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घर के एंट्रेंस पर लटकाएं ये शुभ वस्तु, झगड़े और नेगेटिव एनर्जी होगी खत्म

वास्तु शास्त्र में घर में नमक की पोटली रखने या लटकाने से जुड़े कई लाभ माने जाते हैं। नमक को शुद्धता और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए नमक का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। घर में नमक की पोटली रखने या लटकाने के लाभ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना वास्तु शास्त्र के अनुसार, नमक की पोटली घर में नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने का काम करती है। यह वातावरण को शुद्ध करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। खासकर वह स्थान, जहां मानसिक तनाव या विवाद होते हैं, वहां नमक की पोटली रखने से वातावरण में सुधार हो सकता है। वातावरण को शुद्ध करना: नमक में विशेष गुण होते हैं जो वातावरण में मौजूद गंदगी और नकारात्मकता को अवशोषित करते हैं। जब नमक की पोटली घर में रखी जाती है या लटकाई जाती है तो यह किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर वातावरण को शुद्ध करती है। शांति और संतुलन बनाए रखना नमक की पोटली रखने से घर में शांति और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यह मानसिक तनाव और अवसाद को दूर करने में सहायक हो सकती है। यह घर के माहौल को शांत और खुशहाल बनाती है। व्यावसायिक समृद्धि नमक की पोटली को घर के व्यापारिक स्थान पर या कार्यक्षेत्र में लटकाने से समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। यह व्यापार में सफलता और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। स्वास्थ्य लाभ नमक को घर में रखने से स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि नमक का उपयोग घर के वातावरण को शुद्ध रखने और बीमारियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसे विभिन्न स्थानों पर रखने से हानिकारक बैक्टीरिया और विषाणु दूर हो सकते हैं। घर के प्रवेश द्वार के पास रखना घर के मुख्य द्वार या प्रवेश द्वार के पास नमक की पोटली रखने से घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोका जा सकता है। यह एक प्रकार की सुरक्षा का काम करती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुनिश्चित करती है। अशांति और विवादों को कम करना यदि घर में लगातार अशांति, झगड़े या आपसी विवाद होते रहते हैं तो नमक की पोटली को घर के विभिन्न स्थानों पर रखकर इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। यह वातावरण को शांत करता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है। सपने और मानसिक स्थिति में सुधार नमक की पोटली को तकिए के नीचे रखने से मानसिक स्थिति में सुधार हो सकता है। यह नकारात्मक विचारों को दूर करने और अच्छे सपने देखने में सहायक हो सकती है। घर में नमक की पोटली रखने का तरीका नमक की पोटली को एक सफेद कपड़े में बांधकर घर के किसी कोने में या मुख्य द्वार के पास लटकाया जा सकता है। इसे विशेष रूप से घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिशा घर की ऊर्जा को स्थिर रखने में मदद करती है। नमक की पोटली को एक स्थान पर कुछ समय के लिए रखें और जब वह पूरी तरह से नमक को अवशोषित कर ले, तो उसे बदल दें। पुराने नमक को घर से बाहर फेंक दें क्योंकि वह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। नमक की पोटली रखते समय ध्यान देने योग्य बातें नमक का उपयोग शुद्धता के प्रतीक के रूप में किया जाता है लेकिन इसे किसी भी स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रखना चाहिए। समय-समय पर इसे बदलते रहना चाहिए। नमक की पोटली का उपयोग छोटे या अंधेरे स्थानों पर करना अधिक लाभकारी हो सकता है, जहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा हो। निष्कर्ष वास्तु शास्त्र में नमक का उपयोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, घर के वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मकता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। नमक की पोटली को घर में सही स्थान पर रखना मानसिक शांति और समृद्धि लाने में सहायक हो सकता है। यह सरल उपाय घर में शांति, सुख और समृद्धि बनाए रखने में मदद करता है।  

