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माघ पूर्णिमा 2026: कब है पावन तिथि? स्नान-दान के शुभ योग जानें

 नई दिल्ली Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण और विशेष कहलाती है. शास्त्रों की मानें तो, पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रदेवता माने जाते हैं. इस दिन सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने की स्थिति में होते हैं, जिससे चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है और समसप्तक राजयोग बनता है. इसी कारण पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस समय वातावरण और जल तत्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका लाभ पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करने से मिलता है. यदि किसी कारणवश नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है. शास्त्रों में बताया गया है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान, ध्यान, जप और तप करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है. माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और स्नान-दान मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी. स्नान-दान का मुहूर्त- शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त होता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसके बाद भी स्नान किया जा सकता है लेकिन, ब्रह्म मुहूर्त के बाद के स्नान को राक्षस स्नान कहा जाता है. शुभ योग और पूजा विधि  इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग और रवि पुष्य योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. रवि पुष्य योग सुबह 7 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसे बेहद शुभ माना गया है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें. 'ऊं नमो नारायण' मंत्र का जप करें और सूर्य भगवान की विधिपूर्वक पूजा करें. जल में काले तिल डालकर पितरों के लिए तर्पण करना भी शुभ माना जाता है. माघ पूर्णिमा पर देवताओं का आगमन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी लोक पर विचरण करने आते हैं. इस दिन गंगा स्नान और दान करने से देवगण प्रसन्न होते हैं और साधक को शुभ फल प्रदान करते हैं. विशेष रूप से प्रयागराज में संगम स्नान को अत्यंत फलदायी माना गया है. पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का महत्व माघ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन फल-जल पर उपवास रखने का विधान है. यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो एक समय सात्विक भोजन किया जा सकता है. चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करना भी शुभ फल देता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माघ माह में श्रीहरि विष्णु गंगा नदी में वास करते हैं, इसलिए गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. ग्रह शांति और संतान सुख के उपाय जो लोग ग्रह दोष या गृह शांति चाहते हैं, वे माघ पूर्णिमा के दिन संबंधित ग्रहों के अनुसार दान करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, संतान सुख की कामना रखने वाले दंपती इस दिन विशेष दान, हवन और मंत्र जप कर लाभ पा सकते हैं.

भ्रम में हैं श्रद्धालु: माघ पूर्णिमा कब है—1 या 2 फरवरी, यहां जानें स्नान का शुभ समय

श्रद्धालुओं के लिए माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. हर साल माघ पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा 2026 में 1 फरवरी को है या 2 फरवरी को, साथ ही गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का धार्मिक महत्व कब है माघ पूर्णिमा? पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि और समय कुछ इस प्रकार है. पूर्णिमा तिथि शुरू: 01 फरवरी 2026 (रविवार) सुबह 05:52 बजे से. पूर्णिमा तिथि का समापन: 02 फरवरी 2026 (सोमवार) सुबह 03:38 बजे होगा. उदया तिथि का महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसी दिन व्रत और स्नान का महत्व होता है. चूंकि 01 फरवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी. गंगा स्नान और पूजा के शुभ मुहूर्त माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष समय बताए गए हैं. ब्रह्म मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): सुबह 05:24 से 06:17 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, इस समय स्नान करना अमृत के समान फलदायी माना गया है. अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 मिनट तक रहेगा. यदि आप सुबह जल्दी स्नान नहीं कर पाए हैं, तो इस शुभ समय में भी गंगा स्नान और दान-पुण्य किया जा सकता है. माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व माघ पूर्णिमा को लेकर मान्यता है कि इस दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं. इस दिन किए गए कुछ कार्यों का विशेष फल मिलता है. पुण्य की प्राप्ति: इस दिन दान (तिल, कंबल, घी और अन्न) करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है. पितृ तर्पण: माघ पूर्णिमा पर पितरों के निमित्त तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. कल्पवास का समापन: प्रयागराज में एक महीने से चल रहे कल्पवास की पूर्णाहुति भी इसी दिन होती है. कैसे करें पूजा? सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की धूप-दीप से पूजा करें. सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना इस दिन बहुत ही शुभ माना जाता है. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें.