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ठंडे पैर और अनिद्रा का कनेक्शन: नींद न आने के पीछे की चौंकाने वाली साइंस

अक्सर कहा जाता है कि एक अच्छी और गहरी नींद सेहत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसोम्निया या नींद न आने की समस्या आम हो गई है। हम अक्सर अच्छी नींद के लिए गैजेट्स से दूरी बनाने या अंधेरे कमरे की बात करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पैरों का तापमान आपकी नींद की क्वालिटी तय करता है? जी हां, कई रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों के हाथ और पैर गर्म होते हैं, उन्हें ठंडे हाथ-पैर वाले लोगों की तुलना में जल्दी और गहरी नींद आती है। आइए जानते हैं इसके पीछे का विज्ञान और कैसे आप अपने पैरों को जल्दी गर्म कर सकते हैं। इसके पीछे का साइंस क्या है? दरअसल हमारे शरीर का तापमान हमारी स्लीप साइकिल को कंट्रोल करता है। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन हमारे शरीर को ठंडा करने के लिए पैरों को गर्म करना जरूरी है।     गर्मी रिलीज- जब हम सोने की तैयारी करते हैं, तो हमारे शरीर का आंतरिक तापमान गिरना शुरू हो जाता है। यह दिमाग को संकेत देता है कि अब आराम करने का समय है। हमारे हाथ और पैर शरीर के हीट रिलीज जोन होते हैं।     वैसोडिलेशन- जब आप अपने पैरों को गर्म करते हैं, तो वहां की ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं, जिसे वैसोडिलेशन कहा जाता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर की आंतरिक गर्मी त्वचा के जरिए बाहर निकलने लगती है। अगर आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो ब्लड वेसल्स सिकुड़ी रहती हैं और अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे शरीर को ठंडा होने में ज्यादा समय लगता है और नींद आने में देरी होती है। पैरों को गर्म करने के असरदार तरीके     गर्म पानी से नहाना- सोने से लगभग 1-2 घंटे पहले गर्म पानी से नहाना बहुत फायदेमंद होता है। ध्यान रखें कि पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो। यह आपके पूरे शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है।     ऊनी या मोटे मोजे पहनें- यह सबसे आसान तरीका है। बिस्तर पर जाने से पहले अपने आरामदायक मोजे पहन लें। यह पैरों की गर्मी को बरकरार रखता है और वैसोडिलेशन की प्रक्रिया को तेज करता है।     हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल- आप अपने पैरों के पास हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल रख सकते हैं। यह न केवल गर्मी देता है बल्कि मांसपेशियों को आराम भी पहुंचाता है।     पैरों की मालिश- सोने से पहले हल्के गुनगुने तेल से पैरों की मालिश करने से भी गर्मी पैदा होती है और थकान मिटती है।  

खाने-सोने की गलत दिनचर्या डाल रही है सेहत पर असर, अभी करें सुधार

आपकी जीवनशैली पर वास्तु का गहरा असर पड़ता है। खाने से लेकर सोने तक वास्तु शास्त्र में हर चीज के लिए एक सही दिशा का वर्णन किया गया है, जिनका ध्यान रखने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसे में आपको भी इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। खाने के लिए सही दिशा वास्तु शास्त्र में खाना खाने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को सही माना गया है। अर्थात भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि ऐसा करने से पाचन में मदद मिलती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि वास्तु शास्त्र में इसे यम की दिशा माना गया है। ऐसे में इस दिशा में मुख करके भोजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर पश्चिम दिशा में भोजन किया जाए, तो इससे बीमारियों में वृद्धि होती है। सोने के लिए कौन सी दिशा है उचित वास्तु शास्त्र में माना गया है कि सोते समय आपका सिर दक्षिण या पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से आरामदायक नींद आती है, जिससे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में सिर करके सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही वास्तु नियमों के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं सोना चाहिए और न ही दरवाजे की तरफ पैर करके सोना चाहिए। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र में पूजा आदि के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी (ईशान कोण) को सबसे उत्तम माना गया है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और घर में दिव्यता लाती है। ऐसे में आपका मंदिर इसी दिशा में होना चाहिए। वहीं अगर आपका बेडरूम घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो इससे रिश्तों में स्थिरता और मधुरता आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में सोने से दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहता है।  

