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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: ओपीडी दवा-जांच सीमा बढ़ाने का अधिकार मिला, पेंशनर्स को फायदा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत, राजस्थान राज्य पेंशनर्स चिकित्सा रियायती योजना-2021 (आरजीएचएस) में संशोधन करते हुए, पेंशनर्स के लिए आउटडोर चिकित्सा सुविधा (ओपीडी) में दवाइयों और जांचों की वार्षिक सीमा बढ़ाने का अधिकार अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया है। वर्तमान में ओपीडी दवाइयों के लिए 50 हजार रुपये और जांचों के लिए 5 हजार रुपये की सीमा तय थी। नये प्रावधान के तहत ओपीडी दवाइयों की सीमा 2 लाख रुपये तक बढ़ाने के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के अतिरिक्त सीईओ या संयुक्त सीईओ को अधिकार दिया गया है। 2 लाख से 7 लाख रुपये तक की सीमा बढ़ाने के लिए एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को अधिकार होगा। 7 लाख रुपये से अधिक के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (प्रशासनिक विभाग) को अधिकार दिया गया है। इसी तरह जांचों के लिए 5 हजार रुपये से अधिक की सीमा बढ़ाने का अधिकार राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ को दिया गया है। पहले यह अधिकार वित्त विभाग के पास थे, लेकिन अब यह पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित कर दिए गए हैं। इस फैसले से पेंशनर्स को अपने चिकित्सा खर्चों के लिए अधिक लचीलापन मिलेगा और आवेदन प्रक्रिया भी सरल होगी। पेंशनर्स को इस सुविधा के लिए अब आरजीएचएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

भाजपा में चर्चा तेज: राठौड़ की अपील के पीछे क्या है रणनीति?

जयपुर राजस्थान भाजपा में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन का इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ इस बार ऐसी टीम बनाने पर फोकस कर रहे हैं जो न केवल मजबूत हो बल्कि विवादों से भी दूर रहे। इसके लिए वे पिछले एक साल में सभी गुटों के नेताओं, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, सांसदों, मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनके सुझाव ले चुके हैं। राठौड़ का स्पष्ट संदेश है कि भाजपा कार्यकर्ता संगठन के लिए काम करे, किसी व्यक्तिगत नेता के लिए नहीं। उनकी प्राथमिकता सत्ता और संगठन का संतुलन साधना है, जिसके तहत मौजूदा मंत्रियों को भी संगठन में और सक्रिय नेताओं को सरकार में जगह दी जा सकती है। इससे मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत भी मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उपाध्यक्ष पद पर नाहर सिंह जोधा, ज्योति मिर्धा, अनिता कटारा, विजेंद्र पूनिया और हरिराम रिणवा के नाम संभावित हैं। महा मंत्री पद पर श्रवण सिंह बगड़ी, मिथलेश गौतम, भूपेंद्र सैनी और अर्चना मीणा के नाम चर्चा में हैं, जबकि मंत्री पद के लिए आईदान सिंह भाटी, एकता अग्रवाल और नीलम गुर्जर का नाम सामने आया है। राठौड़ फरवरी 2028 तक अपने कार्यकाल में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, युवा और महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ाने और आदिवासी-दलित समुदाय को जोड़ने पर जोर देंगे। यह नई टीम न केवल आंतरिक संरचना को सुदृढ़ करेगी, बल्कि आने वाले उपचुनावों और निकाय चुनावों में भाजपा के मनोबल को भी बढ़ाएगी।

एनईबी थाना पुलिस की दबिश, धारदार हथियार के साथ एक आरोपी गिरफ्तार

अलवर अलवर के एनईबी थाना पुलिस ने धारदार हथियार लेकर घूम रहे एक आदतन अपराधी को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी दिनेश चंद्र ने बताया कि कल मुखबिर से सूचना मिली कि एनईबी हाउसिंग बोर्ड के पास एक युवक हथियार के साथ घूम रहा है और किसी वारदात की फिराक में है। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी मनीष पुत्र रामावतार, निवासी एनईबी, को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार मनीष आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह कई दिनों से पुलिस की निगरानी से नदारद था और अपने घर पर भी नहीं मिल रहा था। पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद धारदार हथियार को जब्त कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और कई मामलों में न्यायालय से भी गैरहाजिर था। उसे जल्द ही अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।  

