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फिलीपींस में भीषण तूफान से तबाही, 25 मृत; राहत और बचाव जारी

मनीला

फिलीपींस में पिछले एक हफ्ते से जारी मूसलधार बारिश और भूस्खलन के बीच अब ट्रॉपिकल तूफान 'को-मे' ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे फिलीपींस के लिए यह तूफान एक और बड़ा झटका साबित हुआ है। ऐसे में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका अहम बन जाती है ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित और आवश्यक मदद मिल सके।

इस खतरनाक तूफान के कारण अब तक कम से कम 25 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 2.78 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। तूफान शुक्रवार को देश के उत्तरी पहाड़ी इलाकों से गुजरा।

इतनी रफ्तार से आया तूफान
'को-मे' नाम का यह तूफान गुरुवार की रात पांगासिनान प्रांत के अग्नो कस्बे में 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया। इसके झोंकों की गति 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। शुक्रवार सुबह तक इसकी ताकत थोड़ी कम हुई और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूर्वोत्तर दिशा की ओर बढ़ता दिखा।

मॉनसून को भी किया और भयानक
तूफान ने देश में पहले से ही चल रही मौसमी बारिश को और ज्यादा तीव्र बना दिया। पिछले एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में बाढ़, पेड़ों के गिरने, भूस्खलन और बिजली के झटकों से लोगों की जान गई है। फिलहाल आठ लोग लापता हैं। हालांकि, तूफान 'को-मे' से सीधे मौत की कोई पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

स्कूल बंद, 35 प्रांतों में क्लास सस्पेंड
सरकार ने राजधानी मनीला में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। लुजोन के मुख्य उत्तरी इलाके के 35 प्रांतों में कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। कम से कम 77 शहरों और कस्बों में 'आपातकाल' घोषित किया गया है, जिससे राहत फंड जल्दी मिल सके और जरूरी सामान जैसे चावल की कीमतें न बढ़ें।

278,000 लोगों का विस्थापन, सेना तैनात
सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, 2.78 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ और तूफान के कारण अपने घरों को छोड़ चुके हैं। इनमें से अधिकांश को आपातकालीन शेल्टर या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी। अब तक लगभग 3,000 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राहत और बचाव के लिए सेना, पुलिस, कोस्ट गार्ड, दमकल कर्मियों और स्थानीय वॉलंटियरों को तैनात किया गया है।

राष्ट्रपति की चेतावनी और अमेरिकी मदद का वादा
राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने व्हाइट हाउस यात्रा से लौटने के बाद राहत शिविरों का दौरा किया और लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। उन्होंने एक आपात बैठक में कहा कि अब जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाएं और ज्यादा और अनिश्चित होंगी। अमेरिकी सरकार ने राहत सामग्री और भोजन को दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए अपने सैन्य विमानों की मदद देने का वादा किया है।

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