क्या रात में स्मार्टवॉच पहनना सुरक्षित है? पूरी जानकारी

नई दिल्ली क्या आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं? ऐसे में इस बात की दुविधा आपको भी होती होगी कि सोते समय स्मार्टवॉच पहनी जाए या नहीं? कई लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते, वहीं कई लोग सोते समय अपने शरीर पर किसी भी गैजेट के होने से परहेज करते हैं। चलिए फिर आज तमाम दुविधाओं का अंत करते हुए पता लगाते हैं कि स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए या नहीं? इसके बाद आप इस बात का फैसला बेहतर तरीके से कर पाएंगे कि स्मार्टवॉच को सोते समय पहनना है या नहीं। नींद की क्वालिटी ट्रैक करने के लिए स्मार्टवॉच कंपनियां अपनी घड़ियों में खासतौर पर स्लीप मोड फीचर देती हैं। इस फीचर की मदद से यूजर अपनी नींद की क्वालिटी का सही ट्रैक पता कर सकता है। स्मार्टवॉच हल्की, गहरी और REM स्लीप को मापती है, जिससे आपको समझ आता है कि आपकी नींद कितनी बेहतर या खराब है। इसके अलावा स्मार्टवॉच आपको नींद सही से पूरी न होने पर चेतावनी भी दे सकती है, ताकि आप ठीक से नींद लेने पर ध्यान दे सकें। अगर आपका मकसद अपनी नींद की क्वालिटी पता करना या फिर नींद की क्वालिटी सुधारना है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए। दूसरों को बिना डिस्टर्ब किए जागने के लिए अगर आप सुबह जल्दी उठते हैं और नहीं चाहते कि आपके फोन का अलार्म बाकी सभी की नींद खराब करे, तो भी आप स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। दरअसल आप स्मार्टवॉच पर अलार्म लगाकर सोएंगे, तो वह आवाज करने की जगह आपके हाथ पर वाइब्रेट होकर आपको जगाएगी। इससे आप समय से उठ पाएंगे और किसी की नींद खराब भी नहीं होगी। बता दें कि ऐपल या सैमसंग जैसी महंगी स्मार्टवॉच में अलार्म के लिए खासतौर पर सॉफ्ट तरह की वाइब्रेशन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपकी नींद तीखी और झटकेदार वाइब्रेशन से ना टूटे। हेल्थ से जुड़े सभी अपडेट पाने के लिए स्मार्टवॉच सोते समय आपके दिल की धड़कन से लेकर खून में मौजूद ऑक्सीजन तक लगातार नापता है। यह आपके स्ट्रेस लेवल आदि पर भी नजर रखती है। ऐसे में अगर आप अपने स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहना चाहते हैं, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। ऐसे में अगर आपकी हेल्थ से जुड़ी कोई मेट्रिक खतरे के निशान पर जाती है, तो यह आपको समय रहते सजग कर सकती है। नींद में अड़चन से बचना हो तो अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें कलाई में कुछ भी पहनकर सोने से असुविधा होती है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। दरअसल कई बार स्मार्टवॉच की वजह से कलाई में घर्षण, पसीना या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में स्मार्टवॉच पहन कर सोने से किसी तरह का फायदा होने की जगह, सोने में ही असुविधा हो सकती है। बेहतर बैटरी लाइफ के लिए अगर आप अपनी स्मार्टवॉच से बेहतर बैटरी लाइफ चाहते हैं, तो उसे रात में पहनकर नहीं सोना चाहिए। अगर आप रातभर स्मार्टवॉच को नींद या स्वास्थ्य से जुड़ी बाकी डिटेल्स मापने के ल‍िए इस्‍तेमाल करते हैं, तो उठने के बाद स्मार्टवॉच की बैटरी बेहद कम मिलती है। ऐसे में दिन में सबसे पहले आपको अपनी स्मार्टवॉच को चार्ज करना पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर न सोएं। अगर नींद कच्ची है तो अगर आपकी नींद कच्ची है या फिर आप हल्के शोर या रोशनी से उठ जाते हैं, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। हो सकता है कि आपकी स्मार्टवॉच रात में किसी तरह के नोटिफिकेशन के चलते वाइब्रेट होने लगे या फिर स्मार्टवॉच के सेंसर की लाल-हरी लाइट आपकी नींद तोड़ दे। ऐसे में स्मार्टवॉच को पहने कर सोने से बचें। देखा जाए, तो स्मार्टवॉच पहन कर सोना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। ऐसे में अपनी आदत के अनुसार चुनें कि आप स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहते हैं या नहीं।