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पुराने नियमों को बदला गया: संपत्ति के लिए नई गाइडलाइन लागू

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्तियों के गाइडलाइन निर्धारण संबंधी नियमों में बड़ा सुधार करते हुए नए नियम जारी किए हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जमीन गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में बड़ा बदलाव किया गया है. इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब आसान होगी. वहीं, भ्रम, विसंगतियां व अतिरिक्त शुल्क भी समाप्त होंगे, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी. पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी ने विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि जमीन के गाइडलाइन मूल्य निर्धारण संबंधी वर्तमान नियम अत्यंत जटिल तथा विरोधाभासी हैं तथा सामान्यजन की समझ से बाहर हैं. इसके कारण आम लोगों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन नियमों को सरल, संक्षिप्त तथा व्यक्तिनिरपेक्ष बनाया जाए. बताया गया है कि गाइडलाइन दरों की गणना इन नियमों के अनुसार की जाती है, जैसे मुख्य  मार्ग की दूरी क्या होगी, कौन से तल में होने पर कितना वैल्यूएशन होगा, किन-किन परिस्थितियों में कितने कितने मूल्य बढ़ेंगे आदि. इन नियमों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री के समय बाजार मूल्य का आकलन किया जाता है. गाइडलाइन दरों के निर्धारण संबंधी ये नियम वर्ष 2000 से बने हुए थे तथा इनमें कोई परिवर्तन या संशोधन नहीं हुआ था. बताया गया है कि गाइडलाइन दरों की गणना इन नियमों के अनुसार की जाती है, जैसे मुख्य मार्ग की दूरी क्या होगी, कौन से तल में होने पर कितना वैल्यूएशन होगा, किन-किन परिस्थितियों में कितने कितने मूल्य बढ़ेंगे आदि. इन नियमों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री के समय बाजार मूल्य का आकलन किया जाता है. गाइडलाइन दरों के निर्धारण संबंधी ये नियम वर्ष 2000 से बने हुए थे तथा इनमें कोई परिवर्तन या संशोधन नहीं हुआ था. वर्तमान नियमों में कई विसंगतियां थीं, जिसके कारण संपत्ति के बाजार मूल्य की वास्तविक और तार्किक रूप से गणना नहीं हो पाती थी. जैसे मुख्य मार्ग के आधार पर गाइडलाइन दरों की गणना का प्रावधान था, लेकिन इस पूरी गाइडलाइन में कहीं भी मुख्य मार्ग को परिभाषित नहीं किया गया था. मुख्यमंत्री व पंजीयन मंत्री के निर्देश पर गाइडलाइन संबंधी नियमों के पुनरीक्षण के लिए उद्देश्य निर्धारित किया गया था कि इन नियमों को सरल व संक्षिप्त और जनहितैषी बनाया जाए. साथ ही इसमें मानवीय हस्तक्षेप को कम करते हुए प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर द्वारा स्वमेव लागू होने लायक प्रावधान तैयार किए जाएं. इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए नए जारी बाजार मूल्य गणना संबंधी उपबंध 2025 में कई मुख्य प्रावधान किए गए हैं. पूर्व प्रचलित उपबंध में 77 प्रकार के निर्धारण प्रावधान थे, जिन्हें घटाकर अब गणना संबंधी केवल 14 प्रावधान रखे गए हैं, जिन्हें समझना आम जनता के लिए बेहद आसान होगा. पूर्व उपबंध में नगरीय निकायों तथा इनमें कृषि, नजूल, डायवर्टेड- प्रत्येक अलग-अलग प्रकार की भूमि के लिए अलग-अलग प्रकार की गणना के प्रावधान थे. अब इन्हें युक्तिसंगत बनाते हुए एक ही प्रकार का प्रावधान किया गया है. सभी वर्ग के नगरों व भूमि के लिए अब हेक्टेयर दर की सीमा 0.14 हेक्टेयर कर दी गई है. निर्मित संरचनाओं के लिए केवल 8 दरें रखी गई हैं. कृषि, डायवर्टेड, नजूल एवं आबादी भूमि के लिए अब एक समान मूल्यांकन मानक लागू होगा, जिससे डायवर्टेड व नजूल भूमि होने मात्र से संपत्ति के बाजार मूल्य नहीं बढ़ेंगे तथा भ्रम व त्रुटियों की संभावना समाप्त होगी. दो फसली भूमि होने पर 25 प्रतिशत वृद्धि, गैर परंपरागत फसलों पर 25 प्रतिशत वृद्धि, नलकूप ट्यूबवेल होने पर उसकी अलग कीमत, बाउंड्रीवाल व फ्लिंट होने पर उसकी अलग कीमत वृद्धि करने जैसे प्रावधानों को हटा दिया गया है. इसका प्रत्यक्ष लाभ आम जनता को होगा. नए नियम में यह प्रावधान किया गया है कि जब कोई नया मोहल्ला, कॉलोनी या परियोजना विकसित हो तो उसके लिए विशेष रूप से गाइडलाइन दर का निर्धारण किया जाएगा. जमीन की सरकारी कीमतों में वृद्धि का प्रस्ताव लटका प्रदेश में अचल संपत्ति व जमीन की नई कलेक्टर गाइडलाइन दरें बढ़ाने का प्रस्ताव फिलहाल लटक गया है. पंजीयन विभाग ने 8 महीने पहले जमीन की गाइडलाइन दर में वृद्धि करने की प्रक्रिया शुरू की थी, वह लटकी हुई है. जबकि अचल संपत्ति व जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन दर तैयार करने के लिए सर्वे हो चुका है. जिला समितियों द्वारा गाइडलाइन दर में डेढ़ से दो गुना तक वृद्धि प्रस्तावित है. निर्णय नहीं होने के कारण वर्तमान में 7 साल पुरानी गाइडलाइन दरें ही लागू हैं.

