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आजमाएं गुस्से को छूमंतर करने के लिए ये लाजबाव उपाय

कहते हैं क्रोध बुद्धि को खा जाता है, यह बात कई लोग जानते हैं फिर भी क्रोध करते हैं और बेवजह अपना और अपने साथी को परेशान करते हैं। वैसे अगर आपको कभी गुस्सा आ भी जाए तो इन उपायों से आप अपने गुस्से को काबू में रख सकते हैं। अमूमन देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति गुस्सा होता है तो उसके आस-पास का माहौल भी प्रभावित होता है। ऐसे में अगर आपको गुस्सा आ रहा हो तो एकांत मे चले जाइए और उस समस्या के बारे में एक बार सोचिए क्या आप जिस बात या जिस पर गुस्सा कर रहे हैं। क्या वह जायज है? अगर हां तो उसका निवारण तलाशिए। आपकी एक पहल गुस्से को छूमंतर कर सकती है। अगर आपको किसी व्यक्ति का बात करने का तरीका पसंद नहीं है लेकिन उसके हाव-भाव अच्छे लगते हैं तो अपने गुस्से को शांत करने के लिए ध्यान लगाएं। इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि एक तालाब काई से ढका हुआ है। वहां एक प्यासा और थका हुआ आदमी पहुंचता है। वह उस काई को हटाता है, पानी पीता है, उसमें नहाता है और अपनी थकावट दूर करता है। ठीक इसी तरह आप उस व्यक्ति के हाव-भाव पर ध्यान न देकर उसकी बातों पर ध्यान लगाएंगे तो आपको कभी गुस्सा नहीं आएगा और आप हमेशा खुश रहेंगे। ऐसा गुस्सा किस काम का जिसके कारण गुस्सा समाधान की वजह खुद एक समस्या बन जाए। बेहतर है गुस्से को शांत करने के बोलना बंद कर दें। ऐसे में आपको उसका खुले दिल से स्वागत करना चाहिए और उसके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। अगर कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसकी बातें अच्छी हैं, हाव-भाव अच्छे हैं और वह दयालु भी है लेकिन आपको उस पर फिर भी खीझ आती है तो अपने गुस्से पर काबू करने के लिए ध्यान लगाएं। एक तालाब का पानी बहुत मीठा और साफ है। एक प्यासा और गर्मी से बेहाल आदमी उस तालाब के पास पहुंचता है, जिसका पानी पीकर और उसमें नहा कर उसे परम सुख की अनुभूति होती है और उसकी परेशानियां दूर हो जाती हैं। ठीक ऐसे ही आप भी अपना सारा ध्यान उस आदमी की अच्छाइयों पर लगाएं और अपने गुस्से को खुद पर हावी न होने दें।  

बार-बार आता है गुस्सा? इन उपायों से रखें खुद को शांत

गुस्सा आना और गुस्सा होना दो अलग बातें हैं। किसी इंसान को गुस्सा आ रहा है लेकिन उसने कंट्रोल कर लिया, तो वो कई सारी प्रॉब्लम से बच सकता है। लेकिन गुस्सा हो जाना मतलब कि आपका अपने गुस्से पर कंट्रोल नही है। इसलिए सबसे जरूरी है समझना कि अपने गुस्से पर कैसे कंट्रोल किया जाए। जिससे ना केवल आप बाद में किसी भी तरह की शर्मिंदगी से बचें बल्कि होने वाले नुकसान को भी टाल सकें। गुस्से पर कंट्रोल करने के लिए अगर सांइटिफिक तरीके की बात की जाए तो मायो क्लीनिक ने इसके कई तरीके बताएं हैं, जिससे गुस्से को कंट्रोल किया जा सकता है। गुस्से में बोलने से पहले सोचें किसी भी आध्यात्मिक गुरु से बात करें तो वो गुस्से में बोलने से मना करते हैं। ठीक यहीं बात साइंस भी कहता है कि जब भी आप गुस्सा हो तो बोलने से पहले सोचें। गुस्से में बोले गए शब्द बाद में शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। इसलिए गुस्सा हो तो चुप हो जाए और सोचकर बोलें। फिजिकल एक्टीविटी करें गुस्से को कंट्रोल करना है तो फिजिकल एक्टीविटी करें। जैसे कि वॉक करना शुरू करें या रन करें। या फिर अपनी मनपसंद किसी फिजिकल एक्टीविटी को करें। काम के बीच से ब्रेक लें कई बार काम करते-करते दिमाग थक जाता है। ऐसे में स्ट्रेसफुल माइंड में एंगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इससे बचने के लिए ब्रेक लें और माइंड को रिफ्रेश करें। जिससे गुस्सा पर कंट्रोल हो सके। माफ करना सीखें मन में निगेटिव बातें रखना गुस्से को बढ़ाती है। जिसके प्रति गुस्सा हों उसे माफ करने से कड़वाहट कम होती है और आपके अंदर का गुस्सा भी कम होता है। सॉल्यूशन पर फोकस करें जब भी गुस्सा हो तो हमेशा सॉल्यूशन पर फोकस करें। वो कौन सी चीजें हैं जिससे गुस्सा आता है। उसके सॉल्यूशन निकालने की कोशिश करें। जिससे आपका गुस्सा कम हो।  

