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मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य

हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस साल ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान भी किया जाता है. इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खचड़ी बनाई और खाई जाती है. साथ ही इसका दान भी किया जाता है. ये एक पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी याद आ जाती है, लेकिन इस परंपरा के पीछे सिर्फ स्वाद भर नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना है. इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी है. आइए जानते हैं. ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसे एक शुभ परिवर्तन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है, उससे शुभ फल प्राप्त होते हैं. खिचड़ी में पड़ने वाला चावल, दाल और घी सात्विक आहार है. ये सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. जीवन में स्थिरता आती है. यही वजह है कि इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है. ये भी है एक धार्मिक मान्यता धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जोड़ी जाती है. बताया जाता है कि एक समय कठिन हालातों और आक्रमणों की वजह से योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे. ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने सभी को सलाह दी कि दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाया जाए. यह भोजन कम समय में बन जाता था और लंबे समय तक उर्जा देता था. धीरे धीरे इस साधारण और पौष्टिक भोजन की चर्चा साधु संतों से समाज तक पहुंची. इसी के बाद इसे मकर संक्रांति के पर्व से जोड़ दिया गया. तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना शुभ कहा जाने लगा.

मकर संक्रांति पर सीएम विष्णु देव साय की अपील—पतंग उत्सव मनाएं सुरक्षित और पारंपरिक तरीके से

चीनी मांझा प्रतिबंधित, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों से पतंगों के इस उल्लासपूर्ण पर्व को सुरक्षित, जिम्मेदार और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि त्योहार के आसपास चीनी मांझा से होने वाली दुर्घटनाओं की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं, इसलिए इसका प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है और इसका उपयोग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, पक्षियों और राहगीरों के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए। मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देशित किया है कि चीनी मांझा के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिकों को इसके खतरों और कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर परंपरा, आनंद और सुरक्षा—तीनों का संतुलन बनाए रखें। उन्होंने सभी को मिलकर इस पर्व को हर्ष, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ मनाने की अपील की।

मकर संक्रांति पर सूर्य-बुध की युति, बुधादित्य राजयोग से इन राशियों के खुलेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी बड़े ग्रह किसी न किसी पर्व या त्योहार पर कोई न कोई शुभ योग का निर्माण करते हैं, जिसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है. इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी. विशेष बात यह है कि इसी दिन सूर्य और बुध 100 साल बाद एक साथ मकर राशि में आकर बुधादित्य राजयोग का निर्माण करेंगे. यह योग कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है. मान्यतानुसार, इस राजयोग से अचानक धन लाभ, तरक्की और भाग्य का साथ प्राप्त हो सकता है.  क्या है बुधादित्य राजयोग?  जब सूर्य और बुध एक ही राशि में एक साथ विराजमान होते हैं, तब बुधादित्य राजयोग बनता है. ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, नेतृत्व और सम्मान का कारक माना जाता है, जबकि बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और निर्णय क्षमता का प्रतीक माना जाता है. इन दोनों ग्रहों की युति से व्यक्ति में आत्मविश्वास और सफलता पाने की क्षमता बढ़ती है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन बनने जा रहे बुधादित्य राजयोग से किन राशियों की किस्मत चमकेगी.  मेष राशि बुधादित्य राजयोग मेष राशि वालों भाग्य भाव में बन रहा है, जो किस्मत को मजबूत करता है. इस समय सभी अधूरे काम पूरे हो सकते हैं. नौकरी-व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छे मौके मिल सकते हैं. किसी विदेश यात्रा के योग भी बन रहे हैं, जो लाभकारी साबित होगी. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. परिवार में भी खुशियों का आगमन होगा. धार्मिक या शुभ कार्यों में शामिल होने का अवसर मिलेगा. यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने का होगा. नई दिशा में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल रहेगा.  कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए बुधादित्य राजयोग सुख-सुविधा से जुड़े भाव में बन रहा है. इस कारण घर, वाहन या संपत्ति से जुड़ा कोई अच्छा  खबर मिल सकती है. पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी. अपनों के साथ अच्छा समय बिताएंगे. आप कोई नया काम या निवेश शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय रहेगा. मानसिक तनाव कम होगा. फैसले लेने में आसानी होगी. परिवार के साथ रिश्ते मजबूत होंगे. उनके सहयोग से लाभ मिलने की संभावना है.  कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए बुधादित्य राजयोग लाभ देने वाला साबित हो सकता है. यह योग आपकी कुंडली के लाभ भाव में बन रहा है, जिससे आय के नए रास्ते खुल सकते हैं. इस दौरान आपकी कमाई बढ़ सकती है. पुराने निवेश से भी फायदा मिलने के योग हैं. दोस्तों और रिश्तेदारों के सहयोग से काम आगे बढ़ेगा. नई पहचान और संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकते हैं. शेयर बाजार या किसी जोखिम वाले निवेश में हैं, तो सोच-समझकर किया गया फैसला फायदा दिलाएगा. मानसिक रूप से संतुलित रहना आपके लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट रहेगा. 

