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कोनेरू हम्पी ने फाइनल में पहुंचकर रचा इतिहास, दिव्या देशमुख से होगी टक्कर

मुंबई   ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने  फिडे महिला विश्व कप सेमीफाइनल में चीन की टिंगजी लेई को टाईब्रेकर में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए हरा दिया और अब फाइनल उनका सामना हमवतन भारतीय दिव्या देशमुख से होगा। शनिवार से होने वाले फाइनल में जगह बनाने वाली हम्पी और दिव्या दोनों ने अगले साल होने वाले महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया है। सामान्य समय नियंत्रण में पहली दो बाजी ड्रॉ होने के बाद हम्पी को टाईब्रेकर में 1-1 से ड्रॉ के साथ संतोष करना पड़ा जिसमें दोनों खिलाड़ियों के लिए 15-15 मिनट की दो बाजी अतिरिक्त समय के साथ थी। अगली दो टाईब्रेक बाजी 10-10 मिनट की थी। लेई ने पहली बाजी जीतकर बढ़त बनाई लेकिन हम्पी ने मुश्किल स्थिति में होने के बावजूद दूसरी बाजी जीतकर मुकाबला फिर बराबर कर दिया। टाईब्रेक बाजी के तीसरे सेट में हम्पी ने पहली बाजी में सफेद मोहरों से शुरुआत की और खेल के सभी विभागों में लेई को परास्त करते हुए इसे जीत लिया। पहली बाजी जीतने के बाद फाइनल में पहुंचने के लिए हम्पी को बस एक ड्रॉ की जरूरत थी और उन्होंने जीत हासिल करके खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। यह पहली बार है जब किसी चेस वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत बनाम भारत मुकाबला होगा। दिव्या देशमुख के साथ होगा फाइनल? ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी का फाइनल मुकाबला भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख के साथ होगा. दिव्या FIDE वूमेंस शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं. वहीं अब कोनेरू हम्पी ने भी इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा लिया है. जिस टूर्नामेंट के फाइनल तक आज तक कोई भारतीय महिला नहीं पहुंची थीं, वहीं इस बार FIDE चेस वर्ल्ड कप की दोनों फाइनलिस्ट भारत की ही प्लेयर हैं. दिव्या देशमुख ने भी चीन की खिलाड़ी को हराया इंटरनेशनल मास्टर दिव्या देशमुख ने बुधवार, 23 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले में ही चीन की टैन झोंग्यी को हराकर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया. नागपुर की रहने वाली ये लड़की FIDE शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला है. दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी के फाइनल में पहुंचने से ये तो तय है कि इस बार चेस का विश्व विजेता भारत बनने जा रहा है.   दिव्या पहली बार खेल रहीं वर्ल्ड कप इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मास्टर 19 साल की दिव्या देशमुख ने फिडे महिला विश्व शतरंज कप के सेमीफाइनल के दूसरे गेम में पूर्व विश्व चैंपियन चीन की झोंगयी टैन को हरा दिया था और मिनी मैच 1.5-0.5 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया था। इस प्रक्रिया में दिव्या कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाने वाली पहली भारतीय बन गईं थीं। महिला कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट अगले साल होना है और उस टूर्नामेंट से मौजूदा महिला विश्व चैंपियन वेनजुन जू के प्रतिद्वंदी का फैसला होगा। दिलचस्प बात यह है कि दिव्या पहली बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं। चीन की दूसरी वरीयता प्राप्त जोनर झू और तत्कालीन हमवतन ग्रैंडमास्टर डी हरिका को क्वार्टर फाइनल में हराने के बाद दिव्या ने इस प्रतियोगिता में अपना दबदबा बरकरार रखा और टैन के खिलाफ 101 चाल में जीत उनके बढ़ते शतरंज कौशल का प्रमाण था।   

