samacharsecretary.com

शनि दोष से मुक्ति चाहते हैं? मकर संक्रांति पर इन दानों से होंगे शनि देव प्रसन्न

भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर हर वर्ष माघ माह में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर सूर्य देव के पुत्र शनि देव की राशि है. मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा समेत अन्य पावन नदियों में स्नान और फिर दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. चूंकि, मकर संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व है, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है. धार्मिक मत है कि सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. साथ ही आरोग्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है. मकर संक्रांति के दिन अगर आप सूर्य देव को प्रसन्न और न्याय के देवता शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन तीन चीजों का अवश्य दान करें. इन चीजों का दान करने से सौ गुना फल प्राप्त होता है, तो आइए इन चीजों के बारे में जानते हैं. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए मकर संक्रांंति पर करें ये चीजें दान काले तिल मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान, पूजा, जप-तप के बाद काले तिल का दान अवश्य करें. मान्यता है कि इस दिन काले तिल का दान करने से कुंडली में शनि मजबूत होते हैं. साथ ही शनि देव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन मंदिर में भी काले तिल दान किए जा सकते हैं. घी मकर संक्रांति के दिन पूजा-पाठ के बाद घी का दान अवश्य करें. घी मिश्रित खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन कराएं. उड़द की दाल मिश्रित खिचड़ी बनाएं. ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. काले कंबल मकर संक्रांति के दिन पूजा, जप-तप के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को काले कंबल का दान करें. माना जाता है कि ऐसा करने से शनि देव की कृपा से करियर और कारोबार में मनचाही सफलता मिलती है.

मकर संक्रांति पुण्यकाल टाइमिंग: स्नान-पूजा का सही समय क्या है? एक क्लिक में पूरी जानकारी

सनातन परंपरा में मकर संक्रांति को आध्यात्मिक शुद्धि और नई ऊर्जा का पर्व माना जाता है, जब स्नान, दान, ध्यान और सूर्य आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा. इसी दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, जिससे शुभ कार्यों और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर किए गए पुण्य कर्म पूरे वर्ष सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं. यही कारण है कि इस दिन के स्नान, पूजा और ध्यान के शुभ मुहूर्त को जानने की जिज्ञासा श्रद्धालुओं में विशेष रूप से बनी रहती है. मकर संक्रांति पर पुण्यकाल कब लगता है? शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि जिस क्षण सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, उसी समय से पुण्यकाल आरंभ हो जाता है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, मकर संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहता है. सामान्य रूप से यह अवधि लगभग 10 से 11 घंटे की मानी जाती है, हालांकि स्थान विशेष के अनुसार इसमें हल्का अंतर संभव है. इस पुण्यकाल के दौरान किया गया स्नान, दान, जप और पूजा विशेष फल प्रदान करते हैं. मान्यता है कि इस समय किए गए धार्मिक कर्म न केवल वर्तमान जीवन को शुभ बनाते हैं, बल्कि जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय कर आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं. मकर संक्रांति का पुण्यकाल (लगभग)     पुण्यकाल का आरंभ- प्रातः 07:15 बजे रहेगा.     पुण्यकाल की समाप्ति- सायं 05:45 बजे रहेगा. स्नान और ध्यान का शुभ समय क्या है? मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक स्नान करना सर्वोत्तम और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस पावन समय में किया गया स्नान तन के साथ-साथ मन और आत्मा की भी शुद्धि करता है. मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है. यदि किसी कारणवश गंगा या अन्य तीर्थों में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्य प्रदान करता है. स्नान के पश्चात शांत और एकाग्र मन से सूर्यदेव का ध्यान करना, गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी माना गया है. ध्यान और जप से मानसिक तनाव कम होता है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है. पूजा, अर्घ्य और दान से मिलता है पूर्ण पुण्य मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद सूर्यदेव की पूजा और अर्घ्य अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना विशेष पुण्य प्रदान करता है. अर्घ्य अर्पित करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्य मंत्रों का जप करना शुभ माना गया है. इसके साथ ही इस दिन तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और भोजन का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर श्रद्धा, नियम और विधि से किया गया स्नान, ध्यान और सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, आर्थिक समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे पूरे वर्ष सुख और संतुलन बना रहता है.