मकर संक्रांति पर ग्रह दोषों से छुटकारा पाने काले तिल के करें 6 उपाय!

आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म के बड़े पर्वों में से एक है। ज्योतिष गणना के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देवगुरु बृहस्पति की धनु राशि से निकल कर अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इस दिन के बाद से उनकी चाल उत्तर की तरफ हो जाती है। इसे ही सूर्य का उत्तरायण कहते हैं। यह दिन दान, पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खास माना जाता है। खासकर इस दिन काले तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन काले तिल का दान और इसका सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन तिल से जुड़े उपाय करने से व्यक्ति की किस्मत भी बदल सकती है। मकर संक्रांति के दिन अगर तिल से जुड़ा कुछ खास उपाय किया जाए तो शनि दोष, सूर्य दोष और पितृ दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। चलिए इन उपायों के बारे में जानते हैं। शनि मंदिर में तिल का दीया जलाएं मकर संक्रांति के दिन शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष में राहत मिलती है। इस दिन स्नान करने के बाद तिल का दान भी अच्छा माना जाता है। गंगाजल में मिलाकर स्नान करें मकर संक्रांति के दिन भिगोए हुए काले तिल को गंगा जल में मिलाएं। इसके बाद इस जल से स्नान करना चाहिए। इस उपाय से रोग-दोष दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है व आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। सूर्य को अर्घ्य दें मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में काले तिल और फूलों के साथ अक्षत डालकर भगवान सूर्य के मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं मकर संक्रांति के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और पूर्वजों का स्मरण करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और दोष का प्रभाव भी कम होता है। मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न मकर संक्रांति के दिन काला तिल और गुड़ का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को ठंड कपड़े देने से भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन आगमन होता है।

