अब चुप नहीं रहना चाहतीं. प्रदर्शन के दौरान बारिश तेज थी, लेकिन छात्राएं डटी रहीं. प्रशासन ने हालांकि इस विरोध के पीछे किसी के उकसावे की संभावना की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि यदि किसी शिक्षक या अन्य व्यक्ति ने छात्राओं को उकसाया है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. यह प्रदर्शन सिर्फ शिक्षकों की वापसी की मांग नहीं था, बल्कि उस भरोसे की वापसी की गुहार थी जो इन बच्चियों को कभी दिखाया गया था. अब प्रशासन जांच और समाधान की बात कर रहा है, पर बच्चियों के मन में असमंजस बना हुआ है. सवाल यह है कि जब भविष्य की ये बेटियां अपने अधिकारों के लिए बारिश में भीगती सड़क पर बैठने को मजबूर हो जाएं, तो क्या इसे सिर्फ विरोध मानना चाहिए या सिस्टम के लिए एक आईना और चेतावनी के रूप में देखना चाहिए?

धमकी देकर नाबालिग से किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को किया सलाखों के पीछे

बलरामपुर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी मनोज ने घर में घुसकर नाबालिग को जान से मारने की धमकी दी और उसे अपने मामा के घर ले गया. जहां आरोपी ने नाबालिग के साथ गंदा काम किया. मामला थाना रघुनाथ नगर का है. पीड़िता ने रोते-बिलखते अपने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया. वरिष्ठ अधिकारियो के निर्देशानुसार आरोपी मनोज कुमार (21 वर्षीय) को गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपी के खिलाफ  धारा333 351(1), 137 (2) 64 बीएनएस, पाक्सो एक्ट 4,6 के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेजा गया है.

खनन मामले में लापरवाही नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने खनन सचिव से मांगा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण

बिलासपुर हाईकोर्ट ने अवैध उत्खनन के एक मामले में खनन सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है. मामला सक्ती जिले के ग्राम नंदेली में शासकीय भूमि पर हो रहे अवैध पत्थर उत्खनन के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका का है. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने खनन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं, महाधिवक्ता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए मांगे गए समय को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है. याचिकाकर्ता खोलबाहरा द्वारा अधिवक्ता योगेश चंद्रा के जरिए जनहित याचिका दायर की गई है. जिसमें कहा गया है कि ग्राम नंदेली, तहसील जैजैपुर, जिला सक्ती स्थित खसरा नंबर 16/1, क्षेत्रफल 14.2 हेक्टेयर की शासकीय भूमि पर राजेश्वर साहू सहित अन्य निजी व्यक्तियों द्वारा लंबे समय से गौण खनिज पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तहसील और जिला प्रशासन से कई बार की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे पहले याचिकाकर्ता ने एक अलग रिट याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने 30 जून 2025 के आदेश में यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं है. हालांकि अदालत ने उन्हें जनहित याचिका दायर करने की छूट दी थी. इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत वर्तमान जनहित याचिका दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद से प्रतिवादी उस स्थान को धीरे-धीरे पाटने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे साक्ष्य मिटाए जा सकें. उन्होंने इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की. कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए खनन विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले व्यक्तिगत रूप से हलफनामा प्रस्तुत करें और इस विषय में स्थिति स्पष्ट करें.