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‘जा रानी जा…’ – तीन बच्चों की मां की कोर्ट मैरिज में पति खुद बना गवाह, बिहार में अनोखा मामला

 हाजीपुर 
      
बिहार के वैशाली जिले से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. जहां रिश्तों की सीमाएं टूटती हैं, सोशल मीडिया पर प्यार की कहानी लिखी जाती है और अंत में ऐसा मोड़ आता है, जिसे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. यह मामला सिर्फ एक शादी या तलाक का नहीं बल्कि उस सच्चाई का आईना है, जिसे समाज अक्सर स्वीकार करने में हिचकता है.

रानी कुमारी की जिंदगी भी कभी बिल्कुल आम थी. वर्ष 2011 में उनकी शादी अहिरपुर निवासी कुंदन कुमार से कोर्ट मैरिज के जरिए हुई. कुंदन घर पर ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे. शादी के बाद धीरे-धीरे परिवार बढ़ा और दंपती तीन बच्चों के माता-पिता बने. करीब पांच साल पहले रानी की जिंदगी में कुछ ऐसा हुइा जिसने सब कुछ बदल दिया. फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए उसकी बातचीत अपने ही फुफेरे भाई गोबिंद कुमार से बढ़ने लगी. शुरुआत पारिवारिक हालचाल से हुई, फिर पुराने किस्से, फिर लंबी बातचीत और देखते-देखते भावनाएं गहराने लगीं. मोबाइल की छोटी-सी स्क्रीन पर शब्दों ने वह जगह बना ली, जो शायद रिश्तों में खाली होती जा रही थी. गोबिंद रानी की बातें सुनते थे, उन्हें समझता था कम से कम रानी को ऐसा महसूस होने लगा. यही एहसास धीरे-धीरे प्यार में बदल गया.

जब घर बार-बार छूटने लगा

इस रिश्ते का असर जल्द ही रानी के व्यवहार में दिखने लगा. वह कई बार पति और बच्चों को छोड़कर गोबिंद के पास चली गई. दो-तीन साल पहले वह अचानक घर से गायब हो गई थी. काफी प्रयासों के बाद उसे वापस लाया गया. उस समय कुंदन कुमार काम के सिलसिले में जम्मू में रहने लगा, लेकिन रानी वहां भी टिक नहीं पाईं. डेढ़ महीने पहले भी वही कहानी दोहराई गई. कुंदन जम्मू से उन्हें वापस आया, बच्चों का वास्ता दिया, परिवार की दुहाई दी लेकिन हर बार की तरह रानी का मन कहीं और था. 

कुंदन का टूटना और एक अनोखा फैसला

बार-बार पत्नी का घर छोड़ना, बच्चों का सवाल, समाज की बातें. इन सबके बीच कुंदन कुमार भीतर से टूट गया. वह समझ गया कि जबरदस्ती किसी को साथ नहीं रखा जा सकता. एक दिन उन्होंने वह फैसला लिया, जिसे सुनकर लोग आज भी हैरान हैं. कुंदन ने रानी से साफ कह दिया अगर तुम्हारी खुशी गोबिंद के साथ है, तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं. कुंदन ने न तो हंगामा किया, न ही कानूनी लड़ाई चुनी. उल्टा,  रानी और गोबिंद की कोर्ट मैरिज कराने का जिम्मा खुद उठा लिया.

कोर्ट मैरिज और पति बना गवाह

वैशाली कोर्ट में जब रानी कुमारी और गोबिंद कुमार ने शादी के कागजात पर हस्ताक्षर किए, तो वहां मौजूद लोगों के लिए सबसे चौंकाने वाला सीन था पति कुंदन कुमार का गवाह बनकर खड़ा होना. वही कुंदन, जिनके साथ रानी ने 14 साल पहले सात फेरे नहीं, बल्कि कोर्ट मैरिज की थी, आज उसी महिला को दूसरे पति के साथ विदा कर रहा था. कुंदन ने कहा कि वह अब थक चुका है. उन्होंने बच्चों के लिए खुद को मजबूत किया और रानी को आजाद कर दिया. 

गोबिंद का भरोसा और नई उम्मीद

शादी के बाद गोबिंद कुमार ने भरोसा जताया कि रानी अब उन्हें छोड़कर वापस नहीं जाएंगी. उन्होंने बताया कि दोनों के बीच लंबे समय से बातचीत होती रही है और हाल ही में फोन पर हुई बात के बाद उन्होंने साथ रहने का अंतिम निर्णय लिया.
गोबिंद का मानना है कि अब सब कुछ साफ है. कोई छुपाव नहीं, कोई अधूरा रिश्ता नहीं. वह इसे एक नई शुरुआत मानते हैं.

रानी की बात: मैं खुश नहीं थी

रानी कुमारी ने भी अपना पक्ष रखा. साफ कहा कि वह पहले पति के साथ खुश नहीं थीं. उनके अनुसार कुंदन के साथ रहना उनके लिए मानसिक रूप से तकलीफदेह था. यह भी स्पष्ट किया कि उनके तीनों बच्चे कुंदन के साथ ही रहेंगे और वह इस फैसले से संतुष्ट हैं. रानी का कहना है कि गोबिंद के साथ उन्हें समझ और अपनापन मिला, जिसकी कमी वह अपने वैवाहिक जीवन में महसूस कर रही थीं.

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