अबकी बार टैंपो भी भरना मुश्किल होगा: डोटासरा का तंज

जयपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को बीजेपी और आरएसएस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस चुनाव नहीं लड़ता लेकिन ऐसे राज कर रहा है जैसे जनता ने चुनकर भेजा हो। डोटासरा ने आरोप लगाया कि बिना जनता के वोट के आरएसएस सरकार पर अंकुश जमाए बैठा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान अब स्वतंत्र राज्य नहीं रहा, बीजेपी-आरएसएस ने इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। कांग्रेस मुख्यालय जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी हो चुकी है। मुख्यमंत्री और मंत्री तक की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता का क्या हाल होगा? उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अबकी बार बीजेपी को टैंपो में बैठने जितने विधायक भी नहीं मिलेंगे। डोटासरा ने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में प्रशासन मनमानी कर रहा है। कलेक्टर मंत्रियों के तक फोन नहीं उठाते। जब मंत्री जिले में जाते हैं, तो सर्किट हाउस में उनसे मिलने पांच लोग भी नहीं आते। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अब तो मंत्री सिर्फ कलेक्टर का नाश्ता करके लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ठेके अब गुजरात की लॉबी के पास जा रहे हैं। दिल्ली की पर्ची लेकर आने वाले ठेकेदारों को ही काम मिल रहा है। मंत्री सवाल उठाते हैं, फिर दो दिन में सेट हो जाते हैं। डोटासरा ने कहा कि पुलिस विभाग में भी अव्यवस्था है। पहले डीजीपी का इकबाल होता था, अब एक डीजी के ऊपर चार-चार डीजी बैठा दिए गए हैं। कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर दोनों हैं- आखिर काम करेगा कौन?। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में एक मंत्री ने शिकायत की कि कलेक्टर और एसपी उनकी नहीं सुनते, तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया आपकी खुद की शिकायतें दिल्ली तक पहुंची हैं। इसके बाद सभी मंत्री चुप हो गए। चुनाव तैयारियों को लेकर डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस ने सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन निर्वाचन विभाग ने अब तक प्रशिक्षण की सूचना नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीएलओ एप पर ही फोटो ले सकते हैं, तो मतदाताओं से फोटो क्यों मांगी जा रही है?

