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स्मार्ट सिटी योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप: लोकसभा में कुमारी सैलजा ने उठाया मुद्दा

चंडीगढ़ सिरसा की सांसद, कांग्रेस की महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री कुमारी सैलजा ने लोकसभा में स्मार्ट सिटी मिशन के क्रियान्वयन में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के फरीदाबाद और करनाल सहित देश के कई शहरों में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का काम अपेक्षित गति से नहीं हुआ है और अनेक योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों शहरों में कुल 167 परियोजनाओं में से जून 2024 तक केवल 112 परियोजनाएं ही शुरू की जा सकीं, जबकि उनमें से भी 67 परियोजनाओं में तीन से चार वर्ष तक की देरी हुई है। नगर स्तरीय निगरानी समिति की 133 निर्धारित बैठकों के स्थान पर केवल 10 बैठकें आयोजित की गईं, जिससे परियोजनाओं की सही समीक्षा और निगरानी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 3896.82 करोड़ रुपये की प्रस्तावित वित्तीय व्यवस्था के मुकाबले केवल 1825.86 करोड़ रुपये (लगभग 46.86 प्रतिशत) ही जुटाए जा सके। इसके अलावा करनाल में 356.87 करोड़ रुपये ऐसे कार्यों पर खर्च किए गए जो चिन्हित विकास क्षेत्र से बाहर थे। साथ ही परियोजनाओं की गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन भी नहीं कराया गया। कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि इन अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच करवाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए। मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग का कुमारी सैलजा ने समर्थन किया है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी का संघर्ष करोड़ों बहुजनों को अधिकार, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान की राह दिखाने वाला रहा है। ऐसे महान समाज सुधारक को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाना देश की सामाजिक न्याय की भावना को और मजबूत करेगा।

बजट घटा तो बढ़ेगी मुश्किलें: कुमारी सैलजा ने उठाए सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

चंडीगढ़ सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार के बजट 2026-27 पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से स्पष्ट है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2013-14 में कांग्रेस सरकार के समय कुल बजट खर्च का 21.77 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार के 2026-27 के बजट में यह घटकर मात्र 10.80 प्रतिशत रह गया है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की कटौती यह दर्शाती है कि सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हरियाणा के लगभग 90 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और हेडमास्टर के पद खाली पड़े हैं, जिससे स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक वातावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जब विद्यालयों में नेतृत्व ही नहीं होगा तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल सकेगी। कुमारी सैलजा ने प्रदेश की विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लगभग 50 प्रतिशत टीचिंग पोस्ट खाली हैं, चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी भिवानी में 69 प्रतिशत, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा में लगभग 60 प्रतिशत तथा सीआरएसयू जींद में भी करीब 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इससे साफ है कि प्रदेश की उच्च शिक्षा भी गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की नीति पर काम कर रही है ताकि लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों से खत्म हो जाए और निजी शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा मिले। यदि सरकार वास्तव में शिक्षा को लेकर गंभीर होती तो खाली पदों को तुरंत भरती, विद्यालयों के ढांचे को मजबूत करती और शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी करती। कुमारी सैलजा ने कहा कि बजट 2026-27 में किसानों के साथ भी अन्याय किया गया है। विशेष रूप से कपास किसानों के बजट में भारी कटौती की गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का रोडमैप नहीं बल्कि जुमलों और भाषणों का पुलिंदा है। शिक्षा, किसान और युवाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। सांसद लेंगी सिरसा में दिशा की बैठक सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा 6 मार्च को सुबह 10 बजे सिरसा के पंचायत भवन में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इससे पहले वह सुबह 9:30 बजे पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, सिरसा में आमजन से मुलाकात कर लोगों की समस्याएं सुनेंगी। बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसमें जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा समिति के सदस्य उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा कुमारी सैलजा 6 मार्च को दोपहर 3 बजे जींद के डीआरडीए हॉल में आयोजित दिशा की बैठक की अध्यक्षता करेंगी तथा 7 मार्च को सुबह 11 बजे जिला बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोर्ट परिसर, बार रूम, फतेहाबाद पहुंचेंगी।

