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ऐसे दूर होगी खर्राटों की खर्र-खर्र

जब हम खर्राटा लेते हैं तो हमारा मुंह और गला, जीभ, गले का ऊपरी हिस्सा, तालु और यूव्यल टॉन्सिल और कंठशूल के विरुद्ध वाइब्रेट होता है। खर्राटा लेने के कई कारण हो सकते हैं और ऐसा माना जाता है कि मोटे लोग अधिक खर्राटा लेते हैं लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार अतिरिक्त फैटी टिशूज एअर पैसेज को दबाने का काम करते हैं। सोने जाने से पहले अल्कोहल लेने से भी खर्राटों की समस्या हो सकती है। कोल्ड और एलर्जी के कारण यदि नाक बंद हो तो भी कई बार व्यक्ति खर्राटे लेते हैं। कुछ साधारण उपायों के जरिए खर्राटों की यह समस्या दूर की जा सकती है… -बिस्तर पर सोने के दौरान कुछ अतिरिक्त तकिओं के जरिए खुद को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें। पीठ के बल समतल पर ना लेटें। इससे आपके गले के टिशूज एअर पैसेज को बाधित नहीं कर पाएंगे। -अपने बेड के सिरहाने को थोड़ा ऊपर की ओर उठाकर रखें। इसके लिए बेड के हर पैर के नीचे थोड़े मोटे गुटके लगा दें। इससे बेड थोड़ा ऊंचा हो जाएगा और खर्राटों की समस्या में कमी आएगी। -हमेशा करवट लेकर सोएं। गहरी नींद में हो सकता है आपकी पोजिशन बदल जाए लेकिन सोने की शुरुआत कम से कम करवट लेकर करें। सीधे सोने से आपकी जीभ और तालु, गले से हवा निकलने के रास्ते को रोकने का काम करते हैं। -तकिए को पकड़कर सोने से अधिक लाभ नहीं मिलेगा। इससे बेहतर है कि आप जो भी कपड़े पहनकर सो रहे हैं उसके पिछले हिस्से में टेनिस बॉल सी दें। रात में गहरी नींद के दौरान जब आप अपने बैक पर सोने की कोशिश करेंगे तो बॉल की वजह से फिर करवट ले लेंगे। -नेजल स्ट्रिप की मदद से अपनी नाक को बाहर की ओर से टेप कर दें। यह दवाओं की दुकान पर भी आसानी से मिल जाता है। यह आपकी नासिका छिद्र को खोल देगी और हवा का प्रवाह बेहतर होगा। -पिपरमेंट माउथवॉश से कुल्ला करें, इससे गले और नाक में मौजूद लाइनिंग सिकुड़ जाएगी। यह उस स्थिति में अधिक कारगर हो सकता है जबकि आपके खर्राटे की समस्या अस्थाई हो। हर्बल गारगलिंग के लिए एक ग्लास ठंडे पानी में कुछ बूंदे पिपरमेंट ऑयल की डालें। -कमरे में एलर्जी पैदा करने वाली चीजों को नियमित रूप से साफ करते रहें, जैसे कमरे में बिछा कारपेट, चादर और तकिए का कवर। इससे नाक का कड़ापन कम होगा। -यदि आपके खर्राटों की समस्या मौसमी है तो उस खास मौसम में एलर्जी का ध्यान रखें। इस दौरान रोजाना हर्ब्स युक्त चाय पिएं। इससे सूजन कम करने में मदद मिलती है। -कई बार अधिक वजन भी खर्राटों का कारण बनता है इसलिए शरीर का दस प्रतिशत तक वजन कम करने से ऊपरी एअरवेज के सिकुड़न को कम करने में मदद मिलेगी। -धूम्रपान की आदत हो तो उसे तुरंत छोड़ दें। इससे म्युकस मेब्रेंन में असहजता होती है, जिससे गले में सूजन होती है एअरवे सिकुड़ जाता है। साथ ही धूम्रपान करने वालों को नाक बंद होने की समस्या अधिक होती है। -यदि आप कोई खास दवा ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें। क्योंकि कुछ दवाओं के कारण खर्राटों की समस्या और भी बिगड़ जाती है। जैसे स्लीपिंग पिल्स।  