कमाई और खर्च का पूरा हिसाब होगा आसान, जानें सरकार की खास योजना

नई दिल्ली भारत की आर्थिक तस्वीर अगले साल से एक बड़े बदलाव से गुजरने वाली है। केंद्र सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है, जिसके तहत लोगों की कमाई और खर्च को अब बिल्कुल नए तरीके से मापा जाएगा। इस बड़े बदलाव का मकसद सकल घरेलू उत्पाद (GDP), महंगाई (CPI) और औद्योगिक उत्पादन (IIP) जैसे प्रमुख आर्थिक आंकड़ों को अपडेट करना है, ताकि ये आज के समय की असली आर्थिक स्थिति को दिखा सकें। सबसे खास बात यह है कि अब तेजी से बढ़ते सर्विस सेक्टर को ट्रैक करने के लिए एक नया इंडेक्स भी जारी किया जाएगा। बेस ईयर में बदलाव वर्तमान में, भारत के सभी आर्थिक आंकड़े 2011-12 के बेस ईयर यानी उस समय की कीमतों पर आधारित होते हैं। लेकिन 2011-12 से अब तक लोगों के खर्च करने की आदतों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। उस समय जहाँ खाने-पीने पर ज्यादा खर्च होता था, वहीं अब स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं जैसे खर्च हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए, सरकार ने Base Year को अपडेट करने का फैसला किया है ताकि नए आंकड़े सही और वास्तविक स्थिति को दर्शा सकें। GDP के नए आंकड़े: GDP की गणना के लिए अब 2022-23 की कीमतों को Base Year बनाया जाएगा, जिसके नए आंकड़े 27 फरवरी 2026 को जारी होंगे। इससे पहले, 7 जनवरी को आने वाले बजट अनुमान अभी पुराने बेस ईयर पर ही आधारित रहेंगे। महंगाई के आंकड़े: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी महंगाई के नए आंकड़े भी फरवरी 2026 में आएंगे, जो 2023-24 के दामों को ध्यान में रखेंगे। अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की भूमिका सबसे बड़ी है, लेकिन अब तक इसे अलग से मापने का कोई प्रभावी तरीका नहीं था। इस बड़े सुधार के तहत, पहली बार नया सर्विस सेक्टर इंडेक्स आएगा। यह इंडेक्स विशेष रूप से डिजिटल, लॉजिस्टिक्स और अन्य तेजी से बढ़ते क्षेत्रों की प्रगति को ट्रैक करेगा। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सेक्टर देश के आर्थिक विकास का एक विशाल हिस्सा बन चुका है। महंगाई मापन (CPI) और खर्च के आंकड़ों में बड़ा सुधार सरकार केवल GDP तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम आदमी की जेब से जुड़ी महंगाई (CPI) को मापने के तरीके में भी सुधार कर रही है। महंगाई को मापने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अब कीमतों और वस्तुओं के 'वजन' (Weightage) को बदला जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) से मिलने वाले अनाज पर होने वाले खर्च को भी अब आंकड़ों में सही तरीके से शामिल किया जाएगा। इससे महंगाई का असली असर और आम नागरिक पर पड़ने वाले बोझ को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। नीति निर्माण होगा बेहतर इन सभी बड़े बदलावों से सरकार को देश की आर्थिक स्थिति का सबसे सटीक और अपडेटेड आंकड़ा मिलेगा। जब महंगाई और GDP के आंकड़े वास्तविक और सटीक होंगे, तो सरकार बेहतर और प्रभावी आर्थिक नीतियां बना सकेगी। इन नीतियों का सीधा लाभ आम आदमी को मिलेगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर होगी और देश के विकास को नई गति मिलेगी।  

