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पंजाब में गरमाई सियासत: मोगा में भाजपा कार्यक्रम के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

चंडीगढ़ पंजाब के मोगा में भाजपा की रैली के दौरान किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताया। विभिन्न किसान संगठनों ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई, किसानों से जुड़े मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर प्रदर्शन किया, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। मोगा में भाजपा रैली के दौरान किसानों का विरोध पंजाब के मोगा जिले में आयोजित भाजपा की राजनीतिक रैली के दौरान किसानों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाते हुए भाजपा नेताओं का घेराव किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारी समूहों का कहना था कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार को इस पर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। किसान संगठनों की मांगें और प्रदर्शन का कारण किसान नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन विभिन्न संगठनों के आह्वान पर किया गया। उनका कहना है कि सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों और राजनीतिक बंदियों की रिहाई सहित कई मुद्दों पर सरकार को निर्णय लेना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल किसान संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार इन मामलों में संवैधानिक सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही है, इसलिए उन्होंने रैली के दौरान विरोध दर्ज कराया। मोगा में आयोजित इस रैली को भाजपा ने पंजाब की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में पेश किया। कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए मौजूदा सरकार की आलोचना की। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि पंजाब में बदलाव की आवश्यकता है और पार्टी आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर सक्रिय रूप से अभियान चला रही है। विपक्ष और सियासी प्रतिक्रियाएँ रैली के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। कुछ नेताओं ने कार्यक्रम को राजनीतिक दिखावा बताते हुए दावा किया कि राज्य में पार्टी को स्थानीय समर्थन नहीं मिल रहा। वहीं भाजपा नेताओं ने रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत का संकेत बताया। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। पंजाब लंबे समय से किसानों के आंदोलनों का केंद्र रहा है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि नीतियों और कर्ज राहत जैसे मुद्दे लगातार राजनीति में प्रमुख बने हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। ऐसे में मोगा की यह घटना राज्य में किसान राजनीति और चुनावी रणनीतियों के बीच बढ़ते टकराव को भी दर्शाती है।

बठिंडा में पुलिस ने आधी रात दबिश देकर कई किसान नेताओं को लिया हिरासत में

बठिंडा. पंजाब के बठिंडा में चाऊके आदर्श स्कूल संघर्ष से जुड़े किसान नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर आज बठिंडा में प्रस्तावित पक्के मोर्चे से पहले प्रशासन और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। पक्का मोर्चा विफल करने के उद्देश्य से पुलिस ने तड़के बड़े स्तर पर किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी की, जिसमें कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां से जुड़े दो किसान नेताओं—कुलविंदर सिंह ग्याना और फौजी महिमा—को हिरासत में लिया है। इसके अलावा अजैब सिंह जखेपल और कर्मजीत सिंह मंगवाल को भी पुलिस ने काबू किया है। वहीं जिला प्रधान शिंगारा सिंह मान, वरिष्ठ नेता जगदेव सिंह जोगेवाला, जगसीर सिंह झुंबा, गुलाब सिंह जिउंद, अमरीक सिंह सिवियां और लखबीर सिंह मान सहित करीब एक दर्जन नेताओं के घरों पर दबिश दी गई, लेकिन अधिकांश नेता पहले ही भूमिगत हो चुके थे। यूनियन के अनुसार आधी रात के बाद घराचों, महलां, गंडुआं और उगराहां सहित कई गांवों में पुलिस कार्रवाई की गई। प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के घर भी छापेमारी हुई, हालांकि वे वहां नहीं मिले। यूनियन ने सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की सीसीटीवी फुटेज साझा करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। नेताओं ने भुच्चो खुर्द में इकट्‌ठे होने का लिया निर्णय बताया जा रहा है कि कल जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में किसानों ने डीसी कार्यालय का घेराव करने के बजाय भुच्चो खुर्द में एकत्र होने का निर्णय लिया था, लेकिन तड़के हुई कार्रवाई के बाद यूनियन ने रणनीति में बदलाव किया है। इधर धरना स्थल भुच्चो खुर्द को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसान नेता की रिहाई की मांग यूनियन नेताओं ने बताया कि पूरा संघर्ष बलदेव सिंह चाऊके और सगनदीप सिंह जिउंद की रिहाई को लेकर है, जो पिछले नौ महीनों से बठिंडा जेल में बंद हैं। यूनियन का आरोप है कि दोनों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक रिहाई नहीं होती, तब तक पक्का मोर्चा जारी रहेगा।