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Chirag Yojana Haryana: स्कूलों से सीटें खाली, फिर भी छात्रों को नहीं मिला अलॉटमेंट

चंडीगढ़. चिराग योजना को लेकर शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों से खाली सीटों का ब्योरा तो मंगवा लिया लेकिन अब तक स्कूलों को सीटें अलॉट नहीं की गईं। इसके बावजूद 13 मार्च से योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जिससे अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने इसे शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही बताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि विभाग ने 29 जनवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच चिराग योजना के तहत सहमति वाले निजी स्कूलों से खाली सीटों का विवरण मांगा था। स्कूलों ने विभाग की वेबसाइट पर अपनी खाली सीटों की जानकारी भी अपलोड कर दी, लेकिन अब तक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित स्कूलों को सीटें आवंटित नहीं की हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 13 मार्च से 30 मार्च तक आवेदन की तिथि निर्धारित कर दी है, लेकिन सीटें अलॉट न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों के आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। कई अभिभावक स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन स्कूल भी असमंजस की स्थिति में हैं। कुंडू ने कहा कि जब किसी भी स्कूल को सीटें ही आवंटित नहीं की गईं, तो अभिभावक आवेदन किस स्कूल में करें। उन्होंने शिक्षा निदेशक से मांग की है कि जल्द से जल्द चिराग योजना के तहत संबंधित स्कूलों को सीटें अलॉट की जाएं।

सैनी सरकार ने ‘चिराग’ योजना के तहत दाखिले से वंचित छात्रों को दी राहत

चंडीगढ़. हरियाणा में ‘चिराग’ योजना के तहत दाखिले से वंचित रह गए छात्रों को बड़ी राहत दी गई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने लंबित और अपात्र घोषित किए गए निजी स्कूलों के लिए चेकिंग पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला लिया है। यह पोर्टल 23 से 30 जनवरी तक खुला रहेगा। निदेशालय द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश में बताया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने में देरी हुई। जहां दाखिला प्रक्रिया पहली से 30 अप्रैल 2025 तक निर्धारित थी, वहीं 10वीं का परिणाम 15 जून, 2025 को घोषित किया गया। इस कारण कई पात्र छात्र ‘चिराग’ योजना के तहत तय समय में दाखिला नहीं ले सके। आदेश के अनुसार, ऐसे छात्र जिन्होंने 15 जुलाई, 2025 तक 10वीं से 11वीं में दाखिला ले लिया, लेकिन ‘चिराग’ योजना के तहत उनका डेटा अपलोड नहीं हो पाया, अब वे पोर्टल खुलने के दौरान अपनी मार्कशीट, छात्र विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे वास्तविक रूप से पात्र छात्रों को योजना का लाभ मिल सकेगा। शिक्षा निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि 276 निजी स्कूलों को कुछ कक्षाओं के लिए पात्र और कुछ के लिए अपात्र पाया गया है। इसका मुख्य कारण स्कूलों द्वारा मान्यता से संबंधित अधूरे दस्तावेज अपलोड करना बताया गया है। कई स्कूल सीनियर सेकेंडरी तक मान्यता प्राप्त होने के बावजूद केवल सेकेंडरी स्तर तक के दस्तावेज अपलोड कर रहे थे। ऐसे सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना पूर्ण और सही मान्यता प्रमाण-पत्र पोर्टल पर अपलोड करें। जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके जिलों के संबंधित स्कूल तय समयसीमा के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जमा करें। निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में स्थित निजी स्कूलों से समन्वय स्थापित कर पोर्टल खुलने की अवधि में सभी लंबित छात्र डेटा और मान्यता दस्तावेज समय पर अपलोड करवाएं। शिक्षा विभाग के इस निर्णय से उन छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो समयसीमा के कारण ‘चिराग’ योजना से बाहर हो गए थे। विभाग का कहना है कि यह कदम योजना के उद्देश्य के अनुरूप है, ताकि किसी भी पात्र छात्र को तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित न रहना पड़े।