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इमरजेंसी में डॉक्टर गायब! घायल मरीज तड़पते रहे, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

गढ़वा वैसे तो झारखंड सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ताजा मामला गढ़वा से आया है जहां बीते रविवार को सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक गायब रहे। मरीज के परिजनों ने किया हंगामा गढ़वा सदर अस्पताल के ड्यूटी रोस्टर के अनुसार बीते रविवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक इमरजेंसी में डॉक्टर सरफराज की ड्यूटी थी, लेकिन जानकारी के मुताबिक डॉक्टर सरफराज शाम 4:45 बजे के बाद इमरजेंसी ड्यूटी में पहुंचे। इस दौरान गंभीर रूप से घायल दो मरीजों को इलाज करने के लिए लाया गया था, लेकिन उन्हें इमरजेंसी में चिकित्सक के आने का घंटों इंतजार करना पड़ा जिसके बाद मरीज के परिजनों ने हंगामा भी किया। यहां पर चिकित्सक ही बराबर गायब रहते हैं सदर अस्पताल आए लोगों का कहना है कि लोग बड़ी उम्मीद के साथ सदर अस्पताल में अपने मरीज को लेकर आते हैं कि वहां पर अच्छा इलाज होगा, लेकिन यहां पर चिकित्सक ही बराबर गायब रहते हैं। लोगों का ये भी कहना है कि डॉक्टर ओपीडी में भी देर से आते हैं और पहले ही चले जाते हैं। गायनी विभाग का भी यही हाल है। वहीं, इमरजेंसी में चिकित्सक का न होना सवाल पैदा करता है।  

सदर अस्पताल रांची में इतिहास: पहली बार बाएं तरफ की गॉल ब्लैडर स्टोन का सफल ऑपरेशन

रांची झारखंड के रांची के सदर अस्पताल में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में सफलता हासिल की गई है। पहली बार बाएं तरफ गॉल ब्लैडर स्टोन की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई, जो एक कंप्लीट सूट्स इनवर्सस केस था। इस दुर्लभ बीमारी में शरीर के अंग जैसे हृदय, पित्ताशय, आदि, अपने सामान्य स्थान की बजाय उल्टे हिस्से में होते हैं। यह स्थिति लगभग 10,000 से 20,000 मरीजों में एक बार ही देखने को मिलती है। इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व सदर अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अजीत कुमार ने किया। ऑपरेशन के दौरान डॉ. अजीत और उनकी टीम ने बेहद सावधानी से काम किया क्योंकि इस तरह के मरीजों का ऑपरेशन करना बहुत मुश्किल होता है। सर्जन को उल्टी तरफ खड़े होकर ऑपरेशन करना पड़ता है, जो सामान्य शल्य चिकित्सा के विपरीत होता है। मरीज बी. बाड़ा, जो बेड़ो थाना के ईंटा चिंद्ररी की रहने वाली हैं और फिलहाल मोराबादी में रहती हैं, पिछले दो-तीन महीनों से पेट दर्द से परेशान थीं। जांच में पता चला कि उन्हें गंभीर बीमारी एक्यूट पेनक्रिएटाइटिस है और उनके पित्ताशय में कई पत्थर हैं जो सामान्य के विपरीत बाएं तरफ स्थित हैं। इको और सीटी स्कैन से यह भी पता चला कि उनका हृदय दाहिनी बजाय बाएँ तरफ है, यह पूरी स्थिति कंप्लीट सूट्स इनवर्सस दर्शाती है। मरीज के पति जोसेफ उरांव जो खेती-किसानी करते हैं, ने अस्पताल प्रशासन और डॉ. अजीत की टीम को धन्यवाद दिया। उनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया। इस ऑपरेशन में एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजीत कुमार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. वसुधा गुप्ता, डॉ. विकास बल्लभ, सिस्टर स्नेहलता, और ओटी स्टाफ सहित संदीप, संतोष, सृष्टि, सुरेश, अमन, विरंजन, कल्पना व नंदिनी की टीम शामिल थी।