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हर मुश्किल में शांत रहना सीख लिया तो कामयाबी आपसे दूर नहीं

किसी भी परिस्थिति में कंट्रोल करना जरूरी है। पर ये कंट्रोल दूसरों पर ना होकर खुद पर होना जरूरी है। अपने आप को और दिमाग को इस तरह से ट्रेनिंग दे कि मुश्किल, विपरीत और बिल्कुल अलग तरह की सिचुएशन में कैसे खुद को शांत रखें। क्योंकि ज्यादातर गलतियां हम तभी करते हैं जब हमारी सोच, फिजिकल एक्टीविटी और हमारे शब्द जल्दी से रिएक्ट कर देते हैं। जब अपने दिमाग पर हमारा कंट्रोल होगा तो इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना आसान होगा। जानें कैसे विपरीत सिचुएशन में खुद को कूल रखें। खुद पर कंट्रोल खोने से बचाना जब भी सामने वाला आपको प्रोवोक करे, नीचा दिखाए तो खुद से यहीं कहना है कि मेरा रिएक्शन मेरी ताकत है और मैं इसे ऐसे ही नहीं दूंगा। क्योंकि गुस्से में खुद पर कंट्रोल खो देने से पावर भी चली जाती है। धीरे से रिएक्ट करें जब भी बहुत ही गंभीर, डिप्रेशन और स्ट्रेसफुल सिचुएशन आए तो तीन बार गहरी सांस लें और सोचें क्या मेरा इस जगह पर रिस्पांड करना जरूरी है। जो इंसान शांत रहते हैं वो अपनी प्रतिक्रिया देने के मामले में जल्दीबाजी नहीं दिखाते। और, जो लोग जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं अक्सर वो कमजोर ही होती है। सिचुएशन नहीं माइंड पर कंट्रोल करें अक्सर लोग सिचुएशन को कंट्रोल करने में लग जाते हैं लेकिन सिचुएशन नहीं खुद के माइंड पर कंट्रोल करने की जरूरत होती है। मेंटली स्ट्रांग लोगों से इन बातों को सीखें। जैसे ही कोई निगेटिव सिचुएशन आए तो सोचें कि हर समस्या का समाधान होता है। इससे पहले भी कई मुश्किल परिस्थितियां संभाली हैं। इसे भी संभाल लेंगे और ज्यादा सोचने से नहीं बल्कि अपने ऐक्शन में क्लियरिटी लाएं। जिससे प्रॉब्लम सॉल्व की जा सके। बॉडी लैंग्वेज पर कंट्रोल जब भी निगेटिव सिचुएशन आती है तो अपने बॉडी लैंग्वेज पर भी कंट्रोल करें। स्पाइन को सीधा करें, चेस्ट को ओपन करें और सांसों को धीरे से लें। ऐसा करने से बॉडी लैंग्वेज कंट्रोल में दिखेगी। निगेटिव विचारों को रोकें मन में जैसे ही निगेटिव विचार आएं तो खुद से बात करें कि क्या जो मैं सोच रहा हूं वो सही है या केवल मन का भ्रम। अपने विचारों को लिखें, ऐसा करने से ज्यादा क्लियर होगा माइंड।  