खाने-सोने की गलत दिनचर्या डाल रही है सेहत पर असर, अभी करें सुधार

आपकी जीवनशैली पर वास्तु का गहरा असर पड़ता है। खाने से लेकर सोने तक वास्तु शास्त्र में हर चीज के लिए एक सही दिशा का वर्णन किया गया है, जिनका ध्यान रखने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसे में आपको भी इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। खाने के लिए सही दिशा वास्तु शास्त्र में खाना खाने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को सही माना गया है। अर्थात भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि ऐसा करने से पाचन में मदद मिलती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि वास्तु शास्त्र में इसे यम की दिशा माना गया है। ऐसे में इस दिशा में मुख करके भोजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर पश्चिम दिशा में भोजन किया जाए, तो इससे बीमारियों में वृद्धि होती है। सोने के लिए कौन सी दिशा है उचित वास्तु शास्त्र में माना गया है कि सोते समय आपका सिर दक्षिण या पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से आरामदायक नींद आती है, जिससे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में सिर करके सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही वास्तु नियमों के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं सोना चाहिए और न ही दरवाजे की तरफ पैर करके सोना चाहिए। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र में पूजा आदि के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी (ईशान कोण) को सबसे उत्तम माना गया है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और घर में दिव्यता लाती है। ऐसे में आपका मंदिर इसी दिशा में होना चाहिए। वहीं अगर आपका बेडरूम घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो इससे रिश्तों में स्थिरता और मधुरता आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में सोने से दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहता है।  

2025 के अंत से पहले जरूर रखें ये पांच चीजें घर में, मिलेगी समृद्धि और सुख-शांति

   साल 2025 अपने अंतिम चरण में है और नवंबर का महीना भविष्य की दिशा तय करने का सही समय है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर वर्ष 2025 समाप्त होने से पहले कुछ शुभ वस्तुएं घर में लाई जाएं, तो आने वाला साल सुख-शांति, और समृद्धि से भरा रहता है। ये वस्तुएं घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती हैं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं। वास्तु शास्त्र कहता है,  “सकारात्मक ऊर्जा ही समृद्धि का द्वार खोलती है।” इसलिए साल 2025 खत्म होने से पहले ये पांच वस्तुएं अपने घर में लाएं और आने वाले वर्ष 2026 का स्वागत करें। गोमती चक्र – धन और लक्ष्मी कृपा का प्रतीक गोमती चक्र को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में गोमती चक्र होता है, वहां मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। इसे धन स्थान या तिजोरी में लाल कपड़े में लपेटकर रखने से आर्थिक स्थिरता, सुख-संपन्नता और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है। तीन फेंगशुई सिक्के – समृद्धि और तरक्की का प्रतीक फेंगशुई में लाल रिबन में बंधे तीन चीनी सिक्के सौभाग्य के प्रतीक हैं। इन्हें मुख्य द्वार पर टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह उपाय व्यापार में उन्नति और करियर में सफलता लाने वाला माना जाता है। दक्षिणावर्ती शंख – सौभाग्य और वास्तु दोष निवारण दक्षिणावर्ती शंख समुद्र मंथन से उत्पन्न 14 रत्नों में से एक है। इसे शुभ मुहूर्त में खरीदकर लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी या पूजा घर में रखने से लक्ष्मी कृपा और सौभाग्य प्राप्त होता है। यह घर के वास्तु दोषों और ग्रह बाधाओं को दूर करने में भी प्रभावी है। लाफिंग बुद्धा – खुशहाली और आनंद का प्रतीक लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को घर या ऑफिस में रखने से खुशहाली और सकारात्मकता बढ़ती है। उन्हें उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखना सबसे शुभ माना गया है। हाथ ऊपर उठाए बुद्धा — तरक्की और सफलता के प्रतीक हैं। पोटली लिए बुद्धा — आर्थिक समस्याओं से राहत दिलाते हैं। तुलसी का पौधा – शुद्धता और समृद्धि का वास तुलसी में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का निवास माना गया है। घर में तुलसी का पौधा लगाने से धन, सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। प्रतिदिन तुलसी की पूजा और दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में शुभता बनी रहती है।  

