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रायपुर आईजी ने पुलिस अधीक्षकों को अपराध और सड़क दुर्घटनाएं रोकने के दिए सख्त निर्देश

रायपुर. आईजी अमरेश मिश्रा ने रायपुर रेंज के पुलिस अधीक्षकों की बैठक ली, जिसमें उन्होंने अपराध समीक्षा कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने अंतर्राज्यीय सीमा में निगरानी और एंड टू एंड जांच करने कहा। इसके अलावा किशोर अपराधों में नियंत्रण, दुर्घटनाओं में कमी लाना के भी निर्देश दिए। आज आईजी अमरेश मिश्रा की बैठक में रायपुर जोन के अतंर्गत रायपुर (ग्रामीण), महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार जिलों के पुलिस अधीक्षकों एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। बैठक में बेहतर कार्यालय प्रबंधन एवं मानव संसाधन प्रबंधन पर परिचर्चा की गई। बैठक में लंबित अपराध, चिटफंड प्रकरण, सायबर अपराध की समीक्षा करते हुए नवीन कानून के अतंर्गत दर्ज अपराधों का गुणवत्तापूर्ण विवेचना कर समयावधि में निराकरण करने, थानों में जप्त वाहनों के निराकरण, राजसात एवं निलामी, गौवंश तस्करी पर प्रभावी कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही रेंज स्तर पर चलाये जा रहे निश्चय अभियान के तहत लगातार प्रभावी कार्यवाही करते हुए अंर्तराज्यीय सीमा में निगरानी एवं चेकिंग कर मादक पदार्थ की तस्करी, फायनेंशियल एण्ड टू एण्ड इन्वेस्टीगेशन, PIT NDPS तथा सफेमा के तहत कार्यवाही करने की बात कही। स्कूलों में बच्चो की सुरक्षा सुनिश्चित करने व किशोर अपराधो में नियंत्रण के लिए सभी स्तरों पर बैठक आयोजित कर कार्ययोजना बनाने, स्कूल के आसपास नशे की बिक्री पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। होली, रमजान आदि त्यौहारों में शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने आसूचना संकलन कर गुण्डा बदमाशों के विरूद्ध कार्रवाई एवं संभावित चाकूबाजी/अड्डेबाजी आदि संवेदनशील स्थानों को चिन्हांकित कर लगातार चेकिंग अभियान व प्रभावी पेट्रोलिंग करने के भी निर्देश दिए गए। यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने मालवाहक वाहनो में यात्री परिवहन, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरूद्ध एवं अवैध पार्किंग पर कार्ययोजना के साथ सघन कार्रवाई के निर्देश दिए गए। आगामी विधानसभा बजट सत्र के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने संबंधी भी दिशा-निर्देश दिए गए।

अमर सिंह चहल प्रकरण में जांच तेज, तीन आरोपियों के नाम सामने आए

पटियाला पूर्व IG अमर सिंह चहल के मामले में पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों की पहचान की है। इसके अलावा पुलिस ने 25 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं और करीब 3 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन रोक दिए हैं। यह मामला 8.10 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़ा है। जांच में पता चला है कि इस ठग गिरोह के तार महाराष्ट्र से जुड़े हैं और तीन मुख्य आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है। जांच में पता चला कि आरोपी WhatsApp और Telegram ग्रुप के एक्टिव मेंबर थे। पुलिस के मुताबिक, ठगों ने कई फर्जी पहचान पत्र और अलग-अलग बैंक अकाउंट के जरिए ट्रांजैक्शन किए। जांच के दौरान 25 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं और करीब 3 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन रोक दिए गए हैं। शक है कि इस गैंग में 10 से ज्यादा लोग शामिल हैं। आरोपियों ने बैंक का CEO बनकर इन्वेस्टमेंट के नाम पर पैसे ठगे। यह भी पता चला है कि अमर सिंह चहल ने 22 दिसंबर को धोखा खाने के बाद खुद को गोली मार ली थी, हालांकि वह इस घटना में बच गए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले उन्होंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पुलिस को मौके से 16 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। नोट में उन्होंने आत्महत्या करने के अपने कारणों की जानकारी दी थी। जिससे पता चला है कि पूर्व IG ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए थे, जिससे उन्हें काफी फाइनेंशियल नुकसान हुआ था। गौरतलब है कि 2019 में रिटायर हुए अमर सिंह चहल यहां अर्बन एस्टेट इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह कुछ दिन पहले दोपहर करीब 1:30 बजे अपने घर के आंगन में आए और राइफल से खुद को सीने में गोली मार ली। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। 

निवेश के नाम पर ठगी का झटका: व्हाट्सएप फ्रॉड के शिकार पूर्व IG, ICU में भर्ती

चंडीगढ़  कई रिटायर्ड अफसर गंवा चुके हैं रकम, फर्जी ‘F-777 वेल्थ ग्रुप’ की साइबर जांच तेज    पटियाला। पूर्व आईजी अमर सिंह चाहल ऑनलाइन निवेश ठगी का शिकार हो गए हैं। ठगी की इस साजिश के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं और हालत स्थिर बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद पटियाला पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, पूर्व आईजी को पहले रिटायर्ड अफसरों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। इसके बाद उन्हें एक अलग ग्रुप ‘F-777 वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप’ में शामिल कराया गया, जहां शेयर बाजार, IPO और अन्य निवेश योजनाओं में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। शुरुआत में थोड़ी रकम पर रिटर्न दिखाकर भरोसा जीता गया, फिर बड़ी राशि निवेश कराई गई, जिसके बाद ठगी सामने आई। जांच में सामने आया है कि इस व्हाट्सएप ग्रुप में पटियाला के कई रिटायर्ड और नामी अधिकारी भी शामिल थे, जो अपनी रकम गंवा चुके हैं। पुलिस ने ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है, हालांकि अभी कोई भी लिखित शिकायत देने को तैयार नहीं है। अधिकतर अधिकारी मौखिक रूप से ठगी की पुष्टि कर रहे हैं। साइबर सेल की कई एंगल से जांच पूर्व आईजी की पत्नी के बयान पर साइबर क्राइम सेल में FIR दर्ज, जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क किया गया, उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही, यह भी जांच कि किस रिटायर्ड अफसर ने ठग को ग्रुप में जोड़ा, फर्जी नामों से काम कर रहे आरोपियों के खिलाफ अज्ञात में मामला दर्ज। पुलिस की अपील : पुलिस ने ऐसे किसी भी व्यक्ति से, जो इस या इसी तरह की स्कीम का शिकार हुआ हो, सामने आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, ताकि ठगों तक जल्द पहुंचा जा सके। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर बनाए जा रहे फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं, चाहे शिकार कोई आम नागरिक हो या वरिष्ठ अधिकारी।