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टिकट की राजनीति: क्या तेजस्वी का फैसला पारिवारिक विवाद थामने की चाल है या यादव वोट बैंक को साधने की रणनीति?

पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए सियासी दलों ने हर दांव चल रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के सियासी विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, तेज प्रताप का अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ विवाद चल रहा है और मामला अदालत में है.

करिश्मा राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं. दरोगा राय के छोटे बेटे पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ तेज प्रताप की शादी हुई थी, कुछ समय के बाद उनके रिश्ते खराब हो गए. इसे लेकर लालू परिवार बैकफुट पर आ गया है.

तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी का यह सियासी डैमेज कंट्रोल करने का दांव है या फिर यादव वोटों को जोड़े रखने की स्ट्रैटेजी है?

करिश्मा राय पिछले विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से टिकट मांग रही थीं, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था. तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या के बीच चल रहे केस की वजह से लालू परिवार ने करिश्मा को टिकट नहीं दिया था. लालू परिवार उस समय तेज प्रताप के साथ था, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिया.

तेज प्रताप यादव इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद अपनी पार्टी बनाकर लड़ रहे हैं. तेज प्रताप यादव महुआ सीट से ताल ठोक रहे हैं. लालू यादव द्वारा पारिवारिक संबंधों और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए करिश्मा राय को परसा सीट से मैदान में उतारना, क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. परसा से टिकट देकर तेजस्वी एक तीर से कई दांव साधते नजर आ रहे हैं.

परसा विधानसभा सीट जीतने का सियासी दांव 

 बिहार की सियासत में दरोगा प्रसाद का राजनीतिक रसूख किसी से छिपा नहीं है. वह बिहार के सीएम रहे और परसा सीट पर उनका सियासी दबदबा था. 1952 में पहली बार परसा सीट से जीतकर विधायक बने दरोगा राय ने 1970 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. इस सीट को दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय ने अपनी कर्मभूमि बनाते हुए अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया. 2015 में परसा सीट पर चंद्रिका राय आरजेडी से विधायक चुने गए, उससे पहले जेडीयू से जीतते रहे.

तेज प्रताप और ऐश्वर्या के रिश्ते बिगड़े तो चंद्रिका राय ने आरजेडी का दामन छोड़कर जेडीयू में वापसी कर ली. 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर चंद्रिका राय चुनाव लड़े और आरजेडी से छोटे राय मैदान में थे. छोटे लाल राय ने जीत दर्ज कर विधायक बने, लेकिन बाद में वे पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए.

अब 2025 के चुनाव में परसा में मुकाबला दिलचस्प होगा. चंद्रिका राय के जेडीयू में अलग-थलग पड़ जाने के चलते तेजस्वी ने बड़ा दांव चला. आरजेडी ने करिश्मा राय को उतारा है तो जेडीयू से छोटे लाल राय मैदान में है. इस तरह मुकाबला काफी रोचक होगा.

तेजस्वी यादव ने सियासी संदेश देने का चला दांव

 तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप यादव की साली को टिकट देकर सियासी संदेश दे दिया है. तेजस्वी ने तेज प्रताप को स्पष्ट संदेश दिया है कि आरजेडी अब उन लोगों से दूरी बनाकर नहीं रखेगा, जिनसे उनके निजी विवाद के चलते 2020 में दूरी बनाई गई थी. इसी के चलते तेजस्वी ने करिश्मा को पार्टी का टिकट दिया है. चंद्रिका राय अब जब खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं तो अपनी भतीजी के लिए सियासी समर्थन कर सकते हैं.

बिहार में यादव समुदाय के करीब 15 फीसदी वोटर हैं, जो ओबीसी में सबसे ज्यादा हैं. यादव आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है. तेज प्रताप यादव के हरकतों से यादव समाज नाराज भी माना जा रहा था, चाहे ऐश्वर्या राय के साथ विवाद का मामला हो या फिर अनुष्का यादव के साथ फोटो वायरल होने की बात हो. ऐसे में तेजस्वी ने करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाकर यादव समुदाय की नाराजगी को दूर करने का दांव चला है.

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