भूमि खरीद-फरोख्त में बड़ी राहत: साय सरकार ने ऋण पुस्तिका अनिवार्यता खत्म की

रायपुर जमीन से जुड़ी अगर रत्ती भर की भी कभी आपने कोई कार्रवाई की होगी, या कभी किसी किसान या जमीन के कारोबारी से पाला पड़ा हो तो आपको ऋण पुस्तिका की अहमियत अच्छे से पता है. इसको लेकर अच्छी यादें कम, बुरी यादें ज्यादा होंगी. अब साय सरकार ने ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लेते हुए जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त कर दी है. पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा प्रदेश के तमाम जिला पंजीयकों को ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त करने के संबंध में पत्र जारी किया है. इसमें पंजीयकों से अधीनस्थों को जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यकता समाप्त किए जाने के संबंध में निर्देशित करते हुए इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है. किसानों-जमीन मालिकों की समस्या को इंगित करते हुए पत्र में लिखा गया है कि कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख की प्रविष्टियों का इंद्राज कर किसानों को ऋण पुस्तिका जारी की जाती है. इसके अलावा किसानों को समय समय पर दिए जाने वाले ऋण, बंधक आदि का रिकार्ड भी ऋण पुस्तिका में दर्ज किया जाता है. वर्तमान में छत्तीसगढ़ में राजस्व अभिलेख ऑनलाइन कर दिए गए हैं, तथा भूमि पर भारित ऋण की प्रविष्टि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है. राजस्व अभिलेखों के गिरदावरी संबंधी रिकार्ड ऑनलाईन अद्यतन होते हैं जो ऋण पुस्तिका में अद्यतन नहीं हो पाते हैं. पंजीयन अधिकारियों के द्वारा रजिस्ट्री के समय ऑनलाइन प्रविष्टियों से डाटा मिलान किया जाता है, दस्तावेज में शुल्क अवधारण के या पंजीयन के उद्देश्य से ऋण पुस्तिका की कोई विशेष प्रासंगिता नहीं होती हैं. पंजीयन अधिकारियों के लिए ऋण पुस्तिका के तथ्यों की सत्यता जांचने का कोई प्रावधान नहीं है. प्रायः यह देखने में आया है कि भौतिक ऋण पुस्तिका की कमी अथवा अन्य कारणों से क्रेता किसानों को जमीन खरीदी-बिक्री के बाद नई ऋण पुस्तिकाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं. इससे पक्षकारों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा शासन की छवि भी खराब होती हैं. प्रदेश में दस्तावेजों का ऑनलाईन पंजीयन वर्ष 2017 से किया जा रहा है, तथा भुईयां से किसानों को नक्शा खसरा व बी-1 की प्रति भी ऑनलाइन प्राप्त हो रही है. विक्रेता के स्वामित्व के वेरिफिकेशन हेतु पंजीयन साफ्टवेयर का भुईया के साथ इंटीग्रेशन किया गया है, जिससे पंजीयन के समय दस्तावेज में वर्णित तथ्यों का राजस्व विभाग के डाटा से ऑनलाइन मिलान होने पर पंजीयन की कार्रवाई की जाती है. शासन द्वारा राजस्व विभाग के साफ्टवेयर में ऑटो म्यूटेशन का प्रावधान किया गया है. जिसके तहत् भूमि के पंजीयन के साथ ही स्वतः खसरे का बटांकन होकर नवीन बी-1 जनरेट हो जाता है, जिसमें क्रेता एवं विक्रेता के पास धारित भूमि की जानकारी स्वतः अद्यतन हो जाती है. प्रदेश में भूमि के पंजीयन से लेकर अन्य कार्य ऑनलाईन हो रहे हैं, जिसके तहत् पंजीयन प्रणाली को पेपरलेस भी किया गया है। भुईयां पोर्टल पर भूमि का बी-1, खसरा एवं नक्शा आदि ऑनलाइन उपलब्ध है, और मान्य भी है. अतः अब भौतिक रूप से प्रदाय की जा रही ऋण पुस्तिका या किसान किताब की पंजीयन हेतु आवश्यकता नहीं है. अतः दस्तावेजों के पंजीयन के लिए किसानों / पक्षकारों से ऋण पुस्तिका की मांग न की जाए. भूमि के स्वामित्व फसल विवरण एवं पंजीयन हेतु प्रासंगिक अन्य तथ्यों की पुष्टि ऑनलाइन डाटा से अनिवार्य रूप से किया जाए.

