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देवपुर की महिलाओं का अनूठा संकल्प: महतारी वंदन की राशि जोड़कर बनवाया शिव मंदिर

धमतरी महतारी वंदन की राशि से बना शिव मंदिर: देवपुर की महिलाओं ने दिखाई सामूहिकता और आस्था की मिसाल छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी माध्यम बन रही है। धमतरी जिले के परियोजना सेक्टर खरेंगा के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवपुर की महिलाओं ने इस योजना से प्राप्त राशि का उपयोग कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम देवपुर में लंबे समय से मंदिर नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। गांव के लोग विशेष अवसरों पर दूसरे गांवों में जाकर पूजा करते थे। इस समस्या को देखते हुए गांव की निवासी मती निर्मला और उनकी साथी महिलाओं ने एक सकारात्मक पहल करने का निर्णय लिया। निर्मला और गांव की अन्य महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही थी। उन्होंने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि इस राशि का एक हिस्सा गांव के सामाजिक और धार्मिक कार्य के लिए उपयोग किया जाएगा। महिलाओं ने अपनी महतारी वंदन की राशि को मिलाकर एक निधि तैयार की और उसी से गांव में शिव मंदिर के निर्माण की शुरुआत की। महिलाओं की इस पहल को गांव के अन्य लोगों का भी भरपूर सहयोग मिला। सामूहिक प्रयासों से कुछ ही समय में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और अब गांव में भव्य शिव मंदिर स्थापित हो गया है। मंदिर बनने से न केवल ग्रामीणों की धार्मिक आस्था को एक स्थान मिला है, बल्कि गांव में सामुदायिक एकता और सहयोग की भावना भी और मजबूत हुई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना की है। अब देवपुर में महाशिवरात्रि, सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर सामूहिक पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिससे गांव में उत्साह और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। देवपुर की महिलाओं द्वारा किया गया यह प्रयास दर्शाता है कि यदि महिलाएं संगठित होकर संकल्प लें तो वे अपने गांव और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग कर महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। देवपुर की यह पहल आज आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और यह संदेश दे रही है कि सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच से किसी भी समस्या का समाधान संभव है।

उज्जैन के शिव मंदिर में 1.31 करोड़ के नोटों से सजावट, भगवान के मुकुट और माला भी नोटों से बनीं

उज्जैन  उज्जैन जिले के बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि मेले के अवसर पर भगवान शिव का 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से विशेष श्रृंगार किया गया है। मंदिर को नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई है। मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के बाद मेला आयोजित किया जाता है। इस बार मेला 14 फरवरी से शुरू हुआ है और 28 फरवरी को समापन होगा। नोटों से किया गया यह विशेष श्रृंगार 26 फरवरी तक रहेगा। सात कलाकारों ने तीन दिन में तैयार की सजावट मंदिर के पुजारी के अनुसार, नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों को तैयार करने में सात कलाकारों की टीम को करीब तीन दिन का समय लगा।  पिछले सालों में भी नोटों से हुआ विशेष श्रृंगार मंदिर में पिछले चार वर्षों से नोटों से विशेष श्रृंगार की परंपरा जारी है। 2021 में 7 लाख, 2022 में 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख रुपए के नोटों से श्रृंगार किया गया था। 2025 में 1 करोड़ 21 लाख और इस साल 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से मंदिर सजाया गया है। दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान महादेव के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में नोटों से की गई सजावट इस समय सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। सात कलाकारों ने तीन दिन में तैयार की सजावट मंदिर के पुजारी के अनुसार, नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों को तैयार करने में सात कलाकारों की टीम को करीब तीन दिन का समय लगा। कलाकारों ने नोटों से आकर्षक सजावट कर मंदिर को भव्य रूप दिया है। पिछले सालों में भी नोटों से हुआ विशेष श्रृंगार मंदिर में पिछले चार सालों से नोटों से विशेष श्रृंगार की परंपरा जारी है। 2021 में 7 लाख, 2022 में 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख रुपए के नोटों से श्रृंगार किया गया था। 2025 में 1 करोड़ 21 लाख और इस साल 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से मंदिर सजाया गया है। दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान महादेव के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में नोटों से की गई सजावट आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।