भाग्य बदल देंगे ये पौधे! शनि-राहु के दोष होंगे दूर

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का विशेष महत्व है। इन नौ ग्रहों में शनि, राहु और केतु को क्रूर और अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। जब इन ग्रहों का प्रभाव किसी व्यक्ति की कुंडली में प्रतिकूल होता है, तो जीवन में अनेक बाधाएं, मानसिक तनाव, बीमारियां, आर्थिक संकट और पारिवारिक क्लेश उत्पन्न होते हैं। हालांकि इन दुष्प्रभावों को कम करने के लिए वैदिक उपाय मौजूद हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत सरल, प्राकृतिक और प्रभावशाली उपाय है नीम का पौधा घर के बाहर लगाना। शनि ग्रह और नीम का संबंध: शनि ग्रह न्याय का देवता है और कर्मफल देने वाला ग्रह है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में विलंब, संघर्ष और परीक्षा लाता है। जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तब व्यक्ति असमंजस, बीमारी, आर्थिक तंगी और सामाजिक कलह का शिकार हो सकता है। नीम का पौधा शनि की क्रूरता को शांत करता है। नीम का उपयोग औषधियों में होने के कारण यह स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, जो शनि से जुड़े रोगों जैसे गठिया, त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द आदि को कम करता है। शनिवार को नीम के नीचे दीपक जलाने और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करने से शनि की शांति मानी जाती है। राहु ग्रह और नीम का प्रभाव: राहु एक छाया ग्रह है और इसका संबंध भ्रम, आकस्मिक घटनाओं, मानसिक अशांति और नकारात्मक विचारों से है। नीम की पत्तियां और वातावरण नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की क्षमता रखते हैं। राहु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नीम के पास प्रतिदिन कुछ समय बिताना लाभकारी होता है। नीम राहु के कारण उत्पन्न मनोवैज्ञानिक विकार जैसे चिंता, भय और भ्रम को शांत करता है। केतु ग्रह और नीम का संबंध: केतु भी राहु की तरह एक छाया ग्रह है और यह आत्मा, वैराग्य और अप्रत्याशित हानियों से जुड़ा होता है। जब केतु अशुभ होता है, तो जीवन में आध्यात्मिक भटकाव, रोग और निराशा देखी जाती है।  नीम के समीप ध्यान या साधना करने से केतु के प्रभाव से उपजे मानसिक विषाद में राहत मिलती है। नीम घर के वातावरण को शुद्ध करता है, जिससे मानसिक शांति आती है और केतु के प्रभाव से बचाव होता है। नीम का पौधा कहां और कैसे लगाएं ? नीम का पौधा घर के मुख्य द्वार के पास, दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना श्रेष्ठ माना गया है। शनिवार के दिन या अमावस्या तिथि को नीम का पौधा लगाना शुभ होता है। नीम के पौधे के पास कच्चा दूध और जल अर्पित करें, सरसों का तेल का दीपक जलाएं और ॐ नमः भगवते वासुदेवाय या ॐ ह्रीं कें राहवे नमः मंत्र का जाप करें।

तुलसी के पास ये एक गलती बना सकती है दरिद्रता का कारण, जानें सही उपाय

धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र, पूजनीय और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इसे घर में लगाने से सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति आती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे के पास कुछ ऐसी चीजें रखना वर्जित माना गया है, जिन्हें रखने से घर की समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और दरिद्रता आ सकती है। जूते-चप्पल जूते-चप्पल अशुद्ध माने जाते हैं और इनका सीधा संबंध गंदगी से होता है। तुलसी का पौधा पूजनीय है। इसके पास जूते-चप्पल या उनसे संबंधित कोई भी वस्तु रखने से लक्ष्मी का अपमान होता है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।  कांटेदार पौधे या सूखे पौधे तुलसी के पास कभी भी कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और घर में कलह का कारण बन सकते हैं। इसी तरह, तुलसी के गमले के आस-पास सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी नहीं रखने चाहिए। सूखी तुलसी या सूखे पौधे दुर्भाग्य और धन हानि का संकेत देते हैं। टूटी हुई या खंडित वस्तुएं पूजा-पाठ से संबंधित टूटी हुई मूर्तियां, दीपक, या अन्य खंडित सामग्री को तुलसी के पास नहीं रखना चाहिए। खंडित वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं और घर की बरकत में रुकावट डालती हैं। लोहे का सामान तुलसी के गमले के आस-पास लोहे से बनी अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। लोहा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जो तुलसी की सकारात्मकता को कम कर सकता है और समृद्धि में कमी ला सकता है।