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बड़े भाई के दही-चूड़ा भोज से नदारद रहे तेजस्वी, तेज प्रताप का आया हल्का-फुल्का बयान

पटना बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई नेताओं ने शिरकत की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे के आवास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पिता के भोज में आने पर तेज प्रताप खुश नजर आए, तो भाई के नहीं आने पर उन्होंने चुटकी ले ली।   पटना में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान बुधवार को तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके दही-चूड़ा भोज में पिता (लालू) और राज्यपाल आए। दोनों ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है। इसके बाद पूरे बिहार में यात्रा निकालेंगे। खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के घर भोज में नहीं पहुंचे। जब तेज प्रताप से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- तेजस्वी को न्योता भेज दिया, छोटे भाई हैं, थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं। घर जाकर तेजस्वी को न्योता दिया था न्योता एक दिन पहले तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे और मां-पिता के साथ ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया था। दरअसल, अनुष्का यादव से रिलेशन की बात सामने आने के बाद पिछले साल तेज प्रताप यादव को लालू ने आरजेडी और अपने परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और अकेले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि, वह खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब तेज प्रताप अपनी बिहार समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में दही-चूड़ा भोज में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन समेत सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया।  

तेजस्वी यादव की सीट पर आग का तांडव, शॉर्ट सर्किट से मची अफरातफरी, 20 घर जले

वैशाली वैशाली जिले के राघोपुर दियारा इलाके में भीषण आग लगने से करीब 20 घर जलकर राख हो गए। यह घटना देर रात जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के जुड़ावनपुर करारी पंचायत अंतर्गत माली टोला में हुई। जानकारी के अनुसार, आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। सबसे पहले दिनेश भगत के घर में शॉर्ट सर्किट से आग लगी, जिसके बाद तेज पछुआ हवा के चलते आग ने देखते ही देखते आसपास के घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि काबू पाना मुश्किल हो गया। सूचना मिलते ही कई अग्निशामक वाहन मौके पर पहुंचे और दमकल कर्मियों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक 20 घर पूरी तरह जल चुके थे। इस हादसे में गोरख भगत, कृष्ण भगत, रंजीत कुमार मालाकार, नीतीश कुमार, नमेधारी राय, चनारीक राय, दिलीप राय, मुन्नी देवी, कन्हैया कुमार, सन्नी कुमार, मनीष कुमार, पुतुल कुमारी, सिमरन कुमारी, अंजली कुमारी समेत कई परिवारों के घर जलकर राख हो गए। आगजनी में लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। सभी अग्नि पीड़ित परिवार मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे, ऐसे में इस घटना ने उनकी रोजी-रोटी पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो महीने पहले भी इसी गांव में भीषण आग लगी थी, लेकिन अब तक पीड़ितों को कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई है, जिससे लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

तेजस्वी यादव पर BJP का पोस्टर अटैक: लापता की तलाश लिखकर साधा निशाना

पटना बिहार बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष पर जोरदार निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर बीजेपी ने पोस्टर जारी कर तेजस्वी यादव को लापता बताया है। "लापता की तलाश! नाम- तेजस्वी यादव, पहचान- 9वीं फेल…", सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए बिहार बीजेपी ने लिखा कि लापता का तलाश! नाम- तेजस्वी यादव, पहचान- 9वीं फेल, आखिरी बार कब देखा- मीडिया से मुंह छिपाकर भागते हुए। लापता की तलाश! नाम: तेजस्वी यादव पहचान: 9वीं फेल pic.twitter.com/wNb41hnwOZ      बता दें कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दो दिन ही सदन की कार्यवाही में शामिल रहे और विपक्ष के नेता चुने जाने के बावजूद सेशन की बाकी कार्यवाही में मौजूद नहीं रहे। 1-2 दिसंबर को सदन में हाज़िर रहने के बाद 3 दिसंबर से तेजस्वी यादव से गायब है। उनकी अचानक अनुपस्थिति बिहार की सियायत में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, इसके कुछ ही समय बाद परिवार संग उनके विदेश यात्रा पर जाने की खबर सामने आई, वहीं विरोधी दलों के नेताओं द्वारा उन पर जमकर निशाना साधा है। बिहार विधानसभा चुनाव में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ 25 सीटों ही कब्जा कर पाई। वहीं हार के बाद तेजस्वी यादव ने कोई बयान दिया। मीडिया से दूरी बनाकर रखी हुई। हालांकि अभी तक आरजेडी का इस पोस्ट पर कोई रिएक्शन नहीं आया।

