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लेटरहेड पर पीएम की तस्वीर, संगठन का नाम… छांगुर बाबा ने जनता को ऐसे किया गुमराह

लखनऊ  धर्मांतरण रैकेट के मामले में यूपी एटीएस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर खुद को भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ नामक संस्था का अवध प्रांत महासचिव बताता था. इस संस्था को ईदुल इस्लाम नाम का शख्स नागपुर से चला रहा था, जिसे भी एफआईआर में नामजद आरोपी बनाया गया है. छांगुर को बनाया अवध प्रांत का महासचिव   ईदुल इस्लाम ने संस्था के फर्जी लेटर पैड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो लगा रखी थी. संस्था का मुख्यालय नागपुर दिखाकर दावा किया जाता था कि इसका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से है. जांच में पता चला कि ईदुल इस्लाम ने छांगुर को बाकायदा अवध प्रांत का महासचिव नियुक्त किया था.  छांगुर बाबा ने खुद को "भारत प्रतिकार्थ सेवा संघ" नामक संस्था का अवध प्रांत महासचिव बताया। यह संस्था ईदुल इस्लाम नामक एक दूसरे आरोपी द्वारा चलाई जा रही थी। इतना ही नहीं, इस्लाम ने नागपुर में भी एक फर्जी सेंटर खोलकर संस्था को वैध दिखाने की कोशिश की। आपको बता दें कि नागपुर में ही आरएसएस का हेडक्वार्टर है। अधिकारियों से मिलने के दौरान छांगुर बाबा और इस्लाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो वाले लेटरहेड का इस्तेमाल करते थे। साथ ही दोनों RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों का नाम लेकर खुद को प्रभावशाली और मान्यता प्राप्त संगठन का हिस्सा बताते थे। मुस्लिम देशों से फंडिंग ATS की FIR के अनुसार, छांगुर बाबा ने विदेशी फंडिंग के जरिए आतंकी प्रशिक्षण केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। उसे पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग मिली होने का संदेह है। जांच में सामने आया है कि 22 बैंक खातों के जरिए 60 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग किया गया। ईडी ने किए कई खुलासे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यूपी और महाराष्ट्र में छांगुर बाबा के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां हैं, जिनमें अधिकतर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई हैं। मुंबई में ‘रनवाल ग्रीन्स’ नाम की एक बहुमूल्य संपत्ति संदिग्ध सौदे के जरिए खरीदी गई। छांगुर बाबा का एक कनेक्शन पनामा स्थित कंपनी ‘Logos Marine’ से भी मिला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की पुष्टि होती है। फिलहाल छांगुर बाबा हिरासत में है और उसकी भूमिका की जांच एटीएस, एसटीएफ और ईडी द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। मामले में धार्मिक भावना को आहत करने, आतंकी गतिविधियों की साजिश, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों की धाराएं लगाई गई हैं। खुद को बताते थे RSS का करीबी   वे दोनों अफसरों और स्थानीय नेताओं के साथ मुलाकातों व बातचीत में खुद को आरएसएस के बड़े नेताओं का करीबी बताते थे. यही नहीं, एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि ईदुल इस्लाम ने स्थानीय प्रशासन से साठगांठ कर ग्राम समाज और तालाब की जमीनें फर्जी तरीके से खरीदवाने में भी मदद की.  वह अफसरों को जमालुद्दीन उर्फ छांगुर को आरएसएस के नागपुर सेंटर से जुड़ी संस्था का पदाधिकारी बताता था. धर्मांतरण केस की तफ्तीश के दौरान एटीएस थाने में दर्ज एफआईआर में ईदुल इस्लाम को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है.

केंद्र के बाद MP सरकार का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश ने भी तय की गेहूं की स्टॉक लिमिट