गरीबों का हक छीना जा रहा? बीपीएल कार्ड कटौती पर कुमारी सैलजा का हमला

चंडीगढ़ सिरसा सांसद पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बीपीएल राशन कार्डों की संख्या में आई भारी कमी को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार के जो आंकड़े सामने आए हैं वे चिंताजनक हैं और यह गरीबों के साथ अन्याय का संकेत देते हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि जनवरी 2024 में प्रदेश में 44.99 लाख बीपीएल राशन कार्ड थे, जो मार्च 2025 में बढ़कर 52.50 लाख हो गए, लेकिन जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर 39.88 लाख रह गई। उन्होंने कहा कि लगभग 24 प्रतिशत की यह कमी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। क्या वास्तव में प्रदेश में गरीबी इतनी तेजी से कम हुई है या फिर पात्र परिवारों को विभिन्न प्रशासनिक कारणों से सूची से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एससी, एसटी, बीसी वर्गों, दिहाड़ी मजदूरों, विधवाओं और अनाथों के राशन कार्ड परिवार पहचान पत्र में कथित त्रुटियों के आधार पर काटे गए हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि गरीब परिवारों के लिए राशन जीवन का आधार है और यदि पात्र लोगों को योजनाओं से वंचित किया गया है तो यह उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने प्रदेश सरकार से बीपीएल राशन कार्डों में हुई कटौती पर श्वेत पत्र जारी करने, अपील के बाद बहाल किए गए कार्डों का विवरण सार्वजनिक करने तथा पीपीपी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन पात्र परिवारों के कार्ड गलत डेटा के कारण कटे हैं, उनकी शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जानी चाहिए। सफाई पर लाखों खर्च, ज़मीन पर कूड़ा: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने फतेहाबाद में सफाई व्यवस्था को लेकर सामने आए मामले पर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। कुमारी सैलजा ने कहा कि जनता के धन का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यदि कागजों में खर्च दिखाया गया है और जमीनी स्तर पर परिणाम नजर नहीं आ रहे तो इसकी निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए। कुमारी सैलजा ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने उपायुक्त को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए थे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो।

राष्ट्रीय हित सबसे पहले: कुमारी सैलजा ने भारत-अमेरिका समझौते में स्पष्टता की मांग की

चंडीगढ़ सिरसा की सांसद, कांग्रेस की महासचिव व पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा ने अमेरिका के साथ घोषित व्यापार समझौते के संयुक्त वक्तव्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस समझौते के कुछ प्रावधान भारतीय किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों और घरेलू उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति में खड़ा कर सकते हैं। आज मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि अमेरिकी कृषि, खाद्य और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाज़ार को व्यापक रूप से खोला जाता है, जबकि भारतीय निर्यात पर उच्च टैरिफ (शुल्क) और अन्य गैर-शुल्क बाधाएँ बनी रहती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव देश की कृषि अर्थव्यवस्था, कुटीर उद्योगों और रोजगार पर पड़ सकता है। कुमारी सैलजा ने कहा कि विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, जूते, रबड़, रसायन तथा कारीगर उत्पाद जैसे क्षेत्र, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, इस प्रकार की असमान शर्तों से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि इन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए समझौते में कौन-कौन से ठोस सुरक्षा प्रावधान (सेफगार्ड) शामिल किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आने वाले वर्षों में अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद का कोई प्रावधान है, तो यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने की नीति के साथ किस प्रकार संतुलित होगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौता समानता, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित के आधार पर होना चाहिए। संसद और देश की जनता के समक्ष इस व्यापार समझौते का पूर्ण विवरण रखा जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों और लघु उद्योगों के हितों से किसी प्रकार का समझौता न हो। कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस विषय पर विस्तृत स्पष्टीकरण दे और यह बताए कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए कौन-कौन से ठोस प्रावधान शामिल किए गए हैं।

कुमारी सैलजा का सरकार पर हमला: लाडो लक्ष्मी योजना में संशोधन से महिलाओं का भरोसा टूटा

