samacharsecretary.com

चुनावी मैदान में अकाली दल का नया दांव, मुफ्त गेहूं और सस्ती दाल का किया बड़ा वादा

गुरदासपुर. पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को फतेहगढ़ चूड़ियां स्थित गांव लोधीनंगल के खेल स्टेडियम में एक विशाल रैली को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ सीनियर नेता बिक्रम मजीठिया, डा. दलजीत सिंह चीमा, सुच्चा सिंह लंगाह सहित अन्य उपस्थित रहे। सुखबीर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि पंजाबियों के दिल की धड़कन है। उन्होंने कहा कि पंजाब में सबसे अधिक विकास बादल सरकार के समय हुआ है। अकाली दल की सोच है कि पंजाब तभी उन्नति करेगा, जब यहां पर भाईचारा बनी रहेगी। लेकिन कुछ पार्टियां लोगों के धर्म के नाम पर लड़ाकर राज करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में आई बाढ़ के दौरान न केंद्र सरकार ने कुछ दिया और न ही पंजाब सरकार ने कुछ दिया, अगर लोगों के साथ खड़ा था तो वह अकाली दल। उन्होंने कहा कि पंजाब में अकाली दल की सरकार आने पर एक महीने के भीतर लोगों को ट्यूबवेल कनेक्शन दिए जाएंगे। सरकार आने पर फिर से हर महीने 30 किलो गेहूं व 20 रुपये किलो दाल दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा, "गांवों में कंक्रीट की गलियां व नालियां बनाई जाएंगी। हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज और एक वेटरनरी कालेज खोला जाएगा। हर जिले में एक स्किल कॉलेज खोला जाएगा, जहां से लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। SC के आदेश के बावजूद पक्के तौर पर DGP नहीं लगा रही सरकार: मजीठिया मजीठिया ने कहा कि मुझे जेल में भेजने के बाद भी मुख्यमंत्री को यह चिंता थी कि जेल में क्या खाता है। कभी मेरे आलू-बैंगन खाने का जिक्र करते थे तो कभी सिरहाने का। उन्होंने कहा कि जितने भी पे कमिशन लागू हुए सभी प्रकाश सिंह बादल ने किए। सबसे अधिक वेतन व डीए बादल सरकार के समय में मिला। लेकिन आज डीजीपी व चीफ सेक्रेटरी तो पूरे भत्ता लेता हैं, लेकिन कर्मचारियों को कुछ नहीं मिलता। उन्होंने आगे कहा, "जब अकाली दल द्वारा गरीब लोगों के लिए आटा दाल स्कीम शुरू की गई तो मुख्यमंत्री का कहना था कि लोगों को आटा दाल की जरूरत है, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही गेहूं के साथ-साथ दाल, तेल आदि भी देने की बात कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पंजाब में आज तक पक्का डीजीपी नहीं लग सका। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर होने के बाद पक्के तौर पर डीजीपी नहीं लगा रही।

शिरोमणि अकाली दल ने किया बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने का एलान

चंडीगढ. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने तमिलनाडु के एक केस में मुफ्त की योजनाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि अगर लोगों को राज्य मुफ्त में ही सब कुछ देने लगे तो वे काम क्यों करेंगे। पीठ ने यह भी कहा है कि यह हालात केवल किसी एक राज्य के नहीं है, बल्कि सभी राज्यों में इसी तरह हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से पंजाब भी अछूता नहीं है। पंजाब में समय-समय की सरकारों की ओर से वोट बैंक को साधने के लिए शुरू की गई सब्सिडी की प्रथा को किसी भी सरकार ने रोकने की हिम्मत नहीं की, बल्कि हर सरकार ने इसमें बढ़ोतरी ही की है। पंजाब में चुनाव से पहले एक बार फिर मतदाताओं को रिझाने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां देने की घोषणाएं होने लगी हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने दो दिन पहले सत्ता में आने पर बुढ़ापा पेंशन 1,500 से बढ़ाकर 3,100 रुपये करने और शगुन योजना के तहत एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसी तरह आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में महिलाओं को 1000-1000 रुपये देने की तैयारी की हुई है, जिसका मार्च महीने में पेश होने वाले बजट में प्रावधान किया जा सकता है। कहां-कहां कितनी खर्च हो रही है सब्सिडी 22,000 करोड़ रुपये इस समय किसानों, घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर को निशुल्क व सस्ती बिजली देने पर खर्च हो रहे। 4,800 करोड़ रुपये बुढ़ापा पेंशन आदि के लिए दी जा रही है। 750 करोड़ रुपये महिलाओं को बसों में निशुल्क सफर के तहत दिया जा रहा है। इसी तरह जो लोग मुफ्ट राशन जिसके तहत गेहूं और चावल दिए जा रहे हैं में नहीं आते उन्हें सरकार अपनी ओर से राशन मुहैया करवा रही है। इस पर सब्सिडी दी जा रही है। पंजाब में 1997 से शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर पंजाब में 1997 में शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर आज तक चलता जा रहा है। हर साल इसमें कोई कमी होने के बजाय बढ़ोतरी ही हो रही है और आज हालात यह है कि पंजाब की आमदनी के प्रमुख स्रोत जीएसटी से सरकार को केवल 24 से 25 हजार करोड़ ही मिल पा रहे हैं, जबकि सब्सिडी पर खर्च की बात करें तो यह लगभग 28 हजार करोड़ रुपये है। यह भी उस समय है जब मौजूदा सरकार ने अभी महिलाओं को एक-एक हजार रुपये देना शुरू नहीं किया है। अगर यह योजना शुरू होती है तो राज्य के खजाने पर 12 हजार करोड़ रुपये का और बोझ पड़ेगा। (राज्य में एक करोड़ वोटर महिलाएं हैं)। सब्सिडी के इस बोझ के कारण जहां पंजाब में कैपिटल एक्सपेंडिचर नहीं हो रहा है, वहीं विभागों में कर्मचारियों को भर्ती करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि उन पर खर्च होने वाले वेतन का बोझ पहले से ही काफी ज्यादा है।