भोपाल  गेहूं के भाव को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने अधिकतम भंडारण की सीमा निर्धारित कर दी है। मध्य प्रदेश में भी इसके अनुरूप अब व्यापारी और थोक विक्रेता तीन हजार टन से अधिक गेहूं का भंडारण(wheat stock MP) नहीं कर पाएंगे। फुटकर व्यापारियों के लिए यह सीमा 10 टन की रहेगी। यह भंडारण सीमा 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि थोक और फुटकर व्यापारियों के साथ चेन रिटेलर के लिए भी अधिकतम भंडारण की सीमा तय की गई है। चेन रिटेलर के प्रत्येक आउटलेट के लिए 10 टन की सीमा इस आधार पर निर्धारित की गई है कि सभी आउटलेट पर अधिकतम मात्रा आउटलेटों की कुल संख्या के 10 गुना से अधिक भंडारित नहीं होना चाहिए।  प्रोसेसर के लिए भंडारण की मात्रा उसकी मासिक स्थापित क्षमता के 70 प्रतिशत को वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा करने के आधार पर निर्धारित होगी। यह शेष अवधि की मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार ने तय की स्टॉक की सीमा  इसी तरह चेन रिटेलर के प्रत्येक आउटलेट के लिये 10 मीट्रिक टन की सीमा इस आधार पर निर्धारित की गई है कि सभी आउटलेट पर अधिकतम मात्रा आउटलेटों की कुल संख्या के 10 गुना मीट्रिक टन से अधिक भण्डारित नहीं होना चाहिये। प्रोसेसर के लिये स्टॉक की मात्रा उसकी मासिक स्थापित क्षमता के 70 प्रतिशत मात्रा को वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा करने पर आने वाली मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिये। 29 लाख मीट्रिक टन अधिक गेहूं की खरीद  उल्लेखनीय है कि इस साल प्रदेश सरकार ने करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख 74 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जो पिछले साल की तुलना में 29 लाख मीट्रिक टन अधिक है, पिछले साल 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ था। इस साल 2600 रुपये MSP पर मप्र सरकार ने खरीदा गेहूं यहाँ बताना जरूरी है कि इस बार केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये निर्धारित किया था लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने इस पर 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस दिया जिसके बाद गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गयी, परिणाम स्वरुप किसानों ने सरकार को गेहूं बेचा जिसका लाभ किसानों और सरकार दोनों को ही हुआ।  

राजस्व कामकाज में सख्ती, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को अब पूरे दिन ऑफिस में रहना होगा

जबलपुर  वीआइपी दौरे और लॉ एंड ऑर्डर के चलते प्रभावित होने वाले राजस्व प्रकरणों की समस्या को हल करने के लिए जिले में नई पहल की गई है। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में राजस्व अधिकारियों का नया सेटअप तैयार किया गया है। अब राजस्व न्यायालय का कामकाज संभालने वाले अधिकारियों को वीआइपी दौरे और लॉ एंड आर्डर की जिमेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब अदालती काम में लगाए गए तहसीलदार और नायब तहसीलदार केवल अदालत का काम ही देखेंगे। वे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तहसीलों में बैठकर राजस्व प्रकरणों का निपटारा करेंगे। प्रोटोकॉल देखेंगे 14 अधिकारी नए आदेश में प्रोटोकॉल और कानून व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिये पृथक से 14 राजस्व अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मामले में अपर जिला दंडाधिकारी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मामले में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को थाना क्षेत्र का आवंटन करने के निर्देश दिये हैं। गैर न्यायालयीन कार्यों के लिए नियुक्त प्रभारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख एवं प्रभारी सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। पक्षकार होते थे परेशान दरअसल, वीआइपी दौरों के प्रोटोकॉल और अचानक उत्पन्न होने वाली लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को संभालने की जिमेदारी का असर राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर पड़ता था। इससे न केवल आम पक्षकार परेशान होते हैं, बल्कि राजस्व विभाग की छवि पर गंभीर असर पड़ता है। इससे निपटने के लिए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने दो तरह का सेटअप तैयार कराया। राजस्व कोर्ट की बढ़ी संख्या नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण में गति लाने तथा समय सीमा के भीतर उनका निराकरण करने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों की संया 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। इन अधिकारियों की ड्यूटी प्रोटोकॉल, कानून व्यवस्था आदि कार्यों में नहीं लगाई जा सकेगी। संवाद पर जोर नए सेटप के साथ आम जनमानस से संवाद पर भी जोर दिया गया है। अदालती काम संभालने वाले राजस्व अधिकारी अब सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कोर्ट में बैठेंगे। इससे अवगत कराने पूरे जिले में 22 जुलाई को एक साथ सभी तहसीलों में बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

राजस्व कामकाज में सख्ती, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को अब पूरे दिन ऑफिस में रहना होगा