पीएम का आभार जताने पर विरोध, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति चर्चा में

पटना बुधवार को नेता प्रतिपक्ष विधान मंडल नहीं पहुंचे, जिसको लेकर जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने उनपर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि जिनके परिवार की सुरक्षा के लिए 160 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, वे स्वयं सदन में दिखाई नहीं दे रहे। आखिर कहां गायब हो गए तेजस्वी यादव ? इस खबर के प्रकाशित होने के बाद देर शाम राजद ने भी पलटवार करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। जवाब में बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि जिस तरह की राजनीति जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार जी आप करते हैं, ऐसा लगता है कि आपके राजनीति का एकमात्र आधार और सोच तेजस्वी प्रसाद यादव ही हैं। आप वास्कोडिगामा की तरह तेजस्वी यादव की खोज में मत लगिए, बिहार की जनता के हित में उनको बुलडोजर नीति से बचाइए।  हालांकि आज भी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन में आने का इंतजार जरुर किया जायेगा। नरेंद्र नारायण यादव को  निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज सदन को नया उपाध्यक्ष मिल गया है। मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार विधायक बने नरेंद्र नारायण यादव को सर्वसम्मति से निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया। वह इस सत्र के लिए प्रोटेम स्पीकर की भूमिका भी निभा रहे थे। उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी नए विधायकों को बधाई दी और बिहार के विकास पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। 2005 से है कानून का राज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में अपने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि, जब 2005 में एनडीए (NDA) सरकार बनी थी, तब से ही बिहार में कानून का राज है। तभी से मैं लगातार बिहार के विकास में लगा हुआ हूं, और यही मेरा एकमात्र उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अब बिहार में किसी तरह का डर और भय नहीं है, बल्कि चारों तरफ शांति और भाईचारे का माहौल है। अब नहीं होता हिंदू-मुस्लिम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पहले बिहार में बहुत हिंदू-मुस्लिम होता था, लेकिन अब कोई झगड़ा-झंझट नहीं होता है। अपनी सरकार के कार्यों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की घेराबंदी कराई गई और 2016 से मंदिरों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  राजद विधायक भाई वीरेन्द्र से कहा कि आपको दो बार मौक़ा दिए। आपके साथ भी विकास किए न , गड़बड़ सड़बड़ किए तो छोड़ दिए। अब इनके साथ हैं। आपके साथ कभी नहीं आएंगे। कुमार सर्वजीत के बयान पर बिहार विधानसभा में बवाल, जदयू नेता रत्नेश सदा को दी चुनौती राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने गया के मगध मेडिकल अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर कहा कि वहां जाने पर लगता है कि दलित के मोहल्ले में आ गए हैं। उनकी यह बात सुनते ही जदयू विधायक रत्नेश सदा ने राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार का विरोध करते हुए कहा कि मैं भी उसी दलित की कोख से पैदा हुआ हूं। दलितों के लिए जो हरकत इन्होंने की है वो इसे माफ नहीं करेंगे। उनके इस विरोध के बाद राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने जदयू नेता रत्नेश सदा पर पलटवार करते हुए उनको चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर इनमें हिम्मत है तो हम इन्हें चुनौती देते हैं। ये हमारे साथ गया जिले के दलित मोहल्लों में चलें और देखें कि गया जिले के मुसहर इलाके में एक भी नाली-गली नहीं बनी है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के विरोध के बाद विपक्ष ने विधान परिषद् का किया वॉकआउट बिहार विधान परिषद में महामहीम राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद शुरू हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे थे, तभी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अचानक उठीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि   पहले सत्ता पक्ष नहीं, बल्कि विपक्ष को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन उनकी बात नहीं मानने पर पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत विपक्ष के सभी सदस्यों ने विधान परिषद् का वॉकआउट कर बाहर निकल गए। बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर चलेगा बुलडोजर बिहार विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय सिन्हा और राजद नेता विधायक भाई वीरेंद्र एक दूसरे से भिड़ गए। उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर  बुलडोजर चलाया जाएगा। इसी बात पर भाई वीरेन्द्र भड़क गए और खड़े होकर उनका विरोध करने लगे। उन्होंने कहा कि हर्ष फायरिंग के बारे में बोलिए। इस पर विजय सिन्हा ने कहा कि आप जिसे हर्ष फायरिंग बता रहे हैं वह शादी विवाह में पटाखा फोड़े जा रहे थे। इसकी जांच भी की जा चुकी है। अपनी बात खत्म करते करते विजय सिन्हा ने कहा कि मौसम बदल रहा है इसलिए बदलते मौसम में आप अपने कपड़े भी बदल लीजिये वरना तबियत खराब हो जाएगी। और रही बात बुलडोजर की तो बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर बुलडोजर चल के रहेगा। राजद विधायक ने सम्राट चौधरी को कहा – आप  स्मार्ट बुलडोजर चलाईये राजद विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने अंग्रेजी में अपनी बात शुरू की लेकिन फिर टोकने पर हिंदी में बोलने लगे। उन्होंने अपनी बात शुरू करते हुए सबसे पहले बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि आप मजबूत आदमी हैं। आपको लोग बुलडोजर बाबा कहता है तो ऐसा लगता है कि यह कॉपी किया जा रहा है इसलिए आप सम्राट बुलडोजर नहीं बल्कि स्मार्ट बुलडोजर चलाइए। उन्होंने कहा कि सम्राट जी आप सिर्फ मानवीय पक्ष को सामने रखिए और उसके पीछे हिडन एजेंट को जरूर देखिए और मुझे लगता है कि आप सम्राट बुलडोजर से स्मार्ट बुलडोजर जरूर बनियेगा। राजद विधायक ने मुख्यमंत्री की जमकर की प्रशंसा इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बहुत बेहतर काम किया है, उनके कार्यों की हम प्रशंसा करते हैं। उन्होंने महिलाओं को 35% आरक्षण दिया है। मैं इसकी भी प्रशंसा करता हूं। उन्होंने जिस तरह से महिला पुलिस की एक बड़ी संख्या खड़ी कर दी है इसके लिए भी मैं उनकी प्रशंसा करता हूं।

बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव की ताजपोशी, विपक्ष का नया चेहरा तय

पटना राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव 18वीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होंगे। राजद और महागठबंधन के विधायक दल की बैठक में तेजस्वी यादव के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई। शनिवार को एक पोलो रोड में हुई बैठक में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने एक स्वर से तेजस्वी को अपना नेता माना। तय हुआ कि विपक्ष की संख्या भले ही कम है, लेकिन जनहित के मसले पर मजबूती से सदन में आवाज उठाएंगे। लोगों की भलाई के लिए विपक्ष मजबूती से सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा। एक दिसम्बर को विधानमंडल का सत्र शुरू होने से पहले तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन के विधायकों और प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। इस मीटिंग में भाग लेने के लिए तेजस्वी यादव शनिवार को दिल्ली से पटना पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया कर्मियों ने उनसे कई सवाल पूछे पर तेजस्वी यादव ने कोई उत्तर नहीं दिया। वे सीधे बैठक के लिए रवाना हो गए। विधानसभा चुनाव में हार पर कांग्रेस और राजद में तकरार के बीच तेजस्वी यादव को विपक्ष का नेता चुन लिया गया। राजद के साथ कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के नेताओं ने तेजस्वी के नाम पर मुहर लगा दी। इस बार के चुनाव में पूरा विपक्ष 35 सीटों पर सिमट गया। इनमें 25 विधायक राजद के तो 6 विधायक कांग्रेस के हैं। वाम दलों के चार विधायक हैं। सदन में इनकी उपस्थिति बहुत कमजोर रहने वाली है क्योंकि एनडीए के पास 202 विधायकों की ताकत है। बैठक में कहा गया कि संख्या बल कम होने के बावजूद विपक्ष जनता और जनहित के मुद्दों को सदन से सड़क तक संघर्ष करेगा। शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की जा रही है। माले विधायक अजय कुमार ने बताया कि विपक्ष संगठित होकर सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेगा। विपक्ष हमेशा रचनात्मक विरोध करेगा। राजद के भाई वीरेंद्र ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का विरोध पूरी मजबूती से किया जाएगा। संख्या कम है लेकिन मनोबल कम नहीं है।  