कोनेरू हम्पी ने फाइनल में पहुंचकर रचा इतिहास, दिव्या देशमुख से होगी टक्कर

मुंबई   ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने  फिडे महिला विश्व कप सेमीफाइनल में चीन की टिंगजी लेई को टाईब्रेकर में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए हरा दिया और अब फाइनल उनका सामना हमवतन भारतीय दिव्या देशमुख से होगा। शनिवार से होने वाले फाइनल में जगह बनाने वाली हम्पी और दिव्या दोनों ने अगले साल होने वाले महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया है। सामान्य समय नियंत्रण में पहली दो बाजी ड्रॉ होने के बाद हम्पी को टाईब्रेकर में 1-1 से ड्रॉ के साथ संतोष करना पड़ा जिसमें दोनों खिलाड़ियों के लिए 15-15 मिनट की दो बाजी अतिरिक्त समय के साथ थी। अगली दो टाईब्रेक बाजी 10-10 मिनट की थी। लेई ने पहली बाजी जीतकर बढ़त बनाई लेकिन हम्पी ने मुश्किल स्थिति में होने के बावजूद दूसरी बाजी जीतकर मुकाबला फिर बराबर कर दिया। टाईब्रेक बाजी के तीसरे सेट में हम्पी ने पहली बाजी में सफेद मोहरों से शुरुआत की और खेल के सभी विभागों में लेई को परास्त करते हुए इसे जीत लिया। पहली बाजी जीतने के बाद फाइनल में पहुंचने के लिए हम्पी को बस एक ड्रॉ की जरूरत थी और उन्होंने जीत हासिल करके खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। यह पहली बार है जब किसी चेस वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत बनाम भारत मुकाबला होगा। दिव्या देशमुख के साथ होगा फाइनल? ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी का फाइनल मुकाबला भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख के साथ होगा. दिव्या FIDE वूमेंस शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं. वहीं अब कोनेरू हम्पी ने भी इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा लिया है. जिस टूर्नामेंट के फाइनल तक आज तक कोई भारतीय महिला नहीं पहुंची थीं, वहीं इस बार FIDE चेस वर्ल्ड कप की दोनों फाइनलिस्ट भारत की ही प्लेयर हैं. दिव्या देशमुख ने भी चीन की खिलाड़ी को हराया इंटरनेशनल मास्टर दिव्या देशमुख ने बुधवार, 23 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले में ही चीन की टैन झोंग्यी को हराकर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया. नागपुर की रहने वाली ये लड़की FIDE शतरंज वर्ल्ड कप में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला है. दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी के फाइनल में पहुंचने से ये तो तय है कि इस बार चेस का विश्व विजेता भारत बनने जा रहा है.   दिव्या पहली बार खेल रहीं वर्ल्ड कप इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मास्टर 19 साल की दिव्या देशमुख ने फिडे महिला विश्व शतरंज कप के सेमीफाइनल के दूसरे गेम में पूर्व विश्व चैंपियन चीन की झोंगयी टैन को हरा दिया था और मिनी मैच 1.5-0.5 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया था। इस प्रक्रिया में दिव्या कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाने वाली पहली भारतीय बन गईं थीं। महिला कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट अगले साल होना है और उस टूर्नामेंट से मौजूदा महिला विश्व चैंपियन वेनजुन जू के प्रतिद्वंदी का फैसला होगा। दिलचस्प बात यह है कि दिव्या पहली बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं। चीन की दूसरी वरीयता प्राप्त जोनर झू और तत्कालीन हमवतन ग्रैंडमास्टर डी हरिका को क्वार्टर फाइनल में हराने के बाद दिव्या ने इस प्रतियोगिता में अपना दबदबा बरकरार रखा और टैन के खिलाफ 101 चाल में जीत उनके बढ़ते शतरंज कौशल का प्रमाण था।   

