samacharsecretary.com

बीज उत्पादक व विक्रेता अप्रैल से साथी पोर्टल के माध्यम से करें व्यवसाय: कृषि विभाग

नकली बीजों पर लगेगी नकेल, गुणवत्ता का पूरा ब्यौरा देगा साथी पोर्टल  बीज उत्पादक व विक्रेता अप्रैल से साथी पोर्टल के माध्यम से करें व्यवसाय: कृषि विभाग  हर जिले में मास्टर ट्रेनर तैनात, बीज व्यवसाइयों को देंगे प्रशिक्षण बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और बीज कंपनियों को किया जा रहा प्रशिक्षित 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत, शेष भी 15 दिन के भीतर करा लें पंजीकरणः अपर कृषि निदेशक लखनऊ डबल इंजन सरकार किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने बीज व्यवसाइयों से अनुरोध किया है कि अप्रैल से साथी पोर्टल पर संपूर्ण जानकारी अपडेट करें। बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया साथी पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से ट्रैक की जाएगी। यह प्रक्रिया बीज की मिलावट रोकने, नकली बीजों पर अंकुश लगाने और किसानों को सही गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। केंद्र व महाराष्ट्र सरकार की टीम ने दिया प्रशिक्षण  उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान भी चलाया। कृषि निदेशालय में चले प्रशिक्षण में केंद्रीय टीम व महाराष्ट्र कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किया। डॉ. सोनू कुमार चौधरी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (सीड) भारत सरकार,  अर्चना व अविनाश विजयकुमार पेडगांवकर, वरिष्ठ निदेशक (आईटी) एन.आई.सी, निलाद्रि बिहारी मोहंती संयुक्त निदेशक व उनकी टीम के सदस्य कोमित व सुदीप ने प्रशिक्षण प्रदान किया। महाराष्ट्र की उप निदेशक (कृषि) डॉ. प्रीति सवाईराम ने उनके राज्य में साथी पोर्टल की सफलता की कहानी बताई। उन्होंने इसके विभिन्न चरणों, कार्यों व किसानों को होने वाले लाभ की भी जानकारी दी। हर जनपद से आए तीन-तीन व्यवसायी, लौटकर देंगे ट्रेनिंग  अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित कर मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है। अब ये प्रशिक्षक जनपद स्तर पर थोक व फुटकर विक्रेताओं को प्रशिक्षित करेंगे जिससे नई प्रणाली का सही ढंग से संचालन हो सकेगा। उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे स्थानीय स्तर पर सभी विक्रेताओं और उत्पादकों को नई प्रक्रिया में प्रशिक्षित करें ताकि अप्रैल से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू की जा सके। लगभग 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। शेष 30 फीसदी विक्रेता भी 15 दिन के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण करा लें। किसी भी समस्या पर स्थानीय जिला कृषि अधिकारी से भी निराकरण करा सकते हैं।  बीज से जुड़ी सारी जानकारी देगा साथी पोर्टल साथी (सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंटरी) पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण और वितरण की गुणवत्ता में पारदर्शिता लाना और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है। बीज पैकेट पर लगे टैग के क्यूआर कोड को स्कैन करके किसान बीज के स्रोत, बीज का उत्पादन करने वाली एजेंसी/फर्म, उसके प्रमाणीकरण की पूरी जानकारी एवं उसकी गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। दो चरणों में तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर पहले दिन बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन एवं बीज कंपनियों और फर्मों को प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन जिलों के थोक एवं रिटेलर बीज विक्रेताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधि मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। वे अपने-अपने जनपदों में अन्य डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर को साथी पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षित करेंगे।