विपक्ष का नया चेहरा तेजस्वी यादव, बैठक में हुआ बड़ा निर्णय

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए RJD ने आज समीक्षा बैठक की। बैठक मे तेजस्वी के साथ -साथ  लालू-राबड़ी व मीसा भी शामिल हुए । बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। आरजेडी विधायक दल का नेता तेजस्वी यादव को घोषित किया गया है। बैठक में हार के कारणों पर भी समीक्षा की गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद)  महज 25 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ने के साथ राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।'

तेजस्वी यादव ने 17 नवंबर को बुलाई समीक्षा बैठक, चुनावी हार पर करेंगे मंथन

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए RJD अब महामंथन करने जा रही है। दरअसल, तेजस्वी यादव ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर पार्टी विधायकों और सभी राजद उम्मीदवारों की अहम बैठक बुलाई है। सुबह 11 बजे होगी बैठक बताया जा रहा है कि एक पोलो रोड स्थित सरकारी आवास पर सुबह 11 बजे बैठक हो सकती है। इधर, बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार तथा पार्टी के महज 25 सीटों पर सिमट जाने के बाद लालू परिवार की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं और अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ने के साथ राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।' रोहिणी की सोशल मीडिया पोस्ट लालू प्रसाद यादव के राजद परिवार में कथित मतभेदों की ओर इशारा करती है। इसी साल 25 मई को लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को एक महिला को लेकर उठे विवाद के बाद पार्टी और परिवार दोनों से निकाल दिया था। इस कार्रवाई के लिए तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के करीबी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और चुनाव लड़ा, हालांकि महुआ विधानसभा क्षेत्र से लगभग 50 हजार वोटों से हार गए, वहीं महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी प्रसाद यादव कड़े मुकाबले के बाद अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।  