संक्रांति के बाद बड़ा बदलाव, मंगल देव इन राशियों को देंगे सफलता और ऊर्जा

मकर संक्रांति के बाद ग्रहों के सेनापति मंगल राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल का गोचर सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यह गोचर कुछ राशियों के लिए भाग्योदय का संकेत देगा, वहीं कुछ को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। मंगल गोचर 2026 की तिथि और समय ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार— 16 जनवरी 2026, भोर 4 बजकर 27 मिनट पर मंगल ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल 23 फरवरी 2026, दोपहर 11 बजकर 49 मिनट तक मकर राशि में गोचर करेंगे। इसके बाद मंगल कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। मकर राशि मंगल की उच्च राशि मानी जाती है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव विशेष रूप से शक्तिशाली रहेगा। मंगल गोचर 2026 का सभी राशियों पर प्रभाव मेष राशि मंगल आपके दसवें भाव में गोचर करेगा, जो करियर और कर्म का भाव है। कार्यक्षेत्र में जबरदस्त उन्नति प्रशासनिक कार्यों में सफलता पिता के करियर में बदलाव के योग उपाय: दूध उबालते समय उसे गिरने न दें। वृष राशि मंगल आपके नौवें भाव में रहेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा बड़े भाई से लाभ चिकित्सा, कृषि और शस्त्र से जुड़े व्यवसाय में मुनाफा उपाय: भाइयों की मदद जरूर करें। मिथुन राशि मंगल आठवें भाव में गोचर करेगा। जीवन सुखमय रहेगा अस्थायी मांगलिक दोष बनेगा उपाय: तवा गर्म होने पर पानी के छींटे मारकर रोटी सेंकें। कर्क राशि मंगल सातवें भाव में रहेगा। वैवाहिक जीवन में संतुलन जरूरी अस्थायी मांगलिक दोष उपाय: 23 फरवरी तक बांस से बनी वस्तुएं घर न लाएं। सिंह राशि मंगल छठे भाव में गोचर करेगा। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भाई-बहनों और मित्रों को लाभ उपाय: मंगलवार को भाई समान व्यक्ति को उपहार दें। कन्या राशि मंगल पांचवें भाव में रहेगा। संतान सुख बुद्धि और विवेक में वृद्धि शिक्षा में सफलता उपाय: रात में सिरहाने पानी रखें और बच्चों को दूध दान करें। तुला राशि मंगल चौथे भाव में गोचर करेगा। भूमि, भवन और वाहन का सुख माता का सहयोग अस्थायी मांगलिक दोष उपाय: सुबह उठकर कुल्ला करें। वृश्चिक राशि मंगल तीसरे भाव में रहेगा। पराक्रम में वृद्धि भाई-बहनों से सहयोग ससुराल पक्ष से लाभ उपाय: मंदिर में शहद का दान करें। धनु राशि मंगल दूसरे भाव में गोचर करेगा। धन लाभ होगा लेकिन बचत कठिन संतान सुख मिलेगा  उपाय: भाइयों की मदद करते रहें। मकर राशि मंगल लग्न भाव में रहेगा। स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में वृद्धि राजनीति और व्यापार में लाभ अस्थायी मांगलिक दोष उपाय: मंदिर में कपूर या दही का दान करें। कुंभ राशि मंगल बारहवें भाव में रहेगा। खर्च बढ़ सकता है लेकिन धन की कमी नहीं शय्या सुख में वृद्धि अस्थायी मांगलिक दोष उपाय: कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं और खाकी रंग की टोपी पहनें। मीन राशि मंगल ग्यारहवें भाव में गोचर करेगा। आय में वृद्धि इच्छाओं की पूर्ति आध्यात्मिक झुकाव उपाय: बेटी के ससुराल पक्ष को चादर भेंट करें। मंगल गोचर 2026: क्या कहता है ज्योतिष? मंगल का यह गोचर कई राशियों के लिए सफलता, साहस और धन वृद्धि लेकर आएगा। वहीं जिन राशियों पर अस्थायी मांगलिक दोष बन रहा है, उन्हें उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहिए।

