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आगरा में बनेगा हाई-टेक स्पोर्ट्स कॉलेज, अब मंडल में ही निखरेंगी खेल प्रतिभाएं

– योगी सरकार ने मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए मंजूर किए 80 करोड़ रुपये   – पढ़ाई के साथ मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग, 2036 के ओलंपिक के लिए तैयार होंगे खिलाड़ी   आगरा, उत्तर प्रदेश को खेलों की दुनिया में 'नंबर वन' बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। बजट 2026-27 में सरकार ने खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। इसी कड़ी में आगरा समेत प्रदेश के 10 मंडलों में नए स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जाएंगे। इसके निर्माण के लिए सरकार ने 80 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। अब ताजनगरी और आसपास के खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एत्मादपुर में 50 हेक्टेयर जमीन, आठ करोड़ का प्रावधान योगी सरकार की 'एक मंडल- एक स्पोर्ट्स कॉलेज' नीति के तहत आगरा में बनने वाले स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। एत्मादपुर क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद जल्द ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। बजट में इस कॉलेज के निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर करीब आठ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल मैदान, प्रशासनिक भवन, आवासीय सुविधाएं (हॉस्टल) और शिक्षा व्यवस्था एक ही परिसर में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ पढ़ाई की सुविधा देना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में होगा विकसित यह संस्थान केवल एक कॉलेज नहीं बल्कि 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक में भारत की भागीदारी और पदक संभावनाओं को मजबूत करना है। आगरा का यह कॉलेज भविष्य के ओलंपियन तैयार करने की नर्सरी बनेगा। खेल दिग्गजों ने सराहा योगी सरकार के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है। आगरा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कमी थी तो बस उच्च स्तरीय संसाधनों की। स्पोर्ट्स कॉलेज बनने से यहाँ की बेटियों और युवाओं को अब अपने घर में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिल सकेगी। यह कदम आगरा से नए स्टार खिलाड़ी निकालने में मदद करेगा।   – हेमलता काला, पूर्व अध्यक्ष, चयन समिति, भारतीय महिला क्रिकेट टीम/ पूर्व क्रिकेटर, भारतीय महिला क्रिकेट टीम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने खेलों को जो प्राथमिकता दी है, वह अभूतपूर्व है। मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भविष्य के ओलंपियंस तैयार करने की फैक्ट्री साबित होगी। – संजय गौतम, उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हॉकी संघ आगरा में स्पोर्ट्स कॉलेज का सपना अब साकार होने जा रहा है। एक ही परिसर में पढ़ाई और खेल की व्यवस्था होने से अभिभावक भी बच्चों को खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। यह आगरा के खेल जगत के लिए संजीवनी समान है। – कमल चौधरी, अध्यक्ष, आगरा हॉकी संघ

यूपी के शहरों का गंदा पानी अब बिना शोधन के गंगा-यमुना में नहीं जाएगा

प्रदेश में कुल 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, इनमें से 41 पूर्ण सीएम योगी के नेतृत्व में नदियों की स्वच्छता को मिली नई रफ्तार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 एसटीपी संचालित हैं लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना सहित प्रमुख नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपशिष्ट जल का शोधन कर नदी प्रदूषण की रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। अब प्रदेश के शहरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के नदियों में नहीं जाएगा। नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत सीवरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी स्टार्ट हुए हैं। 842 करोड़ रुपए की इस परियोजना से लगभग 25 लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं, वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी एसटीपी का संचालन किया गया है। 308 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का लाभ मिलेगा। शुक्लागंज (उन्नाव) में 65 करोड़ रुपए से 5 एमएलडी एसटीपी शुरू हुआ है। इससे 3 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी। अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन : जोगिन्दर सिंह राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। सीवेज को शुद्ध कर बना रहे पर्यावरण के अनुकूल वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, जो बड़ी मात्रा में सीवेज को शुद्ध कर नदियों में प्रवाहित होने से पहले उसे पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से गंगा-यमुना की स्वच्छता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य को भी सुरक्षित किया जा रहा है। परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की निर्मलता सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले अपशिष्ट जल का शोधन कर पूरी तरह से नदी प्रदूषण की रोकथाम करना है। इससे नदियों की निर्मलता को सुनिश्चित किया जा रहा है। गंगा स्वच्छता के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता यूपी राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। सीवर शोधन परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश गंगा स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। इन जिलों में हुआ काम सीवर शोधन की परियोजना प्रयागराज (नैनी, फाफामऊ, झूंसी), कन्नौज, नरोरा, गढ़ मुक्तेश्वर, अनूपशहर, कानपुर, बिठूर, अयोध्या, मथुरा-वृन्दावन, छाता (मथुरा), कोसीकला (मथुरा), वाराणसी, चुनार, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, कासगंज, इटावा, शुक्लागंज-उन्नाव, सुल्तानपुर, जौनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुड़ाना, लखनऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, बरेली, कैराना, फर्रुखाबाद, मेरठ, देवबंद (सहारनपुर), सहारनपुर, शामली, हापुड़, गोरखपुर, आगरा, गुलावटी (बुलंदशहर), पंडित दीन दयाल नगर (मुगलसराय-चन्दौली), भदोही, राम नगर, हाथरस, अलीगढ़, डलमऊ (रायबरेली), मानिकपुर (प्रतापगढ़) में संचालित हैं।