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सजावट में की गई ये गलती बिगाड़ सकती है घर की सुख-शांति, जानें मूर्तियों से जुड़े नियम

हम अपने घर को सुंदर बनाने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अक्सर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां लाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि हर मूर्ति घर के लिए सही नहीं होती। कई बार हम केवल कलात्मकता देखकर ऐसी मूर्तियां ले आते हैं जो असल में घर की ऊर्जा को अशांत कर सकती हैं। क्रोधित और उग्र स्वरूपों से बचें वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कभी भी भगवान के उग्र या क्रोधित स्वरूप वाली मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए, भगवान शिव का 'नटराज' स्वरूप कला का अद्भुत नमूना है, लेकिन यह उनके 'तांडव' यानी विनाश के नृत्य को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसी मूर्ति घर में रखने से कलह और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसी तरह, मां काली का विकराल रूप या भगवान हनुमान का ऐसा चित्र जिसमें वे लंका दहन कर रहे हों, घर की शांति में बाधा डाल सकता है। युद्ध और विनाश के दृश्य पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, घर में कभी भी युद्ध से जुड़ी तस्वीरें या मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अक्सर लोग महाभारत के दृश्य या भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश देने वाली तस्वीर लगाते हैं। उपदेश वाली तस्वीर तो ठीक है, लेकिन अगर उसमें युद्ध के अस्त्र-शस्त्र और रथ प्रमुखता से दिख रहे हों, तो वह घर के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद पैदा कर सकती है। खंडित और पुरानी मूर्तियां वास्तु के अनुसार, खंडित (टूटी हुई) मूर्ति घर में रखना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। अगर मूर्ति का एक छोटा सा कोना भी चटक गया हो या उसका रंग पूरी तरह उतर गया हो, तो वह अपनी सकारात्मकता खो देती है। ऐसी मूर्तियों को तुरंत हटाकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए। इन विशेष मूर्तियों से भी करें परहेज वास्तु नियमों के अनुसार, घर के भीतर शनि देव, राहु और केतु की मूर्तियां स्थापित नहीं करनी चाहिए। इनकी पूजा मंदिर में करना ही श्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा, एक ही भगवान की दो मूर्तियां इस तरह न रखें कि उनका मुख एक-दूसरे की तरफ हो या उनकी पीठ एक-दूसरे से मिलती हो। यह स्थिति घर में धन के आगमन को रोकती है। घर के मंदिर के लिए कुछ जरूरी नियम: बैठी हुई मुद्रा: घर में हमेशा भगवान की बैठी हुई और मुस्कुराती हुई मुद्रा वाली मूर्तियां लाएं। अंगूठे से बड़ी न हो: घर के मंदिर में रखी मूर्ति का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए, अंगूठे के बराबर की मूर्ति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। आमने-सामने न हो: मूर्तियों को कभी भी एक-दूसरे के आमने-सामने न रखें। साफ-सफाई: धूल जमी हुई या जाले लगी हुई मूर्तियों से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है।

बाथरूम की गलत दिशा बिगाड़ सकती है आपका बजट! वास्तु शास्त्र के अनुसार सही नियम

घर को बनवाते समय वास्तु शास्त्र से जुड़े नियम का पालन जरूर करना चाहिए। इससे घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। साथ ही सुख-शांति बनी रहती है, लेकिन गलत दिशा में बाथरूम होने से परिवार के सदस्यों के जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और वास्तु दोष लग सकता है, तो आइए इस आर्टिकल आपको बताते हैं कि किस दिशा में बाथरूम होने से जीवन खुशहाल रहता है। बाथरूम के लिए कौन-सी दिशा है शुभ? वास्तु शास्त्र की मानें तो बाथरूम के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में बाथरूम होने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसके अलावा पश्चिम दिशा में भी बाथरूम बनवा सकते हैं। अगर आप जीवन में वास्तु दोष का सामना कर रहे हैं, तो इसकी वजह गलत दिशा में बना बाथरूम हो सकता है। इसलिए बाथरूम को बनवाने से पहले वास्तु शास्त्र के नियम के बारे में जरूर जान लें। इन दिशाओं में बनवाएं बाथरूम बाथरूम को उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं बनवाना चाहिए। इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है। इस दिशा में बाथरूम होने से आर्थिक तंगी की समस्या बन सकती है। इसके अलावा घर के बीच में बाथरूम बनवाने से बचना चाहिए। इससे वास्तु दोष लगता है, जिसका प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। कैसा होना चाहिए पानी का बहाव? बाथरूम के अंदर फर्श का ढलान पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु के अनुसार, इस दिशा को जल की निकासी के लिए उत्तम माना जाता है। किस दिशा में होनी चाहिए टॉयलेट सीट? बाथरूम में टॉयलेट को इस तरह लगाएं कि बैठते समय इंसान का मुंह दक्षिण या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। पूर्व या पश्चिम की तरफ मुंह करके बैठना उत्तम नहीं माना जाता है। इन बातों का रखें ध्यान     बाथरूम में उत्तर या पूर्व की दीवार पर नल और शावर पर लगवाना चाहिए।     इसके अलावा बाथरूम में उत्तर या पूर्व की दीवार पर शीशा लगाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।     बाथरूम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।  