कामयाबी की राह: भगवद् गीता के 5 श्लोक जो हर किसी को याद रखने चाहिए

कुछ लोगों के लिए सक्सेज पाना सपने के जैसा होता है। क्योंकि वो लाइफ में ज्यादातर कामों में फेलियर का सामना करते हैं और निराश रहते हैं। ऐसे निराश और हताश लोगों को अपनी आदतों में सुधार के साथ ही भगवद्गीता के इन श्लोकों को पढ़ने की जरूरत है। क्योंकि यहीं वो श्लोक हैं जो लाइफ में सक्सेज पाने और उसे बरकरार रखने में मदद करते हैं। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन कर्म करो फल की चिंता ना करो। ये श्लोक उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो हर वक्त रिजल्ट की चिंता करते हैं। जिसकी वजह से ठीक तरीके से परफार्मेंस पर फोकस नहीं कर पाते। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि हमेशा अपनी परफार्मेंस को अच्छा करने की चिंता करनी चाहिए। फल की चिंता में परफार्मेंस को बिल्कुल नहीं खराब होने देना चाहिए। बदलाव प्रकृति का नियम है गीता में कहा गया है कि इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नही है। जो आज है वो कल नहीं होगा। आप हमेशा सफल बने रहो ऐसा जरूरी नहीं। कई बार सफल होने के बाद आपको फेलियर का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मन में किसी तरह के तनाव को लेना नहीं चाहिए बल्कि अपने काम पर फोकस करना चाहिए। डर का त्याग जरूरी है गीता में कहा गया है कि हमेशा निडर होकर अपने काम को करना चाहिए। किसी सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़कर कोशिश करनी चाहिए। फेलियर के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। किसी काम को शुरू करने के लिए पहली जरूर हिम्मत की भी होती है। फिर चाहे वो करियर में हो या फिर लाइफ में। फेल होने, नयी चीजों को सीखने और फिर आगे बढ़ने के लिए साहस जरूरी है। जिस दिन फेलियर का डर छोड़कर आगे बढ़ेंगे उसी दिन सक्सेज मिलेगी। सक्सेज केवल पर्सनल नहीं होती कई बार खुद के बारे में सोचने से ऊपर उठकर सोसायटी और फैमिली के बारे में सोचने की जरूरत होती है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो मन में गर्व के साथ संतुष्टि की फीलिंग आती है और ये भी एक सक्सेज ही है। जो आपको पावरफुल बनाती है। मन को जीतने वाले के लिए मन ही मित्र है जिस इंसान में मन को कंट्रोल नहीं किया उसके लिए मन किसी दुश्मन की तरह है। वहीं जो मन को अपने वश में कर लेता है, मन उसका फ्रेंड बन जाता है। जिसकी मदद से वो हर सफलता पा सकता है। खुद पर शंका करना, डरना और आलस जैसी बाधाओं को दूर भगा लेता है वहीं सक्सेज पाता है।  

बहुत लकी लोग होते हैं ये! जिन्हें मिल जाएं जीवन की ये चीजें, तरक्की तय है

अक्सर हम किसी इंसान से मिलते हैं और हमारे मन में यही आता है कि ये इंसान वाकई कितना भाग्यशाली है। दरअसल हम सभी की भाग्यशाली होने की परिभाषा बड़ी अलग-अलग होती है। किसी को एक अच्छी नौकरी होना भाग्यशाली होने की निशानी लगता है तो किसी को पुश्तैनी धन-दौलत होना या शानदार लव लाइफ होना। खैर, ये लोगों के अपने-अपने पैमाने हैं। हालांकि महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीति में कुछ ऐसे व्यक्तियों का जिक्र किया था, जो उनकी नजरों में वाकई बेहद भाग्यशाली होते हैं। आचार्य कहते हैं कि जिन लोगों के पास ये कुछ चीजें मौजूद हैं उन्हें तो खुद को किस्मत वाला ही समझना चाहिए क्योंकि हर इंसान के नसीब में यह नहीं होता। तो चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को भाग्यवान बनाने वाली ये चीजें कौन सी हैं। जिसके पास हो दान-पुण्य करने का सामर्थ्य आचार्य चाणक्य अपने एक श्लोक में इस बात का जिक्र करते हैं कि जिस व्यक्ति में दान-पुण्य करने का सामर्थ्य है, वो भी बहुत किस्मतवाला ही होता है। दरअसल कोई भी व्यक्ति दान-पुण्य करने में सामर्थ्य तब होता है, जब उसके पास पर्याप्त धन होता है और उसे खर्च करते हुए, व्यक्ति को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। आचार्य कहते हैं कि पिछले कई जन्मों के पुण्य के कारण ही मनुष्य को ये सौभाग्य प्राप्त होता है। जिसका साथ दे उसकी सेहत आचार्य चाणक्य के अनुसार जिन लोगों की सेहत उनका साथ देती है, उनसे ज्यादा भाग्यशाली भी दूसरा कोई नहीं। इस दुनिया में सबसे बड़ी दौलत इंसान की सेहत ही होती है। यदि व्यक्ति स्वास्थ्य ना हो और कोई ना कोई रोग उसे घेरे रहे, तो लाखों की धन संपदा भी बेकार ही जान पड़ती है। आचार्य कहते हैं कि अगर आप भरपेट भोजन कर पा रहे हैं और उसे पचाने में आपको कोई परेशानी भी हो रही है; तो आपको खुद को किस्मतवाला ही समझना चाहिए। अच्छे जीवनसाथी का होना है सौभाग्य की निशानी आचार्य चाणक्य के अनुसार एक अच्छे जीवनसाथी का मिलना भी सौभाग्य की निशानी है, जो हर किसी की किस्मत में नहीं होता। एक अच्छा जीवनसाथी आपके हर सुख-दुख में साथ खड़ा मिलता है और उसके साथ जीवनयात्रा थोड़ी आसान हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा पार्टनर है और उसका दांपत्य जीवन सुखी है, तो वो इंसान यकीनन ही बेहद भाग्यशाली हैं। मेहनत से बना सकते हैं अपना भाग्य इन सभी बातों के साथ ही आचार्य चाणक्य का कहना यह भी है कि अगर किसी इंसान को किस्मत का साथ ना भी मिले, तो वो अपनी मेहनत के बल पर खुद को भाग्यवान बना सकते है। अपनी नीति में आचार्य कहते हैं कि मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है और जो व्यक्ति मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, वो अपनी किस्मत खुद चमका देता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कुछ बहुत बड़ा करते हैं, जो शायद सिर्फ भगवशाली लोगों के बस की भी बात नहीं।  

