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नारायण साईं का तलाक और 2 करोड़ की एलिमनी: 18 साल बाद खुली असलियत

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर में फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में तलाक को मंजूरी दे दी है।कोर्ट ने नारायण साईं को पत्नी को 2 करोड़ रुपए स्थायी भरण-पोषण (एलुमनी) देने का आदेश दिया है। यह मामला करीब आठ साल तक कोर्ट में चला। कोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखने के बाद आदेश पारित किया था, जिसकी जानकारी मंगलवार को पीड़िता के वकील अनुराग गोयल ने दी। बता दें कि नारायण सांई अभी दुष्कर्म के एक मामले में सूरत जेल में बंद है। 24 मार्च को ही उसे इंदौर की फैमिली कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। 2008 में शादी, 2013 से अलग रह रहे थे याचिका के मुताबिक, जानकी और नारायण साईं की शादी 2008 में हुई थी, लेकिन 2013 से दोनों अलग रह रहे हैं। पत्नी ने पति पर परित्याग का आरोप लगाया और कहा कि लंबे समय से उनके बीच वैवाहिक संबंध नहीं हैं। 5 करोड़ मांगे, कोर्ट ने 2 करोड़ तय किए याचिका में नारायण साईं पर अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाए गए। साथ ही सूरत की अदालत में दुष्कर्म मामले में सुनाई गई सजा का भी उल्लेख किया गया। पत्नी ने 5 करोड़ रुपए एलुमनी की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 2 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया। 50 लाख भरण-पोषण बकाया धारा 125 सीआरपीसी के तहत पहले 50 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण तय किया गया था, लेकिन यह नियमित रूप से नहीं दिया गया। वकील के मुताबिक, करीब 50 लाख रुपए बकाया हैं, जिसकी वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हाई कोर्ट में चुनौती की संभावना जानकारी के अनुसार, इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। संपत्ति के सत्यापन को लेकर इंदौर कलेक्टर को निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक पूरी जानकारी कोर्ट में पेश नहीं हो सकी है। करीब आठ साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद 2 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने न सिर्फ दोनों के बीच तलाक को मंजूरी दी, बल्कि यह भी आदेश दिया कि नारायण साईं तीन महीने के भीतर जानकी को 2 करोड़ रुपये बतौर स्थायी गुजारा भत्ता (परमानेंट एलिमनी) दे।  कोर्ट ने पिछले आठ वर्षों तक मेंटेनेंस न दिए जाने को भी गंभीरता से लिया. सुनवाई के दौरान मार्च 2026 में नारायण साईं को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया और बयान दर्ज किया गया. इसके बाद अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाया. 2008 में शुरू हुआ यह रिश्ता अब 2026 में कानूनी तौर पर खत्म हो चुका है।  यौन शोषण केस में आजीवन कारावास नारायण साईं को सूरत की दो बहनों के साथ रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। साल 2013 में सूरत की दो बहनों ने केस दर्ज कराया था। छोटी बहन ने नारायण साईं के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज कराया था, जबकि बड़ी बहन ने उसके पिता आसाराम के खिलाफ शिकायत की थी। छोटी बहन के आरोप के अनुसार, नारायण साईं ने 2002 से 2005 के बीच उसके साथ कई बार रेप किया था। पीड़िता आसाराम के आश्रम की 'सेविका' थी। उसने सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम, गांभोई आश्रम, पटना आश्रम, काठमांडू आश्रम और मध्य प्रदेश के मेघनगर आश्रम ले जाकर रेप करने का आरोप लगाया था।

आसाराम के बेटे नारायण साईं ने कुटुम्ब न्यायालय में दी पेशी, पत्नी ने दायर की तलाक की याचिका

इंदौर  स्वयंभू संत आसाराम का बेटा नारायण साईं कथित मानसिक क्रूरता को लेकर अपनी पत्नी की ओर से दायर तलाक के मुकदमे में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इंदौर के कुटुम्ब न्यायालय में पेश हुआ और बयान दर्ज कराया। मामले से जुड़े वकीलों ने यह जानकारी दी। नारायण साईं दुष्कर्म के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद गुजरात के सूरत के जेल में बंद है। जिसके बाद उसे पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ इंदौर के कुटुम्ब न्यायालय में लाया गया। इस दौरान अदालत परिसर में उसकी इंदौर निवासी पत्नी जानकी हरपलानी भी मौजूद थीं। हालांकि, उन्होंने मीडिया के सामने चुप्पी साधे रखी। एकमुश्त मांगी 5 करोड़ की रकम मामले से जुड़े वकीलों ने बताया कि जानकी की ओर से पेश तलाक के मुकदमे में नारायण साईं कुटुम्ब न्यायालय में पेश हुआ। वकीलों ने बताया कि यह मुकदमा जानकी ने अपने पति पर मानसिक क्रूरता और अन्य आरोप लगाते हुए दायर किया है जिसमें उन्होंने एकमुश्त पांच करोड़ रुपए की स्थायी भरण-पोषण राशि की मांग की है। अदालत ने दी 1 अप्रैल की अगली तारीख वकीलों ने बताया कि करीब 90 मिनट की पेशी के दौरान अदालत में नारायण साईं का बयान दर्ज किया गया और फिर जानकी के वकीलों ने उससे जिरह की। अदालत ने मुकदमे में दोनों पक्षों की अंतिम बहस के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की है। कुटुम्ब न्यायालय ने नारायण साईं को वर्ष 2018 में आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी जानकी को हर महीने 50,000 रुपए की भरण-पोषण राशि प्रदान करे। हालांकि जानकी की ओर से अदालत में कहा गया है कि पिछले आठ साल से उनके पति की ओर से उन्हें भरण-पोषण राशि अदा नहीं की गई है।