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अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दीपोत्सव से रूस के कलाकारों को मिली प्रेरणा

एवगेनी बनेंगे राम, दारिया निभाएंगी सीता का किरदार, मुरात लक्ष्मण और दिमित्री बनेंगे हनुमान दोनों देशों के बीच संबंधों को मिलेगी नई गति, 20 फरवरी को रामलीला में पहुंचकर मॉस्को और आसपास के लोग होंगे भाव विभोर लखनऊ, अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राममंदिर से जुड़े विकास कार्यों और दीपोत्सव समेत किए जा रहे अभूतपूर्व आयोजनों की ख्याति अब सात समंदर पार तक पहुंच रही है। योगी सरकार के सांस्कृतिक विजन और अयोध्या में हुए आध्यात्मिक नवजागरण से प्रेरित होकर रूस की राजधानी मॉस्को में 20 फरवरी को भव्य रामलीला का आयोजन होगा। यह रामलीला अयोध्या में विगत दिनों हुए दीपोत्सव से प्रेरणा लेकर दिव्य और भव्य रूप में आयोजित की जा रही है। इसे भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। रूस में भारत के दूतावास और जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र (JNCC) के सहयोग से होने वाली इस रामलीला में रूस के कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। राम की भूमिका में एवगेनी, सीता के रूप में दारिया, लक्ष्मण के रूप में मुरात और हनुमान के रूप में दिमित्री मंच पर भारतीय आस्था की सजीव प्रस्तुति देंगे। रूसी दर्शकों में विशेष उत्सुकता रूसी-भारतीय मैत्री संस्था ‘दिशा’ इस आयोजन की मुख्य संचालक है। डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में यह संस्था वर्षों से नाट्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक उत्सवों और शैक्षिक पहल के जरिए भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन का सार्वभौमिक संदेश है। यही वजह है कि रूसी दर्शकों में भी इसके प्रति विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। अयोध्या में दीपोत्सव की भव्यता से मिली प्रेरणा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पहचान बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लाखों दीपों से जगमगाती अयोध्या की तस्वीरों ने दुनिया भर के सांस्कृतिक संगठनों और कलाकारों को प्रभावित किया है। योगी सरकार ने रूस के कलाकारों की टीम को अयोध्या दीपोत्सव में मंच प्रदान किया। यह टीम रामलीला प्रस्तुत कर पहले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। अयोध्या की आध्यात्मिक आभा और आयोजन की भव्यता देखकर रूस से यहां आए आयोजक और कलाकार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मॉस्को में भी उसी भाव को साकार करने का निर्णय लिया। दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों में रामलीला की परंपरा का इतिहास भी उल्लेखनीय रहा है। 1960 के दशक में सोवियत अभिनेता पद्मश्री गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव ने मॉस्को में रामलीला का मंचन कर दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को नई ऊंचाई दी थी। यह पहल दोनों देशों के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अयोध्या की प्रेरणा से मॉस्को की रामलीला आयोजन का नेतृत्व कर रहे रामेश्वर सिंह ने बताया कि रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया दीपोत्सव और सांस्कृतिक नवजागरण अब वैश्विक प्रभाव दिखा रहा है। मॉस्को की रामलीला अयोध्या की प्रेरणा से आयोजित की जा रही है। 20 फरवरी को भाव-विभोर होगा रूस 20 फरवरी को मॉस्को में होने वाली रामलीला के लिए भव्य मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत की विशेष तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रूसी नागरिक, भारतीय समुदाय और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। जब मंच पर श्रीराम की लीला सजीव होगी तो पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति की भक्ति, मर्यादा और आदर्शों से सराबोर नजर आएगा। यह आयोजन नाट्य प्रस्तुतियों, उत्सवों और शैक्षिक पहल के माध्यम से दोनों देशों की एकता की सशक्त मिसाल पेश करेगा।

अयोध्या में 120 फीट के मंच पर थ्रीडी तकनीक के साथ शुरू हुई भव्य रामलीला

अयोध्या. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या लगातार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वैभव से निखर रही है। इसी कड़ी में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में रामकथा पार्क में सातवें संस्करण की भव्य फिल्मी रामलीला का शुभारंभ हुआ। 120 फीट ऊंचे मंच पर थ्रीडी तकनीक के साथ शुरू हुई इस रामलीला में पहले दिन नारद मोह के प्रसंग से सबका मन मोह लिया। यह आयोजन 22 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलेगा। इस बार रामलीला की खासियत 240 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा, जो इसे और भी भव्य बनाएगा। इसके साथ ही 190 फीट ऊंचे मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का भी दहन किया जाएगा। 60 कारीगर तैयार कर रहे हैं पुतला कोरोना काल 2020 में शुरू हुई इस फिल्मी रामलीला ने हर साल अपनी भव्यता और नवाचार के साथ लोगों का ध्यान खींचा है। संस्थापक अध्यक्ष सुभाष मालिक ने बताया कि इस बार चार राज्यों के 60 कारीगरों की टीम ने इन विशाल पुतलों को तैयार किया है, जो तकनीक और कला का अनूठा संगम प्रदर्शित करेंगे।  बड़े बड़े कलाकार निभा रहे पात्रों की भूमिका रामकथा पार्क में आयोजित इस रामलीला में फिल्मी सितारों की भागीदारी इसे और भी आकर्षक बनाती है। इस साल भगवान शंकर का किरदार बिंदु दारा सिंह, बाली का किरदार सांसद मनोज तिवारी, परशुराम का किरदार पुनीत इस्सर और केवट का किरदार रवि किशन निभा रहे हैं। इन सितारों की मौजूदगी से रामलीला में फिल्मी तड़का और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। अत्याधुनिक तकनीक का किया जा रहा इस्तेमाल रामलीला का मंचन अत्याधुनिक थ्रीडी तकनीक के साथ किया जा रहा है, जो दर्शकों को एक जीवंत अनुभव प्रदान करेगा। मंच की ऊंचाई और तकनीकी प्रभावों के कारण दर्शक रामायण के दृश्यों को और करीब से महसूस कर सकेंगे। आयोजकों ने बताया कि इस बार रावण दहन का आयोजन अभूतपूर्व होगा। मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 बनेंगी सीता इस बार सीता की भूमिका मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 मणिका विश्वकर्मा कर रही हैं। अयोध्या की रामलीला के संस्थापक अध्यक्ष सुभाष मलिक ने बताया कि इस बार अयोध्या की रामलीला इतिहास रचने जा रही है। इसमें रावण का रोल प्रसिद्ध कलाकार विजय सक्सेना कर रहे हैं। श्रीराम की भूमिका फिल्म अभिनेता राहुल भूचर कर रहे हैं। गत वर्ष 47 करोड़ ने देखी थी रामलीला सुभाष मालिक ने बताया कि रामलीला न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। इस आयोजन से अयोध्या में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। रामकथा पार्क में हर शाम हजारों की संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं, और इसका सीधा प्रसारण भी विभिन्न मंचों पर किया जा रहा है। गत वर्ष ऑनलाइन व दूरदर्शन के माध्यम से 47 करोड़ लोगों ने रामलीला देखी थी। इसका प्रसारण रोजाना शाम सात बजे से दस बजे तक दिखाई जाएगी।