मकर संक्रांति के बाद पंचग्रही योग से कुछ राशियों की बढ़ेगी परेशानी

नए साल यानी 2026 की महीना चल रहा है। इस साल ग्रहों की चाल में कई बदलाव होंगे। एक ऐसा ही बदलाव मकर संक्रांति के कुछ दिनों बाद होगा। इस दौरान पांच ग्रह मकर राशि से गुजरेंगे। इस दौरान पंचग्रही राजयोग का निर्माण होगा। ग्रहों की इस परिवर्तन की वजह से कई राशियों की जिंदगी में बहुत सारे बदलाव लाएंगे। हालांकि कुछ राशियों की परेशानियां भी बढ़ेगी। चलिए जानते हैं कि मकर संक्रांति कब है और किन राशियों पर क्या असर पड़ेगा। पंचांग के मुताबिक इस साल यानी 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस तारीख को धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश दोपहर 3:07 बजे हो रहा है। वहीं, मकर संक्रांति के कुछ दिन बाद मकर राशि में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा की युति से दुर्लभ पंचग्रही राजयोग बन रहा है। मकर राशि को सबसे अधिक लाभ इस शक्तिशाली योग का सबसे अधिक लाभ मकर राशि को होगा। इससे उनके करियर, धन, प्रतिष्ठा और पारिवारिक सुख में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही अचानक से धन की प्राप्ति हो सकती है। कुंभ राशि मकर संक्रांति के बाद पंचग्रही योग कुंभ राशि के जातकों के लिए घातक साबित हो सकता है। वर्तमान में राहु भी इसी राशि में गोचर कर रहा है। ऐसे में पंचग्रही योग का निर्माण आपके जीवन में कई बड़े बदलाव ला सकता है। इस समय आपके व्यक्तिगत संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और अपने करीबी लोगों, यहां तक कि माता-पिता के साथ भी मतभेद या बहस हो सकती है। यह समय थोड़ा कठोर रह सकता है क्योंकि यह आपको आपके अपनों का वास्तविक चेहरा दिखा सकता है। साथ ही इस अवधि में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है, क्योंकि आप मानसिक तनाव, चिंता और थकावट महसूस कर सकते हैं। आध्यात्मिक गतिविधियों जैसे ध्यान, योग, पूजा या मंत्र जाप में शामिल होना आपके लिए लाभदायक रहेगा, क्योंकि इससे मन को शांति मिलेगी और मानसिक संतुलन बना रहेगा। कर्क राशि पंचग्रही योग कर्क राशि के जातकों के लिए भी सही नहीं रहेगा। इस राशि के लोग चंद्र ग्रह द्वारा शासित होते हैं। इस दौरान नौकरी जाने की संभावना बन सकती है या व्यवसाय में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यह समय उनके लिए एक कठिन परीक्षा की तरह होगा। प्रेम संबंधों में भी परेशानियां आ सकती हैं और साथी से अलगाव या ब्रेकअप का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह क्षण आपके लिए भावनात्मक रूप से काफी कष्टदायक रहेगा। इस दौरान कर्क राशि के जातकों को चिंता, घबराहट और मानसिक तनाव की समस्या हो सकती है। इसलिए उन्हें विशेष रूप से ध्यान, योग और खुद की देखभाल पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। यदि समय रहते अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखा गया, तो मनोवैज्ञानिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। सलाह- इस दौरान सकारात्मक सोच बनाए रखें और अपने परिवार के साथ समय बिताएं।

मकर संक्रांति से पहले शुक्र देवता का मकर राशि में प्रवेश, 3 राशियों के लिए खुशियों की शुरुआत

मकर संक्रांति को उत्तर भारत में बहुत ही खास और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. जिसको बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है और उन्हें गुड़, खिचड़ी, रेवड़ी अर्पित की जाती है. पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा और इससे ठीक 1 दिन पहले शुक्र देवता गोचर करेंगे.  द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को शुक्र देवता सुबह 4 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे. जो कि बहुत ही शक्तिशाली गोचर माना जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि शुक्र के गोचर से किन राशियों का अच्छा टाइम शुरू होगा.  वृषभ मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर शुक्र का राशि परिवर्तन वृषभ राशि के जातकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आ रहा है. इस राशि परिवर्तन के प्रभाव से जिन कामों में आप पूरे मन और मेहनत से जुटेंगे, उनमें सफलता मिलने की प्रबल संभावना है. लगन और समर्पण अब साफ तौर पर परिणाम देने लगेंगे. इस दौरान निजी संबंधों में भी मधुरता देखने को मिलेगी. जीवनसाथी या करीबी लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा. आपसी तालमेल पहले से बेहतर बनेगा. स्वास्थ्य को लेकर जो चिंताएं पिछले कुछ समय से परेशान कर रही थीं, उनमें भी राहत मिलने के संकेत हैं.  तुला मकर संक्रांति पर शुक्र ग्रह का गोचर तुला राशि के लोगों के लिए शुभ संकेत दे रहा है. अगर साल 2025 में आपकी कोई मनोकामना अधूरी रह गई थी, तो अब उसके पूरे होने की संभावना बन रही है. घर-परिवार के साथ रिश्ते बेहतर होंगे. आपसी रिश्ते पहले से मजबूत होंगे. जो लोग नौकरी की तलाश में हैं, वे किसी दोस्त के साथ मिलकर नया काम शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं. सेहत के लिहाज से भी यह समय सामान्य रहेगा.  मीन मीन राशि के जातकों के लिए मकर संक्रांति बहुत ही शुभ रहेगी. धन संबंधी लाभ मिलने की संभावना है. घर की कुछ पुरानी समस्याओं से राहत भी मिलेगी. जीवनसाथी के साथ समय बिताने के मौके बढ़ेंगे. आप भविष्य की योजनाओं को बनाने में सक्रिय होंगे. संपत्ति या पुराने निवेश से मुनाफा मिलने के संकेत भी हैं. स्वास्थ्य के मामले में चिंता की जरूरत नहीं है. 

