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कॉल रिकॉर्डिंग फीचर के साथ Lyne की नई ब्लूटूथ कॉलिंग वॉच भारत में लॉन्च

 नई दिल्ली Lyne ओरिजनल्स ने अपने स्मार्ट वियरेबल पोर्टफोलियो को एक्सपैंड किया है. कंपनी ने अपनी लेटेस्ट स्मार्टवॉच Lyne Lancer 19 Pro को लॉन्च किया है, जो कम कीमत में दमदार फीचर्स के साथ आती है. इसमें आपको ब्लूटूथ 5.3 कनेक्टिविटी मिलती है. इसकी मदद से यूजर्स वॉच के जरिए ही कॉल कर सकते हैं.  स्मार्टवॉच में हार्ट रेट सेंसर और SpO2 मॉनिटरिंग का फीचर मिलता है. इसमें मल्टीपल स्पोर्ट्स मोड दिए गए हैं. वॉच IPX4 रेटिंग के साथ आती है. सिंगल चार्ज में इसमें 12 दिनों तक का स्टैंडबाय टाइम मिलता है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और दूसरी खास बातें.  कितनी है कीमत?  Lyne Lancer 19 Pro को कंपनी ने 1299 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. इस वॉच को आप प्रमुख ऑफलाइन रिटेल आउटलेट से खरीद सकते हैं. ये अभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है. ये वॉच कम कीमत पर स्मार्ट फीचर्स चाहने वालों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है. हालांकि, इस बजट में बोट, Noise और कई दूसरे ब्रांड्स के भी विकल्प मिलते हैं.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  Lyne Lancer 19 Pro में 2.01-inch का टच स्क्रीन मिलती है. वॉच ब्लूटूथ 5.3 कनेक्टिविटी के साथ आती है. इसे iOS 12 या उससे ऊपर के वर्जन और Android 9 या उससे ऊपर के वर्जन के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. वॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग का फीचर मिलता है. आप कॉल कर सकते हैं और रिसीव भी कर सकते हैं.  वॉच में बिल्ट-इन माइक्रोफोन और स्पीकर मिलते हैं, जो वॉयस ट्रांसमिशन के लिए दिए गए हैं. Lyne Lancer 19 Pro में हार्ट रेट मॉनिटरिंग और ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO2) ट्रैकिंग मिलता है. इसमें स्पोर्ट्स मोड्स दिया गया है. वॉच में मल्टीपल हेल्थ और फिटनेस मॉनिटरिंग फीचर्स मिलते हैं.  Lyne Lancer 19 Pro में कॉल रिकॉर्डिंग का भी फीचर दिया गया है. साथ ही इस पर नोटिफिकेशन अलर्ट भी मिलती है. डिवाइ को पावर देने के लिए 210mAh की बैटरी दी गई है. ब्लूटथ कॉलिंग के साथ ये वॉच तीन से चार दिन इस्तेमाल की जा सकती है. वहीं इसमें 12 दिनों का स्टैंडबाय टाइम मिलेगा.