तालाब की ज़मीन पर करोड़ों की डील! 100 साल पुराने जलस्रोत को बनाया कृषि भूमि

  महासमुंद बिरकोनी के ग्रामीणों के सार्वजनिक निस्तारी और सिंचाई के लिए 100 साल पुराने 4 एकड़ से ज्यादा में फैला चुहरी तालाब को कृषि भूमि बताकर फर्जी तरीके से मनोरमा इंडस्ट्री को बेचने का मामला सामने आया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने तालाब को कृषि भूमि दर्शाकर एक झूठ के सहारे शासन से करीब 58 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी में छूट भी हासिल की है. मनोरमा इंडस्ट्री ने जिन 6 खसरे की जमीन को उद्योग के उपयोग के लिए रजिस्ट्री कराया है उनमें से एक खसरा नंबर तालाब का है. और इस पूरे फर्जीवाड़ा में तहसीलदार, पटवारी, जमीन दलाल और जमीन बेचने वालों पर अहम भूमिका निभाने का आरोप है. अब इस तालाब को इंडस्ट्री द्वारा पाटा जा रहा है. ग्राम पंचायत बिरकोनी के इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड के ओमनगर खमतराई रायपुर निवासी डायरेक्टर गौतम कुमार पाल ने प्लांट के ठीक पीछे पटवारी हल्का नंबर 33 में स्थित खसरा नंबर 2613, 2615, 2617, 2623 और 2626 रकबा 7. 86 हेक्टेयर, 19 एकड़ 65 डिसमिल जमीन 30 जून 2025 को बिरकोनी निवासी दिनबंधु पिता मनराखन चंद्राकर, तुकाराम पिता बाबूलाल चंद्राकर और अशोक पिता छबिराम चंद्राकर से 8 करोड़ 80 लाख 51 हजार 911 रुपये में कृषि भूमि बताकर खरीदा है. इस रजिस्ट्री में 100 साल पुरानी चुहरी तालाब का कही भी उल्लेख नही किया गया है. मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर ने बिक्रय -विलेख के साथ 6 कृषि भूमि की तस्वीर को लगाकर उप पंजीयक के समक्ष पेश किया है लेकिन उन 6 तस्वीरों में से चुहरी तालाब की तस्वीर नही थी. इसके अलावा 1955-56 के अधिकार अभिलेख पंजी में दर्ज खसरा नंबर 1220 है, जो रि – नंबरिंग के बाद वर्तमान में खसरा नंबर 2613 है, जिसका रकबा 1.90 हेक्टेयर यानी 4 एकड़ 75 डिसमिल है. अधिकार अभिलेख पंजी में पानी के नीचे भूमि को निस्तारी के लिए चुहरी तालाब उल्लेख किया गया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने इन जमीनों को खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग संचालनालय से 25 जून 2025 को बकायदा स्टांप शुल्क छूट प्रमाण पत्र भी लिया है. जिसके आधार पर मनोरमा इंडस्ट्री को स्टांप शुल्क में करीब 58 लाख 11 हजार 426 रुपये की छूट दिया गया है. एक झूठ के सहारे 58 लाख की ली छूट मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड प्रबंधन ने झूठी जानकारी देकर बिरकोनी के खसरा नंबर 2013 रकबा 1.90 हेक्टेयर पर सौ साल पुरानी चुहरी तालाब की अस्तित्व को मिटाने के लिए शासन से ही स्टांप ड्यूटी में छूट लिया है. शासन द्वारा उद्योग के विकास के लिए रजिस्ट्री में छूट देने का प्रबंधन किया गया है. लेकिन सवाल है कि क्या अब शासन ही उद्योग को पुरानी सरोवर को पाटने के लिए छूट प्रदान कर रहे हैं? एक तरफ शासन -प्रशासन गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए लोगों के घरों, ऑफिस और भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए जागरूक कर रहा है. तो दूसरी ओर मनोरमा इंडस्ट्री जैसे उद्योग शासन से छूट का फायदा उठाकर 100 साल पुराने तालाब का नामोनिशान मिटा रहे हैं. तालाब की धार्मिक महत्व सदियों पुरानी बिरकोन के चुहरी तालाब से धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है. बिरकोनी की चंडी माता मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में चुहरी तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. यहां के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि, नवरात्रि में दूर दराज से श्रद्धालु यहां आते हैं. उनके लिए तालाब निस्तारी में उपयोग किया जाता है और नवरात्रि पर्व के बाद जवारा विसर्जन इसी तालाब में किया जाता है. हालांकि, गांव के अंदरूनी हिस्से में तालाब बन चुका है लेकिन चुहरी तालाब की धार्मिक महत्व सदियों से चली आ रही है. इस संबंध में मनोरमा इंडस्ट्री के मनसूर अली अहमद से संपर्क किया गया. उन्होंने जमीन क्रेता और मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर गौतम कुमार पाल का नंबर देने से इंकार करते हुए सभी दस्तावेज सही होना बताया.

धनखड़ ने अचानक छोड़ा पद, क्या अगले दिन सामने आने वाला था कोई बड़ा तूफ़ान?