बीज के सबसे अधिक अमानक सैंपल मध्य प्रदेश में, राष्ट्रीय औसत 4 प्रतिशत से कम

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष उनके लोकसभा क्षेत्र विदिशा के किसानों ने अमानक बीज का मुद्दा उठाया था। स्थिति जानने के लिए कृषि मंत्री स्वयं किसानों के साथ खेतों पर पहुंचे तो बीजों की गुणवत्ता घटिया पाई। इससे बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान हुआ। इसके बाद कृषि मंत्री के कड़े रुख पर बीजों के सैंपल लिए गए। मध्य प्रदेश में इन सैंपल की रिपोर्ट आई है तो उसमें लगभग 10 प्रतिशत सैंपल अमानक पाए गए हैं। हालांकि, यह स्थिति मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्ष यानी वित्तीय वर्ष 2020-21 से है। इनके आकलन से सामने आया है कि बीज के सबसे अधिक सैंपल मध्य प्रदेश में फेल हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के सख्त संदेश का असर यह रहा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक अमानक बीच के मामले में 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष में एक भी नहीं थी। वहीं, देश में बीज के सैंपल फेल होने का औसत तीन से चार प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच दो प्रतिशत या इससे कम सैंपल ही फेल हुए हैं। उत्तराखंड में इस अवधि में 2.6 प्रतिशत और गुजरात में तीन प्रतिशत से कम सैंपल अमानक मिले। कार्रवाई की स्थिति यह है कि अमानक बीज की आपूर्ति करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चेतावनी या बिक्री पर प्रतिबंध तक ही सीमित रहती है। सीड्स एक्ट लेकर आ रहे हैं     हम नया सीड़्स एक्ट लेकर आ रहे हैं, जिसमें अमानक या नकली बीज मिलने पर कठोर कार्रवाई का प्रविधान किया जाएगा। अभी प्रविधान उतने कड़े नहीं होने के कारण कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। – शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री।  

हॉर्टिकल्चर विभाग की योजना से सरगुजा के किसान उत्साहित, 1 रुपए में तैयार करें सीड्स नर्सरी

सरगुजा  किसानों के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग ने एक अच्छी योजना शुरू की है. किसान अब मात्र 1 रुपये में सब्जी के बीज का प्लांट तैयार करा सकते हैं. इसके लिए विभाग ने नई सीडलिंग यूनिट लगाई है. अब किसानों को अपनी मनपसंद कंपनी का बीज विभाग को देना होगा. उन बीजों को सीडलिंग यूनिट में तकनीक की मदद से डेवलप किया जाएगा. उन्नत किस्म के तैयार किए गए प्लांट फिर किसानों को दिए जाएंगे. किसान सीधे इन प्लांटों को अपने खेतो में लगा सकता है. उन्नत किस्म के प्लांट से फसल भी अच्छी होगी. किसानों का कहना है कि इस तकनीक और मदद से उनकी आधी परेशानी कम हो गई है. पहले वो बीज तो कभी प्लांट के लिए कई जिलों के चक्कर लगाते थे लेकिन अब उनको यही सुविधा उनके अपने शहर में उपलब्ध हो गई है. सरगुजा में बीज क्रांति: दरअसल, उपचारित प्लांट बाजार में 12 से 15 रुपए में मिलता है, क्योंकि प्राइवेट कंपनी एक बड़ी महंगी सिडलिंग यूनिट लगाकर प्लांट तैयार करते हैं, जिस कारण प्लांट की कीमत अधिक हो जाती है. लेकिन अब किसान अपना बीज हॉर्टिकल्चर विभाग को देकर उनकी यूनिट में प्लांट तैयार करा सकते हैं. प्रति प्लांट का एक रूपये किसानों को देना होगा. किसान अगर प्लांट खुद तैयार करते हैं तो उनके पास कोई ऐसी यूनिट नहीं होती है. कई बार मौसम या बीमारी के कारण प्लांट खराब हो जाते हैं, और किसानों को नुकसान हो जाता है.  हॉर्टिकल्चर विभाग बना किसानों के लिए मददगार: सिडलिंग यूनिट की प्रभारी चंद्रकांती पैकरा बताती हैं कि "बीज को ट्रे में रोपने के बाद उसको जर्मनेशन चेंबर में 12 दिन रखते हैं. फिर उसको हार्डलिंग चेंबर के रखकर तैयार करते हैं. इसके बाद वो बीज का प्लांट तैयार हो जाता है. मार्केट में पौधा महंगा मिलता है यहां पर उनको एक रूपये में तैयार होकर मिल जाता है. अगर किसान खुद से तैयार करते हैं तो सुविधा के अभाव में पौधे पूरे तैयार नहीं हो पाते हैं."