क्या रात में स्मार्टवॉच पहनना सुरक्षित है? पूरी जानकारी

नई दिल्ली क्या आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं? ऐसे में इस बात की दुविधा आपको भी होती होगी कि सोते समय स्मार्टवॉच पहनी जाए या नहीं? कई लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते, वहीं कई लोग सोते समय अपने शरीर पर किसी भी गैजेट के होने से परहेज करते हैं। चलिए फिर आज तमाम दुविधाओं का अंत करते हुए पता लगाते हैं कि स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए या नहीं? इसके बाद आप इस बात का फैसला बेहतर तरीके से कर पाएंगे कि स्मार्टवॉच को सोते समय पहनना है या नहीं। नींद की क्वालिटी ट्रैक करने के लिए स्मार्टवॉच कंपनियां अपनी घड़ियों में खासतौर पर स्लीप मोड फीचर देती हैं। इस फीचर की मदद से यूजर अपनी नींद की क्वालिटी का सही ट्रैक पता कर सकता है। स्मार्टवॉच हल्की, गहरी और REM स्लीप को मापती है, जिससे आपको समझ आता है कि आपकी नींद कितनी बेहतर या खराब है। इसके अलावा स्मार्टवॉच आपको नींद सही से पूरी न होने पर चेतावनी भी दे सकती है, ताकि आप ठीक से नींद लेने पर ध्यान दे सकें। अगर आपका मकसद अपनी नींद की क्वालिटी पता करना या फिर नींद की क्वालिटी सुधारना है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए। दूसरों को बिना डिस्टर्ब किए जागने के लिए अगर आप सुबह जल्दी उठते हैं और नहीं चाहते कि आपके फोन का अलार्म बाकी सभी की नींद खराब करे, तो भी आप स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। दरअसल आप स्मार्टवॉच पर अलार्म लगाकर सोएंगे, तो वह आवाज करने की जगह आपके हाथ पर वाइब्रेट होकर आपको जगाएगी। इससे आप समय से उठ पाएंगे और किसी की नींद खराब भी नहीं होगी। बता दें कि ऐपल या सैमसंग जैसी महंगी स्मार्टवॉच में अलार्म के लिए खासतौर पर सॉफ्ट तरह की वाइब्रेशन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपकी नींद तीखी और झटकेदार वाइब्रेशन से ना टूटे। हेल्थ से जुड़े सभी अपडेट पाने के लिए स्मार्टवॉच सोते समय आपके दिल की धड़कन से लेकर खून में मौजूद ऑक्सीजन तक लगातार नापता है। यह आपके स्ट्रेस लेवल आदि पर भी नजर रखती है। ऐसे में अगर आप अपने स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहना चाहते हैं, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। ऐसे में अगर आपकी हेल्थ से जुड़ी कोई मेट्रिक खतरे के निशान पर जाती है, तो यह आपको समय रहते सजग कर सकती है। नींद में अड़चन से बचना हो तो अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें कलाई में कुछ भी पहनकर सोने से असुविधा होती है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। दरअसल कई बार स्मार्टवॉच की वजह से कलाई में घर्षण, पसीना या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में स्मार्टवॉच पहन कर सोने से किसी तरह का फायदा होने की जगह, सोने में ही असुविधा हो सकती है। बेहतर बैटरी लाइफ के लिए अगर आप अपनी स्मार्टवॉच से बेहतर बैटरी लाइफ चाहते हैं, तो उसे रात में पहनकर नहीं सोना चाहिए। अगर आप रातभर स्मार्टवॉच को नींद या स्वास्थ्य से जुड़ी बाकी डिटेल्स मापने के ल‍िए इस्‍तेमाल करते हैं, तो उठने के बाद स्मार्टवॉच की बैटरी बेहद कम मिलती है। ऐसे में दिन में सबसे पहले आपको अपनी स्मार्टवॉच को चार्ज करना पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर न सोएं। अगर नींद कच्ची है तो अगर आपकी नींद कच्ची है या फिर आप हल्के शोर या रोशनी से उठ जाते हैं, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। हो सकता है कि आपकी स्मार्टवॉच रात में किसी तरह के नोटिफिकेशन के चलते वाइब्रेट होने लगे या फिर स्मार्टवॉच के सेंसर की लाल-हरी लाइट आपकी नींद तोड़ दे। ऐसे में स्मार्टवॉच को पहने कर सोने से बचें। देखा जाए, तो स्मार्टवॉच पहन कर सोना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। ऐसे में अपनी आदत के अनुसार चुनें कि आप स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहते हैं या नहीं।