हाई प्रोटीन डाइट बना रही है युवाओं को बीमार? जानें डॉक्टरों की राय

आजकल फिट रहने का जुनून हर किसी पर हावी है। जिम जाना, प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेना और हाई प्रोटीन डाइट फॉलो करना यंगस्टर्स में एक आम ट्रेंड बन गया है। मसल्स बनाने और वजन कम करने के लिए प्रोटीन को 'सुपरफूड' माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस प्रोटीन को आप अपनी सेहत का दोस्त समझ रहे हैं, वो कम उम्र में ही आपके दिल का दुश्मन बन सकता है? जी हां, डॉक्टर्स अब इस बात को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? पहले हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन आजकल 20, 30 और 40 की उम्र के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके कई कारण हैं, जिनमें तनाव, खराब लाइफस्टाइल, धूम्रपान, शराब, मोटापा और अनहेल्दी खान-पान शामिल हैं, लेकिन अब एक नया और चौंकाने वाला कारण सामने आ रहा है- जरूरत से ज्यादा प्रोटीन का सेवन, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में। हाई प्रोटीन डाइट और दिल का कनेक्शन डॉक्टर्स और शोधकर्ताओं का मानना है कि हाई प्रोटीन, खासकर एनिमल प्रोटीन और कुछ प्रोटीन सप्लीमेंट्स का ज्यादा सेवन, दिल की सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।     कोलेस्ट्रॉल में बढ़ोतरी: कुछ एनिमल प्रोटीन स्रोतों में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है, जिससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है। यह कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है, जिससे खून का बहाव रुकता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।     किडनी पर दबाव: प्रोटीन को पचाने के लिए किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अगर आप लंबे समय तक अत्यधिक प्रोटीन का सेवन करते हैं, तो आपकी किडनी पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ सकता है, जिससे किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से दिल पर भी असर डाल सकती हैं। एसिडोसिस का खतरा: बहुत अधिक प्रोटीन डाइट शरीर में एसिड का स्तर बढ़ा सकती है। यह शरीर के pH संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें दिल की समस्याएं भी शामिल हैं।     प्रोटीन सप्लीमेंट्स का काला सच: जिम जाने वाले कई युवा बिना डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के प्रोटीन पाउडर का अत्यधिक सेवन करते हैं। कुछ रिसर्च बताती हैं कि बाजार में मिलने वाले कुछ प्रोटीन पाउडर और स्टेरॉयड दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। एक मामले में तो प्रोटीन सप्लीमेंट्स के ओवरडोज के कारण एक युवक का हार्ट फेल होने की नौबत आ गई थी। अचानक होने वाले हार्ट अटैक डॉक्टर के मुताबिक उन्होंने ऐसे कई 35 साल के 'फिट' लोगों का इलाज किया है जिन्हें हार्ट अटैक आया। उन्हें कोई लक्षण नहीं थे, कोई चेतावनी नहीं थी- बस एक टिक-टिक करता टाइम बम था जो कभी भी फट सकता था। यह हमें सिखाता है कि एथलेटिक होना हमेशा हेल्दी होने का सबूत नहीं है। कम बॉडी फैट का मतलब कम जोखिम नहीं है और एक सिक्स-पैक आपको प्लाक रप्चर (धमनी में जमा प्लाक का फटना) से नहीं बचा सकता है। अगर आपकी डाइट आपकी ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत (एंडोथेलियम) को नुकसान पहुंचा रही है, तो आपके बाइसेप्स कितने भी मजबूत क्यों न हों, इसका कोई फायदा नहीं। क्या है सेहत का असली मंत्र? असली सेहत चरम पर जाने में नहीं है, बल्कि यह संतुलन में है। अपनी डाइट में प्लांट-बेस्ड डाइट को शामिल करना और नियमित रूप से ब्लड टे्स्ट कराना बहुत जरूरी है। आपके टेस्ट के रिजल्ट्स ही बताएंगे कि आपका शरीर अंदर से कितना हेल्दी है। इसलिए, सिर्फ बाहर से फिट दिखने के बजाय, अपनी हार्ट हेल्थ पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। एक बैलेंस डाइट ही आपको लंबी और हेल्दी जिंदगी दे सकती है।  

शाम के ये 5 काम बना सकते हैं आपकी किस्मत, आज़माकर देखिए फर्क!

एक बेहतरीन, खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी की चाहत सभी को होती है और इसी चाहत को पूरा करने के लिए हम दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। पर अक्सर शाम का समय टीवी देखने, फोन पर समय बिताने या थक कर कुछ ना करने में ही बेकार चला जाता है। लेकिन अगर आप हर शाम 5 छोटे-छोटे कामों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो ये आपकी सोच, स्वास्थ्य और जीवनशैली में मैजिकल बदलाव ला सकती हैं। ये आदतें ना केवल आपको एक अच्छा इंसान बनाएंगी बल्कि आपको जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद भी करेंगी। तो चलिए जानते हैं उन 5 कामों के बारे में जो आपकी शाम को बना सकती है आपकी सफलता की सीढ़ी। आत्ममंथन से करें दिनभर की समीक्षा हर शाम 10-15 मिनट शांत बैठकर यह जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। आपने पूरे दिन क्या अच्छा किया, आपसे कौन सी गलतियां हुईं और उनसे आपको क्या सीख मिली। जब आप शांत मन से बैठकर आत्ममंथन करेंगे, तो इससे आपको अपनी कमियों और खूबियों के बारे में पता चलेगा। इससे आप आत्म-जागरूक बन पाएंगे और अपनी गलतियों को सुधार कर, जीवन में पॉजिटिविटी के साथ आगे बढ़ेंगे। अगली सुबह की करें तैयारी जीवन में आगे बढ़ाने के लिए हर छोटे बड़े काम की बेहतर प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। फिर वो चाहे नए दिन की शुरुआत की ही प्लानिंग क्यों ना हो। इसलिए रात में ही अगले दिन की टू-डू लिस्ट बना लें। इससे सुबह आपका समय बर्बाद नहीं होगा और आप साफ लक्ष्य के साथ दिन की शुरुआत कर पाएंगे। यह आदत आपके काम में फोकस और प्रोडक्टिविटी दोनों बढ़ाएगी। शाम को लें डिजिटल डिटॉक्स आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस के ज्यादातर काम लैपटॉप और मोबाइल में ही होते है। काम ना होने पर भी लोग मोबाइल का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनसे थोड़ी दूरी बनाना जरूरी है। ऐसे में शाम के वक्त आप डिजिटल वर्ल्ड से दूरी बनाकर रखने का प्रयास करें। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से दूरी बना लें। इसकी जगह ध्यान करें या परिवार से बात करें। इससे नींद भी अच्छी आएगी और मानसिक शांति भी बढ़ेगी। शरीर के लिए निकालें समय दिन भर के काम के बाद शरीर को भी आराम की जरूरत होती है। ऐसे में शाम के समय थोड़ा वक्त अपने शरीर के लिए निकालें। इस समय आप हल्की स्ट्रेचिंग, योग या वॉक कर सकते हैं। इससे शरीर की थकान दूर होती है और नींद भी अच्छी आती है। और जब नींद अच्छी आती है तो अगला दिन भी ताजगी के साथ शुरू होगा। किताबों को भी दें समय दिमाग को शांत करने के लिए बुक रीडिंग से बढ़िया कोई ऑप्शन नहीं है। इसलिए रोज रात सोने से पहले थोड़ी देर तक अपनी मनपसंद किताब पढ़ें। इससे आपको मानसिक सुकून मिलेगा, जिससे आपका फोकस बढ़ेगा। इसलिए फिक्शन या नॉन फिक्शन जिस भी फील्ड में आपकी रुचि है, सोने से पहले उससे जुड़ी किताबें पढ़ें।  