जानिए क्यों बिहार में तेजस्वी यादव की हुई दुर्गति: 5 अहम वजहें

पटना     बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों करीब करीब आ चुके हैं. बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बड़ा झटका दिया है. 14 नवंबर को सुबह 10.45 पर जो रुझान दिख रहा है उसमे महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम) 54 सीटों पर सिमटता दिख रहा, जबकि एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) 185 सीटों पर मजबूत दिख रही है. ताजा रुझानों में तेजस्‍वी खुद अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं. जाहिर है कि बिहार की जनता ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव को हराया नहीं है बल्कि एक तरह से नकार दिया है. आखिर जो पार्टी और जो नेता चुनाव के दिन तक बराबरी का टक्कर देने का दावा कर रहा था वो इस तरह कैसे धराशाई हो गया. आइये देखते हैं इसके पीछे क्या कारण रहे? 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना गलत साबित हुआ इस हार की एक प्रमुख वजह आरजेडी द्वारा 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना साबित हुआ. यह फैसला न केवल जातिवादी छवि को मजबूत कर गया, बल्कि गैर-यादव वोट बैंक को दूर भगा दिया. बिहार की राजनीति जाति पर टिकी है, जहां यादव (14% आबादी) आरजेडी का कोर वोट बैंक है, लेकिन 52 टिकट यादवों को देने से पब्लिक को यादव राज की गंध आने लगी . जिसके चलते अगड़े और अति पिछड़े महागठबंधन से दूर हो गए. आरजेडी ने कुल 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें 52 यादव थे जो कुल प्रत्याशियों का लगभग 36% था.  यह संख्या 2020 के 40 से बढ़ी, जो तेजस्वी की 'यादव एकीकरण' रणनीति का हिस्सा थी. महागठबंधन में सीट शेयरिंग के तहत आरजेडी को 143 सीटें मिलीं थीं. हो सकता है कि आरजेडी को यादव सीटों पर अच्छी सफलता मिल जाए पर ओवरऑल यह नुकसान कर गया.  बीजेपी ने प्रचार में 'आरजेडी का यादव राज' का नैरेटिव चलाया, जो शहरी और मध्यम वर्ग में गूंजा. तेजस्वी ने यदि 30-35 यादव टिकटों तक सीमित रखा होता तो कुर्मी-कोइरी वोटों का हिस्सा 10-15% बढ़ सकता था.जैसा अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनावों में किया था. उन्होंने केवल 5 यादव प्रत्याशियो को मैदान में उतारा. बाकी पिछड़ी जातियों और सवर्णों को वोट देकर उन्हें अपना बना लिया. सहयोगी पार्टियों को भाव न देना तेजस्वी यादव की रणनीति में सबसे बड़ी चूक अपने सहयोगियों कांग्रेस, वाम दलों और छोटी पार्टियों के साथ 'बराबर भाव' न रखना साबित हुआ. सीट शेयरिंग विवादों ने गठबंधन को कमजोर किया, और तेजस्वी के 'आरजेडी सेंट्रिक' अप्रोच ने विपक्ष को बांट दिया. यह न केवल वोट ट्रांसफर फेल कर गया, बल्कि एनडीए को 'एकजुट' दिखाने का मौका दिया.  कांग्रेस ने 'गारंटी' मेनिफेस्टो पर जोर दिया, लेकिन तेजस्वी ने 'नौकरी देंगे' को प्राथमिकता दी, जो सहयोगियों को चुभा. इतना ही नहीं तेजस्वी ने महागठबंधन के घोषणापत्र का नाम भी तेजस्वी प्रण रखकर सबको पीछे कर दिया. तेजस्वी ने प्रचार में सहयोगियों को बैकसीट पर रखा. रैलियों में राहुल गांधी की तस्वीरें कम, तेजस्वी की ज्यादा दिखीं.  तेजस्वी का अपने वादों का ब्लू प्रिंट नहीं दे पाना तेजस्वी की सबसे बड़ी चूक यह रही कि वो वादे तो बहुत कर दिए पर उसका ठोस ब्लूप्रिंट नहीं दे पाए. हर घर को एक सरकारी नौकरी, पेंशन, महिला सशक्तिकरण और शराबबंदी की समीक्षा जैसे वादे तो किए, लेकिन फंडिंग, कार्यान्वयन योजना या समयबद्ध ब्लूप्रिंट के अभाव ने वोटरों में अविश्वास पैदा किया. हर घर को सरकारी नौकरी पर वो खुद जवाब नहीं दे सके. हर रोज कहते रहे कि बस अगले 2 दिन में ब्लू प्रिंट आ जाएगा. पर चुनाव बीत जाने के बाद भी वो दिन नहीं आया. महागठबंधन का मुस्लिमपरस्त छवि बन जाना महागठबंधन की 'मुस्लिमपरस्त' छवि तेजस्वी यादव की हार का बड़ा कारण बनी. मुस्लिम बहुल सीटों पर तो आरजेडी या महागठबंधन के अन्य सहयोगियों की जीत संभव होगी पर पूरे प्रदेश में इसका नुकसान हुआ. खुद यादव जाति के वोट कई जगहों पर आरजेडी को नहीं मिले. सत्ता मिलने पर बिहार में वक्फ बिल नहीं लागू करने वादा जिस तरह तेजस्वी ने किया वह बहुत से यादव बंधुओं को भी पसंद नहीं आया. बीजेपी ने लालू यादव के संसद में वक्फ बिल के अत्याचार के खिलाफ दिए भाषण को खूब वायरल कराया जिसका फायदा उसे मिला. अपने पिता लालू प्रसाद को लेकर कन्फ्यूज रहे तेजस्वी   तेजस्वी ने लालू की विरासत को अपनाया, लेकिन पोस्टर्स में उनकी तस्वीर को छोटा कर 'नई पीढ़ी' को क्या दिखाने की कोशिश की यह समझ में नहीं आया. यह दोहरी नीति उल्टी पड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोपालगंज रैली में कहा, तेजस्वी लालू के पाप छिपा रहे हैं.  तेजस्वी ने लालू के सामाजिक न्याय एजेंडे को अपनाया, लेकिन 'जंगल राज' छवि से डरकर दूरी बनाई. पोस्टर्स में लालू को कोने में ठूंसना उनका अपमान ज्यादा था.  

