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गांव की महिलाओं को अब पानी के लिए नहीं तलाश करने पड़ते कुंए

सिर्फ आधार कार्ड दिया और कनैक्शन हो गया, सार्वजनिक नल भी लगे लखनऊ, बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि आज उन्हें उनके घर में ही पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से भुखमरी और गरीबी की जाने कितनी कहानियां हैं। सिर पर घड़ा रखकर दूरदराज से पानी लाती एक महिला की तस्वीर ही यहां के जिलों की पहचान बन गई थी। सालों साल तक यहां की महिलाओं ने पानी का संकट भुगता है। दूरदराज के कुंओं तक जाकर पानी खींचने के साथ ही हैंडपंप पर पानी के लिए लाइनें लगाई हैं। लेकिन अब यह सब अतीत की बातें हैं। अब सड़कों पर दूर से ही दिखनेवाली पानी की टंकियां उम्मीदों की जलधारा हैं। बात महोबा की करें तो यहां के लोगों ने पानी की किल्लत से लंबे समय तक दुर्दिन भरे दिन देखे हैं। कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। लोग घड़ा भर पानी के लिए जाने कहां-कहां तक भटकते थे। अब यहां दूर से ही दिखाई देने वाले वाटर टैंक नई कहानी कहते हैं। इस जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के सहारे एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन की कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को क्षतिग्रस्त किया गया। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के दौरान लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना अवश्य करना पड़ा। महोबा के अरशद कहते हैं कि कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी-बहुत परेशानी तो होती ही है। लेकिन, अब हर घर नल यहां के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है। चित्रकूट में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना की बात करें तो इससे जुड़े विकास खंड पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर में सवा लाख लोगों के लिए पानी की समस्या खत्म हो गई है। मानिकपुर के उन लोगों का दर्द महसूस कीजिए जो कभी लगभग एक किमी दूर से पानी लाया करते थे।…और इस समस्या की वजह से वहां लोग अपनी बेटियां ब्याहने को आसानी से तैयार नहीं होते थे। उनके लिए यह पानी जिंदगी है, बच्चों का भविष्य है। योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किमी की पाइप लाइन बिछाई जानी है, जिसमें 572 किमी बिछा दी गई है। 17 ओवरहेड टैंक हैं जहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से रोज पानी लाया जा रहा। यमुना नदी से पानी लाकर इस प्लांट में संशोधित करके टैंकों में चढ़ाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा। बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी इस योजना का चर्चा करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं कि हम योगी-मोदी सरकार के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम कर दिया। हमारे बच्चे अब नहो-धोकर स्कूल जाते हैं। उनमें स्वच्छता का भाव स्वतः ही आने लगा है। चित्रकूट में सिलौटा के साथ ही रैपुरा, चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं चल रही हैं और यह सारी योजनाएं उम्मीद की वह धारा हैं जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं था। रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 19570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन सभी घरों में नल लग गए हैं और 60 राजस्व ग्रामों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि हमारी बड़ी समस्या दूर हुई है। अपने लिए पानी का इंतजाम मुश्किल था, जानवरों की तो बात ही दूर। अब हमें परेशान नहीं होना पड़ रहा। लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल की बात हो सकती है लेकिन बुंदेलखंड के लिए यह वरदान है। यह वस्तुतः उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे मोदी-योगी सरकार ने साधना के रूप में लिया। झांसी के बडा गांव, चिरगांव और बंगरा में अंतिम छोर के गांव तक जल जीवन मिशन की पाइप लाइन बिछ गई है। झासी जिले के बंगरा विकासखंड में स्थित गैरहा ग्राम पंचायत के 65 साल के कामता प्रसाद भावुक हो गए। बोले कि यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं। जिला मुख्यालय से दूर बसे इस गांव की विवाहिता शगुन बताती हैं कि उन्हें पहले गांव से आधा किमी दूर पानी लेना जाना पड़ता था और बारिश के समय बड़ी मुश्किल होती थी। झांसी जिले के बंगरा ब्लाक की ग्राम पंचायत पचवारा में बहू बन कर जब रागिनी आईं तो उन्हें सरकारी हैंड पंप से पानी ले जाना पडता था। अब वे टोंटी खोलते हुए दिखाती हैं कि देखिये कितना साफ पानी है। गरीब परिवार की बहू खुश है कि मजदूरी करने वाले उनके पति मुकेश कुमार को एक पैसा तक नहीं देना पड़ा और नल का कनेक्शन हो गया। ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार कनेक्शन हुए हैं। दलित बाहुल्य गांव में योगी सरकार में बनाए गए आरोग्य मंदिर में भी जल जीवन मिशन के तहत नल लगा है, जहां मरीजों, तीमारदारों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों में भी बच्चे स्वच्छ पानी पी रहे हैं। जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह बताते हैं कि इस स्कीम के तहत 42 गांव आच्छादित हैं और इन गांवों में 11 हजार 437 कनेक्शन हुए हैं। बांदा का नाम आते ही सूखा, पानी की कमी और प्यास आदि शब्द अपने आप दिमाग में कौंधने लगते थे। अब यहां अमलीकौर पेयजल परियोजना और खटान पेयजल परियोजना से 544 गावों में पानी पहुंचा है। 82266 घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा गांव के रहने वाले परदेशी ने बताया कि पहले हमें पानी के लिए पहले परेशान होना पड़ता था। वहीं अब हमको हमारे घरों में ही स्वच्छ पानी मिल रहा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि पाइपलाइन डालने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था। उनको भी ठीक कर दिया गया है। हमीरपुर में भी दो पेयजल परियोजनाएं चल रही हैं जहां 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। यहां के लोगों की जिंदगी में यह योजना बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।