iPhone 17 Pro का कैमरा पूरे फोन को ढक देगा? Xiaomi से लिया आइडिया?

नई दिल्ली iPhone 17 Pro के लॉन्च में अभी समय है लेकिन यह अभी से चर्चा में बना हुआ है। इसकी लीक हुई तस्वीरें पहले ही काफी सुर्खियों में रह चुकी हैं। इसकी वजह है इसका बोल्ड और नया डिजाइन। iPhone 17 Pro के प्रोटोटाइप में ज्यादा गोल किनारे देखने को मिले हैं। इसका ये लुक एंड्रॉयड यूजर्स को ज्यादा पसंद आ सकता है। अगर यह डिजाइन असल में आया, तो शायद यह एंड्रॉयड कंपनियों को भी सपाट किनारों (Flat Edges) को छोड़कर ज्यादा आरामदायक डिजाइन अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। Xiaomi Mi 11 Ultra से मिलता-जुलता कैमरा डिजाइन iPhone 17 Pro में सबसे बड़ा बदलाव फोन में पीछे की तरफ कैमरा डिजाइन में देखने को मिल सकता है। फोन में बड़ा और ज्यादा चौड़ाई वाला कैमरा आइलैंड दिया जा सकता है। यह कुछ-कुछ Xiaomi Mi 11 Ultra जैसा दिखता है। कैमरे का डिजाइन भले ही बड़ा हो गया है, लेकिन असल कैमरे की जगह में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। इसमें तीन लेंस वाला सिस्टम ही मिलने वाला है, जिसमें 48MP का मेन सेंसर, 48MP का अल्ट्रावाइड और 5x ऑप्टिकल जूम वाला 12MP का टेलीफोटो लेंस शामिल होगा। एल्यूमीनियम फ्रेम और ज्यादा वजन Apple के एनालिस्ट जेफ पु के मुताबिक बीच का फ्रेम अब एल्यूमीनियम का बना होगा। दिलचस्प बात यह है कि iPhone 17 Pro मॉडल के ज्यादा भारी होने की अफवाह है, जबकि आज के समय में आने वाले ज्यादातर फोन्स पतले और हल्के आ रहे हैं। शायद यही वजह है कि Apple प्रीमियम और ज्यादा टिकाऊ मेटल से दूर हट रहा है। आमतौर पर लोगों को भी पतले और हल्के फोन्स पसंद आते हैं। Apple लोगो की बदली हुई जगह Apple का लोगो भी जो फोन के पीछे होता था वह अब नीचे खिसका दिया गया है। यह एक छोटी सी बात है लेकिन इसे लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। iPhone 17 Pro Max में भी ज्यादातर यही फीचर्स हो सकते हैं, लेकिन उसकी स्क्रीन बड़ी होगी। क्या लोगों को पसंद आएगा डिजाइन? अपने चौंड़े कैमरा आइलैंड, नए मैटेरियल और बदली हुई लोगो की जगह के साथ iPhone 17 Pro ऐप्पल के हाल के सालों में किए गए सबसे बोल्ड विजुअल बदलावों में से एक होने वाला है। यूजर्स को यह बदलाव पसंद आते हैं या नहीं यह तो फोन लॉन्च होने के बाद ही पता चलेगा। हालांकि, ज्यादा जानकारी के लिए हमें सिंतबर में होने वाले Apple के फॉल लॉन्च इवेंट का इंतजार करना होगा।