कांग्रेस से दोस्ती का ‘रिटर्न गिफ्ट’? तेजस्वी यादव को भी मिला वही तगड़ा नुकसान

पटना  ईंट बांधकर तैरना जितना कठिन है, उतना ही मुश्किल किसी दल के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना हो चुका है। यह बात 2017 में यूपी में अखिलेश यादव की करारी हार ने साबित की थी और वही स्थिति अब बिहार में हई है। यहां आरजेडी से लड़कर 62 सीटें कांग्रेस ने ली थीं और जब चुनाव नतीजे आए तो अब तक 6 सीटों पर ही कांग्रेस की बढ़त है। इस तरह उसका स्ट्राइक रेट 10 फीसदी से भी कम है। 2017 में यूपी चुनाव में 100 सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था और 7 पर ही जीती थी। इस नतीजे को लेकर माना गया था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना सपा को भारी पड़ा।   फिर उन्होंने 2017 में अपनी रणनीति में बदलाव किया और सपा अलग होकर चुनाव लड़ी थी। लेकिन तेजस्वी यादव ने कोई सबक नहीं लिया और 2017 वाली अखिलेश यादव की गलती बिहार में दोहरा दी। नतीजा सामने है। दरअसल 2014 के बाद से ही लगातार ऐसा देखा जा रहा है कि जब भी कांग्रेस सामने होती है तो भाजपा का प्रदर्शन शानदार होता है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों के मुकाबले भी कांग्रेस नहीं टिक पाती है। ऐसे में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देना आरजेडी के लिए घातक साबित हुआ है। इसके अलावा समन्वय स्थापित ना हो पाने का नुकसान भी सीधे तौर पर आरजेडी को हुआ है। कांग्रेस को भाकपा-माले ने दिखाया आईना, शानदार स्ट्राइक रेट दिलचस्प बात यह है कि महज 20 सीटों पर लड़ने वाले वामपंथी दल भाकपा-माले की 7 सीटों पर बढ़त है। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी हार से महागठबंधन की भी हार की पटकथा लिख दी है। वहीं एनडीए की बात करें तो अमित शाह लगातार पटना में कैंप करते रहे। तीन दिन तो वह निकले ही नहीं और लगातार सहयोगी दलों के साथ मिलकर मंथन करते रहे। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला है, जबकि महागठबंधन को करारा झटका लगा। यही नहीं प्रचार में भी एनडीए आगे रहा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने कैंपेन को लीड किया और अमित शाह ने भी 36 रैलियां कीं तो वहीं राजनाथ सिंह भी 20 रैलियों में नजर आए। भाजपा के लिए योगी समेत प्रचार में उतरे थे कई सीएम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हों या फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भाजपा ने पूरी फौज ही प्रचार में उतारे रखी। इसके अलावा जेडीयू, लोजपा जैसे दलों के नेता भी कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करते रहे। इसके उलट महागठबंधन में ना तो सहमति बनी और ना ही प्रचार में समन्वय नजर आया।  