भोपाल में कर्मचारियों को मकर संक्रांति पर छुट्टी मिलने की संभावना, कलेक्टर ने भेजा शासन को प्रस्ताव

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जा सकता है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में राज्य शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो करीब 40 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को अवकाश का लाभ मिलेगा। चार स्थानीय अवकाशों का प्रस्ताव शासन के पास कलेक्टर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में मकर संक्रांति के साथ-साथ तीन अन्य महत्वपूर्ण तिथियों को भी शामिल किया गया है –  25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी 19 अक्टूबर: महानवमी 3 दिसंबर: भोपाल गैस त्रासदी बरसी इन सभी अवसरों पर स्थानीय अवकाश घोषित करने की अनुशंसा की गई है। भोपाल को साल में मिलते हैं 4 स्थानीय अवकाश राजधानी भोपाल में हर साल कुल चार स्थानीय अवकाश घोषित किए जाते हैं। वर्ष 2025 में मकर संक्रांति, रंगपंचमी, गणेश चतुर्थी और भोपाल गैस त्रासदी बरसी पर अवकाश दिया गया था। हालांकि इस बार रंगपंचमी पर अवकाश का प्रस्ताव नहीं भेजा गया, जिससे कर्मचारियों में हल्की निराशा भी देखी जा रही है। लगातार वीकेंड का फायदा, कर्मचारियों में खुशी इस बार प्रस्तावित अवकाश वाले दिन खास माने जा रहे हैं –  मकर संक्रांति: बुधवार अनंत चतुर्दशी: शुक्रवार महानवमी: सोमवार गैस त्रासदी बरसी: गुरुवार इन तारीखों में शनिवार-रविवार की बाधा नहीं होगी, जिससे कर्मचारियों को छुट्टी का पूरा लाभ मिल सकेगा। अब सभी की नजरें राज्य शासन के फैसले पर टिकी हैं। मंजूरी मिलते ही भोपाल के हजारों कर्मचारियों के चेहरे खिल उठेंगे।

मकर संक्रांति 2025: सूर्य दोष-पितृ दोष से परेशान हैं? इन उपायों से बदल सकती है किस्मत

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का बड़ा ही पावन और शुभ पर्व माना जाता है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब भी भगवान सूर्य किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस राशि के नाम से संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर राशि में जब सूर्य देव का प्रवेश होता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. इसे देश भर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. मकर संक्रांति का पर्व उत्तर दिशा की ओर सूर्य की यात्रा की शुरुआत करता है. ये पर्व हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. सूर्य देव की पूजा-उपासना की जाती है. फिर क्षमतानुसार दान कियाा जाता है. इस दिन खिचड़ी खाने की परंपरा भी है. मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग भी उड़ाई जाती है. इस दिन सूर्य दोष और पितृ दोष को शांत करने के लिए भी कुछ विशेष काम किए जाते हैं. मकर संक्रांति साल 2026 में कब है? साल 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसलिए नए साल में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन स्नान-दान का शुभ समय 03 बजकर 13 मिनट से शाम को 05 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है. मकर संक्रांति पर करें ये काम दूर होगा सूर्य दोष     मकर संक्रांति पर सूर्य दोष शांत करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.     इसके बाद सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें.     सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा गुड़ और लाल चंदन जरूर मिलाएं.     ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें. मकर संक्रांति पर करें ये काम दूर होगा पृत दोष     मकर संक्रांति के दिन पितृ दोष शांत करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें.     इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, तिल और लाल फूल डालकर अर्घ्य दें.     फिर पितरों का स्मरण करते हुए तिल, गुड़, चावल और वस्त्र का दान करें.     साथ ही गाय, कुत्ते या कौवों को भोजन कराना चाहिए. पितरों के नाम से तिल-तर्पण करें.     ॐ पितृदेवाय नमः का जाप करें.     शाम को दीपदान करें.