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पंजाब हुआ महंगाई वाले टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर

चंडीगढ़.

कर्ज के बोझ में डूबे और महंगाई की मार झेल रहे पंजाब के लिए नया साल अच्छी खबर लाया है। सूबा उन टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया है जो महंगाई की सबसे अधिक मार झेल रहे हैं। राज्य की महंगाई दर कम होकर 1.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार का जीएसटी दरों में कटौती करना प्रदेश के लिए राहत लेकर आया है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में महंगाई दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि जरूरी सामान की कीमतें में कमी आई है। लोगों की जेब पर बोझ भी कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 में सूबे की महंगाई दर 1.82 प्रतिशत तक दर्ज की गई है जबकि पिछले काफी महीनों से नवंबर 2025 तक पंजाब उन पांच राज्यों में शामिल था जहां महंगाई दर सबसे अधिक थी।

राष्ट्रीय स्तर पर भी महंगाई दर 1.33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं 9.49% महंगाई दर के साथ केरल टॉप पर है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक की महंगाई दर 2.99%, आंध्र प्रदेश 2.71%, तमिलनाडु 2.67% और जम्मू एंड कश्मीर की 2.26% है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती से पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार को 1786 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी का कुल राजस्व वर्ष में बढ़कर 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्रदेश पर कर्ज के बोझ के बीच यह अच्छे संकेत हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य पर अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ था जो 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक 4.17 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी आई कमी
इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी कमी आई है। पंजाब में नवंबर 2025 के दौरान सीपीआई 190.8 दर्ज किया गया था, जो दिसंबर 2025 में कम होकर 190.4 हो गया है। अनुमान है और आगे सीपीआई में और कमी हो सकती है। सबसे अधिक सीपीआई केरल में 221.6 दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। नवंबर में यह 197.9 था, जो दिसंबर में बढ़कर 198 हो गया है।

सीपीआई एक तरह का पैमाना है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी समेत अन्य सेवाएं शामिल होती हैं।

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