डॉक्टरों की आंखें खुली की खुली रह गईं, जब पेट में मिले 36 साल पुराने जुड़वा भ्रूण

नई दिल्ली  चिकित्सा विज्ञान में कभी-कभी ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आते हैं जो डॉक्टरों को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ और हैरान करने वाला मामला नागपुर के संजू भगत नामक व्यक्ति से जुड़ा है, जो 36 साल तक अपने पेट में एक अधूरे जुड़वा भ्रूण के साथ जीवित रहा। यह मेडिकल स्थिति 'फीटस इन फीटू' (Fetus in Fetu) कहलाती है। बचपन से पेट दिखता था फूला हुआ संजू भगत का पेट बचपन से ही सामान्य बच्चों की तुलना में कुछ ज्यादा फूला हुआ था। परिवार वालों ने इसे साधारण मोटापा समझ कर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जैसे-जैसे संजू की उम्र बढ़ती गई, उनका पेट असामान्य रूप से बढ़ता गया। स्थिति इतनी अजीब हो गई कि लोग उन्हें मजाक में 'प्रेग्नेंट आदमी' कहकर बुलाने लगे।   1999 में बिगड़ी तबीयत, पहुंचना पड़ा अस्पताल करीब 1999 के आसपास, संजू की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनका बढ़ता हुआ पेट डायाफ्राम पर दबाव डालने लगा, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। जब स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हुई, तो उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।   ऑपरेशन में निकला इंसानी भ्रूण, डॉक्टर रह गए दंग अस्पताल में डॉक्टरों को शुरू में लगा कि संजू के पेट में कोई बड़ा ट्यूमर है। डॉक्टर अजय मेहता और उनकी टीम ने ऑपरेशन का फैसला किया। लेकिन जैसे ही उन्होंने सर्जरी शुरू की, नजारा देखकर सब हैरान रह गए। पेट में ट्यूमर नहीं, बल्कि एक अधूरा मानव भ्रूण मौजूद था। डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान हड्डियां, बाल, जबड़ा और अन्य अंग दिखाई दिए। यह सब देखकर मेडिकल टीम भी हैरान रह गई। क्या होता है फीटस इन फीटू? 'Fetus in Fetu' एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें गर्भ के दौरान एक जुड़वा भ्रूण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा भ्रूण अधूरा रह जाता है और पहले भ्रूण के शरीर के अंदर ही विकसित होता रहता है। यह अधूरा भ्रूण अक्सर पेट या शरीर के किसी हिस्से में पाया जाता है और विकसित भ्रूण के शरीर से ही रक्त आपूर्ति प्राप्त करता है। हालांकि, इसका अपना मस्तिष्क, दिल या अन्य महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। सफल ऑपरेशन के बाद मिली राहत संजू भगत का यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। सर्जरी के बाद उनका पेट सामान्य हुआ और उन्हें राहत मिली। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक बेहद दुर्लभ और चिकित्सा विज्ञान के लिए अध्ययन योग्य केस था।

iPhone और Apple Watch से मिली प्रेग्नेंसी की जानकारी, Apple की नई AI टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी दिनों-दिन आगे बढ़ रही है। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काफी चलन में है। ऐसा तय माना जा रहा है कि भविष्य में एआई का खूब इस्तेमाल किया जाएगा। कई कंपनियों ने एआई का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। अभी तक AI का इस्तेमाल बीमारियों का पता लगाने, बीमारियों का इलाज करने या पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए किया जाता है। आने वाले वक्‍त में एआई का इस्तेमाल प्रेग्‍नेंसी का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा। दुनिया की जानी मानी कंपनी Apple ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। iPhone और Apple Watch से पता चलेगी प्रेग्नेंसी ऐपल के प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, iPad, Apple Watch आदि को सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स माना जाता है। इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इन्हें दूसरे डिवाइस से अलग बनाते हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक Apple ने एक कमाल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है जो अब iPhone और Apple Watch से मिली जानकारी (व्यवहारिक डेटा) का इस्तेमाल करके 92% सटीकता के साथ प्रेग्नेंसी का पता लगा सकता है। कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी? इस रिसर्च का नाम "Beyond Sensor Data: Foundation Models of Behavioral Data from Wearables Improve Health Predictions" है। इस रिसर्च में बताया गया है कि यह नया AI मॉडल कुछ खास स्वास्थ्य संकेतों जैसे नींद की गुणवत्ता, दिल की धड़कन में बदलाव (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी), चलने-फिरने की आदतें (मोबिलिटी) और अन्य महत्वपूर्ण बातों को पहचान सकता है। यह वियरेबल बिहेवियर मॉडल (WBM) प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को भी ट्रैक कर सकता है। इस नए फाउंडेशन मॉडल को बनाने के लिए 2.5 बिलियन घंटे से भी ज्यादा वियरेबल डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पिछले मॉडल्स से बेहतर या उनके बराबर काम कर सके। हालां‍क‍ि अभी यह पता नहीं है क‍ि यह टेक्‍नोलॉजी कबतक ड‍िवाइसेज में ले आएगी जाएगी। रिसर्च में क्या-क्या शामिल था? रिसर्चर्स ने 430 प्रेग्नेंट महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल करके एक प्रेग्नेंसी डेटासेट बनाया, जिनकी डिलीवरी नॉर्मल या सिजेरियन हुई थी। WBM ने ऐप्पल हेल्थ ऐप, हेल्थकिट और हार्ट रेट सेंसर डेटा (PPG) से जानकारी इकट्ठा की। रिसर्च में बताया गया है कि डेटा से पता चला कि बच्चे के जन्म से पहले के नौ महीने और डिलीवरी के बाद का एक महीना "पॉजिटिव" हफ्ते थे, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद ठीक होने के दौरान शारीरिक बदलावों से गुजर रही थीं। बाकी समय को "नेगेटिव" हफ्ते के तौर पर चिन्हित किया गया। नतीजों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने 24,000 से ज्यादा उन महिलाओं का डेटा भी इकट्ठा किया जिनकी उम्र 50 साल से कम थी और जो प्रेग्नेंट नहीं थीं।