एग्जिट पोल फेल होंगे! तेजस्वी यादव बोले—18 को हमारी सरकार बनेगी बिहार में

पटना बिहार चुनाव के दोनों चरणों की वोटिंग संपन्न हो गई। दोनों फेज में बंपर मतदान हुआ। बिहार में वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए। कुल 66.90% मतदान हुआ। अब 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी। और पता चल जाएगा कि बिहार में किसकी सरकार आ रही है। इस बीच तमाम एजेंसियों के एग्जिट पोल्स भी आने शुरू हो गए हैं। जिसमें एनडीए की प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने का दावा किया जा रहा है। मैटराइज-IANS, पीपुल पल्स, पीपुल्स इनसाइट. चाणक्य, पोलस्ट्रेट. जेवीसी पोल्स और दैनिक भास्कर के एग्जिट पोल में एनडीए को 145 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं महागठबंधन को 91 और अन्य के खाते में 5 सीटें जाती दिख रही हैं। सिर्फ Journo Mirror के एग्जिट पोल में महागठबंधन को बहुमत मिलता दिख रहा है। हालांकि ये सभी आंकडे हैं। असली नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। इस बीच मतगणना की तैयारियां भी तेज कर दी गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण की मतगणना के बाद विभिन्न एजेंसियों के जारी एग्जिट पोल के आंकड़ों को विकासशील इंसान पार्टी ने सिरे से नकार दिया है। वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने दावा करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम इससे कोसों दूर होगा। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल सिर्फ कुछ लोगों का सर्वे मात्र है। यह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सारे एग्जिट पोल फेल साबित हुए थे। वीआईपी के प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि इस बार भी उसी कहानी को दोहराता यह एग्जिट पोल दिख रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया और विभिन्न इलाकों से जो रिपोर्ट आ रही है उससे साफ है कि लोग इस चुनाव में बदलाव को लेकर मतदान किया है और वर्तमान सरकार को हटाने के लिए वोट डाला है। रिजल्ट से पहले ही अनंत सिंह के आवास पर जश्न की तैयारी शुरू बिहार चुनाव की वोटिंग दो चरणों में संपन्न हो गई है। 14 नवंबर को मतगणना होगी। लेकिन परिणामों से पहले ही पटना में जदयू उम्मीदवार अनंत कुमार सिंह के आवास पर टेंट लगाए जा रहे हैं, कुर्सियां ​​लाई जा रही हैं और जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुलारचंद यादव हत्या मामले में अनंत सिंह बेऊर जेल में बंद हैं। मोकामा से अनंत सिंह कैंडिडेट हैं। पटना में बुधवार को अपने सरकारी आवास एक पोलो रोड में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि हमें बहुत ही सकारात्मक सूचना मिली है। 1995 से भी बेहतर फीडबैक मिला है। सबने भारी मतदान किया। लोगों ने इस सरकार के खिलाफ वोट किया है। इस बार बदलाव होने जा रहा है। 14 को परिणाम और 18 को शपथ ग्रहण होगा। भाजपा, एनडीए के लोग बौखलाहट में हैं।उन्होने कहा कि मतदान समाप्त होने के पहले ही एग्जिट पोल आने लगा। यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश है। अधिकारियों पर दबाव बनाने को ऐसा सर्वे किया गया। सर्वे दिखाने वाले वही लोग हैं जो पाकिस्तान के शहरों पर कब्जा कर लिया था। प्रोपगंडा किया जा रहा है। सैम्पल सर्वे कोई नहीं बता रहा है। इसका मानक क्या है। पीएमओ जो तय करते हैं, वहीं दिखाया जाता है। बिहार चुनाव के परिणाम से पहले सीएम नीतीश ने महावीर मंदिर में की पूजा बिहार चुनाव के परिणामों से पहले सीएम नीतीश कुमा ने पटना के महावीर मंदिर में पूजा अर्चना की। इस दौरान उनके साथ मंत्री अशोक चौधरी, विजय चौधरी समेत कई नेता मौजूद रहे। 14 नवंबर को रिजल्ट घोषित होगा। इस चुनाव में मतदान के सारे रिकॉर्ड टूट गए। 67.90 फीसदी मतदान हुआ। एग्जिट पोल से भी ज्यादा सीटें एनडीए को मिलेंगी, बोले नित्यानंद राय बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नित्यानंद राय ने कहा, कि जनता की आवाज और NDA सरकार के लिए मुहर वही एग्जिट पोल में दिखाया जा रहा है। उससे भी ज्यादा NDA के पक्ष में सीटें आएंगी। NDA सरकार बनाएगी। ख्यमंत्री नीतीश कुमार की जो सुशासन की लहर है वह चुनाव में मतदान के रूप में देखा जा रहा है। एनडीए की सरकार भारी बहुमत के साथ बनेगी। बिहार का जनाधार एनडीए के साथ , एग्जिट पोल पर बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मैं बिहार, जो लोकतंत्र की जननी है, हर नागरिक का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार को विकास की रफ्तार बढ़ाने का अवसर दिया है।