जबलपुर  वीआइपी दौरे और लॉ एंड ऑर्डर के चलते प्रभावित होने वाले राजस्व प्रकरणों की समस्या को हल करने के लिए जिले में नई पहल की गई है। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में राजस्व अधिकारियों का नया सेटअप तैयार किया गया है। अब राजस्व न्यायालय का कामकाज संभालने वाले अधिकारियों को वीआइपी दौरे और लॉ एंड आर्डर की जिमेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब अदालती काम में लगाए गए तहसीलदार और नायब तहसीलदार केवल अदालत का काम ही देखेंगे। वे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तहसीलों में बैठकर राजस्व प्रकरणों का निपटारा करेंगे। प्रोटोकॉल देखेंगे 14 अधिकारी नए आदेश में प्रोटोकॉल और कानून व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिये पृथक से 14 राजस्व अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मामले में अपर जिला दंडाधिकारी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मामले में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को थाना क्षेत्र का आवंटन करने के निर्देश दिये हैं। गैर न्यायालयीन कार्यों के लिए नियुक्त प्रभारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख एवं प्रभारी सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। पक्षकार होते थे परेशान दरअसल, वीआइपी दौरों के प्रोटोकॉल और अचानक उत्पन्न होने वाली लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को संभालने की जिमेदारी का असर राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर पड़ता था। इससे न केवल आम पक्षकार परेशान होते हैं, बल्कि राजस्व विभाग की छवि पर गंभीर असर पड़ता है। इससे निपटने के लिए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने दो तरह का सेटअप तैयार कराया। राजस्व कोर्ट की बढ़ी संख्या नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण में गति लाने तथा समय सीमा के भीतर उनका निराकरण करने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों की संया 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। इन अधिकारियों की ड्यूटी प्रोटोकॉल, कानून व्यवस्था आदि कार्यों में नहीं लगाई जा सकेगी। संवाद पर जोर नए सेटप के साथ आम जनमानस से संवाद पर भी जोर दिया गया है। अदालती काम संभालने वाले राजस्व अधिकारी अब सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कोर्ट में बैठेंगे। इससे अवगत कराने पूरे जिले में 22 जुलाई को एक साथ सभी तहसीलों में बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

इंदौर-मुंबई तेजस ट्रेन: फुल स्पीड में सफर, देखें स्टेशन व समय का पूरा शेड्यूल

इंदौर   ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को रेलवे ने बड़ा तोहफा दिया है। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा तथा विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल और इंदौर स्टेशनों के बीच विशेष किराये पर सुपरफास्ट तेजस स्‍पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि, ऐसा पहली बार होगा जब तेजस स्पेशल ट्रेन मध्य प्रदेश में दौडे़गी। अब तक तेजस ट्रेन लखनऊ-नई दिल्ली, अहमदाबाद-मुंबई, और मुंबई-मडगांव जैसे मार्गों पर चलती है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने इस स्‍पेशल ट्रेन की जानकारी दी है। ट्रेन संख्या 09085 मुंबई सेंट्रल इंदौर स्‍पेशल प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को मुंबई सेंट्रल से रात 11.20 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन दोपहर 1 बजे इंदौर पहुंचेगी। यह ट्रेन 23 जुलाई से 29 अगस्त तक चलेगी। ट्रेन संख्या 09086 इंदौर मुंबई सेंट्रल स्‍पेशल प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को इंदौर से शाम 5 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन 7.10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी। यह ट्रेन 24 जुलाई से 30 अगस्त तक चलेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरिवली, वापी, सूरत, वडोदरा, दाहोद, रतलाम तथा उज्जैन स्टेशनों पर रुकेगी।इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी 2-टियर एवं एसी 3-टियर कोच होंगे। 21 जुलाई से बुकिंग शुरू ट्रेन संख्या 09085 एवं 09086 की बुकिंग 21 जुलाई से सभी पीआरएस काउंटरों एवं आईआरसीटीसी वेबसाइट पर प्रारंभ होगी। ट्रेनों के ठहराव, समय और संरचना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कवि स्व. गोपालदास नीरज को अर्पित की श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रसिद्ध गीतकार, साहित्यकार एवं पद्म भूषण से सम्मानित स्व. गोपालदास 'नीरज' की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकप्रिय कविताओं के रचियता नीरज जी की कृतियों में देश, समाज और समकालीन परिस्थितियों के साथ संवेदनाओं के सम्मोहक मिश्रण की अनुभूति होती है। उनके द्वारा लिखे गए गीत प्रशंसकों के जीवन को सदैव आनंदित और प्रेरित करते रहेंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद मंगल पांडे को किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अमर शहीद श्री मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए पुण्य स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत अमर शहीद मंगल पांडे ने असाधारण साहस के बूते देश के स्वाभिमान की रक्षा की और स्वतंत्रता के लिए राष्ट्र को जागृत करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रत्येक भारतवासी सदैव उनका ऋणी रहेगा।  

कांग्रेस संगठन में नई जान: राजस्थान में पांच साल बाद विभाग-प्रकोष्ठों का पुनर्गठन