नई दिल्ली जगदीप धनखड़ को इस्तीफा दिए 4 दिन हो गए, मगर हलचल कम नहीं हुई है. जगदीप धनखड़ ने सेहत का हवाला देकर सोमवार यानी 21 जुलाई को इस्तीफा दिया. मगर उनके इस्तीफे की कहानी अब सामने आने लगी हैं. ऐसा लग रहा है कि सेहत बहाना था. उन्हें फ्यूचर की भनक लग गई थी. इसलिए आनन-फानन में मानसून सत्र के पहले दिन ही रात को अपना इस्तीफा सौंपा. जी हां, सूत्रों का दावा है कि राज्यसभा में खुद जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी थी.  जगदीप धनखड़ के पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि भाजपा और उसके सहयोगी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे थे. जगदीप धनखड़ के खिलाफ अगले ही दिन अविश्वास प्रस्ताव आना था. यह फैसला तब हुआ जब सरकार को पता चला कि उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 63 विपक्षी सांसदों की ओर से साइन किए महाभियोग वाले नोटिस को स्वीकार कर लिया. अब क्या है स्थिति इधर, सरकार नए उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार की तलाश तेज कर चुकी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश यात्रा से लौटने के बाद नाम की घोषणा की जा सकती है। धनखड़ के लिए सरकारी अधिकारी टाइप 8 बंगले की तलाश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनका अचानक इस्तीफा इस बात के संकेत देता है कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था, क्योंकि सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए गए विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकारने के अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही थी। अगर ऐसा होता तो धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आसानी से पास हो जता, क्योंकि NDA के पास जरूरी आंकड़े हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि राज्यसभा सचिवालय के एक पदाधिकारी के जरिए सोमवार को धनखड़ को संदेश पहुंचाया गया था कि 'तुरंत पद छोड़ दें या अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव का सामना करें।' इसे चुनौती देने के बजाए धनखड़ राष्ट्रपति भवन पहुंचे और इस्तीफा सौंप दिया। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा के खिलाफ विपक्ष का पत्र स्वीकार करने के बाद धनखड़ से सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी संपर्क नहीं कर पा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने सोमवार शाम हुई BAC यानी बिजनेस एडवाइजरी मीटिंग से दूरी बना ली। विपक्ष से कौन होगा उम्मीदवार पीटीआई भाषा के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि विपक्षी INDIA गठबंधन उपराष्ट्रपति के चुनाव में साझा उम्मीदवार उतार सकता है, हालांकि सभी घटक दलों से विचार-विमर्श के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय किया जाएगा। विपक्षी गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह भावना है कि इसमें उम्मीदवार उतारा जाए, चाहे नतीजे कुछ भी हों क्योंकि ऐसा करने से राजनीतिक संदेश जाएगा।’’ जगदीप धनखड़ ने बीते सोमवार शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है। क्या था अंदरखाने वाला प्लान सूत्रों की मानें तो जगदीप धनखड़ का कदम सरकार के लिए चौंकाने वाला था. जगदीप धनखड़ ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के नोटिस स्वीकार किया था. जबकि सरकार लोकसभा में प्रस्ताव लाना चाहती थी. उसके पास सभी दलों के सदस्यों के हस्ताक्षर भी थे. सरकार के कई मंत्री इसी बात से परेशान और नाराज थे. जगदीप धनखड़ के इस कदम से एनडीए सांसदों और मंत्रियों को ऐसा आघात लगा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद कार्यालय में सांसदों के हस्ताक्षर एकत्र करने के लिए दौड़ लगाई ताकि अगले दिन राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सके. धनखड़ को मिली थी सीक्रेट सूचना जगदीप धनखड़ को इस बात की भनक लग गई थी कि उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है और एनडीए के पास आवश्यक संख्या से अधिक है. सूत्रों ने दावा दिया कि सोमवार को राज्यसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने जगदीप धनखड़ को संदेश दिया कि या तो तुरंत इस्तीफा दें वरना अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना होगा. ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही उसी रात को आनन-फानन में जगदीप धनखड़ राष्ट्रपति भवन पहुंचे. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा. इसके बाद की तस्वीर पूरी दुनिया को पता है. 25 मिनट तक किया इंतजार दरअसल, जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में सेहत का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि वह अपनी सेहत को अब प्राथमिकता देना चाहते हैं. मगर कांग्रेस को शुरू से ही दाल में काला नजर आ रहा था. अब तस्वीर साफ हो गई है. सूत्रों का कहना है कि जगदीप धनखड़ को करीब 25 मिनट तक राष्ट्रपति भवन में इंतजार करना पड़ा था. उनके लिए विदाई भाषण का भी आयोजन नहीं किया गया. कांग्रेस ने सरकार से उनके इस्तीफे की वजह की मांग की. मंत्रियों संग अच्छा नहीं था धनखड़ का व्यवहार सूत्रों का कहना है कि जगदीप धनखड़ का केंद्रीय मंत्रियों संग व्यवहार अच्छा नहीं था. अक्सर वह उन लोगों के साथ कठोरता से पेश आते थे. बैठकों के दौरान डांट-डपट देते थे और अपमानित करते थे. इससे सीनियर मंत्री सब नाराज थे. शिवराज सिंह चौहान को तो जगदीप धनखड़ ने सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया था. सूत्रों का यह भी कहना है कि जगदीप धनखड़ विपक्ष पर खूब बरसते थे, मगर विपक्ष की ओर से लाए गए महाभियोग वाले प्रस्ताव के बाद उनका विपक्ष के प्रति रवैया थोड़ा बदला था.