चंदन का पौधा या लकड़ी घर में रखने से मिलते हैं अद्भुत लाभ, जानिए सही वास्तु तरीका

सनातन धर्म में चंदन को अत्यंत पवित्र, सात्त्विक और दिव्य माना गया है। वेद, पुराण और वास्तु शास्त्र में चंदन का उल्लेख देवपूजा, तिलक, यज्ञ और औषधि के रूप में मिलता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में सही विधि और सही स्थान पर चंदन रखा जाए, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, मानसिक शांति मिलती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। शास्त्रों में चंदन का धार्मिक महत्व हिंदू शास्त्रों के अनुसार चंदन को शीतलता, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव, विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीराम को चंदन अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि जहां चंदन की सुगंध रहती है, वहां दैवीय ऊर्जा का वास होता है। वास्तु के अनुसार घर में चंदन रखने के प्रमुख लाभ सकारात्मक ऊर्जा का संचार वास्तु शास्त्र के अनुसार चंदन की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है। इससे घर में शांति और सौहार्द बना रहता है। मानसिक तनाव और क्रोध में कमी चंदन का प्रभाव मन को शीतल करता है। यदि घर में चंदन की लकड़ी, चंदन पाउडर या चंदन अगरबत्ती रखी जाए तो तनाव, चिंता और गुस्सा कम होता है। पूजा-पाठ में सिद्धि घर के पूजा स्थान में चंदन रखने से देवी-देवताओं की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। तिलक में चंदन का प्रयोग करने से एकाग्रता बढ़ती है और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। वास्तु दोष में कमी वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन घरों में वास्तु दोष होता है, वहां चंदन रखने से दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता है, विशेषकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में। स्वास्थ्य और रोग नाश चंदन प्राकृतिक औषधि है। इसकी सुगंध से सिरदर्द, अनिद्रा और मानसिक थकान में राहत मिलती है। यह आभामंडल (Aura) को भी मजबूत करता है। घर में चंदन रखने की सही दिशा चंदन को हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूजा कक्ष में रखें टूटा या सूखा चंदन न रखें चंदन को साफ, ढके हुए पात्र में रखें इन बातों का रखें ध्यान चंदन का अपमान या अनावश्यक उपयोग न करें जूते-चप्पल के पास चंदन न रखें नकली या केमिकल युक्त चंदन से बचें वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में चंदन रखना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रभावी उपाय है। सही दिशा और श्रद्धा के साथ रखा गया चंदन जीवन में संतुलन और समृद्धि लाता है।

नए साल 2026 में खुशहाली चाहिए? घर की दिशा से लेकर सजावट तक जानें वास्तु टिप्स

आने वाले साल से पहले आप अपने घर में वास्तु नियमों के अनुसार, कुछ बदलाव लाकर सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ावा कर सकते हैं। इससे आपके लिए आना वाला साल खुशियों से भरा रहेगा। वास्तु के अनुसार, दिशाओं का ध्यान रखकर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है। चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स। रसोई में ध्यान रखें ये बातें वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि रसोई में अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में भोजन पकाना चाहिए। ऐसे में आप स्टोव या गैस को इस दिशा में रख सकते हैं। अगर आप इसे उत्तर या पश्चिम दिशा में रखते हैं, तो इससे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही किचन में छुरी-कांटे जैसी धारदार चीजों को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। इन सभी नियमों की अनदेखी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) से जुड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा जा सकता है। वायव्य कोण की बात करें तो आप इस दिशा में बेडरूम या गैरेज बनवा सकते हैं। वहीं अगर नैऋत्य कोण में कैश काउंटर, या मशीनें रखने से लाभ मिलता है। घर के बाहर करें ये चीजें वास्तु शास्त्र में माना गया है कि खराब व टूटी हुई वस्तुएं नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में अपने घर में टूटा या खराब पड़ा इलेक्ट्रिक सामान और बंद घड़ी बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं।  

