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आखिरी 60 दिन में न करें ये गलतियां, पैरेंट्स भी रहें सतर्क

बोर्ड एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। लगभग हर बोर्ड से जुड़े एग्जाम फरवरी महीने में शुरू हो जाएंगे। ऐसे में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स दोनों को ही एक अलग तरह का प्रेशर महसूस होने लगा है। समय कम है और सिलेबस इतना ज्यादा, ऐसे में घबराहट की वजह से कई स्टूडेंट्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनकी तैयारी को नुकसान पहुंचाती हैं। एक्सपर्ट मेघना मिश्रा का कहना है कि बोर्ड एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स के लिए आखिरी के लगभग तीन महीने बहुत कीमती होते हैं। अगर इस समय सही दिशा में मेहनत की जाए, तो अच्छे नंबर लाना पूरी तरह संभव है। वहीं इस दौरान की गई कुछ गलतियां काफी भारी भी साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट ने ऐसी ही गलतियां बताई हैं, जो आपको हर हाल में अवॉइड करनी चाहिए। नई किताबें शुरू करने की गलती कई छात्र परीक्षा के नजदीक आते ही नई-नई किताबें खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा किताबें पढ़ेंगे, उतना ज्यादा सीखेंगे। लेकिन मेघना के मुताबिक आपकी यह सोच गलत है। ज्यादा किताबें पढ़ने से अक्सर कन्फ्यूजन बढ़ती है। बेहतर यही है कि छात्र NCERT की किताबों पर पूरा ध्यान दें और साथ में सिर्फ एक अच्छी प्रैक्टिस बुक रखें। जो किताबें आपके पास पहले से हैं, उन्हीं को अच्छे से समझें और बार-बार रिवाइज करें। गहराई से पढ़ाई करना, ऊपर-ऊपर सब कुछ देखने से कहीं बेहतर होता है। पूरी रात जागकर पढ़ने से बचें कुछ बच्चे एग्जाम आते ही पूरी-पूरी रात जागकर पढ़ाई करने लगते हैं, उन्हें लगता है रात भर जागकर पढ़ने से ज्यादा सिलेबस पूरा हो जाएगा। लेकिन स्टूडेंट्स की ये आदत सही नहीं है। उनका कहना है कि नींद की कमी याददाश्त को कमजोर कर देती है। नींद दिमाग को मजबूत बनाती है और पढ़ी हुई चीजों को याद रखने में मदद करती है। दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद बहुत जरूरी है। इसे किसी भी हालत में नजरअंदाज ना करें। जब आप पूरी नींद लेते हैं, तो पढ़ाई में मन भी लगता है और समझ भी बेहतर होती है। सोशल मीडिया से दूरी बनाएं एक्सपर्ट का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। स्टूडेंट्स सिर्फ पंद्रह मिनट के लिए फोन उठाते हैं, वही कब दो घंटे बर्बाद कर देते हैं, उन्हें पता भी नहीं चलता। अगर सच में पढ़ाई पर ध्यान देना है, तो सोशल मीडिया एप्स को कुछ समय के लिए हटा देना ही बेहतर है। वेबसाइट ब्लॉकर का इस्तेमाल करें और खुद पर कंट्रोल रखें। याद रखें, यह समय दोबारा नहीं आएगा। टॉपर्स से तुलना करना छोड़ें अक्सर छात्र खुद की तुलना टॉपर्स से करने लगते हैं। इससे सिर्फ तनाव और डर बढ़ता है। मेघना मिश्रा के मुताबिक हर छात्र की क्षमता अलग होती है। किसी और की तैयारी देखकर खुद को कम आंकना सही नहीं है। आपको सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। जो आप कर सकते हैं, वही आपके लिए सबसे जरूरी है। तुलना से दूर रहकर शांत मन से पढ़ाई करना ही सफलता पाने का सही रास्ता है। कमजोर विषयों से भागने की आदत कई स्टूडेंट्स कमजोर विषयों को बाद के लिए छोड़ देते हैं, यह बहुत बड़ी गलती है। हर विषय को संतुलन के साथ पढ़ना जरूरी है। कमजोर विषयों पर थोड़ा-थोड़ा रोज ध्यान दें। 80-20 नियम को याद रखें और जहां कमी है, वहां अभ्यास बढ़ाएं। कमजोर विषय ही अक्सर अच्छे नंबरों का रास्ता बनते हैं। परफेक्ट समय का इंतजार ना करें कई स्टूडेंट्स सोचते हैं कि जब सब कुछ सही होगा, तभी पढ़ाई शुरू करेंगे। लेकिन सच ये है कि पढ़ाई के लिए कभी परफेक्ट हालात नहीं होते। आपको खुद की दिनचर्या बनानी होगी और उसी में पढ़ाई को जगह देनी होगी। शुरुआत करना सबसे जरूरी है, परफेक्ट होना नहीं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, चीज़ें अपने आप बेहतर होती जाएंगी।  

राजस्थान के विद्यार्थी साल में दो बार दे सकेंगे बोर्ड परीक्षा, शिक्षा मंत्री का ऐलान

कोटा कोटा जिले के दौरे पर मौजूद शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर अगले सत्र से विद्यार्थियों को सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा का अवसर प्रदान करेगा। शिक्षा मंत्री दिलावर ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रावधानों के अनुसार अगले सत्र से दो बार बोर्ड परीक्षा ली जाएगी। सभी विद्यार्थियों के लिए प्रथम बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होना अनिवार्य होगा, जबकि उत्तीर्ण विद्यार्थियों को समस्त विषयों में से किन्हीं तीन विषयों में द्वितीय अवसर परीक्षा में अपने प्रदर्शन में सुधार करने की अनुमति दी जाएगी। पूरक योग्य घोषित विद्यार्थियों को भी अधिकतम तीन विषयों में द्वितीय अवसर परीक्षा में अपने प्रदर्शन सुधारने की अनुमति दी जाएगी, जिसमें पूरक विषय सम्मिलित रहेंगे। यदि कोई विद्यार्थी प्रथम परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहता है तो उसे भी द्वितीय अवसर परीक्षा में अनुत्तीर्ण विषयों के प्रदर्शन में सुधार करने की अनुमति दी जाएगी। यदि विद्यार्थी इस द्वितीय अवसर परीक्षा में किसी विषय में अनुत्तीर्ण रहता है तो ऐसे विद्यार्थियों को आवश्यक पुनरावृत्ति श्रेणी में रखा जाएगा और वे केवल अगले वर्ष फरवरी माह में मुख्य परीक्षा में ही सम्मिलित हो सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष में एक बार मुख्य परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की जाएगी। उसके परिणाम की घोषणा के बाद इसी सत्र में दूसरी परीक्षा मई-जून में आयोजित की जाएगी। जिसे 'द्वितीय अवसर परीक्षा' नाम दिया जा सकता है। दोनों परीक्षाएं उस वर्ष के पूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित होगी तथा अध्ययन योजना और परीक्षा योजना सामान रहेगी। मुख्य परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी को सक्षम अधिकारी के चिकित्सा प्रमाण पत्र/संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर ही द्वितीय अवसर परीक्षा में प्रवेश की अनुमति दी जा सकेगी। द्वितीय अवसर पर परीक्षा शुल्क मुख्य परीक्षा के समान ही रहेगा तथा 'बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट्स' सिद्धांत लागू रहेगा, अर्थात दोनों परीक्षाओं में प्राप्त श्रेष्ठ अंक अंतिम परिणाम में मान्य होंगे।