एलन मस्क अपने नए एआई मॉडल की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे, बताया सबसे बेहतर

एलन मस्क अपने नए एआई मॉडल की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं। बता दें कि हाल ही में xAI के बड़े लैंगवेज मॉडल का एंडवांस वर्जन Grok 4 लॉन्च किया है। एलन मस्क आएदिन इसके बारे में काफी कुछ जानकारी देते रहते हैं। मस्क ने Grok 4 को Phd लेवल का बताया है। मस्क का कहना है कि यह सभी विषयों के लगभग सभी स्नातक छात्रों से भी ज्यादा स्मार्ट है। अब मस्क ने इसे लेकर एक और बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि ग्रोक 4 इंजीनियरिंग के जलिट सवालों को जवाब भी देता है। जी हां, मस्क की ओर से ग्रोक 4 को लेकर किए जा रहे लगातार दावे के चलते इसके प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। क्या सच में एआई इंजीनियरिंग के सावल हल कर सकता है। आइये, इस खबर के बारे में डिटेल में जानते हैं। इस काम में मदद करेगा ग्रोक  रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क ने अपने ऑफिशियल एक्स (ट्विटर) अकाउंट से ट्वीट करके बताया है कि मुश्किल, वास्तविक दुनिया के इंजीनियरिंग सवालों को हल करके नई राह दिखा रहा है, जिनके जवाब इंटरनेट या किताबों में कहीं नहीं मिलते। उन्होंने यह भी बताया कि यह और भी बेहतर होगा। इसका मतलब है कि अब एलन मस्क का एआई मॉडल इंजीनियरिंग सवालों का भी आंसर दे पाएगा। अगर ऐसा हुआ तो यह इंजीनियरिंग छात्रों के लिए अच्छा हो सकता है। एलन मस्क पहले भी कर चुके कई दावे ऐसा पहली बार नहीं है, जब मस्क ने ग्रोक 4 को लेकर इतने बड़े दावे किए हैं। उन्होंने इसके लॉन्च के दौरान कहा था कि यह इस साल के अंत तक नई टेक्नोलॉजी की खोज कर सकता है। इतना ही नहीं, उनका दावा है कि यह दो साल के भीतर नई फिजिक्स की भी खोज कर सकता है। बता दें कि इसे प्रीमियम के तहत लाया गया है। ग्रोक 4 का यूज करने के लिए यूजर्स को प्रो सब्सक्रिप्शन खरीदना होगा। मस्क ने अपने इस एआई मॉडल के बारे में एक और खास बात एक्स पर शेयर की थी। उन्होंने कहा था कि आप अपनी पूरी सोर्स कोड फाइल को grok.com पर क्वेरी एंट्री बॉक्स में कट और पेस्ट कर सकते हैं और Grok 4 इसे आपके लिए ठीक कर देगा! xAI में हर कोई यही करता है। कर्सर से बेहतर काम करता है। आगे आने वाले समय में देखने को मिलेगा कि एलन मस्क द्नारा ग्रोक को लेकर किए जा रहे दावे, किस हद तक सही होते हैं।

