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कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े: डॉक्टर से समझें वजह और रोकथाम

इस सदी की शुरुआत से अब तक बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या दोगुणी हो चुकी है। कई बच्चों में इसका स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, जिससे यह परेशानी धीरे-धीरे विकराल रूप ले लेती है। युवा अवस्था में प्रवेश से पहले ही वे हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी बेहद गंभीर बीमारियों के संभावित शिकार हो जाते हैं। खराब आहार, निष्क्रियता भरी दिनचर्या और बढ़ता मोटापा बच्चों को उच्च रक्तचाप की मुसीबत में धकेल रहे हैं। लांसेट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में 11.4 करोड़ बच्चे हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिस तेजी से बच्चों में हाइपरटेंशन बढ़ा है, उससे अभिभावकों और स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को तुरंत चेतने की जरूरत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में कुछ बच्चों में रक्तचाप का स्तर तेजी से बढ़ता है, लगभग 14 साल की उम्र में, खासकर लड़कों में, यह चरम स्थिति में होता है। इन दौरान नियमित जांच कराने की जरूरत होती है। इस परेशानी के पीछे मुख्य कारण बचपन में बढ़ता मोटापा है, जबकि थोड़े से प्रयास से इसे रोका जा सकता है। रिपोर्ट की मानें तो मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ इस उम्र में अब अस्थमा और मानसिक सेहत से जुड़ी समस्याओं का भी जोखिम बढ़ता जा रहा है। हमें समझना होगा कि स्वस्थ बच्चे ही एक स्वस्थ युवा के रूप में विकसित होंगे, ऐसे में आहार, व्यायाम जैसी आदतों का विकास बचपन में ही करने की जरूरत है। जिन परिवारों में हाइपरटेंशन की हिस्ट्री रही है, उन्हें बच्चों की सेहत को लेकर विशेष रूप से गंभीर रहने की जरूरत है। बच्चे की हो बीपी व बीएमआइ की जांच साल 2000 तक उच्च रक्तचाप सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन बीते दो दशकों में बच्चे – किशोर भी इसकी गिरफ्त में आए हैं। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चे युवावस्था में हाइ ब्लड प्रेशर के कारण हृदय और किडनी रोग की चपेट में आ जाएंगे। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मोटापा और जेनेटिक प्रमुख हैं। मोटापे से ग्रस्त लगभग हर पांचवां बच्चा हाई बीपी से पीड़ित है। इनमें से 50 प्रतिशत को पता ही नहीं होता कि उन्हें बीपी की समस्या है। शहरों में रहने वाले बच्चों में 20 प्रतिशत मोटापे की गिरफ्त में हैं। क्या हैं वजहें देर तक मोबाइल टीवी देखना पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव, नींद पूरी न करना, फल एवं सब्जियां कम खाना, मीठे पदार्थ, खेलकूद से दूरी और फास्ट- फूड का अधिक सेवन बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की समस्या बढ़ाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज, रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी, पालिसिस्टिक किडनी डिजीज, हाइपरथायराइडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम और जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया भी बच्चों में उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाते हैं । हार्ट डिजीज जैसे को आर्कटेशन आफ आर्टा के साथ स्टेरायड, गर्भनिरोधक गोलियां, नशीली दवाएं और स्लीप एप्निया से भी बच्चे बीपी रोग की चपेट में आ रहे हैं।     मोटापा और अधिक वजन     खराब दिनचर्या, खराब आहार, नमक का अधिक सेवन     किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और जांच का अभाव कैसे करें बचाव प्रतिवर्ष बच्चों की बीपी और बीएमआई की जांच आवश्यक है, उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार दें, बच्चे को किसी एक आउटडोर एक्टिविटी से जोड़ें। तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग और मेडिटेशन कराएं। जंक फूड और मीठे पदार्थों से उन्हें दूर रखें। पढ़ाई के लिए अतिरिक्त दबाव न डालें, स्क्रीन टाइम अधिकतम एक घंटा हो, भोजन में नमक कम करें, ताजे फल-सब्जियां खिलाएं, आठ घंटे नींद की आदत डालें। बच्चों को अनावश्यक स्टेरायड न दें। ध्यान रखें कि यदि आपका बच्चा मोटापे की चपेट में है तो युवावस्था में उसे हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज, दिल का दौरा, स्ट्रोक, खराब कोलेस्ट्राल, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, किडनी रोग और कुछ तरह के कैंसर का खतरा तीन-चार गुणा तक अधिक रहता है।  

उच्च रक्तचाप वालों के लिए डाइट अलर्ट: क्या न खाएँ और क्यों?

दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार करीब हर 4 में से 1 व्यक्ति हाई बीपी की समस्या से जूझ रहा है. ब्लड प्रेशर बढ़ने पर हार्ट पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ सकता है. यह समस्या सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं है, कम उम्र में भी हाई बीपी के केस बढ़ रहे हैं. खासकर गलत डाइट, तनाव, कम नींद, मोटापा और एक्सरसाइज की कमी इसके प्रमुख कारण बनते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के खास कारणों में खानपान बहुत बड़ा फैक्टर है. ऐसे में हाई बीपी वालों के लिए डाइट कंट्रोल करना सबसे जरूरी कदम है. सही खानपान से दवा की जरूरत भी कम हो सकती है और ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में आसानी होती है. खाना अगर बार-बार बाहर का, जंक बेस्ड और इंस्टेंट फूड वाला हो तो शरीर में सोडियम और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे बीपी तेजी से ऊपर जाता है. इसलिए हाई बीपी वाले मरीजों को खानपान का ध्यान रखना चाहिए हाई बीपी के मरीजों को कौन सी चीजें नहीं खानी चाहिए? दिल्ली एमसीडी में डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि हाई बीपी वाले लोगों को सबसे पहले ज्यादा नमकीन चीजों से दूरी बनाने की जरूरत होती है. चिप्स, नमकीन स्नैक्स, अचार, पापड़, प्रोसेस्ड मीट, इंस्टेंट नूडल्स, और पैक्ड सूप जैसे आइटम्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. ऐसे फूड ब्लड वेसल्स को सख्त करते हैं और बीपी को तेजी से ऊपर ले जाते हैं. साथ ही, ज्यादा तली-भुनी चीजें, बेकरी प्रोडक्ट्स, मैदा बेस्ड स्नैक्स और हाई शुगर वाली मिठाइयां भी हार्ट पर भार बढ़ाती हैं. रेड मीट और ट्रांस फैट्स वाले फास्ट फूड का नियमित सेवन भी नुकसानदायक है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज जैसे फूड भी हाई बीपी वालों के लिए गलत विकल्प हैं. ऐसे में जितना हो सके, फ्रेश और लो-सोडियम भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है. हाई बीपी वाले क्या खाएं? कम नमक वाला खाना लें. ताजे फल और सब्जियां रोज खाएं. ओट्स, दलिया, मल्टीग्रेन रोटी जैसे फाइबर वाले अनाज लें. लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें. ऑलिव ऑयल, सरसों तेल जैसे हेल्दी ऑयल का इस्तेमाल करें. पानी ज्यादा पीएं, पर्याप्त नींद लें.