समारोह : मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा बी डी महंत की स्मृति में समारोह

बिलासपुर  मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा  हरेली के अवसर पर चैतुरगढ़ के महिषासुरमर्दिनी माता के परिसर में मध्य प्रदेश और भारत सरकार  की राजनीति में दखल देने वाले पनिका समाज के प्रेरणास्रोत बाबू बिसाहू दास महंत को उनकी 47वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी।साथ ही उनकी स्मृति में बेल,नीम,बड़गद,पीपल के पौधे लगाकर   समाज हित में उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।बहुप्रतीक्षित अनुसूचित जनजाति की मांग को   कोरबा जिला के पनिका समाज ने उठाते हुए  पुनः नया संगठन की अगुवानी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।  भरतदास मानिकपुरी अध्यक्ष, नन्हीदास महंत  महासचिव, गोपालदास   पड़वार,कोषाध्यक्ष, गोरे   महंत सचिव, मनोज  मानिकपुरी,प्रदेश प्रवक्ता, निर्वाचन अधिकारी घनश्याम दास, पाली ब्लॉक के समाज अध्यक्ष कंवल दास रंगोले, लाफा सोसाइटी समाज प्रमुख  पीला दास महंत,बगदरा निवासी संतोष दास महंत, मानिकदास,सहित  भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,डॉक्टर देवधर महंत,साहित्यकार एवं अधिवक्ता उच्च न्यायालय बिलासपुर,डॉक्टर फूल दास महंत पनिका समाज महासमिति राष्ट्रीय संगठन नई दिल्ली अर्जुनदास , हरिहर दास, कोटा से भरतदास, शम्भुदास , पुरुषोत्तम दास, मयादास, मोहर दास ,  एवं महिला आमीन माता समिति, नवयुवकप्रदेश अध्यक्ष भावी रवि के साथ सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में स्वप्रेरित उपस्थित हुए।  

समारोह : मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा बी डी महंत की स्मृति में समारोह

बिलासपुर  मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा  हरेली के अवसर पर चैतुरगढ़ के महिषासुरमर्दिनी माता के परिसर में मध्य प्रदेश और भारत सरकार  की राजनीति में दखल देने वाले पनिका समाज के प्रेरणास्रोत बाबू बिसाहू दास महंत को उनकी 47वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी।साथ ही उनकी स्मृति में बेल,नीम,बड़गद,पीपल के पौधे लगाकर   समाज हित में उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।बहुप्रतीक्षित अनुसूचित जनजाति की मांग को   कोरबा जिला के पनिका समाज ने उठाते हुए  पुनः नया संगठन की अगुवानी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।  भरतदास मानिकपुरी अध्यक्ष, नन्हीदास महंत  महासचिव, गोपालदास   पड़वार,कोषाध्यक्ष, गोरे   महंत सचिव, मनोज  मानिकपुरी,प्रदेश प्रवक्ता, निर्वाचन अधिकारी घनश्याम दास, पाली ब्लॉक के समाज अध्यक्ष कंवल दास रंगोले, लाफा सोसाइटी समाज प्रमुख  पीला दास महंत,बगदरा निवासी संतोष दास महंत, मानिकदास,सहित  भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,डॉक्टर देवधर महंत,साहित्यकार एवं अधिवक्ता उच्च न्यायालय बिलासपुर,डॉक्टर फूल दास महंत पनिका समाज महासमिति राष्ट्रीय संगठन नई दिल्ली अर्जुनदास , हरिहर दास, कोटा से भरतदास, शम्भुदास , पुरुषोत्तम दास, मयादास, मोहर दास ,  एवं महिला आमीन माता समिति, नवयुवकप्रदेश अध्यक्ष भावी रवि के साथ सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में स्वप्रेरित उपस्थित हुए।  

इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का साया, अगले साढ़े सात साल रहना होगा सतर्क