स्मार्टवॉच बनी जीवनरक्षक: हादसे के बाद खुद बुलाई एंबुलेंस, पिता की बची जान

इस बात में तो दोराय नहीं कि टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को आसान बनाती है लेकिन कभी-कभी यह जीवनरक्षक का काम भी कर सकती है। दरअसल ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया साइट X पर किया गया है, जिसमें बताया गया है कि ऐपल वॉच ने एक्सीडेंट में बुरी तरह से घायल एक शख्स की जान बचा ली। X पर किए गए पोस्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल जब वह शख्स बेहोश पड़ा था, तो उसकी कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच ने संजीवनी की तरह उसकी जान बचा ली। चलिए डिटेल में जानते हैं कि क्या रहा पूरा मामला? स्मार्चवॉच बनी संजीवनी X पर किए गए पोस्ट के अनुसार एक शख्स को एक्सीडेंट के बाद उसकी स्मार्टवॉच के खास फीचर्स की मदद से बचा लिया गया। जिस समय सड़क पर घायल पड़े उस शख्स के पास कोई नहीं था, तो ऐपल वॉच के फॉल डिटेक्शन फीचर ने दुर्घटना की सूचना घायल शख्स के परिवार वालों और इमरजेंसी सर्विस तक पहुंचाई। इसके बाद वॉच ने ही इमरजेंसी सर्विस को दुर्घटना की सटीक लोकेशन भी शेयर की। इसके बाद स्मार्टवॉच ने इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल शख्स के बेटे को भी अलर्ट मैसेज भेजा। पोस्ट के अनुसार इस मैसेज में लिखा था कि “आपके पिता को एक्सीडेंट हुआ है, मैंने एंबुलेंस बुलाई है।" इसके बाद जब लड़का एक्सीडेंट की लोकेशन पर पहुंचा, तो उसके पिता को पहले ही अस्पतासल पहुंचाया जा चुका था। समय पर इलाज मिल जाने की वजह से उस शख्स की जान बच गई। Apple वॉच के खास फीचर्स दुनिया की टॉप स्मार्टवॉच में से एक ऐपल वॉच में इस तरह के कई इमरजेंसी फीचर्स आते हैं जो मुसीबत के समय में जान बचा सकते हैं। फॉल डिटेक्शन और क्रैश डिटेक्शन जैसे फीचर इन्हीं में से एक है। यह फीचर इस बात का पता लगा सकता है कि कब आप दुर्घटना के शिकार हुए हैं या गिरे हैं। इसके बाद ऐपल वॉच इस चीज को मॉनिटर करती है कि आपने किसी तरह की मूवमेंट की है या नहीं। साथ ही वह आपके दिल की धड़कन और ब्लड ऑक्सीजन आदि के जरिए शरीर के वाइटल साइन चेक करती है। इन तमाम फैक्टर्स के आधार पर वॉच आपको खतरे में पाती है, तो Emergency SOS फीचर एक्टिवेट होता है। इसके बाद लोकल अथॉरिटीज और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को अलर्ट भेजा जाता है। इसके लिए यूजर को वॉच और फोन में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को सेव करना पड़ता है। पहले भी फरिश्ता बनी है ऐपल वॉच यह पहला ऐसा मामसला नहीं है जब ऐपल वॉच ने किसी की जान बचाई हो। हाल ही में भारत में ही ऐसे दो मामले सामने आए थे जहां दिल की धड़कन में किसी तरह की अनियमितता होन के चलते वॉच ने यूजर को अलर्ट किया और समय रहते डॉक्टर की मदद लेने की सलाह दी। इसी तरह विदेशों में भी ऐपल वॉच द्वारा जान बचाने के कई मामले सामने आए हैं और कुछ को ऐपल अपने लॉन्च इवेंट में दुनिया भर के सामने रख भी चुका है।

घड़ी में फिट बीपी मशीन, शानदार फीचर्स के साथ हुआ भारत में आगमन

नई दिल्ली Huawei ने शुक्रवार को भारत में अपनी नई स्मार्टवॉच Watch D2 लॉन्च कर दी है। यह एक खास हेल्थ-फोकस्ड स्मार्टवॉच है जिसमें 1.82 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इस स्मार्टवॉच की सबसे बड़ी खासियत है कि यह ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग कर सकती है। यह एक ऐसा अनोखा फीचर है, जो कि आमतौर पर स्मार्टवॉच में नहीं मिलता। बता दें कि इस वॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग सपोर्ट भी मिलता है। Huawei Watch D2 में ECG, स्किन टेम्प्रेचर सेंसर भी दिए गए हैं। इसके अलावा इस वॉच में SpO2 यानी ब्लड ऑक्सीजन लेवल और हार्ट रेट सेंसर भी दिए गए हैं। यही वजह है कि यह वॉच फिटनेस के शौकीनों लोगों के लिए बेहद खास है। यह स्मार्टवॉच 80 से ज्यादा वर्कआउट मोड सपोर्ट करती है। कीमत और उपलब्धता भारत में Huawei Watch D2 की कीमत 34,499 रुपये रखी गई है। आप इसे आज से ही Amazon, Flipkart और Rtcindia.net वेबसाइट से खरीद सकते हैं। 5 अक्टूबर तक इस स्मार्टवॉच को इंट्रोडक्टरी ऑफर के साथ 33,499 रुपये में खरीदा जा सकता है। यह स्मार्टवॉच ब्लैक और गोल्ड दो कलर ऑप्शन में खरीदी जा सकती है। डिस्प्ले और डिजाइन Huawei Watch D2 में 1.82 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इसकी पीक ब्राइटनेस 1,500 निट्स है। इस वजह से इसे तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस वॉच में Always-on Display (AOD) मोड मिलता है, जिससे आप हमेशा समय और जरूरी जानकारी देख सकते हैं। बता दें कि बीपी मापने के लिए इस वॉच में 26mm का मैकेनिकल एयरबैग फीचर भी दिया गया है जो ब्लड प्रेशर मापने में मदद करता है। यह स्मार्टवॉच एल्युमिनियम एलॉय से बनी है जो इसे मजबूत और हल्का दोनों बनाती है। Huawei Watch D2 में Ambulatory Blood Pressure Monitorin (ABPM) फीचर है। इसे यूरोप में CE-MDR मेडिकल डिवाइस सर्टिफिकेशन और चीन के National Product Administration से भी सर्टिफिकेशन मिला हुआ है। यानी यह एक मेडिकली सर्टिफाइड डिवाइस है। हेल्थ और फिटनेस फीचर्स ब्लड प्रेशर ट्रैकिंग के अलावा, Huawei Watch D2 रियल-टाइम सिंगल-लीड ECG डेटा भी देती है। यह आपको इर्रेगुलर हार्ट रिदम और संभावित आपातकाल का पता लगाने में मदद करती है। इसमें और भी कई हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स दिए गए हैं जैसे कि हार्ट रेट मॉनिटरिंग, SpO₂, नींद की निगरानी, स्ट्रेस मॉनिटरिंग। यह वॉच आपकी हेल्थ मेट्रिक्स के आधार पर पर्सनलाइज्ड रिमाइंडर और हेल्थ रिपोर्ट भी देती है। Huawei Watch D2 IP68 रेटिंग के साथ आती है। यह Android और iOS दोनों डिवाइस के साथ काम करती है और Huawei Health ऐप के जरिए पेयर की जा सकती है। आप इस स्मार्टवॉच से सीधे कॉल उठा सकते हैं, रिजेक्ट कर सकते हैं और कॉल लॉग देख सकते हैं। इसमें नोटिफिकेशन, कॉल अलर्ट और मौसम की जानकारी भी दिखाई देती है। फिटनेस के शौकीनों के लिए इसमें 80 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड हैं। आप पेयर किए गए ऐप के जरिए वॉच फेस को भी कस्टमाइज कर सकते हैं। बैटरी लाइफ की बात करें तो कंपनी का दावा है कि नॉर्मल इस्तेमाल में यह 7 दिनों तक चल सकती है। इसमें फास्ट चार्जिंग भी मिलती है।