जयपुर संगठन को मजबूत करने की दिशा में कांग्रेस में लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं। पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में तत्कालीन डिप्टी सीएम तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की 2020 में गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत के बाद राजस्थान कांग्रेस के सभी विभाग और प्रकोष्ठ भंग कर दिए गए थे। अब इन प्रकोष्ठों और विभागों में नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस ने एक साथ 7 प्रकोष्ठों का गठन कर दिया। इसमें मुकुल गोयल को उद्योग व्यापार प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया गया। भरत मेघवाल को कच्च बस्ती प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई है। योगिता शर्मा को अभाव अभियोग प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया गया। अमीन पठान को खेल-कूद प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। सुशील पारीक को पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ का प्रदेशाध्यक्ष तथा जीवण खान कायमखानी को स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, संदीप यादव को सहकारिता प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई है। अब जल्द ही प्रकोष्ठ प्रमुख अपनी राज्य और जिला कार्यकारिणी का गठन करेंगे। जिससे कांग्रेस संगठनात्क नियुक्तियों की तादाद बढ़ेगी और हजारों नये कार्यकर्ताओं की फौज कांग्रेस संगठन से जुड़ेगी। प्रदेश कांग्रेस में कुल 18 प्रकोष्ठों में से अब तक 11 पर नियुक्तियों का काम पूरा हो चुका है। वहीं, 11 विभागों में से 6 विभागों के गठन का काम पूरा हो चुका है। पिछले दिनों आदिवासी और अल्पसंख्य विभाग की नियुक्ति भी कर दी गई थी।

जहां जल के नीचे है आस्था का मंदिर: उदयपुर की गुफा में स्वयं प्रकट हुए शिव

अलवर सावन का पवित्र महीना चल रहा है और शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालु देशभर के शिवधामों का रुख कर रहे हैं। आज आपको ले चलते हैं राजस्थान के उदयपुर जिले के एक ऐसे रहस्यमयी शिव मंदिर में जहां एक गुफा में महादेव विराजे हैं। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव पातालेश्वर रूप में प्रकट हुए थे।अरावली की वादियों के बसे उदयपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर बड़गांव क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच स्थित है 'पातालेश्वर महादेव' मंदिर। यह कोई आम शिव मंदिर नहीं है, बल्कि एक ऐसी गुफा में विराजमान है, जिसे लेकर रहस्यमयी मान्यताएं और अद्भुत घटनाएं जुड़ी हैं।   मंदिर के पुजारी पंडित खेमराज गमेती बताते हैं कि यह स्थान 1960 के आसपास चर्चा में आया। मंदिर के पीछे एक कमरे के निर्माण के दौरान खुदाई में करीब तीन फीट चौड़ी एक गुफा सामने आई। उसी रात पुजारी को स्वप्न में संकेत मिला कि इस गुफा में कोई खजाना छुपा है। उन्होंने अपने मित्रों के साथ गुफा में प्रवेश किया और मलबे के बीच एक चट्टान जैसी आकृति दिखी। पास जाकर देखने पर तो एक शिवलिंग था। यह कोई साधारण शिवलिंग नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बन गया। और तभी से इस स्थान को “पातालेश्वर महादेव” कहा जाने लगा। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह गुफा के अंदर स्थित है और शिवलिंग गहराई में विराजमान हैं। गुफा के ऊपर से बहती है मदार नहर, जिसका पानी आगे जाकर फतेहसागर झील में मिलता है। पहले के समय में बारिश का पानी गुफा में भर जाता था और श्रद्धालुओं को जल में उतरकर दर्शन करने होते थे, लेकिन अब प्रशासन और मंदिर समिति ने सीढ़ियां और रेलिंग बनवा दी हैं, जिससे भक्त आसानी से भगवान तक पहुंच पाते हैं। शिवलिंग के ठीक पीछे एक और गहरी गुफा है, जिसका अंतिम छोर आज तक कोई नहीं जान पाया। यह रहस्य श्रद्धालुओं की आस्था को और भी गहरा करता है। मान्यता है कि यह गुफा पाताल लोक तक जाती है  और इसलिए भगवान को पातालेश्वर कहा जाता है।   सावन के महीने में यहां का वातावरण भक्ति और अध्यात्म से सराबोर हो जाता है। हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं, भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। अपने जीवन की मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं। यह मंदिर न सिर्फ शिवभक्तों के लिए एक तीर्थस्थल है, बल्कि यह हमारी आस्था, परंपरा और रहस्यमयी लोककथाओं का भी अद्भुत संगम है। इस सावन, अगर आप उदयपुर आ रहे हैं, तो एक बार पातालेश्वर महादेव के दर्शन जरूर कर सकते हैं। सावन की पावन बेला में पातालगुफा में विराजित यह शिवधाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत चमत्कार है।  

