चंडीगढ़.
पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पाद शुल्क (एक्साइज) संग्रह के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीते दिनों बताया कि विभाग ने 31 मार्च तक 11,782 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो तय लक्ष्य 11,200 करोड़ रुपये से 582 क207 खुदरा शराब समूहोंरोड़ रुपये अधिक है। इसे सरकार की नीतिगत सख्ती और पारदर्शी व्यवस्था का नतीजा माना जा रहा है।
चीमा ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्पाद शुल्क से मिलने वाला राजस्व लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2021-22 में जहां यह आंकड़ा 6,254.84 करोड़ रुपये था, वहीं अब बढ़कर 11,782 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि इस निरंतर बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य निर्धारित किया है।
लाइसेंस शुल्क से 10,520 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
मंत्री ने इस सफलता का श्रेय मजबूत उत्पाद शुल्क नीति, प्रभावी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और व्यापार-अनुकूल वातावरण को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता और नियमों के पालन को भी प्राथमिकता दी है, जिससे शराब कारोबार में स्थिरता आई है और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है। चीमा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई नई आबकारी नीति में लाइसेंस शुल्क से 10,520 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्ष के 9,877 करोड़ रुपये से अधिक है।
207 खुदरा शराब समूहों को लाइसेंस आवंटित
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 207 खुदरा शराब समूहों को नए वित्त वर्ष के लिए लाइसेंस आवंटित कर दिए गए हैं। यह नीति के प्रति कारोबारियों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा- “उत्पाद शुल्क नीति 2026-27 को लेकर समग्र प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। इससे राज्य के खजाने में लगातार राजस्व का प्रवाह बना रहेगा और शराब व्यापार में स्थिरता सुनिश्चित होगी।” सरकार का दावा है कि सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण राजस्व में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। आने वाले समय में भी विभाग इसी रणनीति पर काम करते हुए लक्ष्य से अधिक वसूली की दिशा में आगे बढ़ेगा।





