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विनोद जाखड़ ने सचिन पायलट की मौजूदगी में NSUI के नए कप्तान की थामी ज़िम्मेदारी

नई दिल्ली/जयपुर. राजस्थान की छात्र राजनीति के चमकते सितारे विनोद जाखड़ ने आज आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में शपथ ली। दिल्ली स्थित NSUI राष्ट्रीय कार्यालय, 5 रायसीना रोड पर आयोजित इस भव्य समारोह में राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता और युवाओं के चहेते सचिन पायलट ने शिरकत की। जाखड़ को कार्यकर्ताओं ने कंधों पर बैठाकर दफ्तर तक पहुँचाया, जो उनकी ज़मीनी लोकप्रियता का प्रमाण था। सचिन पायलट का हुंकार: "पद नहीं, ज़िम्मेदारी मिली है" AICC महासचिव सचिन पायलट ने समारोह में उपस्थित हज़ारों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विनोद जाखड़ की नियुक्ति उन हज़ारों कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीद की किरण है जो बिना किसी राजनीतिक विरासत के ज़मीन पर संघर्ष करते हैं। पायलट का संदेश: "विनोद ने राजस्थान विश्वविद्यालय की सड़कों से लेकर प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जो संघर्ष किया, उसी का फल है कि आज राहुल गांधी जी ने उन्हें यह बड़ी ज़िम्मेदारी दी है।" पायलट के भाषण के दौरान 'सचिन पायलट', 'विनोद जाखड़', 'छात्र शक्ति ज़िंदाबाद' के नारों से पूरा NSUI मुख्यालय गूंज उठा। MP संजना जाटव का 'विदाई' तिलक और दही-चूरमा शपथ ग्रहण के लिए रवानगी से पहले एक भावुक और पारंपरिक दृश्य देखने को मिला। भरतपुर की युवा सांसद और विनोद जाखड़ को सांसद संजना जाटव ने तिलक लगाया और रक्षा सूत्र बांधा। संजना जाटव ने विनोद को दही-चूरमा खिलाकर जीत का आशीर्वाद दिया और पदभार ग्रहण के लिए रवाना किया। सोशल मीडिया पर भाई-बहन की ये तस्वीरें राजस्थान के गौरव का प्रतीक बनकर उभरी हैं। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी: कांग्रेस का 'यूथ पावर' शपथ ग्रहण के दौरान विनोद जाखड़ के साथ कांग्रेस के कई कद्दावर युवा चेहरे मौजूद रहे, जो राजस्थान और देश की राजनीति में दखल रखते हैं: यूथ कांग्रेस अध्यक्ष: श्रीनिवास बीवी। प्रमुख नेता: वरुण चौधरी, कन्हैया कुमार। AICC सचिव नेटा डिसूज़ा, AICC सचिव कुणाल चौधरी, पूर्व सांसद डॉ उदित राज और पूर्व NSUI अध्यक्ष फ़िरोज़ खान    राजस्थान से साथी: अभिमन्यु पूनिया (NSUI प्रदेशाध्यक्ष), अनिल चोपड़ा, विधायक रामनिवास गांवरिया और सुरेश मोदी। राजस्थान विश्वविद्यालय से दिल्ली तक का सफ़र विनोद जाखड़ का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे और बाद में NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने पेपर लीक और छात्र हितों के मुद्दों पर कई आंदोलन किए। ऐतिहासिक नियुक्ति: राजस्थान से पहली बार किसी नेता को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जिसे आगामी छात्रसंघ चुनावों और लोकसभा समीकरणों के लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़कों पर लड़ेंगे छात्रों की लड़ाई : विनोद जाखड़ पदभार ग्रहण करने के बाद विनोद जाखड़ ने भावुक होते हुए कहा कि वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और छात्र संगठन को नए मुकाम पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कैंपस से लेकर सड़क तक छात्रों की आवाज़ को बुलंद करना है।

राजस्थान के विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

जयपुर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान की छात्र राजनीति के कद्दावर चेहरे विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह न केवल विनोद जाखड़ के लिए, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है क्योंकि NSUI के 55 साल के इतिहास में पहली बार है जब कमान राजस्थान के किसी नेता को सौंपी है। विनोद जाखड़ वर्तमान में राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर जनवरी 2024 में विनोद जाखड़ को राजस्थान NSUI का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान: छात्र हितों का संघर्ष: उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों के विरोध से लेकर छात्रसंघ चुनाव बहाली तक कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। जेल और संघर्ष: छात्र हितों की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। शीर्ष नेतृत्व का भरोसा: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के 'यूथ विजन' में फिट बैठने के कारण उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्थान की राजनीति पर क्या होगा असर? विनोद जाखड़ की इस नियुक्ति के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं: जातीय समीकरण: कांग्रेस ने एक दलित युवा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राजस्थान और देश के अन्य राज्यों में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। युवा नेतृत्व: राजस्थान से पहली बार किसी का इस पद पर पहुँचना, प्रदेश के अन्य युवा छात्र नेताओं के लिए दिल्ली के दरवाजे खोलने जैसा है। संघर्ष की कहानी विनोद जाखड़ की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से मिस्त्री (प्लास्टर का काम करने वाले) हैं। बचपन का संघर्ष: जब विनोद 7 साल के थे, उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर शिफ्ट हो गया। शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा उसी स्कूल में प्राप्त की जहाँ उनके पिता मजदूरी करते थे। बाद में राजस्थान यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। दलित चेहरा: विनोद जाखड़ एससी (SC) वर्ग से आते हैं और वे राजस्थान कॉलेज के पहले दलित अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2018 की वो 'ऐतिहासिक' जीत विनोद जाखड़ की असली पहचान साल 2018 के राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से हुई। उस समय NSUI ने विनोद को टिकट नहीं दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि पूरे प्रदेश की छात्र राजनीति में अपनी साख जमा ली। जीत के बाद वे पुनः कांग्रेस और NSUI के साथ जुड़ गए।