चंडीगढ़ कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा की सांसद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार द्वारा लाडो लक्ष्मी योजना में बार-बार किए जा रहे बदलावों को महिलाओं के साथ खुला धोखा बताया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने प्रदेश की सभी महिलाओं को 2100 प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के लगभग एक वर्ष बाद भी सरकार अपने वादे से लगातार पीछे हटती जा रही है। पहले यह शर्त लगाई गई कि जिन महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद तीन-तीन महीने की किस्तों में राशि डालने की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि इसके पश्चात सरकार ने योजना में फिर बदलाव करते हुए यह प्रावधान कर दिया कि केवल बीपीएल परिवारों से संबंधित महिलाओं को ही लाभ मिलेगा और वह भी तब, जब उनके बच्चे 10वीं व 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाएंगे। इस स्थिति में 1100 नकद और 1000 की एफडी कराने की बात कही गई। अब तीसरी बार योजना में परिवर्तन करते हुए सरकार ने सभी महिलाओं को मात्र 1100 देने और शेष 1000 की दीर्घकालीन एफडी करने की घोषणा कर दी है। कुमारी सैलजा ने कहा कि बार-बार नियम बदलना यह साबित करता है कि सरकार की नीयत महिलाओं को सशक्त करने की नहीं, बल्कि उन्हें भ्रमित करने की है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करना और बाद में शर्तों में उलझाकर लाभ से वंचित करना महिलाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार बिना किसी शर्त के अपने मूल वादे को पूरा करे और प्रदेश की सभी महिलाओं को प्रतिमाह 2100 की राशि देना तुरंत शुरू करे। कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष करती रहेगी। सांसद सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर नई दरें लागू करना जनविरोधी कदम है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब महंगाई पहले से ही आम आदमी की कमर तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुपचाप 1 अप्रैल 2025 से नई दरें लागू कर दीं, जिससे मध्यम वर्ग, गरीब परिवार, बुजुर्ग, किसान और छोटे दुकानदार सबसे अधिक प्रभावित होंगे। घरेलू श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के उपभोक्ताओं पर फिक्स्ड चार्ज और प्रति यूनिट दरों में की गई बढ़ोतरी पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय सस्ती बिजली और राहत के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने जनता से किए अपने वादे भुला दिए। बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को महंगा करना सीधे-सीधे जनता के साथ विश्वासघात है। कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि हरियाणा में पहले ही बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। ऐसे में बिजली बिल बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है। सरकार को चाहिए था कि वह बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली सुधारे, लाइन लॉस कम करे और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए, न कि उसकी कीमत जनता से वसूले। उन्होंने मांग की कि घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ाई गई बिजली दरें तुरंत वापस ली जाएं। फिक्स्ड चार्ज समाप्त किया जाए। गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए सब्सिडी बढ़ाई जाए।

किसानों के करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम लंबित, सरकार की लापरवाही से बढ़ा संकट : कुमारी सैलजा

चंडीगढ़ सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मिलने वाला मुआवजा अब तक नहीं मिल पाना अत्यंत गंभीर विषय है। किसानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपए के बीमा क्लेम वर्षों से लंबित हैं, जिससे किसान आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, लेकिन उस समय न तो पर्याप्त प्रशासनिक सहायता मिली और न ही समय पर सर्वे किए गए। अब मुआवज़े के समय फसल कटाई प्रयोग, तकनीकी आपत्तियों और बीमा कंपनियों की प्रक्रियाओं के नाम पर किसानों को उनके हक़ से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के अनुसार भिवानी, सिरसा, नूंह और चरखी दादरी जैसे जिलों में बड़ी संख्या में किसानों के बीमा दावे लंबित हैं। कई किसानों ने बताया कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया और बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि किसान किसी प्रकार की रियायत नहीं, बल्कि अपने वैध अधिकार की मांग कर रहा है। प्राकृतिक आपदा किसान के नियंत्रण से बाहर होती है, ऐसे में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह संवेदनशीलता के साथ राहत पहुंचाए। सांसद ने प्रशासन से मांग की कि लंबित फसल बीमा क्लेम की तत्काल समीक्षा की जाए, तकनीकी कारणों से रोके गए मामलों को सरल प्रक्रिया के तहत निपटाया जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।