अगर सफलता पानी है तो आज से अपनाएं ये ज़रूरी आदतें

लाइफ में सफल होने के लिए बहुत सारे काम करने होते हैं। और, सफल इंसान वो है जो ना केवल पैसे से रिच हो बल्कि फैमिली और रिलेशनशिप के साथ ही अपनी हेल्थ से भी रिच हो। तो अगर आप लाइफ में सक्सेजफुल बनना चाहते हैं तो 30 की उम्र आते-आते इन चीजों को जरूर कर लें। एक प्रॉपर्टी जरूर खरीदें सक्सेजफुल बनना चाहते हैं तो अपने शहर में एक प्रॉपर्टी जरूर खरीदें। ये आपको शहर में पहचान देने और एक स्थायी ठिकाना देती है। फैमिली जरूर बनाएं अगर सक्सेजफुल बनना चाहते हैं तो ऐसे प्यार और रिस्पेक्टफुल फैमिली बनाएं। जहां आप अपने पैरेंट्स के साथ ही अपने लाइफपार्टनर और बच्चों के साथ सुकून से रह सकें। इन्वेस्ट करें कम उम्र में अर्निंग शुरू कर दी है तो इन्वेस्ट जरूर करें। जिससे कि फ्यूचर के लिए आपके पास पर्याप्त मनी हो। जितने भी इनवेस्टमेंट प्लान हैं वो आपको कम उम्र में इन्वेस्ट करने पर ही अच्छा रिटर्न देते हैं। मल्टीटास्किंग बने सक्सेजफुल होने के लिए आपको एक साथ कई कामों में निपुण होना जरूरी है। सोशल स्किल के साथ ही ऐसी करियर से जुड़ी स्किल भी जरूर होनी चाहिए। जिससे करियर और फैमिली आगे बढ़े। हेल्थ पर ध्यान दें सक्सेजफुल होने के लिए खुद की सेहत पर भी ध्यान दें। मेंटल और फिजिकल हेल्थ होगी तभी आप करियर पर फोकस कर पाएंगे।  

अगर व्यक्ति में हों ये 5 गुण, तो हर दिल में बनती है खास जगह और मिलती है बड़ी कामयाबी

