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MP वित्त विभाग की नई गाइडलाइन: बाबू और अफसर को 10 दिन में फाइलें निपटाने का आदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा समय-समय पर जो घोषणाएं की जाती हैं या मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव मानिट (समयसीमा) के जो मामले होते हैं, उन सभी से जुड़ी फाइलें वित्त विभाग में कोई भी अधिकारी एक समयसीमा से अधिक रोककर नहीं रख सकेगा। अधिकतम दस दिनों में फाइलों का निपटारा करके आगे बढ़ानी होंगी। इसके लिए वित्त विभाग ने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका तैयार की है। इसमें सबके दायित्व को स्पष्ट किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई असमंजस की स्थिति ना रहे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री सहित विशेष व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले पत्रों को तुरंत कार्रवाई करना होगा। इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में रखे जाने वाले विषयों की संक्षेपिका तैयार करना, विभागीय अभिमत समय पर देना, विभिन्न आयोगों से प्राप्त होने वाले प्रतिवेदन व अनुशंसाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की बैठक समय पर संपन्न करवाना, अवकाश, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि से जुड़े मामलों का समयावधि में प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करवाना अपर सचिव और उपसचिव का दायित्व होगा। इसके साथ ही फाइलों के निपटारे की समय सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है। इसमें मंत्री परिषद को भेजे जाने वाले प्रकरण, नई योजना के करणप्रकरण में 10 दिन, चिकित्सा की प्रतिपूर्ति के मामलों में अधिकतम पांच दिन, बजट राशि से संबंधित प्रतिबंध में पांच दिन, आहरण सीमा बीस प्रतिशत की कटौती, विदेश यात्रा की अनुमति की फाइल पांच दिन, मंत्री से जुड़ी नस्ती और अनुपूरक बजट के प्रस्ताव की फाइल को तीन दिन में आगे बढ़ाना होगा। मनमाना पर्यवेक्षण शुल्क नहीं ले सकेंगे वहीं, वित्त विभाग में निर्माण कार्यों पर लिए जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था बना दी है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले निर्माण कार्य की एजेंसी विभाग है तो तकनीकी स्वीकृति पर पर्यवेक्षण शुल्क शून्य रहेगा। जबकि, निर्माण एजेंसी शासन की कोई संस्था है तो यह एक प्रतिशत रहेगा। 10 करोड रुपये से अधिक के निर्माण कार्य में एजेंसी शासन होने पर पर्यवेक्षण शुल्क तीन प्रतिशत और अन्य संस्था होने पर छह प्रतिशत की दर से लिया जाएगा।

एडिशनल चार्ज पर मिलने लगेगा अतिरिक्त कार्य भत्ता, वित्त विभाग ने किया स्पष्ट

जयपुर राजस्थान में वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है। प्रदेश में एडिशनल चार्ज के भार से जूझ रहे अधिकारियों को अब इसकी एवज में स्पेशल पे मिलेगी।  वित्त विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ऐसे अधिकारी जो 6 महीने से अधिक समय तक किसी विभाग के HOD या सचिव स्तर के पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त कार्य भत्ता (Special Pay) दिया जाएगा। राजस्थान में कई सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों में प्रमुख पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। ऐसे में कई अफसर अपने मुख्य काम के साथ कई विभागों के अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। यह आदेश राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 35 और 50 के तहत जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, जब किसी अधिकारी को अपने नियमित पद के साथ-साथ किसी अन्य रिक्त पद का चार्ज सौंपा जाता है, तो उसे पद रिक्त होने की तिथि से छह माह तक विशेष वेतन दिया जाएगा। यदि छह माह के भीतर उस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होती, तो उस पद को आस्थगित (Keep in Abeyance) माना जाएगा। यानी बजट तैयार करते समय वित्त विभाग इस पद की अनिवार्य नहीं मानते हुए उसे खत्म भी कर सकता है। हालांकि, यह प्रावधान सचिव, प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर लागू नहीं होगा। इन उच्च पदों पर यदि छह माह से ज्यादा समय तक नियुक्ति नहीं होती है, तब भी उन्हें आस्थगित नहीं माना जाएगा और पूरी अवधि तक विशेष वेतन मिलता रहेगा। फिलहाल, प्रदेश के करीब 50 विभाग, बोर्ड और कॉर्पोरेशन ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष (HOD) और वरिष्ठ पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। यह आदेश उन सभी अधिकारियों पर भी लागू होगा जो वर्तमान में इस प्रकार के पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इस फैसले को दीपावली से पहले अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।