भगवान की मूर्ति आपकी कार में: ये वास्तु टिप्स बदल सकते हैं आपकी किस्मत

जब भी हम कार खरीदते हैं तो सबसे पहले इसका रंग, फीचर आदि देखते हैं और इसके बाद किसी ज्योतिष से पूछते हैं कि कार खरीदना शुभ होगा या नहीं। हर व्यक्ति चाहता है नई कार उसके लिए शुभ हो, इसके लिए वो कार खरीदने के बाद तुरंत मंदिर में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंच जाते हैं और उसकी पूजा भी कराते हैं। वहीं देखा जाता है कि बहुत से लोग कार में भगवान की मूर्ति भी लगाते हैं ताकि भगवान की कृपा बनी रहे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोग अक्सर कार में गणेश जी की मूर्ति, देवों के देव महादेव, मां दुर्गा, लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति लगा लेते हैं ताकि उनके ऊपर आने वाले संकट और विघ्नों से भगवान उनकी रक्षा कर सकें लेकिन वास्तु जानकारों का कहना है कि कार में भगवान की मूर्ति रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।  तो वहीं कुछ का तो ये भी मानना है कि गाड़ी में भगवान की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चलिए जानते हैं कार में भगवान की मूर्ति लगानी चाहिए या नहीं और वास्तु शास्त्र के अनुसार कौन से भगवान की मूर्ति लगा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कार में भगवान की मूर्ति रखी है तो इस बात का ध्यान रखें कि इसकी समय-समय पर सफाई जरूर करें। वास्तु जानकारों की मानें तो अगर आपने कार में भगवान की मूर्ति रखी है तो कार में शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे भगवान का अपमान होता है और वे रुष्ट हो जाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार जिन लोगों ने कार में भगवान की मूर्ति रखी है उन्हें धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, इस बात का भी खास ख्याल रखें कि जिस कार में भगवान की मूर्ति या फोटो लगी हो ऐसी कार में प्याज, लहसुन और नॉनवेज का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में इसे अशुभ माना गया है। वैसे तो कार में भगवान या किसी भी देवी देवता की मूर्ति न रखें क्योंकि कई बार हमारे गंदे हाथ मूर्ति को लग सकते हैं लेकिन अगर आपने कार में मूर्ति रखी हैं तो साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा ऐसे लोगों को कभी भी भगवान की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए जो लोग कार में शराब, सिगरेट या नॉनवेज खाते हो नहीं तो आपको पाप लग सकता है। गाड़ी में काले रंग का छोटा कछुआ रखना शुभ माना जाता है।  ये गाड़ी में से नकारात्मकता दूर करता है। गाड़ी में नेचुरल स्टोन या क्रिस्टल रखने से पृथ्वी तत्व मजबूत होता है, इससे कार हमेशा सुरक्षित रहती है।

तुलसी-शमी का पौधा लगाने के वास्तु नियम: दूर होंगी जीवन की हर बाधा

भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा में पेड़-पौधों को एक विशेष स्थान दिया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि आती है। इन्हीं में से दो प्रमुख पौधे हैं तुलसी और शमी। दोनों का ही धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत गहरा है। माना जाता है कि इन्हें सही दिशा में और सही तरीके से लगाने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। आइए जानते हैं तुलसी और शमी के पौधे से जुड़े वास्तु टिप्स और उनके फायदों के बारे में। तुलसी का पौधा तुलसी को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे मां लक्ष्मी का रूप माना गया है और लगभग हर भारतीय घर में इसे देखा जा सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा घर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है। तुलसी लगाने की सही दिशा वास्तु के अनुसार, तुलसी का पौधा हमेशा घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। यह दिशा देवताओं की मानी जाती है, जिससे शुभ फल मिलते हैं। यदि संभव न हो तो इसे पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है। शमी का पौधा शमी का पौधा भी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। इसे शनि देव से जोड़ा जाता है और माना जाता है कि इसे घर में लगाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। शमी को विजयदशमी के दिन पूजने की भी परंपरा है क्योंकि इसे शुभता और विजय का प्रतीक माना गया है। शमी लगाने की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के बाहर मुख्य द्वार के पास लगाना चाहिए। इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जब आप घर से बाहर निकलें तो यह पौधा आपके बाईं ओर पड़े। अगर घर के बाहर जगह नहीं है, तो इसे छत पर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या पश्चिम दिशा में भी लगा सकते हैं। इसे घर के अंदर लगाने से बचें। तुलसी और शमी को एक साथ लगाने के नियम तुलसी और शमी के पौधों को कभी भी एक ही गमले में नहीं लगाना चाहिए। दोनों को अलग-अलग गमलों में रखें। दोनों पौधों को पास-पास लगाया जा सकता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ये एक-दूसरे से सटे हुए न हों।  तुलसी को प्रतिदिन जल अर्पित करें और संध्या काल में उसके पास दीपक जलाएं। शमी के पौधे के नीचे शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।