राज्यपाल से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने की मुलाकात

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे से शनिवार को राजभवन पहुंचकर राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। डॉ. चतुर्वेदी की राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष बनने के बाद राज्यपाल से यह पहली शिष्टाचार भेंट थी।

राज्यपाल को बालिकाओं और ब्रह्माकुमारीज की बहनो ने बांधा रक्षासूत्र

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे को शनिवार को राजभवन में एस.ओ. एस. बालग्राम की बालिकाओं और ब्रह्माकुमारीज की बहनो ने रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधा। राज्यपाल ने इस दौरान कहा कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का पावन पर्व है। यह पर्व परस्पर स्नेह और प्यार के साथ भाइयो द्वारा बहनों की सुरक्षा का संदेश देता है। 

‘कृषक उपहार योजना’ में संशोधन को स्वीकृति, ई-नाम पोर्टल पर कृषि जिंसों की बिक्री को मिलेगा प्रोत्साहन

जयपुर राज्य सरकार ने किसानों को पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से कृषि जिंसों की बिक्री हेतु प्रोत्साहित करने के लिए संचालित ‘कृषक उपहार योजना’ में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। अब इस योजना का लाभ उन किसानों को ही मिलेगा जो ई-नाम पोर्टल के माध्यम से बिक्री करते हुए ई-पेमेंट (इलेक्ट्रॉनिक भुगतान) प्रणाली से भुगतान प्राप्त करते हैं।  मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को कृषि विपणन विभाग द्वारा भिजवाए गए प्रस्ताव के अनुसार अब उन्हीं किसानों को उपहार कूपन जारी किया जाएगा, जिनकी जिंसों की बिक्री ई-नाम पोर्टल पर दर्ज हुई हो और उसका भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से प्राप्त किया गया हो। योजना के वर्तमान स्वरूप में देखा जा रहा था कि ई-नाम पर कृषि जिंस के विक्रय पर्चियों पर जारी कूपन की तुलना में ई-पेमेंट पर जारी कूपन की संख्या काफी कम है। अब केवल ई-पेमेंट पर ही उपहार कूपन जारी किए जाने से ई-नाम पोर्टल पर बिक्री के साथ-साथ किसान और व्यापारी तत्काल एवं सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित होंगे।  संशोधित योजना में ई-पेमेंट से प्राप्त कृषि उपज विक्रय की प्रति 10 हजार रूपये की राशि एवं इसके गुणकों में उपहार कूपन ई-नाम सॉफ्टवेयर द्वारा जारी किए जा सकेंगे। प्रत्येक 6 माह में मंडी स्तर पर ड्रॉ निकालकर 50,000 रूपये का प्रथम पुरस्कार 30,000 रूपये का द्वितीय पुरस्कार और 20,000 रूपये का तृतीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा- परम्परा और विरासत को आगे बढ़ाने में बहनों का अहम योगदान