शनि की साढ़ेसाती, जो हर किसी के जीवन में एक बार जरूर आती है और 7.5 साल तक चलती है. शनि की साढ़ेसाती एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है जो शनि के राशि परिवर्तन के साथ हर ढाई साल में बदलती रहती है. जिस राशि पर भी शनि की साढ़ेसाती चलती है उसको साढ़े सात साल तक मुश्किलों और कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. शनि ग्रह हर ढाई साल में अपनी राशि में परिवर्तन करते हैं. शनि ने साल 2025 में मीन राशि में गोचर किया है. शनि का गोचर बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शनि के इस गोचर के बाद शनि की साढ़ेसाती मेष राशि पर शुरू हो गई है. शनि जिस राशि में गोचर करते हैं उसके एक आगे और एक पीछे वाली राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहता है. इस समय शनि मीन राशि में विराजमान हैं और शनि की साढ़ेसाती कुंभ, मीन और मेष राशि पर चल रही है. शनि की साढ़ेसाती के चरण शनि की साढ़ेसाती 3 चरणों में पूरी होती है. प्रथम चरण, द्वितीय चरण, तृतीय चरण. इस समय मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है. कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है, वहीं मीन राशि पर मध्य या दूसरा चरण चल रहा है. शनि की साढ़ेसाती के दौरान विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसीलिए अपने कर्मों को अच्छा रखें और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करें. शनि देव को कर्मफल दाता कहा जाता है, जो लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती मेष राशि वालों को अगले साढ़े सात साल शनि की साढ़ेसाती का सामना करना पड़ेगा. साल 2025 में 29 मार्च से मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हुई, जो 30 मई, 2032 तक चलेगी. इस दौरान मेष राशि वालों को कार्यों में अड़चनों, मानसिक तनाव, संतान की चिंता और खर्चों में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है. इस दौरान झूठ, छल, फरेब से अपने आप को दूर रखें. शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें, और सरसों के तेल का दिया जलाएं. जरूरतमंदों की सेवा करें. शनिवार के दिन शनि देव से जुड़ी चीजों का दान जरूर करें.

कन्या हायर सेकेंडरी में विधायक ने वितरित की सायकल, विद्यार्थियों के साथ खड़े हो कर की पीटी

आष्टा मध्यप्रदेश के अब आष्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना के पूर्व संस्था के खेल शिक्षक विद्यार्थियों को कराएंगे पीटी, पीटी करने से शरीर मे स्फूर्ति आती है,वही स्वस्थ शरीर मन, मस्तिष्क के लिये पीटी जरूरी है ।उक्त उदगार विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने आज मुख्यमंत्री सायकल योजना अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को सायकल वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आष्टा के कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहे । इस अवसर पर आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर सहित सभी अतिथियों ने भी विद्यार्थियों के साथ पीटी की । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा  सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में जो योजनाएं,सुविधाए शुरू की उन विभिन्न योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को मिले इसके लिए हमारी सरकार पूरी तरह से कृत संकल्पित है । सरकार का दृढ़ निश्चय है कि शासकीय विद्यालयों में अध्यनरत बच्चों को सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध हो ताकि विद्यालय विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास का केंद्र बने और आगे जाकर विद्यार्थी इस देश के अच्छे जिम्मेदार नागरिक बन सके । सरकार की विद्यार्थियों के लिये शुरू की गई मुख्यमंत्री निशुल्क सायकल वितरण योजना के तहत आज आष्टा नगर के कन्या हायर सेकेंड्री, मॉडल स्कूल मुगली रोड,हाईस्कूल अलीपुर  में विद्यार्थियों को अपने दूरस्थ ग्रामों से विद्यालय तक आने जाने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए सरकार की कक्षा 6 एवं 9 वी के विद्यार्थियों को जो दुरस्त ग्रामो से स्कूल आते है ऐसे विद्यार्थियों को निशुल्क योजना के तहत आज विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिलों का वितरण विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर के मुख्य आतिथ्य में किये गये । इस अवसर पर आष्टा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की योजना के तहत विद्यालयों में कक्षा एक से लेकर 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विद्यालयों में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत निशुल्क स्कूल ड्रेस, पुस्तके, मध्यान भोजन,निशुल्क साइकिल, सहित खेल सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है । मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करता हूं कि वे सरकार की सभी योजनाओं का लाभ उठाते हुए अच्छी तरह से मन लगाकर अपने  गुरुजीयो द्वारा पढ़ाई जाने वाली एवं बताई जाने वाली शिक्षा को ग्रहण करें और लक्ष्य तय कर लक्ष्य को प्राप्त कर देश के भविष्य के रूप में जिम्मेदार नागरिक बने और अपने विद्यालय का, अपने माता-पिता का,शिक्षकों का, अपने क्षेत्र का, जिले का, प्रदेश का नाम रोशन करें । इस अवसर पर विधायक ने बताया कि  विद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजाना अब स्कूल प्रारंभ होने के पूर्व एवं स्कूल से छुट्टी होने के पूर्व पीटी कराई जाएगी ताकि बच्चों का स्वास्थ्यअच्छा रहे वे स्वस्थ रहे और स्वास्थ्य के साथ उनका शारीरिक बौद्धिक विकास भी हो । हम विद्यालयों के अंदर पढ़ाई के साथ-साथ खेल सुविधाओं में भी वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं । जिन विद्यालयों में खेल सामग्री की, सुविधाओ की कमी है उन्हें भी दूर करने के प्रयास किये जा रहै है । आयोजित  कार्यक्रम में जीवन सिंह मंडलोई, राय सिंह मेवाडा, सोनू गुणवान, गजराज मेवाड़ा, विशाल चौरसिया, तारा कटारिया, राकेश प्रजापति ,विष्णु परमार, जितेंद्र सिठोलिया, अनिल श्रीवास्तव, तेज सिंह राठौर,बीईओ प्रमोद कुशवाह बीआरसी अजब सिंह राजपूत, संस्था प्रमुख महेंद्र सिंह मालवीय सहित अन्य सभी पदाधिकारी शिक्षक शिक्षिकाएं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे । कार्यक्रम के अंत मे विधायक के साथ सभी ने वृक्षारोपण किया ।  इस अवसर पर विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने सभी साइकिल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुष्प माला पहनकर उन्हें साइकिल सौंपी तथा उनके साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने बताया की इस वर्ष आष्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी विद्यालयों में 1359 सायकलों का वितरण किया जायेगा । साइकिल पाकर आज विद्यार्थियों में काफी खुशी का माहौल नजर आया क्योंकि साइकिल नहीं होने के कारण अभी तक वे विद्यालय पैदल आते थे अब उन्हें साइकिल प्राप्त होने के बाद घर से विद्यालय तक आने और जाने की सुविधा के लिए साइकिल प्राप्त हुई है । विद्यार्थियों ने इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं आष्टा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर का आभार व्यक्त किया ।