बासनपीर में छतरी निर्माण को लेकर विवाद, बिगड़ सकता है माहौल

जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर जिले के सदर थाना क्षेत्र में अंतर्गत स्थित बासनपीर गांव इन दिनों एक विवाद के चलते सुर्खियों में है। 10 जुलाई को ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण कार्य के दौरान उत्पन्न हुआ मामूली विवाद धीरे-धीरे हिंसक रूप ले बैठा और अब यह मुद्दा सामाजिक, धार्मिक और  राजनीतिक भी हो गया है। क्षेत्र में धारा-163 लागू  है लेकिन नेता वहां जबरन जा रहे हैं।  जैसलमेर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ चुका है। अब यहां पर जैसलमेर-बाड़मेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु विधायक हरीश चौधरी पहुंच रहे हैं। बासनपीर से बहुत पहले फतेहगढ़ में सांसद के काफिले को रोकने की तैयारी की गई है। ये जगह बासनपीर से करीब 90 किलोमीटर पहले है। इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा दी है। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। ये पूरा विवाद क्या है, आइए जानते हैं। मामला क्या है और अब तक की स्थिति क्या है ? 10 जुलाई की सुबह बासनपीर गांव में पुराने रियासती योद्धाओं की स्मृति में बनी छतरियों के पुनर्निर्माण कार्य शुरू हुआ। तब पास के गांव से  बड़ी संख्या में धर्म विशेष के पुरुष, महिलाएं और बच्चे मौके पर पहुंचे। उन्होंने  निर्माण को रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव में कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक कांस्टेबल सहित चार लोग घायल हो गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल से प्राप्त वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर जांच शुरू की। 11 जुलाई तक कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 15 से अधिक महिलाएं शामिल थीं। इन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस ने इन पर राजकार्य में बाधा, जानलेवा हमला और धारा 307 सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। शांति स्थापना के प्रयास, लेकिन विवाद नहीं थमा घटना के तुरंत बाद क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में शांति बहाल करने का प्रयास किया और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया। लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। गांव में हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया आने लगी।भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने गांव आने और घटनास्थल पर पहुंचने की घोषणाएं करनी शुरू कर दीं। राजनीतिक दौरे और प्रशासन की चिंता 10 जुलाई के बाद जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी, पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और पूर्व विधायक सांग सिंह भाटी बासनपीर पहुंचे। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी 16 जुलाई को आने वाले थे लेकिन धारा-163 होने के कारण वे नहीं आ पाए। कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने 19 जुलाई को गांव पहुंचने की घोषणा कर दी। राजनीतिक गतिविधियों के चलते प्रशासन को आशंका हुई कि फिर से माहौल बिगड़ सकता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने 16 जुलाई को धारा-163 लागू कर दी और सभा, जुलूस, रैली और भीड़ इकट्ठा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मध्यप्रदेश प्रभारी और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने आज (19 जुलाई) बासनपीर गांव का दौरा करने की घोषणा कर दी। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह अलर्ट हो गया है। हरीश चौधरी बोले- हम मोहब्बत की दुकान खोलने के लिए बासनपीर जाएंगे विधायक हरीश चौधरी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते वैमनस्य के बीच शांति और सद्भावना का संदेश देना है। उन्होंने कहा, "हम थार के लोग हमेशा भाईचारे और अपणायत में विश्वास रखते आए हैं, लेकिन कुछ तत्वों ने यहां जहर घोलने की कोशिश की है। हम मोहब्बत की दुकान खोलने के लिए बासनपीर जाएंगे।" उन्होंने आगे कहा कि वे बासनपीर में गांधी रामधुन संकीर्तन और सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने जैसलमेर जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें अभी तक कोई स्वीकृति नहीं मिली। बावजूद इसके, उन्होंने यह भी एलान किया कि उन्हें यदि रास्ते में कहीं भी रोका गया, तो वे वहीं बैठकर प्रार्थना और रामधुन का आयोजन करेंगे। कानून के उल्लंघन की अनुमति किसी को नहीं बासनपीर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 पहले ही प्रभावी कर दी गई है। इस धारा के चलते किसी भी बाहरी व्यक्ति का गांव में प्रवेश निषेध है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि कानून के उल्लंघन की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और यदि कोई व्यक्ति जबरन प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जैसलमेर-बाड़मेर सीमा पर सुरक्षा के मद्देनज़र अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है। दोनों जिलों को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और हर आने-जाने वाली गाड़ी की गहन जांच की जा रही है। पुलिस की निगरानी टीम लगातार बॉर्डर गतिविधियों पर नजर रखे हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।   इलाके की ड्रोन से निगरानी  जिला प्रशासन की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि संवेदनशील क्षेत्र में धारा 163 के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। उच्च अधिकारियों की निगरानी में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।