जयपुर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने रक्षाबंधन पर्व पर शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर वीरागंनाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी बहनों एवं स्कूल-कॉलेज छात्राओं से रक्षासूत्र बंधवाया।  मुख्यमंत्री ने उपस्थित बहनों को रक्षाबंधन की बधाई देते हुए कहा कि इस त्यौहार का हमारी संस्कृति में बहुत महत्व है। यह भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। हमारे ऐसे त्यौहारों में समरसता एवं एकरूपता का संदेश निहित होता है। उन्होंने कहा कि हमारी परम्परा और विरासत को आगे बढ़ाने में बहनों का अहम योगदान है। बहनें परिवार में विभिन्न भूमिकाएं निभाते हुए उसे संजोने एवं संस्कारित करने की जिम्मेदारी निभाती है। इसलिए हमारी संस्कृति में बहनों का स्थान सर्वाेपरि होता है। श्री शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर छोटी एवं बड़ी बहनों का स्नेह एवं आशीर्वाद मुझे मिला है। यह मेरे लिए अभेद्य सुरक्षा कवच है। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अन्य क्षेत्रों के साथ ही सामाजिक सरोकारों के माध्यम से भी देश को आगे बढ़ाया है। उन्होंने स्वच्छता, लिंगानुपात, पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अभियान चलाकर देशभर में जन-जागरूकता की अलख जगाई। मुख्यमंत्री ने उपस्थित बहनों से आह्वान किया कि वे पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ ही सामाजिक कार्यों से भी जुड़ें और केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित भाई-बहनों को उनका लाभ दिलाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। इससे ही समाज में बदलाव आएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि माता-बहनों के शिक्षित एवं सशक्त होने से ही देश और प्रदेश उत्कृष्ट बनेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश की नारियों ने अपने महान कार्याें से इतिहास रचा है, उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे भी जीवन में साहसिक रूप से कार्य करते हुए अपने सपनों को पूरा करें।  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उपस्थित बहनों से संवाद किया और उन्हें सम्मानस्वरूप उपहार भेंट किए। इस दौरान चिकित्सा, कानून व्यवस्था एवं न्याय सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी नारी शक्ति ने राज्य सरकार द्वारा महिला सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।  मुख्यमंत्री ने किया वीरांगनाओं का विशेष सम्मान, नन्हीं बहनों को दिया स्नेहिल आशीर्वाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने वीरांगना बहनों से राखी बंधवाई और उनका विशेष सम्मान किया। इस दौरान प्रजापिता ब्रह्मकुमारिज संस्थान की चन्द्रकला दीदी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता शर्मा को रक्षासूत्र बांधा। वहीं, स्कूलों में पढ़ने वाली बहनों ने जब अपने नन्हें हाथों से श्री शर्मा को राखी बांधी तो उन्होंने उनके सिर पर हाथ रखकर स्नेहिल आशीर्वाद दिया।

रक्षाबंधन पर श्रीमती दिया कुमारी ने डॉ. प्रेमचंद बैरवा को बांधी राखी

जयपुर भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह के पावन पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर शनिवार को उपमुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा के राजकीय आवास पर उनको उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी ने स्नेहपूर्वक रक्षासूत्र बांधा। इस अवसर पर उन्होंने इस पर्व को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव बताते हुए समाज में प्रेम, सौहार्द और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

18 अगस्त की परीक्षा रद्द करने के लिए छात्र संगठनों का कॉलेज में विरोध प्रदर्शन

कोटा राजस्थान के कोटा में सरकारी महाविद्यालय की समस्याओं से झूझ रहे छात्रों के समर्थन में एबीवीपी और एनएसयूआई की ओर से प्रदर्शन किया गया। छात्र-छात्राओं ने गेट बंद कर महाविद्यालय प्रशासन को घेरा और मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन सैंपा। इसके पहले छात्रों ने काॅलेज परिसर में ही धरना दे दिया और प्रशासन को मौके पर ही बुलाने की मांग पर अड़ गए। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा। वहीं, महाविद्यालय में प्रदर्शन और हंगामें की आशंका को देखते हुए पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया। छात्र नेताओं का कहना है कि काॅलेज में परीक्षा शुरू हो चुकी है, लेकिन रिजल्ट जारी न होने से स्टूडेंट्स असमंजस में हैं। कोटा विश्वविद्यालय ने यूजी प्रथम, थर्ड पीजी सेमेस्टर के अभी तक परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए और आगामी सेमेस्टर शुरू कर दिए। जिससे स्टूडेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि कोटा विश्वविद्यालय के 18 अगस्त के पेपर को स्थगित किया जाए, क्योंकि 17 तारीख को पटवारी का पेपर है। सभी पीजी स्टूडेंट्स ने पटवारी का एग्जाम देने जाएंगे। मानसिक तनाव में कि हमारा सेंटर दूसरे जिले में आया तो एग्जाम में समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। इस मांग को लेकर पहले भी काॅलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक मांगों को नहीं माना गया है। वहीं, दूसरी तरफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राजकीय महाविद्यालय परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कालेज प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। जिस पर कॉलेज प्रशासन ने सभी मांगों के समाधान का आश्वासन दिया। छात्र नेताओं ने बताया कि महाविद्यालय की बिल्डिंग कई जगह से जर्जर हो चुकी है। प्लास्टर गिरने से यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी भी घायल हुए हैं। कई बार कॉलेज प्रशासन को इससे अवगत कराया गया, लेकिन उसके बाद भी हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। छात्रों का कहना है कि कॉलेज परिसर में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। एनसीसी की भी ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ अन्य की गतिविधि में भाग नहीं ले पा रहे हैं।  