13 जनवरी को शुक्र का गोचर, इन 3 राशियों के लिए रह सकती है मुश्किलें, जानें क्या करें

 द्रिक पंचांग के अनुसार, जनवरी 2026 में शुक्र ग्रह अपना पहला बड़ा गोचर करने जा रहे हैं. 13 जनवरी को शुक्र धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. चूंकि शुक्र को धन, ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और संबंधों का कारक माना जाता है, इसलिए उनका यह राशि परिवर्तन सभी राशियों के जीवन को प्रभावित करेगा. इस गोचर का असर हर किसी के लिए समान नहीं रहेगा. जहां कुछ लोगों को इससे सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं, वहीं तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. इस दौरान अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, पैसों की कमी महसूस हो सकती है और नौकरी या कारोबार में नुकसान की स्थिति भी बन सकती है. ऐसे में निवेश से जुड़े फैसलों और खर्चो को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होगा. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर सावधानी भरा समय लेकर आ सकता है. धन से जुड़े मामलों में रुकावटें महसूस हो सकती हैं. अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है. निवेश या बड़े आर्थिक फैसले लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार जरूरी रहेगा. नौकरी या व्यापार में लाभ की गति धीमी रह सकती है, वहीं कुछ मामलों में नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है. पारिवारिक माहौल में भी तनाव की स्थिति बन सकती है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ेगा. इस समय संयम बनाए रखना. जल्दबाजी से बचना फायदेमंद रहेगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर आर्थिक उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है. आय और खर्च के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है. कार्यक्षेत्र में देरी, रुकावट या विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मन थोड़ा परेशान रह सकता है. रिश्तों में भी छोटी-छोटी गलतफहमियां उभर सकती हैं. इस दौरान फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और नए निवेश से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा. आत्मविश्वास बनाए रखें और भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें. परिवार के वरिष्ठ सदस्यों या करीबी लोगों से सलाह लेना आपको सही दिशा दिखा सकता है. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए यह गोचर आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर सतर्क रहना होगा. अचानक पैसों की कमी हो सकती है. पहले से बनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है. नौकरी और व्यापार में अपेक्षित परिणाम न मिलने से निराशा हो सकती है, इसलिए धैर्य रखना बेहद जरूरी होगा. स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें, खासकर तनाव और थकान से बचना जरूरी है. इस समय बड़े खर्च, उधार या नए निवेश से दूरी बनाए रखना समझदारी होगी.

मकर संक्रांति विशेष: सूर्य देव को अर्घ्य देते समय न करें ये भूल, वरना नहीं मिलेगा शुभ फल

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘उत्तरायण’ की शुरुआत माना जाता है. इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के साथ-साथ सूर्य उपासना का विधान है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और कष्टों का निवारण होता है. लेकिन, अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है. सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर साफ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें. तांबे के लोटे का प्रयोग: सूर्य को जल देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही उपयोग करें. अन्य धातुओं (जैसे प्लास्टिक या स्टील) का उपयोग वर्जित है. जल में मिलाएं ये चीजें: लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल फूल, कुमकुम, अक्षत (सादे चावल) और थोड़ा काला तिल जरूर डालें. मकर संक्रांति पर तिल का विशेष महत्व है. अर्घ्य देने की मुद्रा: दोनों हाथों से लोटे को पकड़कर अपने सिर के ऊपर ले जाएं और धीरे-धीरे जल की धार छोड़ें. दृष्टि का ध्यान: जल गिरते समय आपकी दृष्टि जल की धार के बीच से सूर्य देव पर होनी चाहिए. इससे निकलने वाली किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं. परिक्रमा: अर्घ्य देने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर तीन बार क्लॉकवाइज (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें. भूलकर भी न करें ये गलतियां ! पैरों में जल गिरना: सबसे बड़ी गलती यह होती है कि अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर पड़ते हैं. इससे बचने के लिए किसी गमले या बड़े बर्तन में जल अर्पित करें और बाद में उसे पौधों में डाल दें. देर से अर्घ्य देना: मकर संक्रांति पर दोपहर में अर्घ्य देना लाभकारी नहीं माना जाता. कोशिश करें कि सूर्योदय के एक घंटे के भीतर ही जल अर्पित कर दें. बिना जूते-चप्पल के रहें: अर्घ्य देते समय पैर नंगे होने चाहिए. जूते या चप्पल पहनकर सूर्य देव को जल देना अपमानजनक माना जाता है. मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य उपासना, पुण्य संचय और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है. यह पर्व उस शुभ क्षण का प्रतीक है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं.धार्मिक दृष्टि से इसे देवताओं का दिन और सकारात्मक ऊर्जा का आरंभ माना गया है. भगवान सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है. इस दिन खिचड़ी का दान करना और तिल-गुड़ का सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है.