बीमारियों और बुराइयों को जन्म देता है क्रोध

हममें से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे क्रोध या गुस्सा कभी भी न आता हो। क्रोध एक प्रकार का संवेग या भावना है। जिस प्रकार व्यक्ति दुःख, सुख, घृणा आदि महसूस करता है, उसी प्रकार क्रोध भी महसूस करता है। प्रायः बहुत से लोगों को कहते सुना जा सकता है कि उन्हें गुस्सा बहुत आता है। वे किसी मामूली-सी बात पर भी बहुत अधिक गुस्सा हो जाते हैं और गुस्से के समय वे अपना संतुलन तक खो देते हैं। क्रोध में किसी भी व्यक्ति का अच्छा काम भी बिगड़ जाता है। क्रोध व्यक्ति को उसकी समस्याओं को सुलझाने की अपेक्षा और अधिक उलझा देता है। क्रोध की अवस्था में व्यक्ति अपने को किसी कान को कर पाने में सक्षम नहीं पाता। इससे वह अपने तथा समाज के लिए आलोचना का कारण बनता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने संबंधों में कड़वाहट पैदा कर देता है। क्रोध एक अति शक्तिशाली सवेग या भावना है, जो व्यक्ति को शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचा सकता है। जो व्यक्ति जल्दी गुस्सा हो जाते हैं उनमें विभिन्न प्रकार की शारीरिक परेशनियां जैसे सिरदर्द, चर्म रोग, अल्सर और दिल से संबंधित बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। क्रोध के समय व्यक्ति केवल छोटे-छोटे नुकसान ही नहीं, बल्कि काफी बड़ी मुसीबतों में पड़ सकता है। जैसे घर का सामान तोड़ देना, मारपीट करना, रास्ते में दुर्घटना हो जाना और कई बार तो क्रोध में व्यक्ति दूसरे की हत्या तक कर देता है। क्रोधित व्यक्ति दूसरे की भावनाओं को आहत कर आमतौर पर आपसी संबंधों में दरारें डालकर आपस की दूरियां बढ़ा देता है। वैवाहिक संबंधों में तो ऐसी दूरियां कुछ समय बाद खाई बनकर तलाक जैसे भयंकर परिणाम का रूप भी ले सकती हैं। स्वाभाविक क्रोध: सामान्यतया कुछ परिस्थितियों में किया गया क्रोध स्वाभाविक क्रोध होता है। यह क्रोध लगभग सभी व्यक्तियों में पाया जात है और यह क्रोध कभी-कभी लाभदायक भी होता है। उदाहरण के तौर पर बच्चे के स्कूल न जाने या चोरी करने पर मां को गुस्सा आना। पति के रोज देर से घर पहुंचने पर पत्नी को गुस्सा आना सवाभाविक क्रोध है। किसी कर्मचारी के सही काम न करने पर उसके अधिकारी को गुस्सा आना भी इसी श्रेणी में आता है। इस तरह का क्रोध जो किसी परिस्थितिवश किया जाता है, वह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इस प्रकार के अस्थायी क्रोध से यह प्रयास किया जा सकता है कि भविष्य में इस तरह की बात न दोहरायी जाये। दूसरी तरफ इस तरह के स्वाभाविक क्रोध में व्यक्ति को अपनी स्थिति का पूरा ध्यान रहता है और क्रोध करने वाला व्यक्ति को अपनी स्थिति का पूरा ध्यान रहता है और क्रोध करने वाला व्यक्ति उसे नियंत्रण करने में सक्षम होता है। क्रोध कैसे शान्त करें? क्रोध शान्त करने के लिए व्यक्ति को उपचार के साथ-साथ स्वयं भी प्रयत्नशील होना पड़ता है। यदि क्रोध किसी शारीरिक अथवा मानसिक बीमारी के कारण है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति की संबंधित बीमारी का इलाज होने के साथ ही क्रोध की तीव्रता और उसके घटित होने की अवस्था में भी परिवर्तन आ जाता है। क्रोध करने वाले व्यक्ति को दूसरे की स्थिति के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति घर में खाना समय से न मिल पाने के कारण गुस्सा करता है, तो उसे यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खाने में देर होने का कारण घर के कुछ आवश्यक कार्य हो सकते हैं अथवा खाना बनाने वाले व्यक्ति को कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। व्यक्ति को अपनी जरूरतों और समस्याओं के बारे में घर के अन्य सदस्यों, मित्रों आदि के साथ खुलकर बात करनी चाहिए, ताकि समस्याओं का कोई सर्वमान्य हल निकल सके। इस प्रकार क्रोध को काफी हद तक रोका जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी मित्र या घर के सदस्य से किसी बात के बारे में कोई भ्रम की स्थिति है तो ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति से मिलकर स्थिति को स्पष्ट करके क्रोध से बचा जा सकता है। अस्सी से नब्बे प्रतिशत लोगों का क्रोध प्रायः गलत ही होता है। अगर स्थिति की सही समीक्षा और संबंधित व्यक्तियों को अपने परिवार का सदस्य समझकर व्यवहार करें तो संभवतः क्रोध को शान्त किया जा सकता है और उसके दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।