राजस्थान के जंगलों में लौटेगी दहाड़, 5 बाघ होंगे नए घर में बसे

जयपुर राजस्थान में इस साल के अंत तक 2 बाघ अभ्यारण्य में नए बाघों की एंट्री होने जा रही है। राज्य सरकार का वन विभाग महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से बाघों को कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (MHTR) और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (RVTR) में शिफ्ट करने जा रहा है। इसके लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी(NTCA) से मंजूरी ली जा चुकी है।  इनमें नर और मादा दोनों तरह के बाघ होंगे। बाघों की रिलोकेशन इसी साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाएगी। इनमें महाराष्ट्र से बाघों को एयरलिफ्ट किया जाना है। राजस्थान में ऐसा दूसरी बार होगा जब दूसरे राज्य से बाघों को एयरलिफ्ट कर यहां लाया जाएगा। इससे पहले 2008 में रणथम्भौर से सरिस्का में नर बाघ को एयरलिफ्ट करके ले जाया गया था। वर्तमान में, RVTR में 7 बाघ हैं और  MHTR में एक शावक सहित पांच बाघ हैं। वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने बताया कि हाल में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मध्यप्रदेश से 3 और महाराष्ट्र से 2 बाघें को राजस्थान के बाघ अभ्यारण में रिलोकेट करने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा, "शुरुआत में, अक्टूबर में RVTR और MHTR में एक-एक बाघ स्थानांतरित किया जाएगा। चरण बद्ध तरीके से बाघों की शिफ्टिंग का काम किया जाएगा। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाघों को एयरलिफ्ट करने के लिए भारतीय वायुसेना के विमान काम में लिए जाने हैं। इसके लिए वन विभाग ने भारतीय वायुसेना से अनुरोध भी किया है। दरअसल बाघों की रिलोकेशन एक बेहद पेचीदा और तनाव भरा काम होता है। इसमें बाघों की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए यात्रा का समय कम लगे इसके लिए शिफ्टिंग का काम हवाई मार्ग से किए जाने के प्रयास हैं। बाघों के भोजन की व्यवस्था के लिए दोनों अभ्यारण्यों में 150 चित्तीदार हिरण छोड़े जाएंगे। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि यह अन्य राज्यों से बाघों को राजस्थान में स्थानांतरित करने का पहला उदाहरण होगा। इस रिलोकेशन का एक मकसत राजस्थान में बाघों की आबादी में तेजी से बढ़ हरे अंत: प्रजनन को रोकना भी है।नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) के शोध में पाया गया था कि राजस्थान में देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक इनब्रेड बाघ हैं। मामले पर टिप्पणी करते हुए, रणथंभौर टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर मनोज पराशर ने कहा, "अंतःप्रजनन हर जगह एक चिंता का विषय है क्योंकि बाघों की आबादी अलग-थलग है।" उन्होंने कहा, "यह रणथंभौर के बाघ हैं जो सरिस्का और मुकुंदरा गए हैं। बाहर से किसी भी बाघ के संपर्क में आने की शून्य संभावना है।" उन्होंने कहा कि बाघों का रिलोकेशन प्रोजेक्ट अच्छा कदम है क्योंकि यहां दूसरे राज्यों के बाघों को नहीं लाया जाता है तो अगले 2 से 3 दशकों में यहां के बाघ अंत:प्रजनन से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो जाएंगे।