सफलता की कुंजी हमेशा कड़ी मेहनत को माना जाता है। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करने के बाद भी कुछ लोगों को सफलता नहीं मिल पाती है। क्या आप जानते हैं मेहनत करने के बावजूद भी क्यों कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करने में असफल बने रहते हैं? इस सवाल का जवाब सफल लोगों की 5 ऐसी आदतें हैं, जो अकसर कॉमन लोग नजरअंदाज कर देते हैं। आइए जानते हैं सफल लोगों की 5 ऐसी आदतों के बारे में, जो उन्हें आम से खास बनाकर सफलता का रास्ता तय करने में मदद करती हैं। मीठा बोलने का गुण व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके व्यवहार की बड़ी भूमिका होती है। मधुरभाषी यानी मीठे बोल बोलने वाला व्यक्ति हमेशा लोगों के बीच पसंद किया जाता है। ऐसे लोगों की मदद करने के लिए सभी लोग हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे लोग अपनी भाषा से सबका दिल जीतने में कामयाब रहते हैं। जो भविष्य में उनके लिए सफलता का रास्ता तय करने में आसानी पैदा करते हैं। याद रखें, आपके शब्द आपके व्यक्तित्व की ताकत हैं। इन्हें अनमोल बनाएं और देखें कैसे ये आपकी जिंदगी को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हैं। सुलझा स्वभाव वाणी में मिठास और अपने व्यवहार में सौम्यता रखने वाला मनुष्य अपने सुलझे हुए स्वभाव से लोगों को हमेशा प्रभावित कर लेता है। उनकी यह खासियत उसे हर क्षेत्र में तरक्की दिलाती है। अनुशासन अनुशासन से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता, और आत्मविश्वास का विकास होता है। जिस व्यक्ति के पास ये गुण मौजूद होता है, उसे जीवन में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सफल व्यक्ति हमेशा अपने समय का सदुपयोग करते हुए नए कामों की योजनाएं बनाते हैं। इससे उनके भविष्य के लिए उन्हें एक रास्ता मिलता है, जिस पर काम करके वे सफलता की ऊंचाईयों को चूमते हैं। मेहनती जो लोग ईमानदारी से कड़ी मेहनत करते हैं, उन्हें देर से ही सही, लेकिन सफलता जरूर मिलती है। इसीलिए सफलता मिलने में देरी होने पर व्यक्ति को निराश नहीं होना चाहिए बल्कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

आचार्य चाणक्य की सीख: ये गलतियाँ कर देती हैं सफलता से दूर

भारत के इतिहास में एक से बढ़कर एक ज्ञानी पुरुष हुए इन्हीं में से एक थे आचार्य चाणक्य, जिनकी नीतियां इतनी प्रसिद्ध हैं कि आज भी लोग अपने जीवन को सुंदर और सरल बनाने के लिए इनका पालन करते हैं। जीवन का ऐसा कोई भी पहलू नहीं है जिसके बारे में आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में जिक्र ना किया हो। युद्ध के मैदान से लेकर गृहस्थ जीवन की बारीकियों को समझाने के लिए, आचार्य ने कई नीतियां गढ़ीं। अपनी इन्हीं नीतियों में उन्होंने कुछ ऐसी आदतों का भी जिक्र किया है, जो किसी भी व्यक्ति की तरक्की में बाधा बन सकती है। आचार्य की मानें तो अपनी इन्हीं आदतों की वजह से एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी सफल नहीं हो पाता। तो चलिए आज उन्हीं आदतों के बारे में जानते हैं। अपने मन पर नियंत्रण ना रख पाना जिस व्यक्ति का अपने मन पर कंट्रोल नहीं होता है, उसे जीवन में कभी भी सफलता नहीं मिल सकती। आचार्य चाणक्य की नीति में इससे जुड़ा एक श्लोक भी है – "अनवस्थित यस्य न जने न वने सुखम्, जनो दहति संसर्गात् वनं संगविवर्जनात।" जिसका मतलब है कि जिसका मन अशांत है उसे कहीं भी सुख नहीं मिलता, ऐसे में वो दर बदर भटकता ही रहता है। चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण नहीं कर पाता है, उसका किसी भी कार्य में मन नहीं लगता है। ऐसे में सफलता उससे कोसों दूर भागती है। नकारात्मक सोच भी है तरक्की में बाधा किसी भी व्यक्ति की सोच का प्रभाव उसके कार्य और जीवन पर भी पड़ता है। जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है, उसके जीवन में भी पॉजिटिविटी ही रहती है। लेकिन जिस व्यक्ति की सोच नकारात्मक होती है, उसे अपने जीवन में भी नकारात्मकता का ही सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को कभी भी सफलता नहीं मिलती और उनके बनते हुए काम भी बिगड़ने लगते हैं। हमेशा पास्ट में अटके रहना भी है नेगेटिव जीवन में सफल होने के लिए बीती बातों को भुलाकर आगे बढ़ना बहुत जरूरी है। जो लोग अपने पास्ट में ही अटके रहकर खुद को कोसते रहते हैं, वो जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ पाते। आचार्य चाणक्य के अनुसार बीती बातों या असफलताओं से सबक लेकर, जीवन में आगे बढ़ना चाहिए और नए सिरे से नई शुरुआत करनी चाहिए। सफलता का यही मूल मंत्र है। पास्ट की नेगेटिव बातों को सोचने से प्रेजेंट पर भी नेगेटिव असर पड़ता है। जिनमें होती है आत्मविश्वास की कमी जीवन में सफलता तभी मिलेगी, जब आपको खुद पर यकीन होगा। जिस व्यक्ति को खुद पर ही विश्वास नहीं होगा, वो जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकता। ये कहना गलत नहीं होगा कि सफल होने के लिए आत्मविश्वास का होना जरूरी है। आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होती है, उसे सफलता तो दूर समाज में मान-सम्मान भी नहीं मिलता है।  