रेसलिंग आइकन हल्क होगन का निधन, 71 की उम्र में हृदय गति रुकने से गई जान

फ्लोरिडा WWE सुपरस्टार हल्क होगन का 24 जुलाई (गुरुवार) को 71 साल की उम्र में निधन हो गया है. होल्क होगन का निधन कार्डियक अरेस्ट के चलते हुआ. टीएमजेड स्पोर्ट्स के अनुसार गुरुवार की सुबह फ्लोरिडा के क्लियरवॉटर स्थित हल्क होगन के घर पर डॉक्टर्स को बुलाया गया. कुश्ती के इस दिग्गज के घर के बाहर पुलिस की कई गाड़ियां और आपातकालीन चिकित्साकर्मी मौजूद थे. हल्क होगन को स्ट्रेचर पर लादकर एम्बुलेंस के जरिए हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. कुछ ही सप्ताह पहले हल्क होगन की पत्नी स्काई (Sky) ने उन अफवाहों का खंडन किया था कि वह बेहोश हैं. हल्क होगन की वाइफ ने कहा था कि उनका दिल मजबूत है और वह सर्जरी से उबर रहे हैं. Hulk Hogan सिर्फ एक रेसलर नहीं थे, वो 80 के दशक में फैन्स के लिए 'रियल लाइफ सुपरहीरो' बन चुके थे. दमदार शरीर, पीला-लाल रंग का कॉस्ट्यूम और उनका स्लोगन (Say your prayers, eat your vitamins) उनकी खास पहचान थी. हल्क होगन ने अपने अदम्य साहस और काबिलियत के चलते 'हल्कमैनिया' का निर्माण किया. शुरुआती दिनों में वो विंस मैकमैहन की राष्ट्रीय विस्तार योजना का चेहरा बने. रेसलमेनिया 3 में आंद्रे द जाइंट के खिलाफ उनका मैच आज भी ऐतिहासिक माना जाता है, जिसे 93,000 से अधिक लोगों ने लाइव देखा था. अमेरिकी रेसलिंग को नया आयाम दिया हल्क होगन कई बार WWF चैम्पियन रहे. शुरुआती आठ रेसलमेनिया में से सात के आयोजन में हल्क होगन ने मुख्य भूमिका निभाई. इस दौरान फैन्स की नजरें उनपर ही रहती थीं. उनकी अपार लोकप्रियता ने पेशेवर कुश्ती को कॉर्निवल सर्किट से अमेरिकी एंटरटेनमेंट की मुख्यधारा में ला खड़ा किया. 1996 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग (WCW) में वापसी करके हल्क होगन ने दुनिया को चौंका दिया. हल्क होगन अबकी बार पुराने लाल-पीले रंग के कॉस्ट्यूम को छोड़कर काले-सफेद गियर में 'हॉलीवुड होगन' के रूप में सामने आए. वो nWo (न्यू वर्ल्ड ऑर्डर) के तीसरे सदस्य बने और रेसलिंग के इतिहास का सबसे बड़ा 'हील टर्न' कर दिया. उनका ये अवतार आज भी रेसलिंग के सबसे चर्चित चेप्टर्स में से एक माना जाता है. पेशेवर कुश्ती पर हल्क होगन का प्रभाव काफी व्यापक है. उन्हें WWE हॉल ऑफ फेम में दो बार शामिल किया गया, एक बार 2005 में एकल प्रतिभागी के रूप में और फिर 2020 में nWo के सदस्य के रूप में. 

