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भिलाई स्टील प्लांट के एचएसएलटी ठेका श्रमिकों की पेंशन शुरु

भिलाई नगर. बीएसपी में एचएसएलटी ठेका श्रमिकों का पेंशन लंबे समय से लंबित था. स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक के प्रयास से 110 श्रमिकों को पेंशन मिलना शुरु हो गया है. उन्हें 2700 रु. प्रतिमाह पेंशन मिल रहा है तथा लगभग 170000 रु. मिलना प्रारंभ हो गया है. सेवानिवृत्त एचएसएलटी श्रमिकों ने इंटक के प्रयास के लिए इंटक आफिस जाकर आभार जताया. भिलाई इस्पात संयंत्र में साफ-सफाई एवं उत्पादन कार्य में विगत 40 वर्षों से कार्य करने के उपरांत सेवानिवृत्त हुए एचएसएलटी ठेका श्रमिकों का पेंशन लंबे समय से लंबित था. ईपीएफ के केवाईसी लंबित रहने के कारण लगभग 10 वर्षों से प्रयासों के बावजूद उनका पेंशन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था. इस संबंध में ठेका श्रमिकों से ने स्टील ठेका श्रमिक यूनियन (इंटक) कार्यालय में अध्यक्ष संजय कुमार साहू संपर्क किया. विगत दो वर्षों के सतत प्रयासों तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के उच्च प्रबंधन, सीएलसी ठेका प्रकोष्ठ, वित्त विभाग एवं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन रायपुर के सहयोग से 250 ठेका श्रमिकों में से 110 श्रमिकों का पेंशन प्रारंभ हो गया है. शेष श्रमिकों की प्रक्रिया प्रगति पर है.

सुरक्षा में लापरवाही, भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो महाप्रबंधकों को किया निलंबित, अन्य अफसरों को दी चेतावनी

दुर्ग भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के शीर्ष प्रबंधन ने बीते कुछ समय में कार्यस्थल पर हुए कर्मचारियों की मृत्यु और घायल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. सिंटर प्लांट-3 के महाप्रबंधक शंकर मोरी और उर्जा प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक सुब्रमणि रमणी को निलंबित कर दिया है. इसके अलावा उर्जा प्रबंधन विभाग के दो कार्यपालकों को चेतावनी पत्र जारी किया है. वहीं दो महाप्रबंधकों को एडवाइजरी पत्र प्रदान किए गए हैं. जीरो टॉलरेंस की नीति प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित कार्य और असुरक्षित कार्यप्रणाली के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पहले की तरह आगे भी कड़ाई से लागू रहेगी.  सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाना प्रत्येक स्तर पर सामूहिक उत्तरदायित्व है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही या असुरक्षित व्यवहार को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसी संदर्भ में दुर्घटना-जनित परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चूक की गंभीरता को देखते हुए कठोर प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं. सभी घटनाओं का मूल कारण विश्लेषण किया गया है, ताकि प्रत्येक पहलू का तथ्यपरक मूल्यांकन हो सके. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक और निवारक उपायों की रूपरेखा तैयार कर संबंधित विभागों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.