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पितृपक्ष में भूलकर भी न छोड़ें ये 3 दिन, पूर्वजों की आत्मा को मिलता है तृप्ति

इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है, जो पितरों के आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण समय है. पितृ पक्ष 15 दिनों तक चलता है, जो भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक होता है. इस साल पितृपक्ष 21 सितंबर तक रहने वाला है. इस दौरान सभी तिथियों का महत्व है, जिनमें पितरों के लिए किए गए कार्यों से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. तो चलिए आज हम आपको पितृपक्ष की सभी तिथियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनपर तर्पण करना बहुत ही शुभ माना जाता है.  किस तिथि पर किसका होता है श्राद्ध? – पूर्णिमा श्राद्ध या पहला श्राद्ध इस बर पूर्णिमा श्राद्ध 7 सितंबर को होगा. इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुई हो. – प्रतिपदा या पहला श्राद्ध इस बार प्रतिपदा श्राद्ध 8 सितंबर को होगा. प्रतिपदा श्राद्ध में उन पितरों का तर्पण, पिंडदान, दान, श्राद्ध आदि होता है, जिनका किसी भी माह की प्रतिपदा तिथि को निधन हुआ होता है. – द्वितीय श्राद्ध आश्विन मास का द्वितीय श्राद्ध 9 सितंबर को होगा. जिन पितरों की मृत्यु किसी भी महीने के दूसरे दिन (द्वितीया) हुई हो उनका श्राद्ध पितृपक्ष की द्वितीया तिथि पर किया जाता है.  – तृतीया श्राद्ध तृतीया श्राद्ध इस बार 10 सितंबर को है. जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध तृतीया को किया जाता है.  – चौथा श्राद्ध चौथा श्राद्ध भी इस बार 10 सितंबर को ही होगा. अगर किसी के पिताजी की मृत्यु चतुर्थी को हुई हो तो उनका श्राद्ध भी उसी तिथि को किया जाता है.  – पांचवां श्राद्ध या महाभरणी श्राद्ध पांचवां श्राद्ध इस बार 11 सितंबर को होगा. इस दिन अविवाहित पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि पर हुई हो.  – षष्ठी श्राद्ध छठा श्राद्ध इस बार 12 सितंबर को होगा. षष्ठी तिथि के दिन किसी की मृत्यु हो जाती है, उन पितरों का श्राद्ध षष्ठी के दिन किया जाता है.  – सप्तमी श्राद्ध इस बार सप्तमी श्राद्ध 13 सितंबर को होगा. सप्तमी तिथि के दिन जिनकी मृत्यु हो जाती है, उनका श्राद्ध सप्तमी के दिन ही किया जाता है.  – अष्टमी श्राद्ध इस बार आठवां श्राद्ध 14 सितंबर को होगा. जिन पितरों की मृत्यु किसी भी महीने की अष्टमी तिथि के दिन हो जाती है, उनका श्राद्ध जो है वो अष्टमी तिथि के दिन किया जाता है.  – नवमी श्राद्ध इस बार नवमी श्राद्ध 15 सितंबर को होगा. नवमी श्राद्ध खास महिलाओं के लिए होता है. यदि किसी महिला की मृत्यु तिथि याद ना हो तो नवमी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए. – दशमी श्राद्ध इस बार दशमी श्राद्ध 16 सितंबर को होगा. अगर किसी पितर की मृत्यु किसी भी महीने की दशमी तिथि को हुई हो तो उनका श्राद्ध पक्ष की दशमी तिथि के दिन किया जाता है.  – एकादशी श्राद्ध इस बार एकादशी श्राद्ध 17 सितंबर को होगा. इस दिन उन लोगों श्राद्ध किया जाता है,  जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की एकादशी के दिन होती है.  – द्वादशी श्राद्ध इस बार द्वादशी श्राद्ध 18 सितंबर को होगा. इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जो संन्यासी होते हैं. इसलिए, इसे संन्यासी श्राद्ध भी कहा जाता है.  – त्रयोदशी श्राद्ध या मघा श्राद्ध त्रयोदशी श्राद्ध इस बार 19 सितंबर को होगा. पितृ पक्ष की त्रयोदशी के दिन बच्चे का श्राद्ध किया जाता है. अगर किसी के घर में बच्चे की मृत्यु हो गई हो तो उसका श्राद्ध त्रयोदशी के दिन किया जाता है.  – चतुर्दशी श्राद्ध इस बार चतुर्दशी श्राद्ध 20 सितंबर को होगा. इस दिन उन व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हो गई हो.  – सर्वपितृ अमावस्या या आखिरी श्राद्ध  ये इस बार 21 सितंबर को है. इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है. यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है जब सभी पितरों की पूजा की जाती है.  पितृ पक्ष की ये 3 तिथियां हैं खास पितृ पक्ष की सभी तिथियों का अपना महत्व है, क्योंकि हर तिथि पर किसी न किसी के पितर की मृत्यु हुई होती है और वे उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं. लेकिन, इस दौरान भरणी श्राद्ध, नवमी श्राद्ध और सर्व पितृ अमावस्या की तिथियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.  1. भरणी नक्षत्र हिंदू पंचांग के मुताबिक, भरणी या पंचमी श्राद्ध 11 सितंबर, गुरुवार के दिन किया जाएगा. भरणी श्राद्ध को महाभरणी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है. भरणी श्राद्ध किसी परिजन की मृत्यु के एक साल बाद करना जरूरी होता है. अविवाहित लोगों का श्राद्ध पंचमी तिथि पर किया जाता है, और यदि उस दिन भरणी नक्षत्र हो तो श्राद्ध का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसके अलावा, जो लोग तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते हैं, उनके लिए गया, पुष्कर आदि में भरणी श्राद्ध करना आवश्यक होता है. 2. नवमी श्राद्ध नवमी श्राद्ध को मातृ श्राद्ध और मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है. नवमी तिथि पर माता पितरों का श्राद्ध करने का विशेष महत्व है, जिसमें मां, दादी, नानी आदि के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है.  3. सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध पितृ पक्ष की सबसे खास और आखिरी तिथि है सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध. सर्व पितृ अमावस्या पर उन पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी तिथि का पता नहीं है. 