ऐंड्रॉयड यूजर्स के लिए 10 काम के ट्रिक्स

ऐंड्रॉयड एक ओपन प्लैटफॉर्म है, इसलिए इसमें कस्टमाइजेशन का काफी स्कोप रहता है। अपने फोन को पर्सनलाइज करने के अलावा भी कुछ ऐसे खास ट्रिक्स हैं जिनसे अपने फोन को आप साफ सुथरा रखकर उसकी बैटरी लाइफ का मैक्सिमम फायदा उठा सकते हैं। ये 10 ट्रिक्स हर ऐंड्रॉयड यूजर को मालूम होनी चाहिए। गूगल नाउ सेटअप करना गूगल नाउ को अपने पर्सनल असिस्टेंट की तरह समझें। गूगल ऐप खोलें, गेट गूगल नाउ पर टैप करें और अपने प्रेफरेंस भर दें। अब आप गूगल नाउ को अपने फेवरिट स्टॉक्स, स्पोर्ट्स टीम्स और दूसरी चीजें बताकर उनसे संबंधित नोटिफिकेशन्स पा सकते हैं। आप गूगलल मैप्स के लिए गूगल नाउ को यह भी बता सकते हैं कि आप किस वाहन से सफर करना पसंद करते हैं, मसलन कार, बस, मेट्रो इत्यादि। लॉन्चर और लॉक स्क्रीन रिप्लेसमेंट्स का इस्तेमाल करें एक ही तरह का वेदर विजेट देखते-देखते परेशान हो गए हैं? आपको बता दें कि आप गूगल प्ले स्टोर से ऐसे फ्री ऐप्स डाउनलोड कर सकते हैं जिनसे आप अपने ऐंड्रॉयड फोन का पूरा इंटरफेस बदल सकते हैं। पावर सेंविग मोड सेटिंग्स मेन्यू पर जाएंग और पावर सेविंग मोड को ऑन कर लें। इससे बैटरी काफी हद तक बचती है। कुछ फोन्स में हाई लेवल, बैटरी सेविंग मोड भी होता है। उदाहरण के लिए, सैमसंग गैलक्सी ै6 के अल्ट्रा पावर सेविंग मोड से आप कॉल और मेसेज कर सकते हैं, इंटरनेट ब्राउज कर सकते हैं। सभी ऐंड्रॉयड फोन्स में बैटरी-सेवर हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन अधिकतर में होता है। एक एक्स्ट्रा बैटरी रखें गौर कीजिएगा अकसर फोन्स की बैटरी गलत टाइम पर बंद हो जाती है। वहीं जाकर जहां चार्ज करने की सुविधा हो ही न। कई ऐंड्रॉयड फोन्स की बैटरी रिमूवेबल होती है। ऐसे में आप एक अलग बैटरी खरीदकर मुश्किल वक्त के लिए रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बैटरी रिप्लेस कर सकते हैं। अब तो खैर पावर बैंक्स भी ऐसी मुश्किल घड़ी से आपको उबार सकते हैं। गूगल क्रोम साइन इन करें अगर आप अपने फोन में मौजूद गूगल क्रोम ब्राउजर पर अपने गूगल अकाउंट में साइन-इन कर लेते हैं तो आपके बुकमार्क्स और प्रेफरेंस खुद-ब-खुद सेव होने लगेंगे। ऐप्स को फोल्डर्स में ऑर्गनाइज कर लें आप अपने ऐप्स को अलग-अलग कैटिगरी मे रखने के लिए फोल्डर्स क्रिएट कर सकते हैं। इससे बिखराव कम होता है और जल्दबाजी में ढूंढने पर ऐप जल्दी मिल जाता है। फोल्डर क्रिएट करने के लिए एक ऐप को प्रेस कर होल्ड करें और उसे खींचकर ऊपर बाईं तरफ क्रिएट फोल्डर ऑप्शन पर ले जाएं। कुछ फोन्स में आप आईओएस की तरह एक ऐप पर दूसरे ऐप को ड्रैग कर ड्रॉप कर सकते हैं। फोल्डर खुद-ब-खुद बन जाएगा। थर्ड पार्टी कीबोर्ड यूज करें कई बार स्वाइप करना टाइप करने से आसान लगता है। जरूरी नहीं कि आप सिर्फ गूगल के कीबोर्ड का ही इस्तेमाल करें, कई सारे कीबोर्ड ऐप्स हैं जिन्हें गूगल प्ले स्टोर से चुना जा सकता है। मसलन, स्वायप के जरिये आप टाइप करने की जगह लेटर्स को स्वाइप कर लिख सकते हैं। क्रोम में बैंडविड्थ मैनेजमेंट अजस्ट करें आप क्रोम में रिड्यूस डेटा यूजेज ऑप्शन ऑन कर सकते हैं जिससे बेकार का वाइटस्पेस हटाकर क्रोम छोटे फॉर्मैट में तस्वीरें ट्रांसलेट कर देता है। इससे ब्राउजिंग के वक्त काफी डेटा बचता है। डेटा सेफ रखने के लिए गूगल ऑथेंटिकेटर गूगल ऑथेंटिकेटर आपको आपके गूगल अकाउंट के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन सिक्यॉरिटी देताहै। ताकि, जब भी आप लॉग इन करें, आपको ऐप द्वारा जेनरेट किया हुआ एक कोड आपके पासवर्ड के साथ नजर आए। इससे अजनबी आपके अकाउंट में लॉग इन नहीं कर सकेंगे। डिफॉल्ट ऐप्स बदलें सेटिंग्स में नेविगेट कर ऑल पर जाएं और क्लियर डिफॉल्ट्स को प्रेस करें। सभी डिफॉल्ट सेटिंग्स और ऐप्स हट जाएंगे। इसके बाद आप अपने फेवरिट ऐप्स को अपनी सहूलियत के हिसाब से सेटअप कर सकते हैं।  