‘धान घोटाले ने खोली सरकार की पोल’, पारदर्शिता पर बड़ा सवाल : कुमारी सैलजा

सिरसा  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में फर्जी गेट पास काटकर मंडियों में धान आए बिना ही बेच डाला। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से धान लाकर यहां के किसानों के नाम से बेचा गया। इस धान घोटाले ने प्रदेश की भाजपा सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए है जबकि सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन और प्रशासन का दावा करती आ रही है। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।  मीडिया को जारी बयान में कहा है कि हरियाणा में अनाज खरीदी प्रणाली और सरकारी वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठ रहे गंभीर आरोपों ने पूरे प्रदेश के किसान समुदाय को गहरी चिंता में डाल दिया है। धान और अन्य फसलों की सरकारी खरीद में व्यापक अनियमितताओं, कागज़ी खरीद के असामान्य रूप से बढ़े आंकड़ों तथा बिचौलियों और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की खबरों ने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सरकारी खरीद व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा और सम्मान देना है, न कि उनके हक़ की अनदेखी करके उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव में धकेलना। बाढ़ से हुए फसल नुकसान के बावजूद कागज़ी खरीद में भारी वृद्धि के आरोप प्रदेश के वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करते हैं, जो चिंताजनक है। ऐसे परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है कि सरकार किसी भी प्रकार की लीपापोती से दूर रहते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनियमितताओं के लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार कौन लोग हैं।  जांच केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन सभी निर्णयकर्ताओं और उच्च स्तर के जिम्मेदार व्यक्तियों को भी शामिल करना चाहिए जिनकी भूमिका ने इस स्थिति को जन्म दिया। किसानों से किए गए एमएसपी वादों की सत्यता और सरकारी खरीद के वास्तविक आंकड़ों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें यह भरोसा हो सके कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए ईमानदारी से कार्य कर रही है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि किसानों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। हरियाणा के किसान आज न्याय की अपेक्षा कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या शोषण को छिपाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे।  कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी। सांसद ने कहा कि धान घोटाले ने साबित कर दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार पर कोई अंकुश नहीं लगा पाई है बल्कि अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है। हरियाणा में फर्जी गेट पास काटकर मंडियों में धान आए बिना ही धान बेच डाला। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से धान लाकर यहां के किसानों के नाम से बेचा गया। धान घोटाला यमुनानगर में सर्वाधिक लगभग 80 करोड़ रुपये और करनाल में 20 करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।

चिकित्सा खर्च में बढ़ोतरी पर सवाल, कुमारी सैलजा ने सरकार को घेरा

चंडीगढ़ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि सरकार की उपेक्षा और अव्यवस्थित प्रणाली के कारण गरीब वर्ग विशेष रूप से ग्रीन कार्ड धारक तथा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मरीज भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण आमजन को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जबकि उन्हें नि:शुल्क और सहज स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए थीं। सरकारी अस्पतालों में कही आर्थोपेडिक सर्जन नहीं है तो कहीं पर बवासीर, हर्निया और अपेंडिक्स के ऑपरेशन की सुविधा तक नहीं है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार ने खर्च घटाने और नीतिगत सुधार के नाम पर जो कदम उठाए हैं, वे वास्तव में गरीब और मध्यम वर्ग की पीड़ा बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं।  उन्होंने कहा कि सिरसा सहित राज्य के अधिकांश जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं, अनेक विभागों में तकनीशियन नहीं हैं, और आवश्यक उपकरण या तो अनुपलब्ध हैं या खराब अवस्था में पड़े हैं। स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया है। गरीब मरीज अपने अधिकार के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि आयुष्मान योजना का मूल उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क उपचार प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह योजना अपने मकसद से भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि कई अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से कतराते हैं, जबकि सरकार की ओर से उनके बकाया भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया। सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि सभी सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, आवश्यक मशीनों की उपलब्धता, और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक तुरंत सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिला अस्पतालों में एक अलग ग्रीन हेल्प डेस्क बनाई जाए, जहां आयुष्मान और ग्रीन कार्ड धारक मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर पर्ची, परामर्श और उपचार की सुविधा दी जा सके। कुमारी सैलजा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़कों तक उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए लड़ी जाएगी। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और गरीबों को उनका हक दिलाकर रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गरीब मरीजों से हो रहा है मजाक सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ 30 लाख गरीब लोग आयुष्मान और चिरायु योजना के दायरे में आते हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अनेक रोगों के उपचार को प्राइवेट अस्पतालों की सूची से हटाते हुए कहा है कि इन रोगों का उपचार और ऑपरेशन की सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करवाई जाएगी। सरकार को सबसे पहले सरकारी अस्पताल में सभी प्रबंध करने के बाद ही प्राइवेट अस्पतालों की सूची से रोगों को हटाना चाहिए था पर एक ओर सूची से रोगों का उपचार और ऑपरेशन बंद कर दिए तो दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं है। कूल्हे और घुटने बदलने की सुविधा बहुत कम अस्पतालों में है, कहा आर्थोपेडिक सर्जन है को ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है, इतना ही नहीं अनेक सरकार अस्पताल तो ऐसे है जहां पर बवासीर, हर्निया और अपेंडिक्स के ऑपरेशन तक की सुविधा नहीं है।