श्राद्ध पक्ष कब से कब तक? देखें पितृपक्ष की सभी महत्वपूर्ण तिथियां

पितृपक्ष का आरंभ सितंबर महीने में हो रहा है। पितृपक्ष में 15 दिनों के लिए पूर्वज स्वर्ग लोक से धरती लोक पर आते हैं। इस बार तिथियों के ऐसा फेर बदल है कि तृतीया और चतुर्थी का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। यहां जानें पितृपक्ष की सारी प्रमुख तिथियां। अपने पूर्वजों को याद करने के लिए और उनकी पूजा करने के लिए पितृपक्ष का समय सबसे शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर स्वर्ग लोक से धरती लोक में आते हैं और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। इस बार पितृ पक्ष का आरंभ 7 सितंबर से होने जा रहा है और इस बार तृतीया और चतुर्थी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। बता दे कि पितरपक्ष यानी श्राद्ध का आरंभ होने से पहले पिठौरी अमावस्या को कुश ग्रहण किया जाता है। इसके बाद प्रोष्ठपदी पूर्णिमा तिथि को पहले श्राद्ध किया जाता है। पितर पक्ष के पहले दिन अगस्त मुनि का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। आइए जानते हैं पितृपक्ष की सभी प्रमुख तिथियां। पितृपक्ष 2025 की तिथियां और तारीख 1) पूर्णिमा तिथि श्राद्ध – रविवार 7 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 2) प्रतिपदा तिथि श्राद्ध – सोमवार 8 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 3) द्वितीया तिथि श्राद्ध – मंगलवार 9 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 4) तृतीया तिथि श्राद्ध चतुर्थी तिथि श्राद्ध – बुधवार 10 सितंबर को किया जाएगा। 5) भरणी तिथि और पंचमी तिथि श्राद्ध – गुरुवार 11 सितंबर को किया जाएगा। 6) षष्ठी तिथि श्राद्ध – शुक्रवार 12 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 7) सप्तमी तिथि श्राद्ध – शनिवार 13 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 8) अष्टमी तिथि श्राद्ध – रविवार 14 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 9) नवमी तिथि श्राद्ध – सोमवार 15 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 10) दशमी तिथि श्राद्ध – मंगलवार 16 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 11) एकादशी तिथि श्राद्ध – बुधवार 17 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 12) द्वादशी तिथि श्राद्ध – गुरुवार 18 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 13) त्रयोदशी तिथिमघा श्राद्ध – शुक्रवार 19 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 14) चतुर्दशी तिथि श्राद्ध – शनिवार 20 सितंबर 2025 को किया जाएगा। 15) सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध – रविवार 21 सितंबर 2025 को किया जाएगा पितृपक्ष में रखें इन बातों का विशेष ख्याल पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध तिथि के अनुसार किया जाता है। जिस दिन भी आपके पितरों का निधन हुआ हो उस तिथि के अनुसार, पितृपक्ष में श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध के दिन अपने पितरों का प्रिय भोजन जरुर बनाएं और इस दिन ब्राह्मण, कौए, गाय, बिल्ली और कुत्तों को जरूर खाना खिलाना चाहिए। इससे पंचबलि कहा जाता है। श्राद्ध के दिन सबसे पहले तर्पण करें। तर्पण के लिए काले तिल, जौ, और जल से पितरों को अर्घ्य दें। वैसे तो श्राद्ध पक्ष के दौरान रोजाना तर्पण करना बेहद जरूरी है। वैसे तो पितृपक्ष में दान करने का विशेष महत्व है और आप किसी भी दिन दान कर सकते हैं लेकिन, जिन दिन आपके पितरों का श्राद्ध है उस दिन दान जरुर करना चाहिए।