कफ सिरप की आपूर्ति राजस्थान में स्थगित, दोबारा होगी गुणवत्ता जांच

जयपुर खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup से बच्चों की तबियत बिगड़ने के मामले में राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी सामने आए हैं। मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा में भी खांसी की सिरप को पीने से 6 बच्चों की मौत हो गई है। राजस्थान में ड्रग कंट्रोलर ने इस दवा के साथ अब सभी तरह की कफ सिरप की सप्लाई  पर तत्काल रोक लगा दी है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पाेरेशन के निदेशक जय सिंह का कहना है कि राजस्थान में फिलहाल सभी तरह की कफ सिरप की फिर से क्वालिटी चैकिंग (QC) करवाई जा रही है। तब तक के लिए इनकी सप्ताई को रोक दिया गया है।  गौरतलब है कि खांसी की यह दवा, कम्पनी द्वारा इस वर्ष के क्रयादेश के तहत जून, 2025 से आपूर्ति की जा रही है। इस सिरप को अब तक 1 लाख 64 हजार से अधिक मरीजों को दिया जा चुका है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि  28 सितम्बर से पहले उसे इस सिरप को लेकर एक भी शिकायत नहीं  मिली थी। लेकिन जानकारी के अनुसार सितंबर के दूसरे सप्ताह में बांसवाड़ा में करीब 7 बच्चे इस सिरप को लेकर गंभीर रूप से बीमार हुए जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा। आरएमएससीएल के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बांसवाड़ा जिले को इस दवा के 50 हजार डोज मिले थे। इनमें से 13 हजार चिकित्सा केंद्रों को वितरित किए गए थे और शेष 37 हजार डोज वेयरहाउस में सुरक्षित रखे गए हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब दवा का वितरण और उपयोग रोक दिया गया है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि जिले में जिस बैच की शिकायत मिली है, वह आपूर्ति यहां नहीं हुई थी, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे रोक दिया गया है। राजस्थान में  Dextromethorphan HBr Syrup की खरीद जून 2025 से हो रही है।  28 सितम्बर को दवा के संबंध में शिकायत होने के बाद सम्पूर्ण प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है। इस कमेटी में आरएमएससीएल के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), कार्यकारी निदेशक (लॉजिस्टिक) एवं मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है। यह कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने पर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। केंद्र की गाइडलाइन थी, यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं   स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार ने इस दवा के संबंध में 2 साल पहले एक गाइडलाइन जारी की थी कि यह दवा 4 साल से छोटे बच्चों के लिए नहीं है। प्रदेश में इस दवा से तबियत बिगड़ने के जितने भी मामले सामने आए हैं वे सभी बच्चे 4 साल से कम उम्र के हैं। आरएमएससीएल प्रबंधन ने बताया कि 28 सितम्बर, 2025 को औषधि Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml [440] के बैच नम्बर KL-25/147 की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भरतपुर व  29 सितम्बर,2025 को जिला सीकर से उक्त औषधि के बैच संख्या KL-25/148 के संबंध में आरएमएससीएल को शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि सिरप का मरीजों द्वारा उपयोग करने पर उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर, बेचैनी, बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही दवा के वितरण पर भी रोक आरएमएससीएल  ने  शिकायती बैच के साथ ही प्रभावी कदम उठाते हुए उक्त औषधि के संबंधित सप्लायर द्वारा क्रयादेश के तहत सप्लाई किये गए सभी बैचों पर तत्काल प्रभाव से उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही, एहतियात के तौर पर अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही खाँसी की इस दवा का वितरण भी आगामी आदेशों तक रोक दिया गया है तथा इसकी भी पुनः गुणवत्ता जाँच करवाई जा रही है। पुन: गुणवत्ता जाँच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।