samacharsecretary.com

उत्तर प्रदेश में फिल्म ‘गोदान’ को मिला टैक्स फ्री दर्जा, गो संरक्षण पर आधारित है फिल्म

उत्तर प्रदेश में फिल्म गोदान टैक्स फ्री, गो संरक्षण को बढ़ावा देने पर आधारित है फिल्म

गो सरंक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, करमुक्त होने से अधिक लोग देख सकेंगे फिल्म

लखनऊ
 उत्तर प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण पर आधारित फिल्म गोदान को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित फिल्म आज  देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय सरकार की उस नीति को रेखांकित करता है, जिसके तहत गो सुरक्षा को सामाजिक और प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि फिल्म के माध्यम से गो संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचेगा और आमजन को इस विषय की गंभीरता से जोड़ने में मदद मिलेगी।

अधिक दर्शक फिल्म देख सकेंगे
उत्तर प्रदेश में करमुक्ति के बाद दर्शकों के लिए टिकट दरों में कमी आएगी, जिससे अधिक से अधिक लोग फिल्म देख सकेंगे। पद संभालते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु किया था और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई थी। गोहत्या और तस्करी के मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। 

गो संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी
गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है फिल्म
गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुके हैं। लगभग दो घंटे की इस फिल्म में गाय के धार्मिक, सामाजिक और व्यावहारिक महत्व को दर्शाया गया है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here