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नमो भारत कॉरिडोर से दिल्ली से पानीपत-करनाल 1 घंटे में, 12 स्टेशन बनेंगे सराय काले खां से हरियाणा तक

दिल्ली/पानीपत

दिल्ली-NCR में हाईस्पीड कनेक्टिविटी का दायरा तेजी से बढ़ने वाला है। सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक नमो भारत कॉरिडोर के लगभग तैयार होने के बाद अब फोकस दो नए बड़े रूट पर है। इसमें दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-एसएनबी-अलवर रूट शामिल हैं। इनमें से दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर को राजधानी और हरियाणा के बीच गेमचेंजर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
सराय काले खां से करनाल तक दौड़ेगी नमो भारत

यह रैपिड रेल कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर हरियाणा के करनाल (मधुबन बाईपास) तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई करीब 136.3 किलोमीटर प्रस्तावित है। इस रूट का ट्रैक नेशनल हाईवे-44 के समानांतर बिछाया जाएगा।
दिल्ली में बनेंगे 5 स्टेशन

इस कॉरिडोर में दिल्ली में 5 स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें सराय काले खां, इंद्रप्रस्थ, कश्मीरी गेट, बुराड़ी, मुकुंदपुर, नरेला शामिल हैं।
हरियाणा में 7 स्टेशन

इस प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा में 7 स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें कुंडली, सोनीपत, मुरथल,गन्नौर, समालखा, पानीपत, करनाल (मधुबन-करनाल बाईपास)। इस कॉरिडोर पर करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। फंडिंग में केंद्र और हरियाणा सरकार के साथ एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान की वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी संभव है।
आधे से भी कम समय में पूरा होगा

अभी दिल्ली से करनाल पहुंचने में सड़क मार्ग से साढ़े तीन से चार घंटे तक लग जाते हैं। ट्रैफिक की वजह से पानीपत का सफर भी ढाई घंटे तक खिंच जाता है। लेकिन नमो भारत कॉरिडोर बनने के बाद दिल्ली से करनाल मात्र करीब 90 मिनट में पहुंच सकेंगे। इसके अलावा दिल्ली से पानीपत लगभग 60 मिनट में पहुंच सकेंगे।
प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, अब काम की तैयारी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नवंबर 2025 में दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम के लिए फंड को हरी झंडी दी थी। प्रोजेक्ट को लागू करने वाली एजेंसी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने नरेला से सोनीपत के बीच बिजली लाइनों और अन्य अवरोधों को हटाने के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। ऐसे संकेत हैं कि जून-जुलाई 2026 से काम शुरू हो सकता है।
रूट और स्टेशन पर खींचतान

शुरुआत में कॉरिडोर कश्मीरी गेट से प्रस्तावित था, बाद में इसे सराय काले खां तक बढ़ाया गया। नरेला और कुंडली के पास स्टेशन लोकेशन को लेकर कई बार सर्वे में बदलाव करना पड़ा। लागत साझा करने को लेकर केंद्र और हरियाणा के बीच विस्तृत मंथन चला। पहले दिल्ली सरकार की ओर से वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं थी, जिससे प्रक्रिया धीमी रही।
नेशनल हाईवे-44 का विस्तार

कॉरिडोर नेशनल हाईवे-44 के साथ-साथ विकसित होना है। इसी दौरान हाईवे को 8 से 12 लेन तक चौड़ा करने का काम चल रहा था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एनसीआरटीसी के बीच समन्वय के बाद अब स्थिति स्पष्ट हुई है। इस हाईवे का बड़ा हिस्सा तैयार होने से रैपिड रेल के पिलर खड़े करना आसान होगा।

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