बचत के साथ खरीदारी में ही है समझदारी

शॉपिंग करने का क्रेज है, तो थोड़ा प्लान करके चलने से इसका मजा और भी बढ़ जाएगा। आखिर इस तरह कुछ बचत होगी और आपकी पसंद का सामान भी आएगा। जानते हैं इसी से जुड़े कुछ टिप्स… अगर आपको शॉपिंग करने का क्रेज है, तो आपका मन सेल सीजन में और भी उतावला हो जाता होगा। लेकिन शॉपिंग पर जाने से पहले उन बातों का जरूर ध्यान रखें, जिनसे सेविंग भी हो जाए और खरीदारी भी बढ़िया हो। सेल का इंतजार करें अगर आपको एक साथ ज्यादा चीजें खरीदने की आदत है, तो बेहतर होगा कि सेल सीजन का वेट करें। जब तक सेल ना लगे, तब तक मॉल में शॉपिंग करना बिल्कुल अवॉयड करें। यहां आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। शॉपिंग का अलग अकाउंट जब भी आपको पे चेक मिले, तो इसे दो अकाउंट्स में डिवाइड करें। एक को अपने बिल्स और जरूरतों के लिए रखें और दूसरे को शॉपिंग के लिए। दूसरे अकाउंट से शॉपिंग वाला दिन आने तक कोई ट्रांजैक्शन ना करें। फिजूल शॉपिंग से बचें ऐसा कुछ भी नहीं खरीदें, जिसकी जरूरत आपको तुरंत न हो। कभी तो इसकी जरूरत होगी वाली सोच रखेंगे, तो फालतू की शॉपिंग ज्यादा होगी। इस पैसे को बचाएं और अपनी जरूरत की चीजों पर खर्च करें। खर्चों का हिसाब-किताब अपने खर्चों का ट्रैक रखना बेहद जरूरी है। बेहतर है कि अपनी डिजिटल डायरी या मोबाइल फोन में नोट बनाकर आप रोजाना होने वाले खर्च का ध्यान रखें। हर महीने के अंत में चेक करें कि कहां सेविंग हो सकती थी। अगर हो सके, तो महीने की बजाय हफ्ते का हिसाब रखें। सेविंग कर दें शुरू आमतौर पर सेल जनवरी और अगस्त के आसपास लगती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एक-दो महीने पहले ही सेविंग्स करना शुरू कर दें। मॉनसून में भी बड़ी-बड़ी सेल लगा करती हैं। ऐसे में आप सेल शुरू होने से एक महीने पहले ही सेविंग शुरू कर दें। एक बार करेंगे, तो आपको खुद ही इसमें मजा आने लगेगा। तो मॉनसून सेल एन्जॉय करने की तैयारी अभी से शुरू कर दें!  