जवानी की 5 बड़ी गलतियां जो बुढ़ापे में बनती हैं पछतावे की वजह

जवानी जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है, जहां सपने बड़े होते हैं और उन्हें पूरा करने का जुनून भी चरम पर होता है। लेकिन यही समय सबसे नाजुक भी होता है, क्योंकि जोश में लिए गए गलत फैसले आगे चलकर पछतावे का कारण बन सकते हैं। कई बार इस उम्र में हम जोश में आकर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारे करियर, रिश्तों और पूरे भविष्य को ही प्रभावित कर सकती हैं। महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीतियों में युवावस्था को बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि जवानी में की गई कुछ गलतियों का व्यक्ति के भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार जवानी में किन गलतियों को करने से बचना चाहिए। ना करें समय की बर्बादी जवानी के दिन भविष्य के निर्माण के दिन होते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति अपनी जवानी के दिनों को यूं ही बर्बाद करता है, वो अपने लिए स्वयं कुंआ खोदने का काम करता है। ऐसा नहीं है कि युवाओं को मौज मस्ती से बिल्कुल दूर हट जाना चाहिए और सिर्फ काम-काम में लगे रहना चाहिए। लेकिन मौज-मस्ती में ही पूरा समय बिता देना, उनके भविष्य को अंधकार में डाल सकता है। इसलिए समय को यूं ही बर्बाद करने के बजाय अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। शिक्षा और करियर को नजरअंदाज करना आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति अपने जवानी के दिनों में पढ़ाई-लिखाई और अपने करियर को इग्नोर करता है, उसे पूरे जीवन पछताना पड़ता है। क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में जवानी ही वो समय होता है, जब वह अपने भविष्य की नींव रखता है। लेकिन जो व्यक्ति इन महत्वपूर्ण दिनों को सिर्फ मौज-मस्ती में बिता देता है और अपने करियर को नजर अंदाज करता है, उसे पूरे जीवन दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो लोग अपने जवानी के दिनों में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हैं उन्हें बुढ़ापे में काफी कष्ट झेलना पड़ता है। दरअसल जवानी में शरीर ऊर्जा और उत्साह से भरा रहता है, ऐसे में अक्सर युवाओं को लगता है कि उनके शरीर में यह ऊर्जा हमेशा बनी रहेगी और इसी गलतफहमी के चक्कर में वे अपने खान-पान और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं देते। जवानी के दिनों में गलत खानपान और अनहेल्दी रूटीन का असर बढ़ती उम्र में देखने को मिलता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है तरह-तरह की बीमारियां घेरने लगती है। इसलिए जवानी में स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जवानी की गलत संगत का असर रहता है ता-उम्र आचार्य चाणक्य का मानना था कि व्यक्ति की संगति ही उसके भविष्य को निर्धारित करती है। इसलिए जवानी के दिनों में आत्म नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है और इसके लिए अच्छी संगत का होना जरूरी है। जवानी के दिनों में जो व्यक्ति गलत संगत में पड़ जाता है, वो अपने जीवन में कभी भी सफलता हासिल नहीं करता है। ऐसा व्यक्ति ना तो जीवन में तरक्की पाता है और ना ही पारिवारिक रूप से सुखी रहता है। पैसे की बर्बादी करना आचार्य चाणक्य के मुताबिक जवानी के दिनों में पैसे की बर्बादी करना, भविष्य के लिहाज से सबसे बड़ी गलती है। जवानी में अक्सर पैसा कमाने का जोश और ताकत दोनों चरम पर होते हैं इसलिए लोगों के खर्चे भी बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। कई बार तो लोग फालतू की चीजों पर ही खर्च करना शुरू कर देते हैं। जबकि ये आदत आपके बढ़ापे में भारी पड़ सकती है। इसलिए जवानी से ही सेविंग्स का ध्यान रखें ताकि उम्र बढ़ने के साथ आपको किसी तरह के आर्थिक समस्या का सामना ना करना पड़े।