सफलता पाने का आसान तरीका: हर सोमवार पढ़ें यह चालीसा

   हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव जी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं, क्योंकि वे मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं. देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है. ऐसे में अगर आप सोमवार के दिन शिवजी की कृपा पाना चाहते हैं, तो इस दिन शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. आइए पढ़ते हैं शिव चालीसा. शिव चालीसा का पाठ दोहा ॥ श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥ जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥ अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥ पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥ जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥ ॥ दोहा ॥ नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान । अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥ शिव चालीसा के फायदे धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ करने से कई लाभ मिलते हैं जैसे तनाव और भय से मुक्ति, बाधाओं का दूर होना और मनोकामनाओं की पूर्ति आदि. शिव चालीसा को सोमवार के दिन पढ़ने से आर्थिक समृद्धि भी प्राप्त होती है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है.

आदित्य नारायण बोले — जो मोबाइल से जीते, वो ज़िंदगी से हारते हैं

रायपुर बॉलीवुड गायक, टेलीविजन होस्ट और अभिनेता के रूप में पहचान बना चुके आदित्य नारायण का मानना है कि आज की पीढ़ी मोबाइल फोन और टैबलेट पर फालतू समय बिताकर जीवन को असफल बना रही है. समय रहते ईमानदारी से कड़ी मेहनत करें तो लक भी साथ देता है. आदित्य को सुपर-इंटेलिजेंट एआई से भविष्य में मानवता के लिए खतरा होने की आशंका है. ईश्वरीय शक्ति पर आदित्य का पूरा विश्वास है. उन्होंने ईश्वरीय शक्ति को सुपर पावर बताया, जो संसार को संचालित कर रही है. माता जानकी के मायके मिथिला के रहने वाले आदित्य ने बाल कलाकार के रूप में करियर की शुरुआत की और ‘छोटा बच्चा जान के…’ जैसे कई हिट गाने गाए हैं. आज वह बहुमुखी कलाकार के रूप में जाने जाते हैं, जो गायन के अलावा लोकप्रिय रियलिटी शो के होस्ट के रूप में भी सफल रहे हैं. छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर आयोजित राज्योत्सव में परफॉर्म करने राजधानी रायपुर पहुंचे गायक आदित्य नारायण ने प्रसिद्ध गायक पिता उदित नारायण और अपने बचपन से लेकर अभी तक चुनौतीभरी यात्रा का जिक्र किया. अभी तक 16 भाषाओं में गाना गा चुके आदित्य का मानना है कि कलाकार हो या कोई और सफल इंसान बनने के लिए दुनिया के मायाजाल से निकलकर लंबे समय तक की गई मेहनत ही आपको पहचान दिला सकती है. उन्होंने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि गायकी के क्षेत्र में उन्होंने 32 वर्षों तक तपस्या की, फिर जाकर 1981 में सफलता मिली. मेरा बैकग्राउंड भी गायकी से जुड़ा है, फिर भी आज तक हर मोड़ पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए जरूरी है कि जिंदगी की हर एक सीढ़ी चढ़ने के लिए जीवनभर मेहनत करनी पड़ेगी और कोई शॉर्टकट रास्ता नहीं है. सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन गया है, जहां अपनी बातों को आसानी से रख सकते हैं. पैसा भी कमा सकते हैं, लेकिन सही मायने में मंच वही है, जहां ऑडियंस आपके लिए तालियां बजाएं. सोशल मीडिया पर 1 करोड़ फैन बनाना बड़ी बात नहीं है, लेकिन मंच पर खड़े होने के लिए एक कलाकार को वर्षों तपस्या और साधना करनी पड़ती है. इसलिए ऑडियंस ही असली पूंजी है. एआई से दुनिया को है खतरा आदित्य का कहना है कि एआई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से दुनिया को खतरा है. मनुष्यों ने मानव जैसी बुद्धि से काम करने के लिए मशीनों का आविष्कार किया, लेकिन आज एआई को लेकर चिंता जताई जा रही है. यदि सुपर-इंटेलिजेंट एआई मानव मूल्यों के साथ मेल नहीं खाया, तो यह मानवता के लिए एक अपरिवर्तनीय वैश्विक तबाही या यहां तक कि विलुप्त होने का कारण बन सकता है. छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक छटाओं ने किया आकर्षित, बनाएंगे म्यूजिक एल्बम माता कौशल्या धाम, बस्तर कलाकृति, जंगल सफारी और यहां की प्राकृतिक छटाओं ने आदित्य को अपनी ओर आकर्षित किया है. उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ को दुनियाभर में पर्यटन स्थल के लिए पहचान दिलाने के लिए 2026 में म्यूजिक एल्बम बनाने का निर्णय लिया है.