दमे की बीमारी में एलर्जी से बचना जरुरी

महानगरों में बढ़ते प्रदूषण ने स्वच्छ हवा, पानी, रोशनी और हरियाली को किताबी बातें बना दिया है। प्रदूषण के कारण ही सांस की बीमारी एक आम समस्या बन चुकी है। बड़ी संख्या में पेड़-पौधों के कटाव से वातावरण दूषित होता है। सांसों की एलर्जी अर्थात दमा भी इसी दूषित वातावरण की ही देन है। आज न केवल बड़े बल्कि छोटे-छोटे बच्चे और नवजात शिशु भी सांस की घुटन से राहत पाने के लिए अपने साथ नेबुलाइजर रखने को विवश हैं। दमा के बारे में अलग-अलग डॉक्टर अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ डॉक्टरों के अनुसार यह श्वास का स्नायुविक रोग रेसपीरेटरी न्यूरोसिस है तो कुछ कहते हैं कि यह रोग रक्त में एलर्जी और टॉक्सिन्स उत्पन्न हो जाने से होता है। जो वायु हम ग्रहण करते हैं वह नाक, गला, फैंरिक्स और वायुनली से होते हुए श्वासनली के द्वारा फेफड़ों में पहुंचती है और जब हम सांस छोड़ते हैं तो इसी प्रकार वायु शरीर से बाहर निकल जाती है। वायु का यह स्वतंत्र ग्रहण और निष्कासन ही हमारी श्वसन क्रिया का आधार है। दमा को एलर्जी का ही एक प्रकार माना जाता है। कोई भी ऐसा पदार्थ जो शरीर के लिए हानिकारक हो, एलर्जी कहलाता है। जब यह पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो शरीर इसका विरोध करता है। जब एलर्जीकारक हमारी श्वसन नली में प्रवेश करता है तो फेफड़ों के बचाव के लिए हमारी श्वसन व्यवस्था उसे बीच में ही रोकने का प्रयास करती है, इससे सांस लेने में कष्ट होता है। जो एलर्जी पहले से ही सिस्टम में प्रवेश कर चुकी होती है उससे बलगम और खांसी होती है और गले में सूजन आ जाती है और उसी से श्वास नली में रुकावट आ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है। इस स्थिति के बार-बार उत्पन्न होने की दशा में इसे दमा की संज्ञा दी जाती है। दमा कोई बीमारी नहीं अपितु एक एलर्जी तथा वंशानुगत रोग है। सांस लेने में तकलीफ होना, दम घुटना, श्वास लेते समय सीटी जैसी आवाज होना, अक्सर छाती का दबाव या भारीपन महसूस होना, खांसते समय पसीना आना, चेहरे पर पीलापन, हाथ-पैर ठंडे रहना व्यायाम आदि करने से सांस फूल जाना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं जिसके द्वारा दमा की पहचान संभव है। लगातार या बार-बार खांसी हो या दो सप्ताह से भी अधिक समय से खांसी ठीक न हो रही हो तो भी तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना उचित होता है अन्यथा आगे चलकर आपको दमे का सामना करना पड़ सकता है। दमे का दौरा अचानक और वह भी प्रायः मध्यरात्रि के बाद ही होता है। रक्त के प्लाज्मा कोर्टिसोल लेवल में प्रतिकूल परिवर्तन आने से फेफड़ों की नलिकाओं में ऐंठन पैदा हो जाती है और रोगी को दमे का दौरा पड़ जाता है। दौरे के समय रोगी को लेटने में कठिनाई होती है इसलिए वह बैठकर ही अपना समय व्यतीत करता है। दमा के उपचार के लिए ज्यादातर इन्हेलर दवाएं दी जाती हैं। दवा देने की अन्य विधियां भी हैं जैसे पंप के पाउडर सूंघने देना और सोल्यूशन नेबुलाइजर में दवा का धुआं बनाकर उस धुएं को इनहेल करने देना। इसके अतिरिक्त गोलियों व इंजेक्शन के रूप में भी दवा दी जाती है। दवाइयों के अतिरिक्त कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर भी दमे को सुरक्षित व प्रभावशाली ढंग से नियंत्रण में रखा जा सकता है। जिन्हें धूल से एलर्जी है उनके लिए आवश्यक है कि वे इससे बचें इसके लिए घर के वातावरण को साफ-सुथरा रखें। घरों में मोटे पर्दे, गलीचे आदि न लगाएं। ऐसे में सफाई के लिए झाडू के स्थान पर वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें क्योंकि यह धूल के महीन से महीन कण खींच लेता है। फर्श की सफाई गीले कपड़े से करें। पालतू जानवर न पालें और तेज सुंगध से बचें आदि। विभिन्न रोगियों में एलर्जीकारक तत्व अलग अलग होते हैं। जो विभिन्न क्रियाओं से उनके भीतर प्रवेश कर सकते हैं जैसे धारा के पास रहना, आटा छानना गेहूं साफ करना आदि। इनसे भी दमे का दौरा पड़ सकता है। इसी प्रकार फूड एलर्जी का ध्यान रखना जरूरी है। खट्टी चीजें, तले हुए पदार्थ व दही न लें। जिन खाद्य पदार्थों में रंग का प्रयोग किया गया हो उनसे बचें। किसी भी दवा का लंबे समय तक सेवन करते रहना भी नुकसानदायक हो सकता है। विभिन्न रोगियों पर किए परीक्षणों से डॉक्टरों ने यह निष्कर्ष भी निकाला है कि कई बार क्रोध, चिन्ता, डर, उत्तेजना या अधिक मेहनत करने के कारण हुई थकावट भी इस रोग को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि ऐसी स्थिति से बचा जाए। प्राकृतिक चिकित्सा के पक्षधरों का मानना है कि दोषपूर्ण खान-पान रहन-सहन, बढ़ती भौतिक सुख-सुविधाएं और घटता हुआ शारीरिक श्रम और व्यायाम से जी चुराने की प्रवृत्ति ही दमे के लिए उत्तरदायी है। जलनेति, सुत्रनेति और कुंजल आदि क्रियाओं का दमे के उपचार में महत्वपूर्ण स्थान है। जलनेति और सूत्रनेति करने से नासामार्ग के अवरोध दूर हो जाते हैं और रोगी को सांस लेने में सुविधा होती है। ऊपरी श्वसन मार्ग को साफ करने के लिए ये क्रियाएं बहुत उपयोग होती हैं। ये क्रियाएं श्वसन मार्ग के संक्रमण को न्यूनतम करने का प्रयास करती हैं। दूसरी क्रिया कुंजल है। इस क्रिया द्वारा सभी अनपचे खाद्य पदार्थों को रोगी के शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। प्रायः इस क्रिया के बाद अम्लीय गंध लिए हरा-पीला सा म्यूक्स जैसा स्राव निकलता है। इस क्रिया से भी रोगी को आराम मिलता है। इनके अतिरिक्त गहरी सांस लेना और प्राणायाम ऐसी क्रियाएं हैं जो दमा के रोगियों के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। दमा के रोगियों को अपने आहार तथा सांस में कठिनाई का रिकार्ड रखना चाहिए। एक या दो मास इस तरह का रिकार्ड रखने पर रोगी की यह ज्ञात हो जाता है कि कौन सी चीजें खाने पर उसकी तकलीफ बढ़ती है। इससे रोगी के आहार से आसानी से एलर्जीकारक चीजों को निकाला जा सकता है। दमा के रोगी को तरोताजा अहसास व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम जैसे जॉगिंग, स्वीमिंग तथा योगासन आदि करने चाहिए। तैरने से श्वसन क्षमता में वृद्धि होती है। खुली हवा में घूमना-फिरना भी लाभकारी है इससे ताजी हवा फेफड़ों में पहुंचती है। हालांकि … Read more