बुन्देलखण्ड में दुग्ध क्रांति : डेयरी वैल्यू चेन बनाकर आत्मनिर्भर हो रहीं 86 हजार महिलाएं

चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा एवं ललितपुर में डेयरी इंडस्ट्री के जरिए ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आय सीएम योगी के विजन के अनुसार 3600 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को किया गया एकजुट 952 गांवों में महिलाओं की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बना दुग्ध व्यवसाय लखनऊ,   बुन्देलखण्ड की पहचान अब सिर्फ संघर्ष और पलायन तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन से इस क्षेत्र में डेयरी वैल्यू चेन महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है। चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा और ललितपुर में दुग्ध व्यवसाय के जरिए 86 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। बुन्देलखण्ड में दुग्ध व्यवसाय को संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाने के लिए महिलाओं की प्रोड्यूसर कंपनी ‘बालिनी’ का गठन किया गया। यह संगठन महिला दुग्ध उत्पादकों द्वारा संचालित है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा ही बदल दी है। इस मॉडल से जुड़कर महिलाएं अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं हैं। संगठन द्वारा बनाए गए उत्पाद को बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। दूध संग्रह, परीक्षण, डिजिटल भुगतान से गांवों में पैदा हुए रोजगार के नए अवसर डेयरी वैल्यू चेन परियोजना के तहत बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों के 952 गांवों में 3,600 स्वयं सहायता समूहों की 86,000 से अधिक महिलाओं को संगठित किया गया है। दूध संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, डिजिटल भुगतान और बाजार से सीधे जुड़ाव की व्यवस्था ने महिलाओं की आय में वृद्धि की है। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिली है। सामूहिक प्रयास से बड़े आर्थिक बदलाव की वाहक बन रहीं ग्रामीण महिलाएं योगी सरकार की मंशा है कि ग्रामीण विकास की धुरी ही महिलाओं की आर्थिक मजबूती बने। इसी सोच के तहत बुन्देलखण्ड में डेयरी परियोजनाओं को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। बालिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी अब न केवल दुग्ध व्यवसाय का मॉडल बन चुकी है, बल्कि यह संकेत भी दे रही है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं बड़े आर्थिक बदलाव की वाहक बन सकती हैं। बुन्देलखण्ड में डेयरी वैल्यू चेन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीएम योगी के नेतृत्व में चल रही योजनाएं जमीन पर असर दिखा रही हैं। गांव की महिलाएं अब क्षेत्र की तरक्की की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।