कठिन समय में काम आएंगी चाणक्य की ये 4 नीतियां, जीवन में लौटेगी समृद्धि और सौभाग्य

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं।  

घर और ऑफिस में तांबे का सूरज लगाएं, करें करियर और मान-सम्मान की वृद्धि

वास्तु के अनुसार घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए हम कई तरह के उपायों को आजमाना पसंद करते हैं। घर के हर एक कोने में हम वास्तु के अनुसार ही चीजों का प्लेसमेंट करते हैं, जिससे समृद्धि बनी रहे। ऐसी ही चीजों में से एक है घर में तांबे का सूरज लगाना। वास्तुशास्त्र के अनुसार, तांबे का सूरज घर में लगाना न केवल सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि यह एक सकारात्मक और सशक्त वातावरण भी प्रदान करता है। तांबे का सूरज घर में लगाने के कई फायदे होते हैं। तांबा एक महत्वपूर्ण धातु है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तांबे का सूरज घर के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करने से विशेष लाभ मिलता है। तांबा सूर्य का प्रतीक है, जो जीवन और ऊर्जा का स्रोत है। इसे घर में लगाने से घर में सकारात्मकता और जीवन शक्ति का संचार होता है। इससे परिवार के सदस्यों में स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। तांबा गर्मी को संतुलित करता है। यह घर के वातावरण को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इस प्रकार घर में ताजगी और शांति बनी रहती है। तांबे का सूरज व्यक्ति की मनोबल को भी बढ़ाता है। यह आत्मविश्वास और ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों को बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकता है। वास्तु की मानें तो घर में तांबे का सूर्य पूरे घर के लिए ऊर्जा का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है। यदि आप सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक तांबे का सूरज घर में लगाते हैं तो आपके घर के चारों तरफ यश, र्कीति और खुशहाली बनी रहती है। तांबे को एक प्रभावशाली धातु के रूप में जाना जाता है और मान्यता है कि इस तरह का सूरज घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह घर के लोगों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है और इससे निकलने वाली ऊर्जा वातावरण में समृद्धि जोड़ती है, जिससे पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है। यदि आप लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं तो अपने घर में तांबे का सूर्य अवश्य लगाना चाहिए। यदि आप किसी कार्यस्थल पर इसे लगाते हैं तो यह सफलता दिलाने में मदद करता है।