Apple यूज़र्स के लिए खुशखबरी: iPhone और Watch अब करेंगे पहले से कहीं ज़्यादा सिंक और स्मार्ट काम

टेक्नोलॉजी दिनों-दिन आगे बढ़ रही है। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काफी चलन में है। ऐसा तय माना जा रहा है कि भविष्य में एआई का खूब इस्तेमाल किया जाएगा। कई कंपनियों ने एआई का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। अभी तक AI का इस्तेमाल बीमारियों का पता लगाने, बीमारियों का इलाज करने या पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए किया जाता है। आने वाले वक्‍त में एआई का इस्तेमाल प्रेग्‍नेंसी का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा। दुनिया की जानी मानी कंपनी Apple ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। iPhone और Apple Watch से पता चलेगी प्रेग्नेंसी ऐपल के प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, iPad, Apple Watch आदि को सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स माना जाता है। इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इन्हें दूसरे डिवाइस से अलग बनाते हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक Apple ने एक कमाल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है जो अब iPhone और Apple Watch से मिली जानकारी (व्यवहारिक डेटा) का इस्तेमाल करके 92% सटीकता के साथ प्रेग्नेंसी का पता लगा सकता है। कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी? इस रिसर्च का नाम "Beyond Sensor Data: Foundation Models of Behavioral Data from Wearables Improve Health Predictions" है। इस रिसर्च में बताया गया है कि यह नया AI मॉडल कुछ खास स्वास्थ्य संकेतों जैसे नींद की गुणवत्ता, दिल की धड़कन में बदलाव (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी), चलने-फिरने की आदतें (मोबिलिटी) और अन्य महत्वपूर्ण बातों को पहचान सकता है। यह वियरेबल बिहेवियर मॉडल (WBM) प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को भी ट्रैक कर सकता है। इस नए फाउंडेशन मॉडल को बनाने के लिए 2.5 बिलियन घंटे से भी ज्यादा वियरेबल डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पिछले मॉडल्स से बेहतर या उनके बराबर काम कर सके। हालां‍क‍ि अभी यह पता नहीं है क‍ि यह टेक्‍नोलॉजी कबतक ड‍िवाइसेज में ले आएगी जाएगी। रिसर्च में क्या-क्या शामिल था? रिसर्चर्स ने 430 प्रेग्नेंट महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल करके एक प्रेग्नेंसी डेटासेट बनाया, जिनकी डिलीवरी नॉर्मल या सिजेरियन हुई थी। WBM ने ऐप्पल हेल्थ ऐप, हेल्थकिट और हार्ट रेट सेंसर डेटा (PPG) से जानकारी इकट्ठा की। रिसर्च में बताया गया है कि डेटा से पता चला कि बच्चे के जन्म से पहले के नौ महीने और डिलीवरी के बाद का एक महीना "पॉजिटिव" हफ्ते थे, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद ठीक होने के दौरान शारीरिक बदलावों से गुजर रही थीं। बाकी समय को "नेगेटिव" हफ्ते के तौर पर चिन्हित किया गया। नतीजों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने 24,000 से ज्यादा उन महिलाओं का डेटा भी इकट्ठा किया जिनकी उम्र 50 साल से कम थी और जो प्रेग्नेंट नहीं थीं।